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Tuesday, November 19, 2013

सफाई


   इस सप्ताह परमेश्वर ने कुछ शरद ऋतु वाली सफाई करी - उसने हमारे रहने के इलाके में एक तेज़ आंधी चलाकर पेड़ों को हिलाया और झकझोरा। इससे उन के सूखे हुए पत्ते और कई टहनियाँ पेड़ से अलग होकर नीचे गिर पड़े। अब आते बसंत ऋतु में नई कोंपलों और पत्तों के उगने और सूर्य की रौशनी से ऊर्जा प्राप्त कर के बढ़ने के लिए पर्याप्त स्थान तैयार हो गया। उन टूट कर गिरे पत्तों और टहनियों को जमा कर के अपने बागीचे से साफ करते समय मुझे यह शिक्षा भी मिली कि जब परमेश्वर मेरे जीवन से व्यर्थ बातों को अलग करे, तो भला होगा कि जो उसने अलग कर दिया है उसे मैं अपने जीवन से साफ भी कर दूँ, जैसे मैंने अपने बाग़ से उन गिरे हुए पत्तों और टहनियों को साफ कर रही थी। मैं ने यह भी सीखा कि इसी प्रकार मेरे जीवन में भी परमेश्वर कभी कभी किसी आँधी को या मुझे झकझोर देने वाले किसी अनुभव को आ लेने देता है जिससे मेरे जीवन के वे व्यर्थ भाग मुझ से अलग किए जा सकें जो सामान्य प्रक्रिया से अलग नहीं हो पा रहे हैं।

   ये ’व्यर्थ’ भाग मेरी कुछ ऐसी आदतें या पसन्द की बातें हो सकतीं हैं जिन्हें मैं ढिटाई से पकड़े हुए हूँ और छोड़ना नहीं चाहती। वे मेरी सेवकाई के ऐसे अंश भी हो सकते हैं जो कभी मेरे लिए भले और लाभदायक थे परन्तु अब उनकी उपयोगिता मेरे जीवन और मेरी सेवकाई के लिए समाप्त हो गई है, परमेश्वर उनके स्थान पर अब कुछ नया मेरे जीवन में लाना चाहता है। लेकिन अधिकांशतः यह कोई बुरी आदत या ज़िद्दी व्यवहार, जैसे कड़ुवाहट, क्रोध, निन्दा (इफिसियों 4:31) आदि होता है जिसे मैं परमेश्वर द्वारा स्मरण दिलाए जाने पर भी, या फिर उसकी चेतावनियों को प्राप्त करने अथवा हलकी डाँट के बावजूद भी छोड़ने को तैयार नहीं होती, ढिटाई से उनमें बनी रहती हूँ। मुझे साफ करने के लिए फिर परमेश्वर को मुझे हिलाना और झकझोरना ही पड़ता है।

   परमेश्वर के वचन बाइबल के पुराने नियम खण्ड में योना नबी ने जाना कि जब कोई किसी ढिटाई के आचरण को छोड़ने को तैयार नहीं होता तब क्या कुछ हो सकता है। योना परमेश्वर का नबी था, लेकिन निनेवे के दुष्ट लोगों के प्रति उसकी कड़ुवाहट परमेश्वर के प्रति उसके प्रेम से कहीं अधिक थी। जब परमेश्वर ने योना को कहा कि वह निनेवे के लोगों के मध्य जा कर पश्चाताप करने का प्रचार करे, तो वह परमेश्वर की आज्ञा को मानने की बजाए, निनेवे से विपरीत दिशा में एक पानी जहाज़ पर चढ़कर चल निकला। लेकिन परमेश्वर से भागना संभव नहीं था; परमेश्वर ने एक प्रचण्ड आँधी के द्वारा उस जहाज़ को झकझोरा, योना ने स्वीकार किया की जहाज़ की यह स्थिति उसके कारण हुई है, और उसके कहने पर उसे पानी में फेंक दिया गया, जहाँ योना के लिए परमेश्वर ने एक बड़े मगरमच्छ को तैयार कर रखा था। तीन दिन तक मगरमच्छ के पेट में रहने के बाद मगरमच्छ ने योना को निनेवे के तट पर उगल दिया और अन्ततः योना ने जाकर निनेवे में परमेश्वर के प्रति पापों से पश्चाताप का प्रचार किया जिससे सारा निनेवे पश्चाताप में परमेश्वर के सामने झुक गया और विनाश से बच गया।

   परमेश्वर तो अपने लोगों को साफ देखना चाहता है, और उन्हें साफ रहने की शिक्षा भी देता है; अब यह हम पर है कि हम कैसे साफ होते हैं - उसकी सुनकर या उसके द्वारा हिलाए और झकझोरे जा कर। हमारी सफाई उसकी ज़िम्मेदारी है, और वह उसे पूरा भी करेगा; इसलिए जो सहज से हो जाए उसके लिए तकलीफ क्यों सहें? - जूली ऐकैरमैन लिंक


