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Tuesday, September 30, 2014

आरंभिक बिन्दु


   यदि आप हमारे घर से, जो उत्तरी अमेरिका में बॉइस, इडाहो में स्थित है, दक्षिण की ओर चलें तो कुछ दूर जाने पर आपको सड़क के पूर्व में झाड़ियों के बीच में से ऊपर उठा हुआ एक टीला दिखाई देगा जो कभी ज्वालामुखीय कार्यवाही द्वारा अस्तित्व में आया था। इस टीले की चोटी ही वह आरंभिक बिन्दु है जहाँ से इडाहो प्रांत का सर्वेक्षण हुआ था। सन 1867 में अमेरिका के प्रधान सर्वेक्षण अधिकारी, लफायेटी कार्टी ने, इडाहो प्रांत की स्थापना के चार वर्ष पश्चात, पीटर बैल को यह ज़िम्मेदारी सौंपी कि वे इस नए इलाके का सर्वेक्षण करें। पीटर बैल ने उस टीले की चोटी पर पीतल का एक स्तंभ गाड़ा और उसे अपने सर्वेक्षण का आरंभिक बिन्दु घोषित किया। पीटर बैल द्वारा किए गए उस सर्वेक्षण से इडाहो प्रांत की सीमाएं और भौगोलिक विवरण स्थापित हुआ। उस आरंभिक बिन्दु के आधार पर ही वहाँ के रिहायशी इलाकों के उत्तर या दक्षिण में होने, अथवा पर्वत श्रंखलाओं के पूर्व या पश्चिम में होने का निर्धारण होता है। ऐसे स्थिर एवं स्थाई बिन्दु ही यह निर्धारित करते हैं कि आप सदा अपने स्थिति के बारे में निश्चित रहेंगे, कभी असमंजस में नहीं रहेंगे, कभी भटकने नहीं पाएंगे।

   हम बहुत सी पुस्तकें पढ़ते हैं, लेकिन हमारे लिए परमेश्वर का वचन बाइबल ही हमारा अटल और सदा स्थिर ’आरंभिक बिन्दु’ है। प्रसिद्ध मसीही प्रचारक जौन वेस्ली बहुत पुस्तकें पढ़ते थे, लेकिन वे अपने आप को सदा ही ’एक पुस्तक का व्यक्ति’ कहते थे। किसी भी पुस्तक की तुलना संसार के इतिहास की सर्वश्रेष्ठ पुस्तक, परमेश्वर के वचन बाइबल से नहीं हो सकती, क्योंकि केवल बाइबल ही है जो परमेश्वर की प्रेरणा से लिखी गई है। बाइबल 66 छोटी-बड़ी पुस्तकों का संग्रह है जो अलग अलग लोगों द्वारा अलग अलग समय में अलग अलग स्थानों एवं भाषाओं में लगभग 1500 वर्ष के अन्तराल में लिखी गईं, और कोई भी लेखक यह नहीं जानता था कि अन्ततः उसकी लिखी पुस्तक एक व्यापक संग्रह का भाग होगी। जब इन सब पुस्तकों को संग्रहित करके एक पुस्तक का रूप दिया गया तो इनमें कोई भी परस्पर विरोधाभास नहीं मिला, वरन वे विभिन्न पुस्तकें एक दूसरे की ऐसी पूरक हो गईं मानों एक ही लेखक ने उन्हें लिखा हो - जो सच भी है, क्योंकि लेखनी चाहे मनुष्य की थी किन्तु विचार तो परमेश्वर के ही थे।

   बाइबल की एक और अद्भुत बात है कि वह प्रत्येक विश्वास करने वाले से बात करती है, उसकी शिक्षाएं एवं घटनाएं प्रत्येक विश्वासी को हर परिस्थिति में ऐसी प्रतीत होती हैं मानों वे उस परिस्थिति में उसी के लिए ही लिखी गई हों; इसीलिए बाइबल को परमेश्वर का जीवता वचन भी कहा जाता है। बाइबल की आरंभिक पुस्तक लगभग 1500 ईसवीं पूर्व अर्थात आज से लगभग 3500 वर्ष पहले लिखी गई, लेकिन बाइबल की हर शिक्षा, उसकी सभी बातें सभी विश्वास करने वालों के लिए ताज़ा और समकालीन ही रही हैं। परमेश्वर ने अपना यह वचन हम सब की भलाई के लिए उपलब्ध करवाया है, और वह चाहता है कि सभी उसके इस वचन पर विश्वास करें, उस पर अधारित जीवन व्यतीत करें जिससे वे कभी किसी गलत मार्ग पर ना चलें।

