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Sunday, March 17, 2013

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   "क्या आप मेरी बहन के लिए प्रार्थना करेंगे?" उस हृष्ट-पुष्ट और कद्दावर कर्मी ने हिचकिचाते हुए मुझसे प्रश्न किया, और मैंने बड़े ग़ौर से उसकी ओर शक भरी नज़रों से देखा।

   कुछ महीने पहले की बात है, जिस फैकट्री में मैं कार्य करता हूँ, वहाँ कर्मीयों द्वारा हड़ताल की संभावना बढ़ती जा रही थी। गर्मी के मौसम की परेशानियों ने लोगों के स्वभाव को चिड़-चिड़ा बना रखा था। फैकट्री के प्रबन्धक कार्य तथा उत्पादन को तेज़ी से बढ़ाने पर ज़ोर दे रहे थे तो मज़दूर संघ के नेता इसका विरोध कर रहे थे। काम के समय के अवकाशों में उन नेताओं द्वारा हमें कहा जाता कि उत्पादन को कम ही रखें। मैं अपने मसीही विश्वास तथा आदर्शवादिता में होकर अधिक से अधिक परिश्रम करना परमेश्वर की ओर से अपना दायित्व समझता था, और मैंने यह बात अपने सहकर्मीयों और मज़दुर संघ के नेताओं को समझाने का व्यर्थ प्रयत्न भी किया। मेरी इस विचारधारा और प्रयास के कारण मुझे अपने सहकर्मियों से घोर विरोध एवं परेशानियों का सामना करना पड़ा; और यह कर्मी जो अब मेरे पास प्रार्थना की विनती लेकर आया था, उन तंग करने वालों में प्रमुख हुआ करता था।

   इसलिए उसकी इस प्रार्थना की विनती पर मुझे एकाएक विश्वास नहीं हुआ, मुझे लगा जैसे मेरे उपहास के लिए यह उसका कोई नया प्रयास है। मैंने उस से पूछा, "मैं क्यों?" उसके उत्तर ने मुझे झकझोर दिया, उसने रुंधे गले से कहा "क्योंकि उसे कैंसर है और मुझे कोई ऐसा व्यक्ति प्रार्थना के लिए चाहिए जिसकी परमेश्वर सुनता हो।" हमारे बीच की कड़ुवाहट जाती रही, और मैंने उसकी बहन के लिए प्रार्थना करी।

   परमेश्वर के वचन बाइबल के लूका ७ अध्याय में एक सूबेदार का उल्लेख है जिसने प्रभु यीशु के पास सहायता के लिए कुछ प्रमुख लोगों को भेजा। जब लोग परेशानी में होते हैं तो ना वे अपना समय और ना ही अपने शब्द व्यर्थ करते हैं; वे निवारण के लिए तुरंत उस व्यक्ति के पास जाते हैं जिसके विश्वास को उन्होंने सार्थक और खरा पाया हो।

   प्रभु यीशु ने अपने अनुयायियों से कहा "तुम पृथ्वी के नमक हो"; "तुम जगत की ज्योति हो" (मत्ती 5:13, 14) - थोडा सा नमक भोजन का स्वाद बढ़ा देता है; ज्योति चाहे हल्की ही हो किंतु अन्धकार में सांत्वना देती है, मनों को शांत रखती है। पाप से बिगड़े हुए और अन्धकार में पड़े संसार में हम मसीही विश्वासी प्रभु यीशु की ओर से ठहराए हुए वे लोग हैं जो बिगड़ों को संवारने और परेशानों को शांति तथा सांत्वना देने वाले हों, उनकी सहायता के लिए तत्पर और उपलब्ध हों। हमारे विश्वास और मसीही जीवन को देखकर वे प्रभु यीशु की ओर आकर्षित हों।

   क्या आप के आस-पास के लोग आपको ऐसे मसीही विश्वासी के रूप में जानते हैं जो उनकी परेशानियों में उनकी सहायता के लिए उपलब्ध हैं? क्या आप अपने स्थान पर संसार के उद्धारकर्ता प्रभु यीशु द्वारा दी गई ’नमक’ और ’ज्योति’ होने की ज़िम्मेदारी को निभा रहे हैं? - रैंडी किलगोर


जब कोई प्रीय जन जोखिम में हो तो कठोर मन वाले को भी सहायता चाहिए होती है।

उसने यीशु की चर्चा सुनकर यहूदियों के कई पुरनियों को उस से यह बिनती करने को उसके पास भेजा, कि आकर मेरे दास को चंगा कर। - लूका 7:3

बाइबल पाठ: लूका 7:1-10
Luke 7:1 जब वह लोगों को अपनी सारी बातें सुना चुका, तो कफरनहूम में आया।
Luke 7:2 और किसी सूबेदार का एक दास जो उसका प्रिय था, बीमारी से मरने पर था।
Luke 7:3 उसने यीशु की चर्चा सुनकर यहूदियों के कई पुरनियों को उस से यह बिनती करने को उसके पास भेजा, कि आकर मेरे दास को चंगा कर।
Luke 7:4 वे यीशु के पास आकर उस से बड़ी बिनती कर के कहने लगे, कि वह इस योग्य है, कि तू उसके लिये यह करे।
Luke 7:5 क्योंकि वह हमारी जाति से प्रेम रखता है, और उसी ने हमारे आराधनालय को बनाया है।
Luke 7:6 यीशु उन के साथ साथ चला, पर जब वह घर से दूर न था, तो सूबेदार ने उसके पास कई मित्रों के द्वारा कहला भेजा, कि हे प्रभु दुख न उठा, क्योंकि मैं इस योग्य नहीं, कि तू मेरी छत के तले आए।
Luke 7:7 इसी कारण मैं ने अपने आप को इस योग्य भी न समझा, कि तेरे पास आऊं, पर वचन ही कह दे तो मेरा सेवक चंगा हो जाएगा।
Luke 7:8 मैं भी पराधीन मनुष्य हूं; और सिपाही मेरे हाथ में हैं, और जब एक को कहता हूं, जा, तो वह जाता है, और दूसरे से कहता हूं कि आ, तो आता है; और अपने किसी दास को कि यह कर, तो वह उसे करता है।
Luke 7:9 यह सुनकर यीशु ने अचम्भा किया, और उसने मुंह फेरकर उस भीड़ से जो उसके पीछे आ रही थी कहा, मैं तुम से कहता हूं, कि मैं ने इस्राएल में भी ऐसा विश्वास नहीं पाया।
Luke 7:10 और भेजे हुए लोगों ने घर लौटकर, उस दास को चंगा पाया।

एक साल में बाइबल: 
  • व्यवस्थाविवरण 30-31 
  • मरकुस 15:1-25