बाइबल और मसीही विश्वास सम्बन्धी अपने प्रश्नों के लिए यहाँ क्लिक करें:

GotQuestions?org

Monday, June 30, 2014

अज्ञानता


   कुछ लोग डॉक्टर के पास जाना इसलिए पसन्द नहीं करते क्योंकि वे यह जानना नहीं चाहते कि उनके अन्दर कोई रोग हो सकता है। कुछ लोग इसी कारण चर्च भी जाना पसन्द नहीं करते क्योंकि वे जानना नहीं चाहते कि उनकी आत्मिक स्थिति ठीक नहीं है। लेकिन जैसे हमारे शरीर की दशा के प्रति हमारी अज्ञानता हमें स्वस्थ नहीं ठहरा देती, वैसे ही हमारा हमारे पाप के प्रति अज्ञान होना हमें बेगुनाह या बेकसूर नहीं ठहरा देता।

   एक धारणा है कि रोमी कानून इस विचार का स्त्रोत है कि नियमों के प्रति अज्ञान होने से हम उनके उल्लंघन के परिणामों से बच नहीं सकते। लेकिन वास्तव में यह विचार रोमी साम्रज्य और कानून से भी बहुत पुरातन है; यह परमेश्वर के वचन बाइबल का एक भाग है। जब हज़ारों वर्ष पहले परमेश्वर ने इस्त्राएल को अपने नियम और व्यवस्था दी थी, तब उसने उनमें यह स्थापित कर दिया था कि अनजाने में किए गए पापों के लिए भी वैसे ही प्रायश्चित की आवश्यकता है, जैसे कि जान-बूझ कर किए गए पापों के लिए (लैव्यवस्था 4; यहेजकेल 45:18-20)।

   रोम में रहने वाले मसीही विश्वासियों को लिखी अपनी पत्री में प्रेरित पौलुस ने इस अज्ञानता और नासमझी को संबोधित किया है। जब लोग परमेश्वर की धार्मिकता से अनजान हो गए तब उन्होंने अपनी धार्मिकता गढ़ ली (रोमियों 10:3)। जब हम अपनी ही गढ़ी हुई धार्मिकता के माप के अनुसार जीवन व्यतीत करते हैं तो हम अपने आप को लेकर अच्छा अनुभव कर सकते हैं। वस्तुस्थिति तो तब सामने आती है जब हम परमेश्वर की धार्मिकता के माप अर्थात प्रभु यीशु मसीह के समक्ष अपने आप को खड़ा करके देखते हैं - हमारी आत्मिक स्थिति का वास्तविक आँकलन तो तब ही होता है।

   कोई मनुष्य अपने किसी भी प्रयास द्वारा परमेश्वर की धार्मिकता के माप पर खरा नहीं उतर सकता, लेकिन परमेश्वर का धन्यवाद हो कि किसी मनुष्य को ऐसा करने की कोई आवश्यकता भी नहीं है, क्योंकि परमेश्वर अपनी धार्मिकता सभी मनुष्यों के साथ सेंत-मेंत बाँटने को तैयार है (रोमियों 5:21); वह हमें हमारे पापों की दशा में ही स्वीकार करके, स्वयं ही हमें पाप की सब मलिनता से शुद्ध और पवित्र करना चाहता है (1 यूहन्ना 1:9)।

   हमें हमारी आत्मिक दशा के प्रति अज्ञानी बने रहने की कोई आवश्यकता नहीं है क्योंकि वह महान परमेश्वर जो हमारी वस्तुस्थिति को भली भाँति जानता है, स्वयं ही हमें धर्मी ठहराने को तैयार है, यदि हम प्रभु यीशु मसीह पर विश्वास लाकर उससे अपने पापों की क्षमा मांग लें और अपना जीवन उसे समर्पित कर दें, क्योंकि जो पाप क्षमा नहीं होंगे, उसे उनका न्याय करना होगा (प्रेरितों 17:30-31)। - जूली ऐकैअरमैन लिंक


परमेश्वर ही हमारी आत्मिक दशा को मापने वाला तथा उसे ठीक करने वाला है।

इसलिये परमेश्वर अज्ञानता के समयों में अनाकानी कर के, अब हर जगह सब मनुष्यों को मन फिराने की आज्ञा देता है। क्योंकि उसने एक दिन ठहराया है, जिस में वह उस मनुष्य के द्वारा धर्म से जगत का न्याय करेगा, जिसे उसने ठहराया है और उसे मरे हुओं में से जिलाकर, यह बात सब पर प्रामाणित कर दी है। - प्रेरितों 17:30-31