   जब हम बाइबल को जीवन की हर बात तथा परिस्थिति के लिए अपना आरंभिक बिन्दु तथा मार्गदर्शक बना लेते हैं, तो हम कभी भी गलत नहीं हो सकते क्योंकि बाइबल में होकर परमेश्वर हमारी अगुवाई करता है। जो बाइबल से प्रेम करते हैं, उस पर विश्वास करते हैं वे सभी भजनकार के साथ कह सकते हैं: "तेरे वचन मुझ को कैसे मीठे लगते हैं, वे मेरे मुंह में मधु से भी मीठे हैं" (भजन 119:103)। - डेविड रोपर


बाइबल एक कुतुबनुमा है जो आपको सदा ही सही दिशा दिखाता है, सही मार्ग पर चलाता है।

उसने उत्तर दिया; कि लिखा है कि मनुष्य केवल रोटी ही से नहीं, परन्तु हर एक वचन से जो परमेश्वर के मुख से निकलता है जीवित रहेगा। - मत्ती 4:4

बाइबल पाठ: भजन 119:97-104
Psalms 119:97 अहा! मैं तेरी व्यवस्था में कैसी प्रीति रखता हूं! दिन भर मेरा ध्यान उसी पर लगा रहता है। 
Psalms 119:98 तू अपनी आज्ञाओं के द्वारा मुझे अपने शत्रुओं से अधिक बुद्धिमान करता है, क्योंकि वे सदा मेरे मन में रहती हैं। 
Psalms 119:99 मैं अपने सब शिक्षकों से भी अधिक समझ रखता हूं, क्योंकि मेरा ध्यान तेरी चितौनियों पर लगा है। 
Psalms 119:100 मैं पुरनियों से भी समझदार हूं, क्योंकि मैं तेरे उपदेशों को पकड़े हुए हूं। 
Psalms 119:101 मैं ने अपने पांवों को हर एक बुरे रास्ते से रोक रखा है, जिस से मैं तेरे वचन के अनुसार चलूं। 
Psalms 119:102 मैं तेरे नियमों से नहीं हटा, क्योंकि तू ही ने मुझे शिक्षा दी है। 
Psalms 119:103 तेरे वचन मुझ को कैसे मीठे लगते हैं, वे मेरे मुंह में मधु से भी मीठे हैं! 
Psalms 119:104 तेरे उपदेशों के कारण मैं समझदार हो जाता हूं, इसलिये मैं सब मिथ्या मार्गों से बैर रखता हूं।

एक साल में बाइबल: 
  • अमोस 7-9


Monday, September 29, 2014

सच्चाई और निश्चयता


   एक दिन मैंने कहीं जाने के लिए टैक्सी करी। जब मैं टैक्सी के अन्दर जा कर बैठा तो मैंने पाया कि अन्दर एक ’न्यू ऐज’ (नए युग) गुरू के कई विज्ञापन लगे हुए हैं। टैक्सी चालक से इस बारे में बात करने पर उस चालक ने बताया कि उसका मानना है कि परमेश्वर ने हर समय और काल में अनेक दिव्य व्यक्तित्वों को गुरू बनाकर भेजा ताकि वे लोगों की आत्मिक अगुवाई करें और वह गुरु हमारे समय के लिए भेजा गया दिव्य व्यक्तित्व था। उस टैक्सी चालक के अनुसार यीशु मसीह भी अपने समय के लिए भेजे गए दिव्य व्यक्तित्व थे। मैंने उस टक्सी चालक से अपनी असहमति व्यक्त करते हुए उसे प्रभु यीशु द्वारा कही गई बात बताई: "...मार्ग और सच्चाई और जीवन मैं ही हूं; बिना मेरे द्वारा कोई पिता के पास नहीं पहुंच सकता" (यूहन्ना 14:6)।

   उस टैक्सी चालक तथा उसके समान विश्वास रखने वाले लोगों की धारणा के विपरीत, प्रभु यीशु दिव्य व्यक्तित्वों की किसी श्रंखला की एक कड़ी मात्र नहीं हैं वरन स्वयं उनके अपने दावे के अनुसार केवल वे ही परमेश्वर तक पहुँचने का एकमात्र मार्ग हैं; उनके बिना स्वर्ग पहुँचने का और कोई रास्ता नहीं है।

