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Wednesday, December 31, 2014

विचार


   आज, इस वर्ष के अन्तिम दिन में, जब हम आने वाले नव वर्ष की ओर नई योजनाओं और निर्णयों के साथ देखते हैं, तो बीते समय के परमेश्वर भक्त लोगों की आवाज़ें हमें उस बात के बारे में भी विचार करने के लिए कहती हैं जिसे हम नज़रन्दाज़ करके रखना चाहते हैं - हमारी मृत्यु!

   थोमस केम्पिस (1379-1471) ने लिखा, "वह आनन्द से है जो अपनी मृत्यु की घड़ी को सदा अपने सम्मुख रखता है और प्रतिदिन अपने आप को उस घड़ी के लिए तैयार बनाए रखता है"। फ्रांसिओ फेनलॉन (1651-1715) ने लिखा, "जो लोग मृत्यु के बारे में विचार करना नहीं चाहते और एक अवश्यंभावी बात को नज़रन्दाज़ करके रखना चाहते हैं - एक ऐसी बात जिसके बारे में अकसर विचार करने से हम आनन्दित ही हो सकते हैं, उनके अन्धेपन की हर भर्त्सना कम ही होगी। मृत्यु का विचार केवल सांसारिक परिपेक्ष रखने वाले लोगों को ही परेशान कर सकता है"। ये लोग मृत्यु के विषय एक निराशाजनक मानसिकता में विचाराधीन रहने के बात नहीं कर रहे थे; जीवन के प्रति उनका नज़रिया सकारात्माक तथा गतिशील था और वे भरपूरी का जीवन जीने वाले लोग थे।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में दाऊद के द्वारा अपने एक भजन में कही बात के अनुरूप हमें भी परमेश्वर से प्रार्थना करनी चाहिए; दाऊद ने परमेश्वर से प्रार्थना करी: "हे यहोवा ऐसा कर कि मेरा अन्त मुझे मालुम हो जाए, और यह भी कि मेरी आयु के दिन कितने हैं; जिस से मैं जान लूं कि कैसा अनित्य हूं! देख, तू ने मेरे आयु बालिश्त भर की रखी है, और मेरी अवस्था तेरी दृष्टि में कुछ है ही नहीं। सचमुच सब मनुष्य कैसे ही स्थिर क्यों न हों तौभी व्यर्थ ठहरे हैं" (भजन 39:4-5)। इस भजन में दाऊद आगे उन लोगों के लिए भी लिखता है जो व्यर्थ ही परिश्रम करते रहते हैं, संपदा एकत्रित करते रहते हैं और यह नहीं जानते कि उनके बाद कौन उसका अधिकारी होगा (पद 6)। उसका निषकर्ष था कि परमेश्वर ही है जिसमें विश्वास और आशा बनाए रखने से वह आत्मिक विद्रोह और विनाश से बचा रह सकता है (पद 7-8)।

   इस वर्ष का अन्त और नए वर्ष की आशा एक उपयुक्त समय है इस पृथ्वी पर अपने जीवन की संक्षिप्तता और परमेश्वर पर अपनी आशा और विश्वास पर विचार करने का - और यह निर्णय करने का ये विचार हमारे साथ प्रतिदिन बने रहेंगे। - डेविड मैक्कैसलैंड


मृत्यु की अवश्यंभाविता पर विचार करते रहना जीवन के प्रति सकारात्मक और गतिशील रवैया बनाए रखता है।

