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Thursday, July 4, 2013

क्रूस

   अमेरिका के सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष एक मुकद्दमा आया - क्या एक धार्मिक चिन्ह, विशेषतः क्रूस को, किसी सार्वजनिक स्थल पर प्रदर्शित किया जाना चाहिए? इस संबंध में ऐसोशियेटेड प्रेस के लिए मार्क शर्मन ने लिखा, यद्यपि जिस क्रूस को लेकर यह मुकद्दमा हो रहा था वह सन 1934 में प्रथम विश्वयुद्ध में शहीद हुए सैनिकों को श्रद्धांजलि के लिए उस स्थान पर खड़ा किया गया था, उसके वहाँ होने का विरोध करने वाले एक सेवा-निवृत सैनिकों के दल का तर्क था कि क्योंकि क्रूस केवल मसीही धर्म का एक प्रबल चिन्ह है ना कि सभी धर्मों का, इसलिए उसे यह वरियता नहीं मिलनी चाहिए।

   क्रूस सदा ही विवादित रहा है। प्रभु यीशु के स्वर्गारोहण के बाद, पहली शताब्दी में ही, पौलुस ने अपने मसीही विश्वास के प्रचार के संबंध में लिखा: "क्योंकि मसीह ने मुझे बपतिस्मा देने को नहीं, वरन सुसमाचार सुनाने को भेजा है, और यह भी शब्‍दों के ज्ञान के अनुसार नहीं, ऐसा न हो कि मसीह का क्रूस व्यर्थ ठहरे। क्योंकि क्रूस की कथा नाश होने वालों के निकट मूर्खता है, परन्तु हम उद्धार पाने वालों के निकट परमेश्वर की सामर्थ है" (1 कुरिन्थियों 1:17-18)। हम मसीही विश्वासियों के लिए प्रभु यीशु मसीह का क्रूस केवल एक प्रबल मसीही चिन्ह ही नहीं है, वरन उस से भी बहुत बढ़कर क्रूस प्रमाण है मनुष्य जाति को पाप के क्रूर शासन से मुक्त करने के परमेश्वर के मार्ग और सभी मनुष्यों के प्रति परमेश्वर के प्रेम का।

   एक बहुविचारवादी और भिन्न आस्थाओं को रखने वाले समाज में धार्मिक चिन्हों को लेकर विवाद तो चलता ही रहेगा और क्या क्रूस किसी सार्वजनिक स्थल पर प्रदर्शित किया जा सकता है या नहीं, इसका निर्णय न्यायालय कर लेंगे; परन्तु हमारे जीवनों के द्वारा क्रूस की सामर्थ प्रदर्शित होती है या नहीं, यह निर्णय हमें व्यक्तिगत रीति से लेना है।

   क्या आपने परमेश्वर के प्रेम और क्षमा के सर्वोच्च चिन्ह - प्रभु यीशु मसीह के क्रूस को अपने हृदय में स्थापित किया है? क्या पापों की आधीनता से मुक्त करने वाली क्रूस की सामर्थ आपके जीवन से प्रदर्शित होती है? - डेविड मैक्कैसलैंड


मानव जाति के प्रति परमेश्वर के प्रेम को क्रूस से बढ़कर अन्य कुछ भी बयान नहीं कर सकता।

क्योंकि क्रूस की कथा नाश होने वालों के निकट मूर्खता है, परन्तु हम उद्धार पाने वालों के निकट परमेश्वर की सामर्थ है। - 1 कुरिन्थियों 1:18

बाइबल पाठ: 1 कुरिन्थियों 1:17-25
1 Corinthians 1:17 क्योंकि मसीह ने मुझे बपतिस्मा देने को नहीं, वरन सुसमाचार सुनाने को भेजा है, और यह भी शब्‍दों के ज्ञान के अनुसार नहीं, ऐसा न हो कि मसीह का क्रूस व्यर्थ ठहरे।
1 Corinthians 1:18 क्योंकि क्रूस की कथा नाश होने वालों के निकट मूर्खता है, परन्तु हम उद्धार पाने वालों के निकट परमेश्वर की सामर्थ है।
1 Corinthians 1:19 क्योंकि लिखा है, कि मैं ज्ञानवानों के ज्ञान को नाश करूंगा, और समझदारों की समझ को तुच्‍छ कर दूंगा।
1 Corinthians 1:20 कहां रहा ज्ञानवान? कहां रहा शास्त्री? कहां इस संसार का विवादी? क्या परमेश्वर ने संसार के ज्ञान को मूर्खता नहीं ठहराया?
1 Corinthians 1:21 क्योंकि जब परमेश्वर के ज्ञान के अनुसार संसार ने ज्ञान से परमेश्वर को न जाना तो परमेश्वर को यह अच्छा लगा, कि इस प्रचार की मूर्खता के द्वारा विश्वास करने वालों को उद्धार दे।
1 Corinthians 1:22 यहूदी तो चिन्ह चाहते हैं, और यूनानी ज्ञान की खोज में हैं।
1 Corinthians 1:23 परन्तु हम तो उस क्रूस पर चढ़ाए हुए मसीह का प्रचार करते हैं जो यहूदियों के निकट ठोकर का कारण, और अन्यजातियों के निकट मूर्खता है।
1 Corinthians 1:24 परन्तु जो बुलाए हुए हैं क्या यहूदी, क्या यूनानी, उन के निकट मसीह परमेश्वर की सामर्थ, और परमेश्वर का ज्ञान है।
1 Corinthians 1:25 क्योंकि परमेश्वर की मूर्खता मनुष्यों के ज्ञान से ज्ञानवान है; और परमेश्वर की निर्बलता मनुष्यों के बल से बहुत बलवान है।

एक साल में बाइबल: 
  • अय्युब 28-29 
  • प्रेरितों 13:1-25