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Monday, June 3, 2013

एक शहर, दो कहानियाँ


   परमेश्वर के वचन बाइबल में एक ही शहर - निनवे के दो भिन्न पुस्तकों में दो भिन्न कथानक हैं। पहला मिलता है योना नबी की पुस्तक में और दूसरा नहूम नबी की पुस्तक में। इन दोनो पुस्तकों में इस एक ही शहर के दो भिन्न अन्जाम सामने आते हैं। 

   पहले कथानक में निनवे दुष्टता से भरा एक गैर-इस्त्राएली शहर था जिसकी दुष्टता का कटोरा भर चला था और इससे पहले कि उस शहर के निवासीयों को परमेश्वर के न्याय का सामना करना पड़े, परमेश्वर उन्हें पश्चाताप का एक अवसर देना चाहता है। परमेश्वर ने अपने नबी योना को निनवे जाकर उन्हें यह पश्चाताप करने का सन्देश देने को कहा लेकिन योना को निनवे के लोगों से कोई हमदर्दी नहीं थी और वह परमेश्वर की आज्ञा से बचने के लिए विपरीत दिशा में जाने वाले एक समुद्री जहाज़ के भीतरी भागों में जाकर सो गया। लेकिन परमेश्वर की नज़र और ज़िम्मेदारी से बचना संभव नहीं है; परमेश्वर ने एक बड़ा तूफान उठाया, जहाज़ के लोग परेशान हो गए, तब योना ने अपना अपराध स्वीकार करते हुए उनसे कहा कि वे उसे समुद्र में फेंक दें। जान बचाने का और कोई चारा ना पाकर नाविकों ने ऐसा ही किया; लेकिन योना का निनवे जाने से बचने का उद्देश्य यहाँ भी सफल नहीं हुआ, क्योंकि परमेश्वर ने एक बड़ी मछली तैयार करके वहाँ भेज दी जिसने योना को निगल लिया और लाकर निनवे के तट पर उगल दिया। अन्ततः योना ने जाकर निनवे में लोगों को पापों से पश्चाताप करने का प्रचार किया और राजा समेत सारा निनवे पश्चाताप के साथ परमेश्वर के सामने झुक गया।

   दूसरा कथानक इससे लगभग सौ वर्ष बाद का है; निनवे की दशा फिर पहले जैसी हो गई है और उनका पाप एक बार फिर न्याय के लिए तैयार है। लेकिन इस बार वे पापों के लिए पश्चातापी नहीं वरन घमंडी हैं और परमेश्वर का नबी नहूम उन्हें परमेश्वर का सन्देश देता है: "यहोवा विलम्ब से क्रोध करने वाला और बड़ा शक्तिमान है; वह दोषी को किसी प्रकार निर्दोष न ठहराएगा..." (नहूम 1:3)। लेकिन साथ ही अपना भय मानने वालों को आश्वासन भी कि: "यहोवा भला है; संकट के दिन में वह दृढ़ गढ़ ठहरता है, और अपने शरणागतों की सुधी रखता है" (नहूम 1:7)।

   इस एक शहर की दो कहानीयों से हम कुछ बातों को सीखते हैं - हर पीढ़ी को परमेश्वर के साथ अपना संबंध स्वयं ठीक करना है। बीती पीढ़ी की धार्मिकता या पश्चाताप वर्तमान या भविष्य की पीढ़ी पर लागू नहीं होता। पाप के प्रति परमेश्वर का दृष्टिकोण कभी नहीं बदलता; वह विलम्ब से कोप करने वाला अवश्य है और सबको, अपने ना मानने वालों को भी, पश्चाताप का भरपूर अवसार देता है, लेकिन पाप से समझौता कभी नहीं करता। जो पश्चाताप के अवसर को स्वीकार कर लेते हैं वे उसकी आशीषों के भागी होते हैं, जो नहीं करते वे अपने निर्णय के अनुसार उसके दण्ड के भागी होते हैं।

   परमेश्वर का यह सन्देश आज भी उतना ही स्पष्ट और ताज़ा है, उसमें कोई परिवर्तन नहीं है। सारे संसार के सभी लोगों के उद्धार और पापों की क्षमा के लिए परमेश्वर ने प्रभु यीशु मसीह को ठहराया है। अब निर्णय आपका है कि आप उससे क्या लेना चाहते हैं - पापों से पश्चाताप तथा यीशु मसीह को उद्धारकर्ता स्वीकार करके अनन्तकाल की आशीषें; या अपने पापों में बने रहकर और क्षमा के दिए गए अवसर को तिरस्कृत करके अनन्तकाल का दण्ड! - डेनिस फिशर


परमेश्वर का न्याय भी, और उसकी करुणा तथा क्षमा भी, दोनो ही निश्चित हैं - चुनाव आपका है।

यहोवा भला है; संकट के दिन में वह दृढ़ गढ़ ठहरता है, और अपने शरणागतों की सुधी रखता है। - नहूम 1:7

बाइबल पाठ: नहूम 1:1-15
Nahum 1:1 नीनवे के विषय में भारी वचन। एल्कोशी नहूम के दर्शन की पुस्तक।
Nahum 1:2 यहोवा जल उठने वाला और बदला लेने वाला ईश्वर है; यहोवा बदला लेने वाला और जलजलाहट करने वाला है; यहोवा अपने द्रोहियों से बदला लेता है, और अपने शत्रुओं का पाप नहीं भूलता।
Nahum 1:3 यहोवा विलम्ब से क्रोध करने वाला और बड़ा शक्तिमान है; वह दोषी को क