मसीह यीशु के कलवरी के क्रूस पर बहाए लहु की सामर्थ पाप के गहरे से गहरे दाग़ को भी धो कर साफ कर सकती है।

पर जैसा तुम्हारा बुलाने वाला पवित्र है, वैसे ही तुम भी अपने सारे चाल चलन में पवित्र बनो। क्योंकि लिखा है, कि पवित्र बनो, क्योंकि मैं पवित्र हूं। - 1 पतरस 1:15-16

बाइबल पाठ: योना 1
Jonah 1:1 यहोवा का यह वचन अमितै के पुत्र योना के पास पहुंचा, 
Jonah 1:2 उठ कर उस बड़े नगर नीनवे को जा, और उसके विरुद्ध प्रचार कर; क्योंकि उसकी बुराई मेरी दृष्टि में बढ़ गई है। 
Jonah 1:3 परन्तु योना यहोवा के सम्मुख से तर्शीश को भाग जाने के लिये उठा, और यापो नगर को जा कर तर्शीश जाने वाला एक जहाज पाया; और भाड़ा देकर उस पर चढ़ गया कि उनके साथ हो कर यहोवा के सम्मुख से तर्शीश को चला जाए।
Jonah 1:4 तब यहोवा ने समुद्र में एक प्रचण्ड आंधी चलाई, और समुद्र में बड़ी आंधी उठी, यहां तक कि जहाज टूटने पर था। 
Jonah 1:5 तब मल्लाह लोग डर कर अपने अपने देवता की दोहाई देने लगे; और जहाज में जो व्यापार की सामग्री थी उसे समुद्र में फेंकने लगे कि जहाज हल्का हो जाए। परन्तु योना जहाज के निचले भाग में उतरकर सो गया था, और गहरी नींद में पड़ा हुआ था। 
Jonah 1:6 तब मांझी उसके निकट आकर कहने लगा, तू भारी नींद में पड़ा हुआ क्या करता है? उठ, अपने देवता की दोहाई दे! सम्भव है कि परमेश्वर हमारी चिन्ता करे, और हमारा नाश न हो।
Jonah 1:7 तब उन्होंने आपस में कहा, आओ, हम चिट्ठी डाल कर जान लें कि यह विपत्ति हम पर किस के कारण पड़ी है। तब उन्होंने चिट्ठी डाली, और चिट्ठी योना के नाम पर निकली। 
Jonah 1:8 तब उन्होंने उस से कहा, हमें बता कि किस के कारण यह विपत्ति हम पर पड़ी है? तेरा उद्यम क्या है? और तू कहां से आया है? तू किस देश और किस जाति का है? 
Jonah 1:9 उसने उन से कहा, मैं इब्री हूं; और स्वर्ग का परमेश्वर यहोवा जिसने जल स्थल दोनों को बनाया है, उसी का भय मानता हूं। 
Jonah 1:10 तब वे निपट डर गए, और उस से कहने लगे, तू ने यह क्या किया है? वे जान गए थे कि वह यहोवा के सम्मुख से भाग आया है, क्योंकि उसने आप ही उन को बता दिया था।
Jonah 1:11 तब उन्होंने उस से पूछा, हम तेरे साथ क्या करें जिस से समुद्र शान्त हो जाए? उस समय समुद्र की लहरें बढ़ती ही जाती थीं। 
Jonah 1:12 उसने उन से कहा, मुझे उठा कर समुद्र में फेंक दो; तब समुद्र शान्त पड़ जाएगा; क्योंकि मैं जानता हूं, कि यह भारी आंधी तुम्हारे ऊपर मेरे ही कारण आई है। 
Jonah 1:13 तौभी वे बड़े यत्न से खेते रहे कि उसको किनारे पर लगाएं, परन्तु पहुंच न सके, क्योंकि समुद्र की लहरें उनके विरुद्ध बढ़ती ही जाती थीं। 
Jonah 1:14 तब उन्होंने यहोवा को पुकार कर कहा, हे यहोवा हम बिनती करते हैं, कि इस पुरूष के प्राण की सन्ती हमारा नाश न हो, और न हमें निर्दोष की हत्या का दोषी ठहरा; क्योंकि हे यहोवा, जो कुछ तेरी इच्छा थी वही तू ने किया है। 
Jonah 1:15 तब उन्होंने योना को उठा कर समुद्र में फेंक दिया; और समुद्र की भयानक लहरें थम गईं। 
Jonah 1:16 तब उन मनुष्यों ने यहोवा का बहुत ही भय माना, और उसको भेंट चढ़ाई और मन्नतें मानीं।
Jonah 1:17 यहोवा ने एक बड़ा सा मगरमच्छ ठहराया था कि योना को निगल ले; और योना उस मगरमच्छ के पेट में तीन दिन और तीन रात पड़ा रहा।

एक साल में बाइबल: 
  • यहेजकेल 11-13 
  • याकूब 1