हम को अपने दिन गिनने की समझ दे कि हम बुद्धिमान हो जाएं। - भजन 90:12

बाइबल पाठ: भजन 39
Psalms 39:1 मैं ने कहा, मैं अपनी चाल चलन में चौकसी करूंगा, ताकि मेरी जीभ से पाप न हो; जब तक दुष्ट मेरे साम्हने है, तब तक मैं लगाम लगाए अपना मुंह बन्द किए रहूंगा। 
Psalms 39:2 मैं मौन धारण कर गूंगा बन गया, और भलाई की ओर से भी चुप्पी साधे रहा; और मेरी पीड़ा बढ़ गई, 
Psalms 39:3 मेरा हृदय अन्दर ही अन्दर जल रहा था। सोचते सोचते आग भड़क उठी; तब मैं अपनी जीभ से बोल उठा; 
Psalms 39:4 हे यहोवा ऐसा कर कि मेरा अन्त मुझे मालुम हो जाए, और यह भी कि मेरी आयु के दिन कितने हैं; जिस से मैं जान लूं कि कैसा अनित्य हूं! 
Psalms 39:5 देख, तू ने मेरे आयु बालिश्त भर की रखी है, और मेरी अवस्था तेरी दृष्टि में कुछ है ही नहीं। सचमुच सब मनुष्य कैसे ही स्थिर क्यों न हों तौभी व्यर्थ ठहरे हैं। 
Psalms 39:6 सचमुच मनुष्य छाया सा चलता फिरता है; सचमुच वे व्यर्थ घबराते हैं; वह धन का संचय तो करता है परन्तु नहीं जानता कि उसे कौन लेगा! 
Psalms 39:7 और अब हे प्रभु, मैं किस बात की बाट जोहूं? मेरी आशा तो तेरी ओर लगी है। 
Psalms 39:8 मुझे मेरे सब अपराधों के बन्धन से छुड़ा ले। मूढ़ मेरी निन्दा न करने पाए। 
Psalms 39:9 मैं गूंगा बन गया और मुंह न खोला; क्योंकि यह काम तू ही ने किया है। 
Psalms 39:10 तू ने जो विपत्ति मुझ पर डाली है उसे मुझ से दूर कर दे, क्योंकि मैं तो तरे हाथ की मार से भस्म हुआ जाता हूं। 
Psalms 39:11 जब तू मनुष्य को अधर्म के कारण डाँट डपटकर ताड़ना देता है; तब तू उसकी सुन्दरता को पतंगे की नाईं नाश करता है; सचमुच सब मनुष्य व्यर्थ अभिमान करते हैं।
Psalms 39:12 हे यहोवा, मेरी प्रार्थना सुन, और मेरी दोहाई पर कान लगा; मेरा रोना सुनकर शांत न रह! क्योंकि मैं तेरे संग एक परदेशी यात्री की नाईं रहता हूं, और अपने सब पुरखाओं के समान परदेशी हूं। 
Psalms 39:13 आह! इस से पहिले कि मैं यहां से चला जाऊं और न रह जाऊं, मुझे बचा ले जिस से मैं प्रदीप्त जीवन प्राप्त करूं!

एक साल में बाइबल: 
  • प्रकाशितवाक्य 19-22

आप सभी के लिए आता नव-वर्ष आशीष पूर्ण एवं मंगलमय हो

Tuesday, December 30, 2014

चिरस्थायी


   हॉबी लॉबी स्टोर्स को स्थापित करने वाले परिवार के सभी सदस्य नया जन्म पाए हुए मसीही विश्वासी हैं। उनका अध्यक्ष, स्टीव ग्रीन परमेश्वर के वचन बाइबल के बारे में बहुत जोशीला है और वह एक ऐसा संग्रहालय बनाना चाहता है जहाँ सारे संसार से लाई गई बाइबल संबंधी दुर्लभ पुस्तकें और पाण्डुलिपियाँ प्रदर्शित हो सकें। स्टीव का कहना है कि, "हम सभी लोगों में बाइबल की बातों को जानने और सीखने के बारे में रुचि जगाना चाहते हैं। बाइबल की बातों को संसार के सामने रखना इस संग्रहालय का उद्देश्य होगा। जितना प्रेम बाइबल से, या फिर जितना विरोध बाइबल का हुआ है, सारे संसार की किसी भी अन्य पुस्तक का कभी नहीं हुआ। इसकी विलक्षण बातों को संसार के सामने रखा जाना ही चाहिए।"

   समय के साथ बाइबल को मिटा देने के अनेक प्रयास हुए होते रहे हैं, किंतु वह आज भी सारे संसार में सबसे अधिक छपने और खरीदे जाने वाली पुस्तक है, संसार की लगभग प्रत्येक भाषा में बाइबल का या उसके एक भाग का अनुवाद हो चुका है और उसे किसी ना किसी माध्यम से प्रकाशित किया जा चुका है - संसार के इतिहास में किसी भी अन्य पुस्तक को यह उपलब्धी नहीं है; और वह संग्रहालय बाइबल की इस कहानी को दिखाएगा। बाइबल के नए नियम खण्ड की पुस्तकों की आज जो प्रतिलिपियाँ हमारे पास उपलब्ध हैं वे लगभग उस समय की हैं जब उन में लिखी घटनाओं के प्रत्यक्षदर्शी विद्यमान थे - संसार की किसी भी अन्य पुस्तक की, उस में लिखी घटनओं के समय जितनी प्राचीन और इतनी मात्रा में उपलब्ध प्रतिलिपियाँ कहीं भी नहीं हैं। बाइबल की इन प्राचीन पुस्तकों में प्रभु यीशु के बारे में दिए गए विवरण, युनानी दार्शनिक सुकरात अथवा रोमी सम्राट कैसर के बारे में उपलब्ध विवरणों से अधिक विश्वासयोग्य हैं, स्त्यापनीय हैं।