बाइबल पाठ: रोमियों 5:12-21
Romans 5:12 इसलिये जैसा एक मनुष्य के द्वारा पाप जगत में आया, और पाप के द्वारा मृत्यु आई, और इस रीति से मृत्यु सब मनुष्यों में फैल गई, इसलिये कि सब ने पाप किया। 
Romans 5:13 क्योंकि व्यवस्था के दिए जाने तक पाप जगत में तो था, परन्तु जहां व्यवस्था नहीं, वहां पाप गिना नहीं जाता। 
Romans 5:14 तौभी आदम से ले कर मूसा तक मृत्यु ने उन लोगों पर भी राज्य किया, जिन्हों ने उस आदम के अपराध की नाईं जो उस आने वाले का चिन्ह है, पाप न किया। 
Romans 5:15 पर जैसा अपराध की दशा है, वैसी अनुग्रह के वरदान की नहीं, क्योंकि जब एक मनुष्य के अपराध से बहुत लोग मरे, तो परमेश्वर का अनुग्रह और उसका जो दान एक मनुष्य के, अर्थात यीशु मसीह के अनुग्रह से हुआ बहुतेरे लागों पर अवश्य ही अधिकाई से हुआ। 
Romans 5:16 और जैसा एक मनुष्य के पाप करने का फल हुआ, वैसा ही दान की दशा नहीं, क्योंकि एक ही के कारण दण्ड की आज्ञा का फैसला हुआ, परन्तु बहुतेरे अपराधों से ऐसा वरदान उत्पन्न हुआ, कि लोग धर्मी ठहरे। 
Romans 5:17 क्योंकि जब एक मनुष्य के अपराध के कराण मृत्यु ने उस एक ही के द्वारा राज्य किया, तो जो लोग अनुग्रह और धर्म रूपी वरदान बहुतायत से पाते हैं वे एक मनुष्य के, अर्थात यीशु मसीह के द्वारा अवश्य ही अनन्त जीवन में राज्य करेंगे। 
Romans 5:18 इसलिये जैसा एक अपराध सब मनुष्यों के लिये दण्ड की आज्ञा का कारण हुआ, वैसा ही एक धर्म का काम भी सब मनुष्यों के लिये जीवन के निमित धर्मी ठहराए जाने का कारण हुआ। 
Romans 5:19 क्योंकि जैसा एक मनुष्य के आज्ञा न मानने से बहुत लोग पापी ठहरे, वैसे ही एक मनुष्य के आज्ञा मानने से बहुत लोग धर्मी ठहरेंगे। 
Romans 5:20 और व्यवस्था बीच में आ गई, कि अपराध बहुत हो, परन्तु जहां पाप बहुत हुआ, वहां अनुग्रह उस से भी कहीं अधिक हुआ। 
Romans 5:21 कि जैसा पाप ने मृत्यु फैलाते हुए राज्य किया, वैसा ही हमारे प्रभु यीशु मसीह के द्वारा अनुग्रह भी अनन्त जीवन के लिये धर्मी ठहराते हुए राज्य करे।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 109-111


Sunday, June 29, 2014

सहायता


   जब चिली में एक गहरी खदान में 33 खनिक धरती की सतह के बहुत नीचे हुए हादसे में फंस गए, तब मेरे विचार से उन्हें लगा होगा कि अब उनके लिए बस एक धीमी और दर्दनाक मृत्यु ही बची है। फिर, यह भी सोचिए कि जब उन तक ऊपर सतह से सन्देश पहुँचा कि उनकी स्थिति का पता लोगों को है और एक बचाव दल उनको बाहर निकालने के लिए दिन-रात कार्यरत है तो उन्हें कितनी खुशी हुई होगी।

   हम सबके जीवन में कभी ना कभी ऐसा समय आता है जब हमें लगता है कि हम एक बहुत बुरी परिस्थिति या स्थान में फंस गए हैं। ऐसे में हमें लगता है कि कोई हमारी हालत को नहीं जानता या समझता, हम चिंतित और अकेला अनुभव करते हैं और हमें बाहर निकल पाने का कोई साधन या वैकलपिक मार्ग सूझ नहीं पड़ता। लेकिन ऐसे अवसरों पर भी हमें परमेश्वर पर भरोसा बनाए रखना चाहिए और आरंभिक मसीही विश्वासियों को उसके द्वारा कहे गए आश्वासन के वचनों को स्मरण रखना चाहिए। वे मसीही विश्वासी ऐसे स्थान में पंसे हुए थे जहाँ शैतान की उपस्थिति और दबदबा चारों ओर महसूस होता था; और उन्हें परमेश्वर ने आश्वस्त किया, "मैं जानता हूँ कि तू वहाँ रहता है" (प्रकाशितवाक्य 2:13)। उस प्रेमी स्वर्गीय पिता से उनकी स्थिति छिपी नहीं थी, वह उनके हालात से अनभिज्ञ नहीं था। जैसे वे अपने परमेश्वर के प्रति वफादार रहे थे, परमेश्वर भी उनकी देखभाल कर रहा था, उन्हें उस परिस्थिति से सुरक्षित निकालकर लाने में लगा था (पद 17)।