   "जीवते परमेश्वर का पुत्र" (मत्ती 16:16) होने के कारण प्रभु यीशु ने अपने आप को एकमात्र सच्चा आध्यात्मिक अगुवा केवल घोषित ही नहीं किया, वरन उस घोषणा के अनुरूप जीवन जी कर भी दिखाया। उनके जन्म से लेकर आज तक, 2000 वर्ष के लंबे अन्तराल में कोई भी जन उनके जीवन में किसी भी प्रकार का कोई पाप या दुराचार दिखा अथवा प्रमाणित नहीं कर सका है। प्रभु यीशु का परिपेक्ष किसी धर्म, जाति, काल या भौगोलिक इलाके तक ही सीमित नहीं था; वे समस्त संसार के हर जन के लिए, वो चाहे किसी भी समय-काल-स्थान का रहने वाला हो, आए थे। प्रभु यीशु ने समस्त संसार के सभी लोगों के उद्धार के लिए प्रभावी अपने जीवन के बलिदान (इब्रानियों 10:12) तथा फिर मृतकों में से अपने पुनरुत्थान के द्वारा अपने एकमात्र सच्चा आध्यात्मिक अगुवा होने के दावे को भी प्रमाणित कर के दिखाया है।

   प्रभु यीशु ने कहा, "मेरी ही प्रतीति करो, कि मैं पिता में हूं; और पिता मुझ में है; नहीं तो कामों ही के कारण मेरी प्रतीति करो" (यूहन्ना 14:11)। जितनी अधिक प्रभु यीशु के जीवन पर खोज हुई है उतनी संसार के किसी अन्य जन पर कभी नहीं हुई, और हर खोज ने प्रभु यीशु तथा उनसे संबंधित परमेश्वर के वचन बाइबल के सभी दावों को सदा सच ही प्रमाणित किया है। इसलिए समस्त मानव जाति को पाप क्षमा तथा उद्धार पाने के लिए किसी अन्य गुरू या मार्ग की आवश्यकता नहीं है - प्रभु यीशु में यह सभी के लिए सेंत-मेंत और सहज रीति से साधारण विश्वास द्वारा उपलब्ध है।

   प्रभु यीशु के बारे में सीखिए और उसे अपना गुरू तथा मार्गदर्शक ग्रहण कर लिजिए; आत्मिक सच्चाई और निश्चयता केवल वह ही प्रदान कर सकता है। - जेनिफर बेन्सन शुल्ट


आत्मिक छलिए केवल भटका सकते हैं; केवल प्रभु यीशु ही है जो परमेश्वर से आपका मेल करवा सकता है, आपको स्वर्ग ले जा सकता है।

उसने उन से कहा; परन्तु तुम मुझे क्या कहते हो? शमौन पतरस ने उत्तर दिया, कि तू जीवते परमेश्वर का पुत्र मसीह है। - मत्ती 16:15-16

बाइबल पाठ: यूहन्ना 14:1-11
John 14:1 तुम्हारा मन व्याकुल न हो, तुम परमेश्वर पर विश्वास रखते हो मुझ पर भी विश्वास रखो। 
John 14:2 मेरे पिता के घर में बहुत से रहने के स्थान हैं, यदि न होते, तो मैं तुम से कह देता क्योंकि मैं तुम्हारे लिये जगह तैयार करने जाता हूं। 
John 14:3 और यदि मैं जा कर तुम्हारे लिये जगह तैयार करूं, तो फिर आकर तुम्हें अपने यहां ले जाऊंगा, कि जहां मैं रहूं वहां तुम भी रहो। 
John 14:4 और जहां मैं जाता हूं तुम वहां का मार्ग जानते हो। 
John 14:5 थोमा ने उस से कहा, हे प्रभु, हम नहीं जानते कि तू कहां जाता है तो मार्ग कैसे जानें? 
John 14:6 यीशु ने उस से कहा, मार्ग और सच्चाई और जीवन मैं ही हूं; बिना मेरे द्वारा कोई पिता के पास नहीं पहुंच सकता। 
John 14:7 यदि तुम ने मुझे जाना होता, तो मेरे पिता को भी जानते, और अब उसे जानते हो, और उसे देखा भी है। 
John 14:8 फिलेप्पुस ने उस से कहा, हे प्रभु, पिता को हमें दिखा दे: यही हमारे लिये बहुत है। 
John 14:9 यीशु ने उस से कहा; हे फिलेप्पुस, मैं इतने दिन से तुम्हारे साथ हूं, और क्या तू मुझे नहीं जानता? जिसने मुझे देखा है उसने पिता को देखा है: तू क्यों कहता है कि पिता को हमें दिखा। 
John 14:10 क्या तू प्रतीति नहीं करता, कि मैं पिता में हूं, और पिता मुझ में हैं? ये बातें जो मैं तुम से कहता हूं, अपनी ओर से नहीं कहता, परन्तु पिता मुझ में रहकर अपने काम करता है। 
John 14:11 मेरी ही प्रतीति करो, कि मैं पिता में हूं; और पिता मुझ में है; नहीं तो कामों ही के कारण मेरी प्रतीति करो।