   बाइबल के विषय यह सब कोई अचरज की बात नहीं है क्योंकि परमेश्वर स्वयं बाइबल का लिखवाने वाला और उसे लोगों तथा परिस्थितियों में सुरक्षित रखकर आज तक उसे उपलब्ध करवाते रहने वाला रहा है। इसीलिए यशायाह की पुस्तक में लिखा है, "घास तो सूख जाती, और फूल मुर्झा जाता है; परन्तु हमारे परमेश्वर का वचन सदैव अटल रहेगा" (यशायाह 40:8)।

   जब भी आप बाइबल को एक खुले और पक्षपात रहित मन से पढ़ते हैं, उसका सन्देश आपको परमेश्वर के निकट आने और फिर बाइबल के सन्देश को दूसरों के साथ बाँटने को प्रेरित करता है; क्योंकि बाइबल ही समस्त मानव जाति के लिए परमेश्वर का एकमात्र एवं चिरस्थायी सन्देश है। - डेनिस फिशर


सारे संसार के समस्त साहित्य में बाइबल के तुल्य और कुछ नहीं है।

मैं तेरे पवित्र मन्दिर की ओर दण्डवत करूँगा, और तेरी करुणा और सच्चाई के कारण तेरे नाम का धन्यवाद करूँगा, क्योंकि तू ने अपने वचन को अपने बड़े नाम से अधिक महत्त्व दिया है। - भजन 138:2

बाइबल पाठ: यशायाह 40:1-8
Isaiah 40:1 तुम्हारा परमेश्वर यह कहता है, मेरी प्रजा को शान्ति दो, शान्ति! 
Isaiah 40:2 यरूशलेम से शान्ति की बातें कहो; और उस से पुकार कर कहो कि तेरी कठिन सेवा पूरी हुई है, तेरे अधर्म का दण्ड अंगीकार किया गया है: यहोवा के हाथ से तू अपने सब पापों का दूना दण्ड पा चुका है।
Isaiah 40:3 किसी की पुकार सुनाई देती है, जंगल में यहोवा का मार्ग सुधारो, हमारे परमेश्वर के लिये अराबा में एक राजमार्ग चौरस करो। 
Isaiah 40:4 हर एक तराई भर दी जाए और हर एक पहाड़ और पहाड़ी गिरा दी जाए; जो टेढ़ा है वह सीधा और जो ऊंचा नीचा है वह चौरस किया जाए। 
Isaiah 40:5 तब यहोवा का तेज प्रगट होगा और सब प्राणी उसको एक संग देखेंगे; क्योंकि यहोवा ने आप ही ऐसा कहा है।
Isaiah 40:6 बोलने वाले का वचन सुनाई दिया, प्रचार कर! मैं ने कहा, मैं क्या प्रचार करूं? सब प्राणी घास हैं, उनकी शोभा मैदान के फूल के समान है। 
Isaiah 40:7 जब यहोवा की सांस उस पर चलती है, तब घास सूख जाती है, और फूल मुर्झा जाता है; नि:सन्देह प्रजा घास है। 
Isaiah 40:8 घास तो सूख जाती, और फूल मुर्झा जाता है; परन्तु हमारे परमेश्वर का वचन सदैव अटल रहेगा।

एक साल में बाइबल: 
  • प्रकाशितवाक्य 16-18


Monday, December 29, 2014

सीमाएं


   मैं इतने वर्षों से लोगों के मध्य कार्य कर रहा हूँ लेकिन आज तक मैं किसी ऐसे व्यक्ति से नहीं मिला हूँ जिसका जीवन परमेश्वर की आज्ञाकारिता के कारण अव्यवस्थित या परेशानियों से भरा हुआ हो। लेकिन आज के इस समय में जब व्यक्तिगत स्वतंत्रता एक अटल, अपरिवर्तनीय अधिकार के रूप में देखी जाती है, परमेश्वर के नियमों के अनुसार जीवन संचालित करने की बात करना उस व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर हमला करने के समान देखा जाता है। जो कोई परमेश्वर की सीमाओं के पक्ष में बोलता है उसे लोग अपने जीवन की सीमाओं से बाहर रखना चाहते हैं। लेकिन व्यक्तिगत स्वतंत्रता के इस उन्माद में हमें इस बात को नज़रन्दाज़ नहीं करना चाहिए कि हमारा समाज जीवन की व्यर्थता और निराशा की बढ़ती हुई भावना से भी ग्रसित होता जा रहा है।