   हम मसीही विश्वसियों के लिए यह एक बड़ी सांत्वना और सामर्थ की बात है कि हमारा परमेश्वर पिता हर पल और हर क्षण यह भली-भाँति जानता है कि हम कहाँ हैं और किस परिस्थिति में हैं, और उन हालात के अनुसार हमें संभाले रहने और उनसे सुरक्षित निकाल लाने के उपाय भी करता रहता है। इसलिए परिस्थिति चाहे कैसी भी क्यों ना हो, परमेश्वर मे निश्चिंत रहें क्योंकि सहायता आने को है। - जो स्टोवैल


इस पृथ्वी पर हमारी सबसे बड़ी आशा यही है कि स्वर्ग से परमेश्वर की सहायता हमारे लिए सदैव उपलब्ध है।

तौभी परमेश्वर की पड़ी नेव बनी रहती है, और उस पर यह छाप लगी है, कि प्रभु अपनों को पहिचानता है; और जो कोई प्रभु का नाम लेता है, वह अधर्म से बचा रहे। - 2 तिमुथियुस 2:19

बाइबल पाठ: प्रकाशितवाक्य 2:12-17
Revelation 2:12 और पिरगमुन की कलीसिया के दूत को यह लिख, कि, जिस के पास दोधारी और चोखी तलवार है, वह यह कहता है, कि। 
Revelation 2:13 मैं यह तो जानता हूं, कि तू वहां रहता है जहां शैतान का सिंहासन है, और मेरे नाम पर स्थिर रहता है; और मुझ पर विश्वास करने से उन दिनों में भी पीछे नहीं हटा जिन में मेरा विश्वासयोग्य साक्षी अन्‍तिपास, तुम में उस स्थान पर घात किया गया जहां शैतान रहता है। 
Revelation 2:14 पर मुझे तेरे विरुद्ध कुछ बातें कहनी हैं, क्योंकि तेरे यहां कितने तो ऐसे हैं, जो बिलाम की शिक्षा को मानते हैं, जिसने बालाक को इस्त्राएलियों के आगे ठोकर का कारण रखना सिखाया, कि वे मूरतों के बलिदान खाएं, और व्यभिचार करें। 
Revelation 2:15 वैसे ही तेरे यहां कितने तो ऐसे हैं, जो नीकुलइयों की शिक्षा को मानते हैं। 
Revelation 2:16 सो मन फिरा, नहीं तो मैं तेरे पास शीघ्र ही आकर, अपने मुख की तलवार से उन के साथ लडूंगा। 
Revelation 2:17 जिस के कान हों, वह सुन ले कि आत्मा कलीसियाओं से क्या कहता है; जो जय पाए, उसको मैं गुप्‍त मन्ना में से दूंगा, और उसे एक श्वेत पत्थर भी दूंगा; और उस पत्थर पर एक नाम लिखा हुआ होगा, जिसे उसके पाने वाले के सिवाय और कोई न जानेगा।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 106-108


Saturday, June 28, 2014

आराधना


   जेम्स फेनिमोर कूपर द्वारा लिखित उपन्यास The Last of the Mohicans में एक पात्र है डेविड गैमुट। गैमुट एक सच्चा मसीही भक्त है जिसका शौक है परमेश्वर के वचन बाइबल में भजन संहिता नामक पुस्तक में दिए गए भजनों को संगीतबद्ध करना और उन्हें गाते रहना चाहे जीवन कैसी भी परिस्थितियों से होकर क्यों ना निकल रहा हो। गैमुट का मानना है कि परमेश्वर पर हर स्थिति में भरोसा किया जा सकता है, संकट के समयों में भी और अच्छे दिनों में भी। उसके जीवन का उद्देश्य है हर समय और हर बात में परमेश्वर की आराधना करते रहना, इस सृष्टि पर परमेश्वर की सार्वभौमिकता, अधिकार और नियंत्रण के लिए उसकी महिमा एवं प्रशंसा करते रहना।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में हमें एक और डेविड, जिसे दाऊद भी कहते हैं, मिलता है। यह व्यक्ति दाऊद, उस उपन्यास के पात्र गैमुट के समान कोई काल्पनिक व्यक्ति नहीं वरन एक जीवता एवं वास्तविक मनुष्य था। दाऊद ने भी जीवन की अनेक अनिश्चितताओं को झेला था और उसे भी इन सभी परिस्थितियों के लिए परमेश्वर की आराधना-स्तुति करना अच्छा लगता था। दाऊद ने अपने गोफन के एक ही वार से पलिश्ती दैत्य गोलियत को मरते हुए देखा; राजा शाऊल को पहले अपना प्रशंसक फिर शक एवं द्वेश में आकर अपना दुश्मन होते भी देखा और शाऊल से जान बचाते रहने को उसे कई वर्ष तक एक से दूसरे स्थान भागते भी रहना पड़ा; दाऊद ने इस्त्राएल के लोगों उसकी ओर फिरकर उसे इस्त्राएल का राजा बनाते भी देखा। लेकिन इन सभी परिस्थितियों में दाऊद ने समय निकाल कर परमेश्वर की आराधना और स्तुति के लिए भजन लिखे भी और उन्हें गाया भी। दाऊद भली भांति जानता और समझता था कि हम हर परिस्थिति में परमेश्वर का धन्यवाद कर सकते हैं उसके नियंत्रण तथा देखभाल के लिए क्योंकि परमेश्वर ही सब बातों पर अधिपति है। इसीलिए अपने एक भजन में दाऊद ने लिखा, "यहोवा ने तो अपना सिंहासन स्वर्ग में स्थिर किया है, और उसका राज्य पूरी सृष्टि पर है" (भजन 103:19)।

