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Thursday, July 25, 2013

आनन्द

   मैं सदा ही ग्रीष्म काल के आने की बाट जोहता हूँ। ठंड के एक लम्बे समय के पश्चात धूप की गर्मी में बाहर निकलना, बेसबॉल खेलना, समुद्र तट पर विचरण करना और दोस्तों के साथ रात को बाहर आग पर खाना पकाकर खाना और बातचीत में समय बिताना आदि सब ऐसे आनन्द हैं जिनकी प्रतीक्षा ठंड के मौसम के बाद मुझे रहती है। लेकिन आनन्द मनाना और मौज करना किसी ऋतु पर निर्भर नहीं है; ऋतु कोई भी हो, क्या हम सब को अच्छा भोजन, मित्रों के साथ समय बिताना और बातचीत करना या परिवार के साथ समय बिताना आनन्दित नहीं करता?

   आनन्द मनाना और मौज करना अपने आप में कोई बुरी बात नहीं है, परमेश्वर ने हमें आनन्दित रहने के लिए ही बनाया है और सृष्टि की चीज़ें दी हैं। परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रेरित पौलुस लिखता है: "इस संसार के धनवानों को आज्ञा दे, कि वे अभिमानी न हों और चंचल धन पर आशा न रखें, परन्तु परमेश्वर पर जो हमारे सुख के लिये सब कुछ बहुतायत से देता है" (1 तिमुथियुस 6:17)। ना केवल परमेश्वर हमारे सुख के लिए हमें बहुतायत से देता है, वरन बाइबल में अन्य स्थानों पर इस बहुतायत से मिलने वाले अच्छे भोजन, अच्छे मित्रों, अच्छे वैवाहिक संबंधों आदि के सदुपयोग से मिलने वाले भले आनन्द का उल्लेख भी है। लेकिन यह दृष्टिकोण रखना कि इन सांसारिक बातों से स्थाई और वास्तविक आनन्द मिल जाएगा एक भ्रम है।

   स्थाई और वास्तविक आनन्द संसार के अल्प कालीन रोमांच और ऐसा रोमांच देने वाली वस्तुओं में नहीं अपितु सृष्टिकर्ता परमेश्वर के साथ एक दीर्घकालीन निकट संबंध बनाने और उसे गहरा बनाते जाने में है। राजा सुलेमान ने भी इस बात को सीखा और पहचाना, लेकिन कुछ कटु अनुभवों के बाद; उसने अपने आप को संसार और संसार के भोग-विलास में लिप्त कर लिया, लेकिन नतीजा एक व्यर्थता का अनुभव ही था: "और जितनी वस्तुओं के देखने की मैं ने लालसा की, उन सभों को देखने से मैं न रूका; मैं ने अपना मन किसी प्रकार का आनन्द भोगने से न रोका क्योंकि मेरा मन मेरे सब परिश्रम के कारण आनन्दित हुआ; और मेरे सब परिश्रम से मुझे यही भाग मिला। तब मैं ने फिर से अपने हाथों के सब कामों को, और अपने सब परिश्रम को देखा, तो क्या देखा कि सब कुछ व्यर्थ और वायु को पकड़ना है, और संसार में कोई लाभ नहीं" (सभोपदेशक 2:10-11)। इसलिए इसमें कोई आश्चर्य नहीं कि अपने सब अनुभवों के आधार पर उसने चिताया कि सांसारिक भोग-विलास के आनन्द के पीछे भागने वाले अन्ततः नुक्सान में ही रहेंगे "जो रागरंग से प्रीति रखता है, वह कंगाल होता है; और जो दाखमधु पीने और तेल लगाने से प्रीति रखता है, वह धनी नहीं होता" (नीतिवचन 21:17)।

   जिस स्थाई और वास्तविक आनन्द कि हमें तलाश है, उसकी प्राप्ति और तृप्ति उसी से होती है जो सब वस्तुओं का बनाने वाला और उन्हें हमें देने वाला है। सृष्टिकर्ता और उद्धारकर्ता प्रभु यीशु के साथ एक दृढ़ संबंध बना लीजिए, उसकी संगति से मिलने वाले अद्भुत आनन्द को चखने के बाद फिर सांसारिक बातों का आनन्द फीका ही लगेगा। - जो स्टोवैल


आपके जीवन का उद्देश्य क्या है - अपना सुख-विलास या परमेश्वर की प्रसन्नता?

सब कुछ सुना गया; अन्त की बात यह है कि परमेश्वर का भय मान और उसकी आज्ञाओं का पालन कर; क्योंकि मनुष्य का सम्पूर्ण कर्त्तव्य यही है। क्योंकि परमेश्वर सब कामों और सब गुप्त बातों का, चाहे वे भली हों या बुरी, न्याय करेगा। - सभोपदेशक 12:13-14 

बाइबल पाठ: सभोपदेशक 2:1-11
Ecclesiastes 2:1 मैं ने अपने मन से कहा, चल, मैं तुझ को आनन्द के द्वारा जांचूंगा; इसलिये आनन्दित और मगन हो। परन्तु देखो, यह भी व्यर्थ है।
Ecclesiastes 2:2 मैं ने हंसी के विषय में कहा, यह तो बावलापन है, और आनन्द के विषय में, उस से क्या प्राप्त होता है?
Ecclesiastes 2:3 मैं ने मन में सोचा कि किस प्रकार से मेरी बुद्धि बनी रहे और मैं अपने प्राण को दाखमधु पीने से क्योंकर बहलाऊं और क्योंकर मूर्खता को थामे रहूं, जब तक मालूम न करूं कि वह अच्छा काम कौन सा है जिसे मनुष्य जीवन भर करता रहे।
Ecclesiastes 2:4 मैं ने बड़े बड़े काम किए; मैं ने अपने लिये घर बनवा लिये और अपने लिये दाख की बारियां लगवाईं;
Ecclesiastes 2:5 मैं ने अपने लिये बारियां और बाग लगावा लिये, और उन में भांति भांति