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Thursday, March 21, 2013

उत्साहवर्धक


   आर्थिक संकट और निराशाजनक समाचारों के समय में पर्डयू विश्वविद्यालय के दो छात्रों ने निर्णय लिया कि वे विश्वविद्यालय के प्रांगण में प्रोत्साहन के शब्दों से लोगों का उत्साहवर्धन करेंगे। प्रत्येक बुधवार की दोपहर को वे दोनो छात्र, कैमरून ब्राउन और ब्रेट वैस्टकौट, एक व्यस्त मार्ग पर खड़े हो जाते, उनके हाथ में एक सूचना-पट्ट होता जिस पर लिखा रहता "निःशुल्क प्रशंसा" और उनके पास से होकर निकलने वाले हर जन से वे कुछ ना कुछ प्रशंसा की कोई भली बात कहते जैसे, "मुझे तुम्हारा लाल कोट बहुत पसन्द आया", "बहुत अच्छे जूते", "बहुत अच्छी मुस्कान" इत्यादि। कुछ छात्रों ने कहा कि वे जानबूझकर हर बुधवार उस मार्ग से जाते जहाँ वे दोनो खड़े हों जिससे अपने बारे में कुछ उत्साहवर्धक सुन सकें।

   उन दोनो के इस नज़रिए से मैं बहुत प्रभावित हुआ, कि कैसे उस कठिन समय में वे दोनो नकारात्मक रवैये को अपना कर आलोचना करने या गलती निकलने की मनसा से ग्रसित होने की बजाए एक सकारात्मक रवैया अपना सके और लोगों को प्रोत्साहित कर सके। उनके इस व्यवहार ने मुझे सोचने पर भी मजबूर किया कि एक मसीही विश्वासी होने के नाते मेरा दूसरे लोगों के प्रति रवैया कैसा है?

   दूसरों की बुराईयों पर केन्द्रित रहने वाले और अपने वचनों से आग लगाने वाले (नीतिवचन 16:27) व्यक्ति होने की बजाए हम मसीही विश्वासियों को दूसरों के लिए शांति, आशा और सांत्वना देने वाले बनना है। क्योंकि जो हमारे मनों में होता है वही हमारे मुंह पर भी आता है, इसलिए हमारे शब्द हमारे विश्वास को बता देंगे: "बुद्धिमान का मन उसके मुंह पर भी बुद्धिमानी प्रगट करता है, और उसके वचन में विद्या रहती है।  मन भावने वचन मधु भरे छते की नाईं प्राणों को मीठे लगते, और हड्डियों को हरी-भरी करते हैं (नीतिवचन 16:23-24)।

   नम्र और भले शब्द चाहे निःशुल्क हों, लेकिन उन से मिलने वाला उत्साहवर्धन बहुमूल्य होता है। आईए क्यों ना आज हम किसी के लिए उत्साहवर्धक बनें। - डेविड मैक्कैसलैंड


प्रशंसा के कोमल शब्द हल्के से होते हैं किंतु उनका प्रभावी वज़न बहुत होता है।

मन भावने वचन मधु भरे छते की नाईं प्राणों को मीठे लगते, और हड्डियों को हरी-भरी करते हैं। - नीतिवचन 16:24

बाइबल पाठ: नीतिवचन 16:20-30
Proverbs 16:20 जो वचन पर मन लगाता, वह कल्याण पाता है, और जो यहोवा पर भरोसा रखता, वह धन्य होता है।
Proverbs 16:21 जिसके हृदय में बुद्धि है, वह समझ वाला कहलाता है, और मधुर वाणी के द्वारा ज्ञान बढ़ता है।
Proverbs 16:22 जिसके बुद्धि है, उसके लिये वह जीवन का सोता है, परन्तु मूढ़ों को शिक्षा देना मूढ़ता ही होती है।
Proverbs 16:23 बुद्धिमान का मन उसके मुंह पर भी बुद्धिमानी प्रगट करता है, और उसके वचन में विद्या रहती है।
Proverbs 16:24 मन भावने वचन मधु भरे छते की नाईं प्राणों को मीठे लगते, और हड्डियों को हरी-भरी करते हैं।
Proverbs 16:25 ऐसा भी मार्ग है, जो मनुष्य को सीधा देख पड़ता है, परन्तु उसके अन्त में मृत्यु ही मिलती है।
Proverbs 16:26 परिश्रमी की लालसा उसके लिये परिश्रम करती है, उसकी भूख तो उसको उभारती रहती है।
Proverbs 16:27 अधर्मी मनुष्य बुराई की युक्ति निकालता है, और उसके वचनों से आग लग जाती है।
Proverbs 16:28 टेढ़ा मनुष्य बहुत झगड़े को उठाता है, और कानाफूसी करने वाला परम मित्रों में भी फूट करा देता है।
Proverbs 16:29 उपद्रवी मनुष्य अपने पड़ोसी को फुसला कर कुमार्ग पर चलाता है।
Proverbs 16:30 आंख मूंदने वाला छल की कल्पनाएं करता है, और ओंठ दबाने वाला बुराई करता है।

एक साल में बाइबल: 

  • यहोशू 7-9 
  • लूका 1:21-38