   आज आप किस अनुभव से होकर निकल रहे हैं - किसी परीक्षा के या आशीष के? आपकी परिस्थिति कोई भी हो राजा दाऊद और डेविड गैमुट के उदाहरणों को स्मरण रखें, और हर बात के लिए परमेश्वर के धन्यवादी हों, उसकी आराधना करें, उस पर भरोसा रखें क्योंकि वह अपने बच्चों के लिए जो करेगा, भला ही करेगा। - डेनिस फिशर


हे मेरे मन, यहोवा को धन्य कह; और जो कुछ मुझ में है, वह उसके पवित्र नाम को धन्य कहे! - भजन 103:1

यह आज्ञा पहरूओं के निर्णय से, और यह बात पवित्र लोगों के वचन से निकली, कि जो जीवित हैं वे जान लें कि परमप्रधान परमेश्वर मनुष्यों के राज्य में प्रभुता करता है, और उसको जिसे चाहे उसे दे देता है, और वह छोटे से छोटे मनुष्य को भी उस पर नियुक्त कर देता है। - दानिय्येल 4:17

बाइबल पाठ: भजन 103:15-22
Psalms 103:15 मनुष्य की आयु घास के समान होती है, वह मैदान के फूल की नाईं फूलता है, 
Psalms 103:16 जो पवन लगते ही ठहर नहीं सकता, और न वह अपने स्थान में फिर मिलता है। 
Psalms 103:17 परन्तु यहोवा की करूणा उसके डरवैयों पर युग युग, और उसका धर्म उनके नाती- पोतों पर भी प्रगट होता रहता है, 
Psalms 103:18 अर्थात उन पर जो उसकी वाचा का पालन करते और उसके उपदेशों को स्मरण कर के उन पर चलते हैं।
Psalms 103:19 यहोवा ने तो अपना सिंहासन स्वर्ग में स्थिर किया है, और उसका राज्य पूरी सृष्टि पर है। 
Psalms 103:20 हे यहोवा के दूतों, तुम जो बड़े वीर हो, और उसके वचन के मानने से उसको पूरा करते हो उसको धन्य कहो! 
Psalms 103:21 हे यहोवा की सारी सेनाओं, हे उसके टहलुओं, तुम जो उसकी इच्छा पूरी करते हो, उसको धन्य कहो! 
Psalms 103:22 हे यहोवा की सारी सृष्टि, उसके राज्य के सब स्थानों में उसको धन्य कहो। हे मेरे मन, तू यहोवा को धन्य कह!

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 103-105


Friday, June 27, 2014

परवाह


   मेरी सास की मृत्यु के कई महीने बाद तक भी उनके अन्तिम दिनों में बड़े प्रेम और ध्यान से उनकी देखभाल करने वाले हस्पताल के लोगों से हमें कार्ड और पत्र आते रहे। उन कार्ड और पत्रों के द्वारा वे हमें उस दुख के समय में सांत्वना और प्रोत्साहन दे रहे थे, उस विछोह का सामना करने के मार्ग सुझा रहे थे। एक पत्र में लिखा था, "आपकी माँ के जन्मदिन की तिथि जैसे निकट आ रही है, हम भी उन्हें स्मरण कर रहे हैं और हमारी प्रार्थनाएं तथा विचार आपके एवें आपके परिवार के साथ हैं।" सहायता करने वाले ये अद्भुत लोग जानते और समझते हैं कि बिछुड़ने का दुख एक लंबी प्रक्रिया है जिसमें लगातार सहायता और सहारे की आवश्यकता होती है, इसलिए वो जो भी करते हैं उसमें गहरी सहानुभूति सम्मिलित होती है।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रेरित पौलुस ने मसीही विश्वासियों को लिखा, "तुम एक दूसरे के भार उठाओ, और इस प्रकार मसीह की व्यवस्था को पूरी करो" (गलतियों 6:2)। पाप स्वभाव के कारण शरीर के कार्य तो विनाशकारी, स्वार्थी और हानिकारक होते हैं (गलतियों 5:19-21) लेकिन प्रभु यीशु में उद्धार पाए हुए लोगों द्वारा परमेश्वर के आत्मा के अनुसार किए गए कार्य हैं: "पर आत्मा का फल प्रेम, आनन्द, मेल, धीरज, और कृपा, भलाई, विश्वास, नम्रता, और संयम हैं; ऐसे ऐसे कामों के विरोध में कोई भी व्यवस्था नहीं" (गलतियों 5:22-23)। मसीह यीशु में हमें मिलने वाली महान स्वतंत्रता एक दूसरे की परवाह और प्रेम के साथ एक दूसरे की सेवा करने की प्रेर्णा देती है।