   लेकिन परमेश्वर के लोगों का परमेश्वर की सीमाओं के प्रति एक अलग नज़रिया होना चाहिए। परमेश्वर के वचन बाइबल के भजनकार के समान हमें यह मानकर चलना चाहिए कि आशीषित जीवन परमेश्वर के नियमों में आनन्दित रहने से ही होता है, ना कि उनके साथ रहने, खड़े होने, चलने से जो परमेश्वर के विरुद्ध रहते हैं (भजन 1:1-2)। प्रभु यीशु मसीह का प्रत्येक विश्वासी यह समझ लेगा कि परमेश्वर के नियम हमारे जीवन से आनन्द चुरा लेने के लिए नहीं वरन जीवन को आनन्द से भर देने के लिए हैं। वे नियम परमेश्वर की बुद्धिमता द्वारा लगाए गए बाड़े हैं जो हमें लापरवाही के जीवन द्वारा आने वाले छल और परेशानियों से बचा कर रखते हैं।

   इसलिए अगली बार जब आपके सामने परमेश्वर की सीमाओं को लाँघने का प्रलोभन आए, तो ऐसा करने से पहले उन सीमाओं के अन्दर आपको रखने के पीछे परमेश्वर के प्रेम भरे उद्देश्य पर थोड़ा विचार अवश्य कर लीजिएगा। सीमाओं के लिए कुड़कुड़ाएं नहीं वरन उनके लिए, उनके कारण जीवन में मिलने वाली आशीषों के लिए परमेश्वर का धन्यवाद करें। - जो स्टोवैल


परमेश्वर की सीमाएं आपको उसकी आशीषों के दायरे में बनाए रखती हैं।

क्या ही धन्य हैं वे जो चाल के खरे हैं, और यहोवा की व्यवस्था पर चलते हैं! क्या ही धन्य हैं वे जो उसकी चितौनियों को मानते हैं, और पूर्ण मन से उसके पास आते हैं! - भजन 119:1-2

बाइबल पाठ: भजन 1
Psalms 1:1 क्या ही धन्य है वह पुरूष जो दुष्टों की युक्ति पर नहीं चलता, और न पापियों के मार्ग में खड़ा होता; और न ठट्ठा करने वालों की मण्डली में बैठता है! 
Psalms 1:2 परन्तु वह तो यहोवा की व्यवस्था से प्रसन्न रहता; और उसकी व्यवस्था पर रात दिन ध्यान करता रहता है। 
Psalms 1:3 वह उस वृक्ष के समान है, जो बहती नालियों के किनारे लगाया गया है। और अपनी ऋतु में फलता है, और जिसके पत्ते कभी मुरझाते नहीं। इसलिये जो कुछ वह पुरूष करे वह सफल होता है।
Psalms 1:4 दुष्ट लोग ऐसे नहीं होते, वे उस भूसी के समान होते हैं, जो पवन से उड़ाई जाती है। 
Psalms 1:5 इस कारण दुष्ट लोग अदालत में स्थिर न रह सकेंगे, और न पापी धर्मियों की मण्डली में ठहरेंगे; 
Psalms 1:6 क्योंकि यहोवा धर्मियों का मार्ग जानता है, परन्तु दुष्टों का मार्ग नाश हो जाएगा।

एक साल में बाइबल: 
  • प्रकाशितवाक्य 13-15


Sunday, December 28, 2014

भला और बुरा


   आग जलाते समय कभी-कभी हवा तेज़ होती है और मुझे आग जलाने नहीं देती; कभी जब आग जल रही होती है और मध्यम पड़ने लगती है तो हवा के झोंके उसे तेज़ कर देने में सहायक हो जाते हैं। वही हवा एक परिस्थिति में तो मेरे लिए बुरी और दूसरी में मेरे लिए अच्छी हो जाती है! जहाँ वह मेरी योजना और कार्य में बाधा बनती है मैं उसे बुरा मान लेता हूँ, और जहाँ वह मेरी सहायक हो जाती है, मैं उसे अच्छा मान लेता हूँ। हवा तो वही है, फर्क केवल मेरे परिपेक्ष और आँकलन का है।

   यह एक उदाहरण है उस विरोधाभास का जिसके अन्तर्गत हम परिस्थितियों अथवा लोगों के विषय में निर्णय लेते हैं या राय व्यक्त करते हैं। यदि वे हमारी योजनाओं और कार्यविधियों में सहायक होते हैं तो अच्छे हैं, यदि बाधा बनते हैं या सहायक नहीं होते तो बुरे हैं।

   लेकिन भले और बुरे की सही पहचान हमें परमेश्वर से मिलती है, जिसके मानक सदा सिद्ध और पक्षपात रहित होते हैं, जो समय, परिस्थितियों, लोगों और आवश्यकताओं के अनुसार बदलते नहीं हैं। उसकी नज़र में भला या बुरा वह नहीं है जो हम मनुष्यों की योजना और सोच के अनुसार भला या बुरा है; वरन भला या बुरा वह है जो उसके स्थापित मानकों के अनुसार भला या बुरा है, जो उसकी योजनाओं की पूर्ति में सहायक या बाधक है। हम मसीही विश्वासियों के लिए परमेश्वर की योजना है कि हम "...एक चुना हुआ वंश, और राज-पदधारी याजकों का समाज, और पवित्र लोग, और (परमेश्वर की) निज प्रजा हो, इसलिये कि जिसने तुम्हें अन्धकार में से अपनी अद्भुत ज्योति में बुलाया है, उसके गुण प्रगट करो" (1 पतरस 2:9)।

