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Tuesday, April 16, 2013

पीड़ा और प्राप्ति


   एक फुटबॉल टीम के खिलाड़ीयों का मनोबल बढ़ाने के लिए प्रशिक्षण शिविर में प्रशिक्षकों ने प्रोत्साहित करने वाला एक वाक्य लिखी हुई टी-शर्ट्स पहन कर रखीं; वह वाक्य था: "तुम्हें प्रतिदिन चुनाव करना होगा -  आज के अनुशासन का कष्ट अथवा बाद में खेद की पीड़ा।" अनुशासन कठोर होता है, और अकसर हम उससे बचने के प्रयास करते हैं। लेकिन जीवन हो या खेल-कूद, कुछ पाने के लिए आज अनुशासन का थोड़ा सा कष्ट कल की बड़ी उपल्बधि का कारण होता है। यदि कष्ट उठाने को तैयार नहीं हैं तो कुछ प्राप्त करना भी असंभव होगा। युद्ध के मैदान में तैयारी और प्रशिक्षण का समय नहीं होता, यह तैयारी तो पहले से ही कर के रखनी होती है और अनुशासित जीवन ही चुनौतियों का सामना करने और उन पर विजयी होने में सक्षम होते हैं। या तो आप जीवन की चुनौतियों के लिए अपने आप को तैयार करे रखते हैं या फिर आपका जीवन "यदि केवल", "अगर", "काश कि मैंने" जैसे शब्दों तथा हार और खेद की पीड़ा से भरा होगा।

   किसी ने खेद की परिभाषा में कहा है कि "यह करे गए पिछले कार्यों और व्यवहार के प्रति सूझबूझपूर्ण एवं भावनात्मक नापसन्दगी है।" पीछे मुड़कर अपने गलत निर्णयों और कार्यों को देखना और उनके कारण मिली हार तथा निराशा के बोझ को उठाए रहना पीड़ादायक ही नहीं शिक्षाप्रद भी होता है। एक मसीही विश्वासी को उसका परमेश्वर पिता कभी नहीं छोड़ता; उस पीड़ा की अग्नि से परमेश्वर अपने विश्वासी जन के अन्दर की व्यर्थ बातों को भस्म करता है और उसे निर्मल करता है। यही स्थिति भजनकार की भी थी। अपने पाप और उसके कारण मिले पीड़ादायक अनुभवों के आधार पर उसने लिखा: "दुष्ट को तो बहुत पीड़ा होगी; परन्तु जो यहोवा पर भरोसा रखता है वह करुणा से घिरा रहेगा" (भजन 32:10)। ना केवल भजनकार ने अपनी गलती को पहचाना वरन उस पीड़ा में भी उसने परमेश्वर की उपस्थिति और सहायता को अनुभव किया।

   हर परिस्थिति में परमेश्वर पर भरोसा और समर्पण; उसके सामने अपने पापों का इनकार नहीं वरन अंगीकर और क्षमा याचना एक ऐसा जीवन प्रदान करते हैं जो खेद की पीड़ा से नहीं लेकिन परमेश्वर की आशीष से भरा होता है। यही हमारा प्रतिदिन का चुनाव है मसीही जीवन के अनुशासन का कष्ट या फिर खेद की पीड़ा। - बिल क्राउडर


वर्तमान के चुनाव भविष्य की आशीषें निर्धारित करते हैं।

जब मैं ने अपना पाप तुझ पर प्रगट किया और अपना अधर्म न छिपाया, और कहा, मैं यहोवा के साम्हने अपने अपराधों को मान लूंगा; तब तू ने मेरे अधर्म और पाप को क्षमा कर दिया। - भजन 32:5 

बाइबल पाठ: भजन 32
Psalms 32:1 क्या ही धन्य है वह जिसका अपराध क्षमा किया गया, और जिसका पाप ढ़ाँपा गया हो।
Psalms 32:2 क्या ही धन्य है वह मनुष्य जिसके अधर्म का यहोवा लेखा न ले, और जिसकी आत्मा में कपट न हो।
Psalms 32:3 जब मैं चुप रहा तब दिन भर कराहते कराहते मेरी हडि्डयां पिघल गईं।
Psalms 32:4 क्योंकि रात दिन मैं तेरे हाथ के नीचे दबा रहा; और मेरी तरावट धूप काल की सी झुर्राहट बनती गई।
Psalms 32:5 जब मैं ने अपना पाप तुझ पर प्रगट किया और अपना अधर्म न छिपाया, और कहा, मैं यहोवा के साम्हने अपने अपराधों को मान लूंगा; तब तू ने मेरे अधर्म और पाप को क्षमा कर दिया।
Psalms 32:6 इस कारण हर एक भक्त तुझ से ऐसे समय में प्रार्थना करे जब कि तू मिल सकता है। निश्चय जब जल की बड़ी बाढ़ आए तौभी उस भक्त के पास न पहुंचेगी।
Psalms 32:7 तू मेरे छिपने का स्थान है; तू संकट से मेरी रक्षा करेगा; तू मुझे चारों ओर से छुटकारे के गीतों से घेर लेगा।
Psalms 32:8 मैं तुझे बुद्धि दूंगा, और जिस मार्ग में तुझे चलना होगा उस में तेरी अगुवाई करूंगा; मैं तुझ पर कृपा दृष्टि रखूंगा और सम्मत्ति दिया करूंगा।
Psalms 32:9 तुम घोड़े और खच्चर के समान न बनो जो समझ नहीं रखते, उनकी उमंग लगाम और बाग से रोकनी पड़ती है, नहीं तो वे तेरे वश में नहीं आने के।
Psalms 32:10 दुष्ट को तो बहुत पीड़ा होगी; परन्तु जो यहोवा पर भरोसा रखता है वह करुणा से घिरा रहेगा।
Psalms 32:11 हे धर्मियों यहोवा के कारण आनन्दित और मगन हो, और हे सब सीधे मन वालों आनन्द से जयजयकार करो!

एक साल में बाइबल: 
  • 1 शमूएल 30-31 
  • लूका 13:23-35