   किसी दुख में पड़े हुए जन के लिए प्रेम और प्रोत्साहन का व्यवहार तपती झुलसाती गरमी में राहत देने वाली तथा तरोताज़ा कर देने वाली वर्षा के समान होता है। जब हम अर्थपूर्ण रीति से दूसरों की परवाह करते हैं, उनसे प्रेम का व्यवहार करते हैं तो यह उनमें नए जीवन की ताज़गी को प्रवाहित करता है, मुर्झाए हुओं को फिर से हरा-भरा करता है और हम मसीही विश्वासियों के लिए समस्त संसार के उद्धारकर्ता मसीह यीशु द्वारा दिए गए निर्देशों को पूरा करता है, मसीही चरित्र को संसार के सामने प्रकट करता है। - डेविड मैक्कैसलैंड


करुणा मसीह-समान प्रेम को कार्यकारी रूप में दिखाने का गुण है।

और उस से हमें यह आज्ञा मिली है, कि जो कोई अपने परमेश्वर से प्रेम रखता है, वह अपने भाई से भी प्रेम रखे। - 1 यूहन्ना 4:21

बाइबल पाठ: गलतियों 5:14-2
Galatians 5:14 क्योंकि सारी व्यवस्था इस एक ही बात में पूरी हो जाती है, कि तू अपने पड़ोसी से अपने समान प्रेम रख। 
Galatians 5:15 पर यदि तुम एक दूसरे को दांत से काटते और फाड़ खाते हो, तो चौकस रहो, कि एक दूसरे का सत्यानाश न कर दो।
Galatians 5:16 पर मैं कहता हूं, आत्मा के अनुसार चलो, तो तुम शरीर की लालसा किसी रीति से पूरी न करोगे। 
Galatians 5:17 क्योंकि शरीर आत्मा के विरोध में, और आत्मा शरीर के विरोध में लालसा करती है, और ये एक दूसरे के विरोधी हैं; इसलिये कि जो तुम करना चाहते हो वह न करने पाओ। 
Galatians 5:18 और यदि तुम आत्मा के चलाए चलते हो तो व्यवस्था के आधीन न रहे। 
Galatians 5:19 शरीर के काम तो प्रगट हैं, अर्थात व्यभिचार, गन्‍दे काम, लुचपन। 
Galatians 5:20 मूर्ति पूजा, टोना, बैर, झगड़ा, ईर्ष्या, क्रोध, विरोध, फूट, विधर्म। 
Galatians 5:21 डाह, मतवालापन, लीलाक्रीड़ा, और इन के जैसे और और काम हैं, इन के विषय में मैं तुम को पहिले से कह देता हूं जैसा पहिले कह भी चुका हूं, कि ऐसे ऐसे काम करने वाले परमेश्वर के राज्य के वारिस न होंगे। 
Galatians 5:22 पर आत्मा का फल प्रेम, आनन्द, मेल, धीरज, 
Galatians 5:23 और कृपा, भलाई, विश्वास, नम्रता, और संयम हैं; ऐसे ऐसे कामों के विरोध में कोई भी व्यवस्था नहीं। 
Galatians 5:24 और जो मसीह यीशु के हैं, उन्होंने शरीर को उस की लालसाओं और अभिलाषाओं समेत क्रूस पर चढ़ा दिया है।
Galatians 5:25 यदि हम आत्मा के द्वारा जीवित हैं, तो आत्मा के अनुसार चलें भी। 
Galatians 5:26 हम घमण्‍डी हो कर न एक दूसरे को छेड़ें, और न एक दूसरे से डाह करें। 
Galatians 6:1 हे भाइयों, यदि कोई मनुष्य किसी अपराध में पकड़ा भी जाए, तो तुम जो आत्मिक हो, नम्रता के साथ ऐसे को संभालो, और अपनी भी चौकसी रखो, कि तुम भी परीक्षा में न पड़ो। 
Galatians 6:2 तुम एक दूसरे के भार उठाओ, और इस प्रकार मसीह की व्यवस्था को पूरी करो।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 100-102


