बाइबल और मसीही विश्वास सम्बन्धी अपने प्रश्नों के लिए यहाँ क्लिक करें:

GotQuestions?org

Friday, June 21, 2013

अनपेक्षित अशीष

   परमेश्वर के वचन बाइबल के प्रथम खण्ड - पुराने नियम में एक पुस्तक है "रूत"। यह पुस्तक एक बड़ी ही अद्भुत लेकिन सच्ची कहानी कहती है, एक गैरइस्त्राएली स्त्री रूत की। कहानी का आरंभ होता है एक इस्त्राएली स्त्री नाओमी के परिवार से, जो इस्त्राएल में पड़े अकाल से बचने के लिए गैरइस्त्राएली मोआब के इलाके में चला जाता है। वहाँ रहते हुए नाओमी के दोनो बेटे मोआबी स्त्रीओं, ओर्पा और रूत से ब्याह कर लेते हैं। कुछ समय पश्चात ही पहले नाओमी के पति का फिर उसके दोनो पुत्रों का भी देहाँत हो जाता है। ऐसे में ये तीन विधवाएं बड़ी कठिन परिस्थितियों में आ जाती हैं।

   तब नाओमी को पता चलता है कि इस्त्राएल अब अकाल से निकल आया है और वह अपने देश, घर और ज़मीन में लौट जाने का निर्णय लेती है। उसकी दोनों विधवा बहुएं भी उसके साथ चलना चाहती हैं, लेकिन नाओमी उन्हें साथ आने से मना करती है क्योंकि उसे लगता है कि परमेश्वर ने उसे छोड़ दिया है और वह उनसे अपने ही लोगों और परिवार जनों में रहने के लिए समझाती है, "तौभी क्या तुम उनके सयाने होने तक आशा लगाए ठहरी रहतीं? और उनके निमित्त पति करने से रुकी रहतीं? हे मेरी बेटियों, ऐसा न हो, क्योंकि मेरा दु:ख तुम्हारे दु:ख से बहुत बढ़कर है; देखो, यहोवा का हाथ मेरे विरुद्ध उठा है" (रूत 1:13)। ओर्पा तो नाओमी की बात मानकर पीछे रह जाती है लेकिन रूत अपनी सास द्वारा परमेश्वर पर रखे कमज़ोर विश्वास से हताश नहीं होती वरन अपने ससुराल के लोगों और उनके परमेश्वर के प्रति एक बड़े अद्भुत विश्वास और समर्पण का परिचय देती है: "तब वे फिर से उठीं; और ओर्पा ने तो अपनी सास को चूमा, परन्तु रूत उस से अलग न हुई। तब उसने कहा, देख, तेरी जिठानी तो अपने लोगों और अपने देवता के पास लौट गई है; इसलिये तू अपनी जिठानी के पीछे लौट जा। रूत बोली, तू मुझ से यह बिनती न कर, कि मुझे त्याग वा छोड़कर लौट जा; क्योंकि जिधर तू जाए उधर मैं भी जाऊंगी; जहां तू टिके वहां मैं भी टिकूंगी; तेरे लोग मेरे लोग होंगे, और तेरा परमेश्वर मेरा परमेश्वर होगा; जहां तू मरेगी वहां मैं भी मरूंगी, और वहीं मुझे मिट्टी दी जाएगी। यदि मृत्यु छोड़ और किसी कारण मैं तुझ से अलग होऊं, तो यहोवा मुझ से वैसा ही वरन उस से भी अधिक करे। जब उसने यह देखा कि वह मेरे संग चलने को स्थिर है, तब उसने उस से और बात न कही" (रूत 1:14-18)।

   यह कहानी आरंभ होती है बड़ी निराशाजनक परिस्थितियों - अकाल, मृत्यु और कठिन हालात के साथ, आगे बढ़ती है एक अद्भुत विश्वास द्वारा, एक नया मोड़ लेती है अनपेक्षित करुणा और दया के व्यवहारों से - रूत का नाओमी के प्रति (रूत 1:16-17; 2:11-12) और फिर नाओमी के दूर के रिश्तेदार बोआज़ का रूत के प्रति (रूत 2:13-14)। इस विलक्षण किंतु सच्ची कहानी में कुछ विचित्र से लोग हैं - दो विधवाएं, जिनमें से एक वृद्ध इस्त्राएली है और दूसरी एक जवान गैर इस्त्राएली, एक समृद्ध व्यक्ति बोआज़ जो एक वैश्या की सन्तान है (यहोशु 2:1, मत्ती 1:5)। इसका कथानक आधारित है एक अजीब से "संयोग" - रूत का बोआज़ के खेत में कटाई के बाद ज़मीन पर पड़ी रह गई अन्न की बालों को बीनने जाने पर (रूत 2:3), जिसके कारण रूत बोआज़ के संपर्क में आती है और फिर बोआज़ उसे ब्याह कर अपने घर ले आता है।

   इस कहानी का यही सुखद अन्त नहीं है। कहानी का अन्त एक अद्भुत और कलपना से भी परे आशीष के साथ है; बोआज़ और रूत से उत्पन्न पुत्र ओबेद इस्त्राएल के राजा दाऊद का दादा हुआ और राजा दाऊद के वंश में आगे चलकर संसार के उद्धारकर्ता प्रभु यीशु मसीह ने जन्म लिया।

   दुखदायी परिस्थितियाँ, परमेश्वर पर कमज़ोर टूटता हुआ विश्वास, बहुत ही साधारण से तथा तुच्छ समझे जाने वाले लोग, कुछ दया और करुणा के प्रकट भाव और इन सब के साथ परमेश्वर का हर बात तथा परिस्थिति को अपने वश में एवं नियंत्रित रखना; नतीजा - संसार के लिए पापों से मुक्ति तथा उद्धार का मार्ग!

   क्या आप अपने जीवन की परिस्थितियों से निराश और परेशान हैं? क्या परमेश्वर पर आपका विश्वास डगमगा रहा है या उठ गया है? क्या जीवन के हालात बिलकुल अनेपक्षित और समझ से बाहर हैं? अपना जीवन परमेश्वर को समर्पित करके सब कुछ परमेश्वर के हाथों में सौंप दीजिए, उसपर भरोसा बनाए रखिए और उसे अपने जीवन में कार्य करने दीजिए; नतीजा ऐसी अनेपक्षित और विलक्षण आशीष होगी जिसकी आप अभी कलपना भी नहीं कर सकते। - जूली ऐकैरमैन लिंक


मसीही विशवासी के जीवन के हर गतिरोध में परमेश्वर एक अद्भुत आनन्द की योजना का निर्माण कर रहा है। - जॉन पाइपर

...क्योंकि तेरी बहू ज&#