   परमेश्वर की इस योजना की पूर्ति के लिए हमें सब लोगों को आदर देना है, सभी मसीही विश्वासियों से प्रेम रखना है, परमेश्वर के भय और भक्ति में जीवन व्यतीत करना है और अपने ऊपर अधिकार रखने वालों का सम्मान करना है चाहे वे हमारे मन के अनुरूप हों अथवा नहीं (पद 17-18)। हमारे इस व्यवहार को देख कर उन अविश्वासियों में विश्वास की चिंगारी जगने की संभावना बन जाएगी जो बुरी परिस्थितियों में भी हमारे भले व्यवहार को देखेंगे; और हमारा ऐसा व्यवहार परमेश्वर की महिमा और गौरव का कारण ठहरेगा। - जूली ऐकैरमैन लिंक


जब परिस्थितियाँ बुरी प्रतीत हों तो स्मरण रखिए कि परमेश्वर सदैव भला रहता है।

जो मन के टेढ़े है, उन से यहोवा को घृणा आती है, परन्तु वह खरी चाल वालों से प्रसन्न रहता है। - नीतिवचन 11:20

बाइबल पाठ: 1 पतरस 2:9-25
1 Peter 2:9 पर तुम एक चुना हुआ वंश, और राज-पदधारी याजकों का समाज, और पवित्र लोग, और (परमेश्वर की) निज प्रजा हो, इसलिये कि जिसने तुम्हें अन्धकार में से अपनी अद्भुत ज्योति में बुलाया है, उसके गुण प्रगट करो। 
1 Peter 2:10 तुम पहिले तो कुछ भी नहीं थे, पर अब परमेश्वर ही प्रजा हो: तुम पर दया नहीं हुई थी पर अब तुम पर दया हुई है।
1 Peter 2:11 हे प्रियों मैं तुम से बिनती करता हूं, कि तुम अपने आप को परदेशी और यात्री जान कर उस सांसारिक अभिलाषाओं से जो आत्मा से युद्ध करती हैं, बचे रहो। 
1 Peter 2:12 अन्यजातियों में तुम्हारा चालचलन भला हो; इसलिये कि जिन जिन बातों में वे तुम्हें कुकर्मी जान कर बदनाम करते हैं, वे तुम्हारे भले कामों को देख कर; उन्‍हीं के कारण कृपा दृष्टि के दिन परमेश्वर की महिमा करें।
1 Peter 2:13 प्रभु के लिये मनुष्यों के ठहराए हुए हर एक प्रबन्‍ध के आधीन में रहो, राजा के इसलिये कि वह सब पर प्रधान है। 
1 Peter 2:14 और हाकिमों के, क्योंकि वे कुकिर्मयों को दण्‍ड देने और सुकिर्मयों की प्रशंसा के लिये उसके भेजे हुए हैं। 
1 Peter 2:15 क्योंकि परमेश्वर की इच्छा यह है, कि तुम भले काम करने से निर्बुद्धि लोगों की अज्ञानता की बातों को बन्‍द कर दो। 
1 Peter 2:16 और अपने आप को स्‍वतंत्र जानो पर अपनी इस स्‍वतंत्रता को बुराई के लिये आड़ न बनाओ, परन्तु अपने आप को परमेश्वर के दास समझ कर चलो। 
1 Peter 2:17 सब का आदर करो, भाइयों से प्रेम रखो, परमेश्वर से डरो, राजा का सम्मान करो।
1 Peter 2:18 हे सेवकों, हर प्रकार के भय के साथ अपने स्‍वामियों के आधीन रहो, न केवल भलों और नम्रों के, पर कुटिलों के भी। 
1 Peter 2:19 क्योंकि यदि कोई परमेश्वर का विचार कर के अन्याय से दुख उठाता हुआ क्‍लेश सहता है, तो यह सुहावना है। 
1 Peter 2:20 क्योंकि यदि तुम ने अपराध कर के घूंसे खाए और धीरज धरा, तो उस में क्या बड़ाई की बात है? पर यदि भला काम कर के दुख उठाते हो और धीरज धरते हो, तो यह परमेश्वर को भाता है। 
1 Peter 2:21 और तुम इसी के लिये बुलाए भी गए हो क्योंकि मसीह भी तुम्हारे लिये दुख उठा कर, तुम्हें एक आदर्श दे गया है, कि तुम भी उसके चिन्ह पर चलो। 
1 Peter 2:22 न तो उसने पाप किया, और न उसके मुंह से छल की कोई बात निकली। 
1 Peter 2:23 वह गाली सुन कर गाली नहीं देता था, और दुख उठा कर किसी को भी धमकी नहीं देता था, पर अपने आप को सच्चे न्यायी के हाथ में सौपता था। 
1 Peter 2:24 वह आप ही हमारे पापों को अपनी देह पर लिये हुए क्रूस पर चढ़ गया जिस से हम पापों के लिये मर कर के धामिर्कता के लिये जीवन बिताएं: उसी के मार खाने से तुम चंगे हुए। 
1 Peter 2:25 क्योंकि तुम पहिले भटकी हुई भेड़ों की नाईं थे, पर अब अपने प्राणों के रखवाले और अध्यक्ष के पास फिर आ गए हो।