Thursday, June 26, 2014

प्रार्थना


   एक इतवार प्रातः की बात है, सुप्रसिद्ध मसीही प्रचारक डी. एल. मूडी कुछ बच्चों को सन्डे स्कूल ले जाने के लिए एक घर में गए। घर के अन्दर तीन व्यक्तियों ने उन्हें घेर कर एक कोने में जा खड़ा किया और उन्हें बुरी तरह से धमकाने लगे। मूडी ने उन तीनों से आग्रह किया, "क्या आप मुझे प्रार्थना करने का समय भी नहीं देंगे?" यह सुनकर उन्होंने मूडी को प्रार्थना करने का अवसर दे दिया, और मूडी उन तीनों के हित के लिए परमेश्वर से प्रार्थना करने लगे। उनके हित के लिए मूडी की प्रार्थना इतनी खराई और ईमानदारी से थी कि वे तीनों उसे सुनकर मूडी को छोड़कर वहाँ से चले गए।

   यदि मैं वहाँ मूडी के स्थान पर होता तो ना जाने क्या करती; शायद अपनी सहायता के लिए चिल्लाती, या बचकर भागने के लिए कोई पिछला दरवाज़ा अथवा खिड़की ढूँढ़ने लगती। मुझे नहीं लगता कि मैं हमारे प्रभु यीशु द्वारा अपने अनुयायियों को दिए गए निर्देश, "जो तुम्हें श्राप दें, उन को आशीष दो: जो तुम्हारा अपमान करें, उन के लिये प्रार्थना करो" (लूका 6:28) का पालन करती।

   ऐसे लोगों के हित के लिए प्रार्थना करना जो हम मसीही विश्वासियों के साथ दुर्व्यवहार करते हैं, उन्हें अपमानित करते हैं, एक तरीका है उन लोगों के साथ भलाई करने का, जैसा प्रभु यीशु ने लूका 6:27 में कहा है। प्रभु यीशु ने अपने चेलों को समझाया कि उन लोगों के साथ भलाई करने से जो हमारे साथ भलाई करते हैं मसीही विश्वासियों को कोई श्रेय नहीं मिलता, क्योंकि पापी भी तो ऐसा ही करते हैं (लूका 6:33)। लेकिन इसके विपरीत उनके लिए प्रार्थना करने, उनकी भलाई की कामना करना (रोमियों 12:14) हमें संसार से भिन्न बनाता है और परमेश्वर के व्यवहार के अनुकूल करता है क्योंकि परमेश्वर भी तो पापियों पर दया करता है, उनके लिए भलाई करता है (लूका 6:35)।

   आज यदि आप किसी विरोधी के द्वारा घेर कर एक कोने में फंसाया हुआ अनुभव करें, तो आवश्यकतानुसार अपनी सुरक्षा के मार्ग के बारे तो सोचें लेकिन साथ ही प्रभु यीशु की शिक्षानुसार उसके लिए प्रार्थना अवश्य करें (लूका 23:34) क्योंकि प्रार्थना ही आपका सर्वोत्तम बचाव है। - जैनिफर बेन्सन शुल्ट्ज़


भलाई के बदले भलाई करना मानवीय है, बुराई के बदले भलाई करना ईश्वरीय है।

अपने सताने वालों को आशीष दो; आशीष दो श्राप न दो। - रोमियों 12:14

बाइबल पाठ: लूका 6:27-36
Luke 6:27 परन्तु मैं तुम सुनने वालों से कहता हूं, कि अपने शत्रुओं से प्रेम रखो; जो तुम से बैर करें, उन का भला करो। 
Luke 6:28 जो तुम्हें श्राप दें, उन को आशीष दो: जो तुम्हारा अपमान करें, उन के लिये प्रार्थना करो। 
Luke 6:29 जो तेरे एक गाल पर थप्पड़ मारे उस की ओर दूसरा भी फेर दे; और जो तेरी दोहर छीन ले, उसको कुरता लेने से भी न रोक। 
Luke 6:30 जो कोई तुझ से मांगे, उसे दे; और जो तेरी वस्तु छीन ले, उस से न मांग। 
Luke 6:31 और जैसा तुम चाहते हो कि लोग तुम्हारे साथ करें, तुम भी उन के साथ वैसा ही करो। 
Luke 6:32 यदि तुम अपने प्रेम रखने वालों के साथ प्रेम रखो, तो तुम्हारी क्या बड़ाई? क्योंकि पापी भी अपने प्रेम रखने वालों के साथ प्रेम रखते हैं। 
Luke 6:33 और यदि तुम अपने भलाई करने वालों ही के साथ भलाई करते हो, तो तुम्हारी क्या बड़ाई? क्योंकि पापी भी ऐसा ही करते हैं। 
Luke 6:34 और यदि तुम उसे उधार दो, जिन से फिर पाने की आशा रखते हो, तो तुम्हारी क्या बड़ाई? क्योंकि पापी पापियों को उधार देते हैं, कि उतना ही फिर पाएं। 
Luke 6:35 वरन अपने शत्रुओं से प्रेम रखो, और भलाई करो: और फिर पाने की आस न रखकर उधार दो; और तुम्हारे लिये बड़ा फल होगा; और तुम परमप्रधान के सन्तान ठहरोगे, क्योंकि वह उन पर जो धन्यवाद नहीं करते और बुरों पर भी कृपालु है। 
Luke 6:36 जैसा तुम्हारा पिता दयावन्‍त है, वैसे ही तुम भी दयावन्‍त बनो।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 97-99


