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Sunday, April 14, 2013

उद्देश्य


   अपनी पुस्तक Life after Heart Surgery (हृदय शल्य चिकित्सा के बाद जीवन) में डेविड बर्क ने मृत्यु से अपना आमना-सामना होने के बारे में बताया है। अपने हृदय पर हुए दूसरे ऑपरेशन के बाद अस्पताल के बिस्तर पर लेटे हुए उसे असहनीय पीड़ा हुई और उसके लिए सांस लेना भी दूभर हो गया। यह समझकर कि अब अन्त निकट है और वह अनन्त में प्रवेश करने वाला है उसने एक बार फिर परमेश्वर से प्रार्थना करी, पापों से मिली क्षमा के लिए धन्यवाद किया और उस पर अपना विश्वास पुनः व्यक्त किया।

   डेविड स्वर्ग पहुँच कर अपने पिता से मिलने के बारे में सोचने लगा जिनकी मृत्यु कई वर्ष पहले हो गई थी, इतने में नर्स ने पूछा कि वह अब कैसा अनुभव कर रहा है। डेविड ने उत्तर दिया कि "ठीक है! बस अब  स्वर्ग जाकर परमेश्वर से मिलने की प्रतीक्षा में हूँ।" नर्स ने उसे उत्तर दिया, "मित्र, मेरे कार्य समय में तो मैं यह नहीं होने दूँगी!" और थोड़े ही समय में डॉक्टर फिर से उसका ऑपरेशन कर रहे थे। उसकी छाती फिर से खोली गई और वहाँ एकत्रित दो लिटर पानी निकाला गया। इसके पश्चात डेविड स्वस्थ होने लगा और ठीक होकर घर जा सका।

   हमारे लिए यह विचार करना कि पृथ्वी पर हमारे अन्तिम क्षण कैसे होंगे, और हम उनका सामना कैसे करेंगे कोई सामान्य बात नहीं है। लेकिन जो प्रभु यीशु में पापों की क्षमा और उद्धार पाने के बाद मृत्यु प्राप्त करते हैं उन्हें यह पता है कि वे धन्य हैं (प्रकशितवाक्य 14:13) और परमेश्वर की नज़रों में उनकी मृत्यु बहुमूल्य है (भजन 116:15)।

   हमारे अस्तित्व में आने से पहले ही परमेश्वर ने हमारे समयों और दिनों को निर्धारित कर दिया था (भजन 139:16) और हम आज केवल इसलिए जीवित हैं क्योंकि सर्वशक्तिमान की श्वास से हमें जीवन मिलता है (अय्युब 33:4)। यद्यपि हम यह नहीं जानते कि हमारी कितनी सांसें शेष हैं, लेकिन हमें यह आशवासन है कि परमेश्वर इस बात को जानता है।

   हमारा उद्देश्य अपने जीवन के शेष समय के बारे में चिंतित होना नहीं वरन इस बात की चिंता हो कि जीवन और मृत्यु दोनों में हम परमेश्वर को भाते रहें (2 कुरिन्थियों 5:9) और हमारे जीवन तथा मृत्यु, दोनों ही से परमेश्वर की महिमा हो। तब ही हम प्रेरित पौलुस के समान कह सकेंगे: "क्योंकि मेरे लिये जीवित रहना मसीह है, और मर जाना लाभ है" (फिलिप्पियों 1:21)। सिंडी हैस कैस्पर


अपनी पहली श्वास से लेकर अन्तिम श्वास तक हम परमेश्वर की देखरेख में रहते हैं।

मुझे ईश्वर की आत्मा ने बनाया है, और सर्वशक्तिमान की सांस से मुझे जीवन मिलता है। - अय्युब 33:4 

बाइबल पाठ: भजन 139:13-18
Psalms 139:13 मेरे मन का स्वामी तो तू है; तू ने मुझे माता के गर्भ में रचा।
Psalms 139:14 मैं तेरा धन्यवाद करूंगा, इसलिये कि मैं भयानक और अद्भुत रीति से रचा गया हूं। तेरे काम तो आश्चर्य के हैं, और मैं इसे भली भांति जानता हूं।
Psalms 139:15 जब मैं गुप्त में बनाया जाता, और पृथ्वी के नीचे स्थानों में रचा जाता था, तब मेरी हडि्डयां तुझ से छिपी न थीं।
Psalms 139:16 तेरी आंखों ने मेरे बेडौल तत्व को देखा; और मेरे सब अंग जो दिन दिन बनते जाते थे वे रचे जाने से पहिले तेरी पुस्तक में लिखे हुए थे।
Psalms 139:17 और मेरे लिये तो हे ईश्वर, तेरे विचार क्या ही बहुमूल्य हैं! उनकी संख्या का जोड़ कैसा बड़ा है।
Psalms 139:18 यदि मैं उन को गिनता तो वे बालू के किनकों से भी अधिक ठहरते। जब मैं जाग उठता हूं, तब भी तेरे संग रहता हूं।

एक साल में बाइबल: 
  • 1 शमूएल 25-26
  • लूका 12:32-59