एक साल में बाइबल: 
  • अमोस 4-6


Sunday, September 28, 2014

अज्ञात


   बहुतेरे लंडनवासियों के लिए 1666 वह वर्ष था जब प्रभु यीशु मसीह का पुनरागमन हो जाएगा। भविष्यवाणी करने वाले उत्साही लोगों ने परमेश्वर के वचन बाइबल में मसीह विरोधी के अंक 666 को मसीह यीशु के जन्मोप्रांत 1000 वर्ष पूरे होने को मिलाकर यह संख्या पाई थी। प्रभु यीशु ने भी अपने दूसरे आगमन के चिन्हों में कहा था कि संसार में भयानक परिस्थितियाँ और विपित्तियाँ होंगी (मत्ती 24:1-8), और उन लंडनवासियों को लग रहा था कि यही हो रहा है क्योंकि सन 1665 में प्लेग द्वारा 100,000 लोगों की मृत्यु होकर चुकी थी और फिर सितंबर 1666 में लंडन में लगी भयानक आग ने दसियों हज़ार मकान जला कर ध्वस्त कर दिए थे। लेकिन सन 1666 भी आकर चला गया और जीवन वैसे ही चलता रहा जैसे पहले चलता था।

   आज हमारे समयों में भी ऐसे अनेक लोग हैं जिन्होंने प्रभु यीशु के दूसरे आगमन और जगत के अन्त की तिथि की भविष्यवाणी करी है। ऐसी भविष्यवाणियाँ होती हैं, मीडिया उसके बारे में बहुत कुछ बताता है, उस से संबंधित संसार में होने वाले उन्माद को दिखाता है, वह तारीख आकर चली जाती है और जीवन वैसा ही चलता रहता है जैसे वह चल रहा था।

   परमेश्वर की योजना में प्रभु यीशु के पुनरागमन के समय को हम से छिपा कर ही रखा गया है। इस संबंध में स्वयं प्रभु यीशु ने कहा, "उस दिन और उस घड़ी के विषय में कोई नहीं जानता, न स्वर्ग के दूत, और न पुत्र, परन्तु केवल पिता" (मत्ती 24:36)। प्रभु यीशु के कभी भी आ जाने की अनिश्चितता हम मसिही विश्वासियों को अपनी आत्मिक उन्नति तथा मसीही सेवकाई के लिए सदा तत्पर एवं तैयार बनाए रखती है, अन्यथा लोग सदा ही नहीं वरन उस निर्धारित तिथि के आस-पास ही इस कार्य को पूरा करते (मत्ती 25:1-13; 1 यूहन्ना 3:2-3)।

   आश्वस्त रहें कि प्रभु यीशु का पुनरागमन होगा अवश्य, लेकिन कब, यह ना तो कोई जानता है और ना ही बता सकता है। हमारा कर्त्वय है कि जब तक हमारा प्रभु अपने समय में हमें लेने पुनः ना आ जाए तब तक हम उसके कार्य में पूरी लगन के साथ लगे रहें और अपने जीवनों को इस संसार की नश्वर लालसाओं में रत नहीं वरन पवित्र चाल-चलन तथा भक्ति के साथ व्यतीत होने वाला बनाए रखें (2 पतरस 3:11)। - डैनिस फिशर


प्रभु यीशु के पुनरागमन के सिद्धांत के जितना व्यावाहरिक मसीही जीवन से जुड़ा और कोई सिद्धांत नहीं है।

तो जब कि ये सब वस्तुएं, इस रीति से पिघलने वाली हैं, तो तुम्हें पवित्र चाल चलन और भक्ति में कैसे मनुष्य होना चाहिए। - 2 पतरस 3:11