एक साल में बाइबल: 
  • प्रकाशितवाक्य 9-12


Saturday, December 27, 2014

विजयी रणनीति


   जिन दिनों मैं हाई-स्कूल में बास्केट-बॉल प्रशिक्षक का कार्य किया करता था, मैंने एक बार एक बड़ी गलती कर दी - एक मैच से पहले मैंने अपने प्रतिद्वंदियों के बारे में जानकारी लेने के लिए अपने कुछ खिलाड़ियों को भेज दिया। उन्होंने आकर हमें बताया कि हम उस प्रतिद्वंदी टीम को आसानी से हरा सकते हैं। उनकी इस सूचना से हम अपनी क्षमता और तैयारी के प्रति अतिआश्वस्त हो गए, अपनी तैयारी में ढीले पड़ गए और हम वह मैच हार गए। अपनी क्षमता पर आवश्यकता से अधिक विश्वास रखना और प्रतिद्वंदी को अपने से कमज़ोर समझना अकसर हार के कारण होते हैं - सांसारिक जीवन में भी और आत्मिक जीवन में भी, जिसके लिए शैतान हमें अनेकों तरीकों से गिराने, फंसाने के प्रयास करता रहता है।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में ऐसी ही एक घटना का उल्लेख है जिससे हम इस बारे में शिक्षा ले सकते हैं - ऐ के युद्ध में इस्त्राएल की पराजय। कनान की भूमि में प्रवेश के पश्चात इस्त्राएलियों का पहला युद्ध यरीहो के निवासियों से हुआ, जिन्हें इस्त्राएलियों ने बड़ी सरलता से हरा दिया। अगला युद्ध ऐ से था, और इस्त्रएली गुप्तचरों ने समाचार दिया कि यरीहो के मुकाबले ऐ एक छोटा सा स्थान है, जिसे हराना कठिन नहीं होगा। गुप्तचरों के समाचार के अनुसार इस्त्राएलियों की एक छोटी सेना ने ऐ पर धावा बोला, परन्तु विजय के स्थान पर उन्हें पराजय मिली और उनके 36 सैनिक भी मारे गए। ऐ की इस पराजय में केवल गुप्तचरों से मिले आँकलन का दोष नहीं था, कुछ अन्य महत्वपूर्ण बातें भी थीं जिनसे हम आज भी अपने जीवन के लिए शिक्षा ले सकते हैं।

   ऐ से पहले यरीहो पर मिली विजय इसलिए संभव हुई थी क्योंकि इस्त्राएल के सेनानायक यहोशु को उस युद्ध के लिए परमेश्वर की योजना का पता था; लेकिन ऐ के युद्ध से पहले कहीं ऐसा वर्णन नहीं है कि यहोशु ने परमेश्वर से इस के बारे में कुछ पूछा या जाना हो; उसने केवल मनुष्यों से मिली सूचना और आँकलन पर ही विश्वास किया और उसके अनुसार योजना बनाई तथा कार्य किया। यरीहो के युद्ध से पहले इस्त्राएल के लोगों ने अपने आप को परमेश्वर के वचन के अनुसार तैयार किया था, उसकी आज्ञाकारिता में रही कमी की पूर्ति करी थी (यहोशू 5:2-8) लेकिन ऐ के युद्ध से पहले कहीं यह देखने को नहीं मिलता कि उन्होंने अपने आप को परमेश्वर के सम्मुख जाँचा हो, उसे अपना समर्पण किया हो, आत्मिक रीति से तैयार हुए हों। ऐ की पराजय का कारण इस्त्राएल की छावनी में छुपा पाप था - एक इस्त्राएली सैनिक, आकान ने यरीहो की लूट में से अर्पण की हुई वस्तुओं में से चुरा कर अपने डेरे में उसे छुपा लिया था (यहोशू 7:1)। जब तक वह पाप उनके मध्य था, इसत्राएली विजयी नहीं हो सकते थे; उस पाप का प्रगट किया जाना, उसके दोष से मुक्त होना और पुनः अपने आप को परमेश्वर के प्रति समर्पित करना आवश्यक था (यहोशू 7:16-26)। जब इस्त्राएलियों ने ऐसा किया, तत्पश्चात ही परमेश्वर ने उन्हें ऐ पर विजयी होने की रणनीति बताई (यहोशू 8:1-7)।

