बाइबल और मसीही विश्वास सम्बन्धी अपने प्रश्नों के लिए यहाँ क्लिक करें:

GotQuestions?org

Wednesday, December 4, 2013

शांति


   सृष्टि की शांति जाती रही जब हमारे आदि माता-पिता, आदम और हव्वा ने परमेश्वर की अनाज्ञाकारिता का पाप कर के, अदन कि वाटिका में वह वर्जित फल खा लिया। यह पाप करते ही ना केवल उन की परमेश्वर से सहभागिता जाती रही, वरन उनकी परस्पर शांति भी जाती रही और वे आपस में भी एक दुसरे पर दोषारोपण करने लगे (उत्पत्ति 3:12-13)। परमेश्वर के साथ तथा परस्पर संबंधों में पाप के कारण आने वाली यही अशांति तब से लेकर आज तक संसार और मानवजाति के लिए दुख का कारण बनी हुई है। हम अपने द्वारा लिए गलत निर्णयों तथा किए गए गलत चुनावों के लिए दूसरों को दोषी ठहराने का प्रयास करते रहते हैं, और जब कोई हमसे इस प्रयास में सहमत नहीं होता तो हम क्रोधित होने लगते हैं। दूसरों पर दोषारोपण की इस प्रवृति के कारण परिवारों, चर्च मण्डली, समाज और राष्ट्रों में भी तनाव तथा कलह व्याप्त है। हम शांति स्थापित कर नहीं पा रहे हैं क्योंकि हमारे मन दूसरों को दोषी ठहराने में लगे रहते हैं और संसार बिखरता जा रहा है, खंडित होता जा रहा है।

   क्रिसमस शांति का मौसम है। परमेश्वर के वचन बाइबल का पुराने नियम का खण्ड हमें बताता है कि कैसे परमेश्वर ने शांति के राजकुमार (यशायाह 9:6), प्रभु यीशु के संसार में आगमन के लिए तैयारी करी। प्रभु यीशु संसार में आए जिससे उसके क्रूस पर बहाए गए लहु के द्वारा (कुल्लुसियों 1:20) पाप और दोषारोपण का यह कुचक्र तोड़ा जा सके और परमेश्वर के साथ तथा परस्पर मानव संबंधों में शांति स्थापित हो सके। हमारे पापों और कटु व्यवहार के कारण संसार में व्याप्त असंतोष तथा अशांति के लिए हमें दोषी ठहराने की बजाए, प्रभु यीशु ने सारे संसार के लोगों के सारे पापों का दोष अपने ऊपर ले लिया, उनका दण्ड सह लिया, और अपने बलिदान तथा पुनर्त्थान के द्वारा पापों के दोष तथा दण्ड से बच निकलने का मार्ग मानव जाति को बना के दे दिया। अब जो कोई भी प्रभु यीशु से अपने पापों की क्षमा मांग कर अपना जीवन उसे समर्पित कर देता है, वह उसका अनुयायी तथा परमेश्वर की सनतान बन जाता है (यूहन्ना 1:12-13)।

   जो परमेश्वर से पापों की क्षमा की यह अद्भुत शांति पा लेता है, फिर स्वतः ही उसके अन्दर दूसरों को भी इस अद्भुत शांति को पहुँचाने की लालसा जागृत हो जाती है। जो परमेश्वर के साथ शांति से जीवन व्यतीत कर पाता है, वह दूसरों के साथ भी शांति से रहने पाता है। जो अपने पापों के दोष से मुक्त हो जाने के अनुभव को जानता है वह दूसरों को भी दोषी ठहराने से दूर रहता है।

   आज परमेश्वर का द्वार संसार के प्रत्येक जन के लिए यह शांति तथा मुक्ति पा लेने के लिए खुला है। क्या आप ने इस अवसर का लाभ उठाया है? यही समय है अपने लिए शांति पा लेने और दूसरों को शांति तक पहुँचा देने का; इसे व्यर्थ ना जाने दीजिए। - जूली ऐकैरमैन लिंक


प्रभु यीशु ने हमारी अशांति अपने ऊपर ले ली जिससे कि हम उस की शांति अपने जीवनों में प्राप्त कर सकें।

क्योंकि हमारे लिये एक बालक उत्पन्न हुआ, हमें एक पुत्र दिया गया है; और प्रभुता उसके कांधे पर होगी, और उसका नाम अद्‌भुत, युक्ति करने वाला, पराक्रमी परमेश्वर, अनन्तकाल का पिता, और शान्ति का राजकुमार रखा जाएगा। - यशायाह 9:6

बाइबल पाठ: कुल्लुसियों 1:17-29
Colossians 1:17 और वही सब वस्‍तुओं में प्रथम है, और सब वस्तुएं उसी में स्थिर रहती हैं। 
Colossians 1:18 और वही देह, अर्थात कलीसिया का सिर है; वही आदि है और मरे हुओं में से जी उठने वालों में पहिलौठा कि सब बातों में वही प्रधान ठहरे। 
Colossians 1:19 क्योंकि पिता की प्रसन्नता इसी में है कि उस में सारी परिपूर्णता वास करे। 
Colossians 1:20 और उसके क्रूस पर बहे हुए लोहू के द्वारा मेल मिलाप कर के, सब वस्‍तुओं का उसी के द्वारा से अपने साथ मेल कर ले चाहे वे पृथ्वी पर की हों, चाहे स्वर्ग में की। 
Colossians 1:21 और उसने अब उसकी शारीरिक देह में मृत्यु के द्वारा तुम्हारा भी मेल कर लिया जो पहिले निकाले हुए थे और बु