बाइबल पाठ: मत्ती 24:1-8
Matthew 24:1 जब यीशु मन्दिर से निकलकर जा रहा था, तो उसके चेले उसको मन्दिर की रचना दिखाने के लिये उस के पास आए। 
Matthew 24:2 उसने उन से कहा, क्या तुम यह सब नहीं देखते? मैं तुम से सच कहता हूं, यहां पत्थर पर पत्थर भी न छूटेगा, जो ढाया न जाएगा। 
Matthew 24:3 और जब वह जैतून पहाड़ पर बैठा था, तो चेलों ने अलग उसके पास आकर कहा, हम से कह कि ये बातें कब होंगी और तेरे आने का, और जगत के अन्‍त का क्या चिन्ह होगा? 
Matthew 24:4 यीशु ने उन को उत्तर दिया, सावधान रहो! कोई तुम्हें न भरमाने पाए। 
Matthew 24:5 क्योंकि बहुत से ऐसे होंगे जो मेरे नाम से आकर कहेंगे, कि मैं मसीह हूं: और बहुतों को भरमाएंगे। 
Matthew 24:6 तुम लड़ाइयों और लड़ाइयों की चर्चा सुनोगे; देखो घबरा न जाना क्योंकि इन का होना अवश्य है, परन्तु उस समय अन्‍त न होगा। 
Matthew 24:7 क्योंकि जाति पर जाति, और राज्य पर राज्य चढ़ाई करेगा, और जगह जगह अकाल पड़ेंगे, और भुईंडोल होंगे। 
Matthew 24:8 ये सब बातें पीड़ाओं का आरम्भ होंगी।

एक साल में बाइबल: 
  • अमोस 1-3


Saturday, September 27, 2014

अन्तिम छोर


   मौस्को बाइबल इन्स्टीट्यूट में रूसी पास्टरों को पढ़ाने का वह मेरा पहला दिन था। सबके बारे में जानकारी लेने के लिए मैंने आग्रह किया कि सभी जन अपने नाम और उस स्थान के बारे में बताएं जहाँ वे कार्यरत थे। सबने बारी बारी से अपने बारे में बताना आरंभ किया; परन्तु एक पास्टर के विवरण को सुनकर मैं कुछ देर के लिए अवाक रह गया। उस पास्टर ने बड़ी दिलेरी से कहना आरंभ किया, "इन सभी उपस्थित पास्टारों में से एक मैं ही हूँ जो प्रभु यीशु द्वारा अपने चेलों को दी गई महान आज्ञा का सबसे विश्वासपूर्ण रीति से पालन करता हूँ!" मुझे स्तब्ध सा देख कर वह मुस्कुराया, और आगे कहना आरंभ किया, "प्रभु यीशु की महान आज्ञा है कि हम उसमें होकर समस्त संसार के सभी लोगों को मिलने वाले महान उद्धार के बारे में बताएं और इस कार्य की पूर्ति के लिए पृथ्वी के अन्तिम छोर तक जाएं। मैं जिस स्थान पर कार्य करता हूँ वह उत्तरी ध्रुव पर स्थित है, उसका नाम है यमाल जिसका अर्थ है पृथ्वी का छोर!" उसकी बात सुनकर हम सब हँस पड़े और एक दूसरे की जानकारी लेने के लिए हमारी बातचीत का सिलसिला आगे बढ़ गया।

   परिचय देने के लिए प्रयुक्त उस पास्टर के, जो यमाल, अर्थात पृथ्वी के अन्तिम छोर क्षेत्र में कार्य करता है, वे शब्द बहुत महत्वपूर्ण हैं। प्रभु यीशु ने अपने स्वर्गारोहण के समय अपने चेलों को जो अन्तिम बात कही थी, "...तुम सामर्थ पाओगे; और यरूशलेम और सारे यहूदिया और सामरिया में, और पृथ्वी की छोर तक मेरे गवाह होगे" (प्रेरितों 1:8) वह हम सभी मसीही विश्वासियों के लिए आज भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। संसार के हर भाग में उद्धार के इस सुसमाचार का सन्देश जाना अनिवार्य है, चाहे वह क्षेत्र कितना ही सुदूर क्यों ना हो, क्योंकि प्रभु यीशु ने संसार के हर एक जन के उद्धार के लिए अपने प्राण बलिदान किए हैं।

   हम में से प्रत्येक मसीही विश्वासी के पास यह अवसर है कि हम प्रभु यीशु में विश्वास और पाप क्षमा द्वारा मिलने वाले उद्धार के सुसमाचार को अपने आस-पास के लोगों तक पहुँचाएं। आप चाहे कहीं भी रहते हों, आपके लिए वही स्थान अन्तिम छोर हो सकता है, वहीं कही कोई ऐसा व्यक्ति विद्यमान हो सकता है जिसे प्रभु यीशु की आवश्यकता है। - बिल क्राउडर


कोई भी स्थान मसीह यीशु की गवाही देने के लिए उचित स्थान हो सकता है।

और राज्य का यह सुसमाचार सारे जगत में प्रचार किया जाएगा, कि सब जातियों पर गवाही हो, तब अन्‍त आ जाएगा। - मत्ती 24:14 

बाइबल पाठ: प्रेरितों 1:1-8
Acts 1:1 हे थियुफिलुस, मैं ने पहिली पुस्तिका उन सब बातों के विषय में लिखी, जो यीशु ने आरम्