   प्रतिदिन के जीवन में हमें अपने कार्यों तथा ज़िम्मेदारियों में अनेकों निर्णय लेने की ’युद्धस्थितियों’ से होकर निकलना पड़ता है और कई बार निराशाओं तथा अनापेक्षित परिणामों का सामना भी करना पड़ता है। परमेश्वर की आज्ञाकारिता, उसके प्रति समर्पण तथा उसके सम्मुख पापों का अंगीकार एवं उनके लिए उससे क्षमा प्रार्थना ही हमें दैनिक जीवन के लिए परमेश्वर से मिलने वाली विजयी रणनीति प्रदान करवाती रहेंगी। - डेव ब्रैनन


मन की पवित्रता जीवन में सामर्थ्य प्रदान करवाती है।

सुनो, यहोवा का हाथ ऐसा छोटा नहीं हो गया कि उद्धार न कर सके, न वह ऐसा बहिरा हो गया है कि सुन न सके; परन्तु तुम्हारे अधर्म के कामों ने तुम को तुम्हारे परमेश्वर से अलग कर दिया है, और तुम्हारे पापों के कारण उस का मुँह तुम से ऐसा छिपा है कि वह नहीं सुनता। - यशायाह 59:1-2

बाइबल पाठ: यहोशू 7:1-13
Joshua 7:1 परन्तु इस्राएलियों ने अर्पण की वस्तु के विषय में विश्वासघात किया; अर्थात यहूदा के गोत्र का आकान, जो जेरहवंशी जब्दी का पोता और कर्म्मी का पुत्र था, उसने अर्पण की वस्तुओं में से कुछ ले लिया; इस कारण यहोवा का कोप इस्राएलियों पर भड़क उठा।
Joshua 7:2 और यहोशू ने यरीहो से ऐ नाम नगर के पास, जो बेतावेन से लगा हुआ बेतेल की पूर्व की ओर है, कितने पुरूषों को यह कहकर भेजा, कि जा कर देश का भेद ले आओ। और उन पुरूषों ने जा कर ऐ का भेद लिया।
Joshua 7:3 और उन्होंने यहोशू के पास लौटकर कहा, सब लोग वहां न जाएं, कोई दो वा तीन हजार पुरूष जा कर ऐ को जीत सकते हैं; सब लोगों को वहां जाने का कष्ट न दे, क्योंकि वे लोग थोड़े ही हैं। 
Joshua 7:4 इसलिये कोई तीन हजार पुरूष वहां गए; परन्तु ऐ के रहने वालों के साम्हने से भाग आए, 
Joshua 7:5 तब ऐ के रहने वालों ने उन में से कोई छत्तीस पुरूष मार डाले, और अपने फाटक से शबारीम तक उनका पीछा कर के उतराई में उन को मारते गए। तब लोगों का मन पिघलकर जल सा बन गया। 
Joshua 7:6 तब यहोशू ने अपने वस्त्र फाड़े, और वह और इस्राएली वृद्ध लोग यहोवा के सन्दूक के साम्हने मुंह के बल गिरकर पृथ्वी पर सांझ तक पड़े रहे; और उन्होंने अपने अपने सिर पर धूल डाली। 
Joshua 7:7 और यहोशू ने कहा, हाय, प्रभु यहोवा, तू अपनी इस प्रजा को यरदन पार क्यों ले आया? क्या हमें एमोरियों के वश में कर के नष्ट करने के लिये ले आया है? भला होता कि हम संतोष कर के यरदन के उस पार रह जाते। 
Joshua 7:8 हाय, प्रभु मैं क्या कहूं, जब इस्राएलियों ने अपने शत्रुओं को पीठ दिखाई है! 
Joshua 7:9 क्योंकि कनानी वरन इस देश के सब निवासी यह सुनकर हम को घेर लेंगे, और हमारा नाम पृथ्वी पर से मिटा डालेंगे; फिर तू अपने बड़े नाम के लिये क्या करेगा? 
Joshua 7:10 यहोवा ने यहोशू से कहा, उठ, खड़ा हो जा, तू क्यों इस भांति मुंह के बल पृथ्वी पर पड़ा है? 
Joshua 7:11 इस्राएलियों ने पाप किया है; और जो वाचा मैं ने उन से अपने साथ बन्धाई थी उसको उन्होंने तोड़ दिया है, उन्होंने अर्पण की वस्तुओं में से ले लिया, वरन चोरी भी की, और छल कर के उसको अपने सामान में रख लिया है। 
Joshua 7:12 इस कारण इस्राएली अपने शत्रुओं के साम्हने खड़े नहीं रह सकते; वे अपने शत्रुओं को पीठ दिखाते हैं, इसलिये कि वे आप अर्पण की वस्तु बन गए हैं। और यदि तुम अपने मध्य में से अर्पण की वस्तु को सत्यानाश न कर डालोगे, तो मैं आगे को तुम्हारे संग नहीं रहूंगा। 
Joshua 7:13 उठ, प्रजा के लोगों को पवित्र कर, उन से कह; कि बिहान तक अपने अपने को पवित्र कर रखो; क्योंकि इस्राएल का परमेश्वर यहोवा यह कहता है, कि हे इस्राएल, तेरे मध्य में अर्पण की वस्तु है; इसलिये जब तक तू अर्पण की वस्तु को अपने मध्य में से दूर न करे तब तक तू अपने शत्रुओं के साम्हने खड़ा न रह सकेगा।

