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Monday, May 13, 2013

महत्वपूर्ण अंग


   हाल ही में मैंने एक ऐसे खेल के बारे में सुना जिसकी कल्पना करना भी मेरी सोच के बाहर था - पैर के अँगूठों की कुश्ती! यह मेरी समझ के बाहर है कि कोई इसे खेलने में रुचि कैसे ले सकता है; लेकिन हर साल संसार भर से लोग इंगलैंड आकर इस खेल की अन्तर्राष्ट्रीय प्रतियोगिता में भाग लेते हैं। प्रतियोगी भूमि पर आमने-सामने बैठते हैं, एक दूसरे के साथ पाँव के अँगूठे फंसाते हैं और फिर जैसे हाथ का पंजा लड़ाने में होता है, वे भी एक दूसरे के पैर को घुमा कर नीचे लगाने का प्रयास करते हैं।

   चलो, पैर के अँगूठों को भी कोई पहचान, कुछ मान-सम्मान तो मिला! अन्यथा पैर के अँगूठे की याद तो तभी आती है जब उस पर कुछ भारी चीज़ गिर जाए या फिर उसे ठेस लग जाए और पीड़ा की लहर शरीर में दौड़ जाए। हमारे पैर और पैर के अँगूठे-अँगुलियाँ हमारे शरीर के महत्वपूर्ण अंग तो हैं, लेकिन जब तक उनमें कोई दिक्कत या पीड़ा ना हो हम उनका ध्यान कम ही करते हैं। लेकिन परमेश्वर के वचन बाइबल में इनका उल्लेख भी उनके महत्व को समझाने के लिए हुआ है। प्रेरित पौलुस ने अपनी एक पत्री में मसीह यीशु की देह अर्थात उसके विश्वासीयों की मण्डली में एक दूसरे के परस्पर महत्व को समझाने के लिए एक मानव देह के अंगों तथा उनके परस्पर महत्व का उदाहरण दिया और लिखा: "यदि पांव कहे कि मैं हाथ नहीं, इसलिये देह का नहीं, तो क्या वह इस कारण देह का नहीं?" (1 कुरन्थियों 12:15)।

   परमेश्वर चाहता है कि हम यह एहसास रखें कि जैसे शरीर में हर एक अंग महत्वपूर्ण है और शरीर के सुचारू रीति से कार्य करने के लिए हर एक अंग के योगदान की आवश्यकता है, वैसे ही मसीह के देह अर्थात उसकी मण्डली में कोई छोटा या महत्वहीन नहीं है; सब महत्वपूर्ण हैं और सबके परस्पर मिल कर कार्य करने से ही मण्डली सुचारू रूप से चल सकती है। साथ ही जैसे शरीर के एक अंग के तकलीफ में होने से सारे शरीर पर प्रभाव आता है और शरीर के अन्य अंग मिल कर उस अंग की सहायता करते हैं, वैसे ही मसीही मण्डली में भी यह हमारा दायित्व है कि हम एक दूसरे की दिक्कतों और परेशानियों में सहायता करें।

   चाहे आप अपने आप को मसीही मण्डली में सबसे गौण और सबसे उपेक्षित सदस्य समझें, लेकिन परमेश्वर की दृष्टि में आप ना गौण हैं और ना ही महत्वहीन - उसने आप के लिए भी कुछ आवश्यक तय कर रखा है और आपके योगदान के बिना उसकी मण्डली अपना पूरी क्षमता के साथ कार्य नहीं कर पाएगी। परमेश्वर द्वारा आपको दिए गए महत्व और अनुपम कौशल को पहचानिए, उसे कार्यान्वित कीजिए और अपने योगदान द्वारा परमेश्वर को आदर तथा महिमा दीजिए। - बिल क्राउडर


परमेश्वर छोटे औज़ारों से बड़े-बड़े कार्य करवा लेता है।

यदि पांव कहे कि मैं हाथ नहीं, इसलिये देह का नहीं, तो क्या वह इस कारण देह का नहीं? - 1 कुरन्थियों 12:15

बाइबल पाठ: 1 कुरन्थियों 12:12-27
1 Corinthians 12:12 क्योंकि जिस प्रकार देह तो एक है और उसके अंग बहुत से हैं, और उस एक देह के सब अंग, बहुत होने पर भी सब मिलकर एक ही देह हैं, उसी प्रकार मसीह भी है।
1 Corinthians 12:13 क्योंकि हम सब ने क्या यहूदी हो, क्या युनानी, क्या दास, क्या स्‍वतंत्र एक ही आत्मा के द्वारा एक देह होने के लिये बपतिस्मा लिया, और हम सब को एक ही आत्मा पिलाया गया।
1 Corinthians 12:14 इसलिये कि देह में एक ही अंग नहीं, परन्तु बहुत से हैं।
1 Corinthians 12:15 यदि पांव कहे कि मैं हाथ नहीं, इसलिये देह का नहीं, तो क्या वह इस कारण देह का नहीं?
1 Corinthians 12:16 और यदि कान कहे; कि मैं आंख नहीं, इसलिये देह का नहीं, तो क्या वह इस कारण देह का नहीं?
1 Corinthians 12:17 यदि सारी देह आंख ही होती तो सुनना कहां से होता? यदि सारी देह कान ही होती तो सूंघना कहां होता?
1 Corinthians 12:18 परन्तु सचमुच परमेश्वर ने अंगो को अपनी इच्छा के अनुसार एक एक कर के देह में रखा है।
1 Corinthians 12:19 यदि वे सब एक ही अंग होते, तो देह कहां होती?
1 Corinthians 12:20 परन्तु अब अंग तो बहुत से हैं, परन्तु देह एक ही है।
1 Corinthians 12:21 आंख हाथ से नहीं कह सकती, कि मुझे तेरा प्रयोजन नहीं, और न सिर पांवों से कह सकता है, कि मुझे तुम्हारा प्रयोजन नहीं।
1 Corinthians 12:22 परन्तु देह के वे अंग जो औरों से निर्बल देख पड़ते हैं, बहुत ही आवश्यक हैं।
1 Corinthians 12:23 और देह के जिन अंगो को हम आदर के योग्य नहीं समझते हैं उन्‍ही को हम अधिक आदर देते हैं; और हमारे शोभाहीन अंग और भी बहुत शोभायमान हो जाते हैं।
1 Corinthians 12:24 फिर भी हमारे शोभायमान अंगो को इस का प्रयोजन नहीं, परन्तु परमेश्वर ने देह को ऐसा बना दिया है, कि जिस अंग को घटी थी उसी को और भी बहुत आदर हो।
1 Corinthians 12:25 ताकि देह में फूट न पड़े, परन्तु अंग एक दूसरे की बराबर चिन्‍ता करें।
1 Corinthians 12:26 इसलिये यदि एक अंग दु:ख पाता है, तो सब अंग उसके साथ दु:ख पाते हैं; और यदि एक अंग की बड़ाई होती है, तो उसके साथ सब अंग आनन्द मनाते हैं।
1 Corinthians 12:27 इसी प्रकार तुम सब मिल कर मसीह की देह हो, और अलग अलग उसके अंग हो।

एक साल में बाइबल: 
  • 2 राजा 17-18 
  • यूहन्ना 3:19-36