Wednesday, June 25, 2014

उपयोग


   जेम्स को दिल की बीमारी थी और उसकी पत्नि बेक्की उसकी देखभाल किया करती थी। लेकिन जब यह देखभाल करना बेक्की के लिए कठिन होने लगा तब उन्होंने निर्णय लिया कि वे किसी ऐसे सेवा स्थान पर भर्ती हो जाएंगे जहाँ देखभाल में उन्हें सहायता मिल सके। बेक्की ने इसके लिए अनेक सेवा स्थान देखे। हर स्थान पर जाकर उसका पहला प्रश्न होता था, "क्या वे लोग भोजन को पका कर तरल या भर्ते के समान बनाते हैं?" बेक्की को सेवा स्थान में जेम्स के लिए सही भोजन मिल पाने की चिन्ता थी क्योंकि जेम्स ठोस भोजन निगल नहीं पाता था। आम तौर से बेक्की को अपने प्रश्न के उत्तर में "नहीं" ही सुनने को मिलता था, लेकिन फिर भी वह जेम्स की देखभाल के लिए सही स्थान खोजने के अपने प्रयास में लगी रही। अन्ततः एक मसीही सेवा स्थान पर उसे उत्तर में "हाँ" सुनने को मिला।

   यद्यपि जेम्स और बेक्की मसीह यीशु में विश्वास नहीं रखते थे और इस विषय को लेकर अपने एक पड़ौसी से उनकी कई बार बहस भी हो चुकी थी, फिर भी जेम्स की देखभाल के लिए उन्होंने उस मसीही सेवा स्थान में आकर रहना स्वीकार किया क्योंकि वहाँ उन्हें जेम्स की आवश्यकता के अनुसार भोजन मिल रहा था। वहाँ रहते हुए उन्होंने वहाँ होने वाली आराधना में जाना और परमेश्वर के वचन को सुनना आरंभ किया; उन्होंने वहाँ के लोगों द्वारा हो रही उनकी अच्छी देखभाल को भी देखा, और एक दिन जेम्स ने अपना जीवन प्रभु यीशु को समर्पित कर दिया। जेम्स का मानना है कि प्रभु अपने वचन के अनुसार उसका पीछा कर रहा था (यूहन्ना 6:44), और परमेश्वर ने भोजन का उपयोग उसे उस मसीही सेवा स्थान पर लाने के लिए किया, जहाँ उसे प्रभु के लोगों की सेवा पाने और परमेश्वर का वचन सुनने का अवसर मिला और वह मसीह यीशु में सारे संसार के सभी लोगों के लिए उपलब्ध पापों की क्षमा और उद्धार का सुसमाचार सुनने पाया, समझने पाया और उसपर विश्वास करने पाया।

   मन परिवर्तन परमेश्वर का कार्य है; अपने प्रेम में होकर परमेश्वर लोगों को अपने निकट खींचता है। इसके लिए वह परिस्थितियों का, अपने वचन बाइबल का, और यहाँ तक कि तरल या भर्तेनुमा किए गए भोजन का भी उपयोग करता है। मसीही विश्वासी होने के नाते परमेश्वर के लिए अपनी गवाही को लेकर उत्साहित रहें; वह आपको, आपके व्यवहार को और आपके वचनों को उन लोगों तक मसीह यीशु में उद्धार के सुसमाचार को पहुँचाने का उपयोग करेगा जिन्हें मसीह यीशु के सुसमाचार की आवश्यकता है। - ऐनी सेटास


प्रेम वह चुंबक है जो मसीही विश्वासियों को एक दूसरे के निकट और अविश्वासियों को मसीह यीशु के निकट ले लाता है।

और मैं यदि पृथ्वी पर से ऊंचे पर चढ़ाया जाऊंगा, तो सब को अपने पास खीचूंगा। - यूहन्ना 12:32