एक साल में बाइबल: 
  • प्रकाशितवाक्य 4-8


Friday, December 26, 2014

स्वच्छ


   आजकल आप जहाँ भी जाएं, आपको अपने हाथों को स्वच्छ रखने तथा अपने आस-पास सफाई बनाए रखने के निर्देश दिखाई देंगे। स्वास्थ्य अधिकारी हमें निरन्तर स्मरण दिलाते रहते हैं कि रोग फैलाने वाले जीवाणुओं से बचे रहने का सबसे उत्तम उपाय है स्वच्छता - अपनी तथा अपने आस-पास की। इसीलिए सार्वजनिक स्थानों पर, जहाँ गन्दगी में जीवाणुओं के पनपने का और लोगों में एक से दूसरे तक जीवाणुओं के फैलने का अवसर सबसे अधिक होता है इस स्वच्छता को बनाए रखने के निर्देश सबसे अधिक मिलते हैं।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में भी हमें ना केवल शारीरिक वरन आत्मिक स्वच्छता के विषय में शिक्षाएं मिलती हैं। दाऊद ने अपने लिखे एक भजन में परमेश्वर की उपस्थिति में आने के लिए आत्मिक स्वच्छता के बारे कहा: "यहोवा के पर्वत पर कौन चढ़ सकता है? और उसके पवित्र स्थान में कौन खड़ा हो सकता है? जिसके काम निर्दोष और हृदय शुद्ध है, जिसने अपने मन को व्यर्थ बात की ओर नहीं लगाया, और न कपट से शपथ खाई है" (भजन 24:3-4)। दाऊद यहाँ मन की अर्थात आत्मिक स्वच्छता की बात कर रहा है; एक ऐसे जीवन की जो परमेश्वर के भय और भक्ति में वह करने के लिए समर्पित है जो परमेश्वर को पसन्द है। ऐसा जीवन ही सच्ची आराधना के लिए परमेश्वर के सम्मुख खड़े रहने पाएगा।

   क्योंकि हम मसीही विश्वासियों में प्रभु का पवित्र आत्मा निवास करता है, इसलिए वह हमें कायल भी करता है कि हम एक स्वच्छ मन-मस्तिष्क रखने वाला जीवन व्यतीत करें, जहाँ से निकलने वाली सच्ची आराधना परमेश्वर को भावती तथा ग्रहणयोग्य हो। - बिल क्राउडर


सच्ची आराधना का उदगम प्रभु यीशु द्वारा स्वच्छ किए गए मन से होता है।

इसलिये हे भाइयों, मैं तुम से परमेश्वर की दया स्मरण दिला कर बिनती करता हूं, कि अपने शरीरों को जीवित, और पवित्र, और परमेश्वर को भावता हुआ बलिदान कर के चढ़ाओ: यही तुम्हारी आत्मिक सेवा है। और इस संसार के सदृश न बनो; परन्तु तुम्हारी बुद्धि के नये हो जाने से तुम्हारा चाल-चलन भी बदलता जाए, जिस से तुम परमेश्वर की भली, और भावती, और सिद्ध इच्छा अनुभव से मालूम करते रहो। - रोमियों 12:1-2

बाइबल पाठ: भजन 24
Psalms 24:1 पृथ्वी और जो कुछ उस में है यहोवा ही का है; जगत और उस में निवास करने वाले भी। 
Psalms 24:2 क्योंकि उसी ने उसकी नींव समुद्रों के ऊपर दृढ़ कर के रखी, और महानदों के ऊपर स्थिर किया है।
Psalms 24:3 यहोवा के पर्वत पर कौन चढ़ सकता ह