बाइबल पाठ: यूहन्ना 6:44-51
John 6:42 और उन्होंने कहा; क्या यह यूसुफ का पुत्र यीशु नहीं, जिस के माता पिता को हम जानते हैं? तो वह क्योंकर कहता है कि मैं स्वर्ग से उतरा हूं। 
John 6:43 यीशु ने उन को उत्तर दिया, कि आपस में मत कुड़कुड़ाओ। 
John 6:44 कोई मेरे पास नहीं आ सकता, जब तक पिता, जिसने मुझे भेजा है, उसे खींच न ले; और मैं उसको अंतिम दिन फिर जिला उठाऊंगा। 
John 6:45 भविष्यद्वक्ताओं के लेखों में यह लिखा है, कि वे सब परमेश्वर की ओर से सिखाए हुए होंगे। जिस किसी ने पिता से सुना और सीखा है, वह मेरे पास आता है। 
John 6:46 यह नहीं, कि किसी ने पिता को देखा परन्तु जो परमेश्वर की ओर से है, केवल उसी ने पिता को देखा है। 
John 6:47 मैं तुम से सच सच कहता हूं, कि जो कोई विश्वास करता है, अनन्त जीवन उसी का है। 
John 6:48 जीवन की रोटी मैं हूं। 
John 6:49 तुम्हारे बाप दादों ने जंगल में मन्ना खाया और मर गए। 
John 6:50 यह वह रोटी है जो स्वर्ग से उतरती है ताकि मनुष्य उस में से खाए और न मरे। 
John 6:51 जीवन की रोटी जो स्वर्ग से उतरी मैं हूं। यदि कोई इस रोटी में से खाए, तो सर्वदा जीवित रहेगा और जो रोटी मैं जगत के जीवन के लिये दूंगा, वह मेरा मांस है।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 94-96


Tuesday, June 24, 2014

दूरी और समय


   बहुत वर्षों से मैं नेपाल में काम कर रहे एक पास्टर के साथ पत्राचार द्वारा संपर्क में हूँ। वह पास्टर अपने चर्च के सदस्यों के साथ अकसर हिमालय के दुर्गम क्षेत्रों में प्रभु यीशु में लाए गए विश्वास द्वारा मिलने वाली पापों से क्षमा एवं उद्धार का सुसमाचार प्रचार करने के लिए यात्रा करता रहता है। हाल ही में मुझे उससे एक पत्र प्राप्त हुआ, जिसमें उसने आने वाले सप्ताह में अपनी यात्रा का कार्यक्रम लिखा था और उसके लिए प्रार्थना करने को कहा था।

   उसके उस व्यस्त कार्यक्रम के अनुसार उसने उस सप्ताह में अपनी मोटरसाईकिल द्वारा 160 किलोमीटर की यात्रा का लक्ष्य रखा था जिसमें उसे अनेक स्थानों पर सुसमाचार प्रचार तथा पुस्तिकाओं का वितरण करना था। मुझे अपने मित्र द्वारा उस कठिन पहाड़ी क्षेत्र में इतनी लंबी यात्रा करने पर अचरज हुआ और मैंने उसे पत्र लिख कर उसका कुशल-मंगल तथा यात्रा का समाचार पूछा। उसका उत्तर आया, "पहाड़ों में अपने चर्च के सदस्यों के साथ पैदल यात्रा करना और उद्धार के सुसमाचार का प्रचार करना हमारे लिए एक बड़ा अद्भुत समय रहा है। क्योंकि सभी चर्च सदस्यों के पास मोटरसाईकलें नहीं थीं इसलिए हम सब ने पैदल ही यह यात्रा करने का निर्णय लिया। यह हम सबके लिए बहुत आशीषमय रहा है और अभी अनेक ऐसे स्थान हैं जहाँ जाना बाकी है।" 

   उसके इस उत्तर से मुझे दो बातें स्मरण हो आईं - पहली तो, "और यीशु सब नगरों और गांवों में फिरता रहा और उन की सभाओं में उपदेश करता, और राज्य का सुसमाचार प्रचार करता, और हर प्रकार की बीमारी और दुर्बलता को दूर करता रहा" (मत्ती 9:35); और दूसरी अपनी दशा। मुझे कितनी हिचकिचाहट होती है यदि बर्फ के समय में मुझे अकेले रह रहे किसी विधुर से मिलने जाना होता है; या सड़क के पार रह रहे किसी पड़ौसी की सहायता के लिए बाहर निकलना पड़ता है; या जब मैं किसी कार्य में व्यस्त हूँ तब कोई मित्र आकर मेरा द्वार खटखटाए तो जाकर उसके लिए द्वार खोलना पड़ता है - अर्थात उस मसीही प्रेम के अन्तर्गत जब मुझे किसी समय भी कोई दूरी तय करनी होती है।

   मेरे मित्र उस नेपाली पास्टर के लिए प्रभु यीशु का उदाहरण सर्वोपरी है। वह अपने प्रभु के समान ही परमेश्वर के राज्य के सुसमाचार के प्रचार के लिए किसी भी समय कोई भी दूरी तय करने के लिए तैयार रहता है, और प्रभु हम मसीही विश्वासियों से यही चाहता है (मत्ती 28:18-20)। - डेविड रोपर


परमेश्वर ने हमें जो दिया है, वह चाहता है कि हम उसे दूसरों के साथ बाँटें भी।

परन्तु जब पवित्र आत्मा तुम पर आएगा तब तुम सामर्थ पाओगे; और यरूशलेम और सारे यहूदिया और सामरिया में, और पृथ्वी की छोर तक मेरे गवाह होगे। - प्रेरितों 1:8

बाइबल पाठ: मत्ती 9:35-38, 28:18-20