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Sunday, February 9, 2014

मृत्यु में महिमा


   हम जब जवान और बलवन्त होते हैं तब अकसर यह तो सोचते हैं कि किस प्रकार अपने जीवन से परमेश्वर की महिमा करें, लेकिन क्या हमें यह भी नहीं सोचना चाहिए कि हम अपनी मृत्यु के द्वारा भी परमेश्वर की महिमा करने पाएं?

   पतरस ने तीन बार प्रभु यीशु का इन्कार करा (युहन्ना 18:15-27) लेकिन फिर भी प्रभु यीशु ने उसे अवसर दिया कि वह प्रभु के प्रति अपने प्रेम को बता सके (युहन्ना 21:15-17); तीन बार प्रभु यीशु ने पतरस से पूछा, "क्या तू मुझ से प्रेम करता है?" और फिर तुरंत अनापेक्षित रीति से विषय बदलते हुए प्रभु यीशु ने पतरस से कहा, "मैं तुझ से सच सच कहता हूं, जब तू जवान था, तो अपनी कमर बान्‍धकर जहां चाहता था, वहां फिरता था; परन्तु जब तू बूढ़ा होगा, तो अपने हाथ लम्बे करेगा, और दूसरा तेरी कमर बान्‍धकर जहां तू न चाहेगा वहां तुझे ले जाएगा। उसने इन बातों से पता दिया कि पतरस कैसी मृत्यु से परमेश्वर की महिमा करेगा; और यह कहकर, उस से कहा, मेरे पीछे हो ले" (युहन्ना 21:18-19)। प्रभु यीशु ने पतरस से स्पष्ट कह दिया कि उसके जीवन में वह समय आएगा जब लोग उसे जबरन वहाँ ले जाएंगे जहाँ वह जाना नहीं चाहता, लेकिन मृत्यु की उस अनचाही रीति से भी वह परमेश्वर की महिमा करेगा।

   प्रेरित पौलुस ने भी कहा, "मैं तो यही हादिर्क लालसा और आशा रखता हूं, कि मैं किसी बात में लज्ज़ित न होऊं, पर जैसे मेरे प्रबल साहस के कारण मसीह की बड़ाई मेरी देह के द्वारा सदा होती रही है, वैसा ही अब भी हो चाहे मैं जीवित रहूं या मर जाऊं" (फिलिप्पियों 1:20)। मसीही मण्डली तथा मसीही विश्वासियों के इतिहास को यदि हम देखें तो ना केवल उस आरंभिक मण्डली के सदस्यों को, वरन प्रत्येक काल और स्थान पर मसीह के विश्वासियों को हमेशा ही सताव, क्लेष और संकट से होकर गुज़रना पड़ा है और बहुतों ने अपने विश्वास के लिए प्राण बलिदान करके अपने विश्वास की सार्थकता प्रमाणित करी है, प्रभु के नाम को महिमा दी है।

   यह सौभाग्य केवल हम मसीही विश्वासियों ही को है कि हम ना केवल जीते जी अपने जीवनों से अपने और समस्त संसार के उद्धारकर्ता प्रभु यीशु की महिमा करें, वरन अपनी मृत्यु के द्वारा भी अपने प्रभु को महिमा दे सकें। प्रार्थना में प्रभु से माँगिए कि ना केवल अपने जीवन से वरन अपनी मृत्यु से भी आप प्रभु यीशु की महिमा करने पाएं। - डेविड मैक्कैसलैंड


आप परमेश्वर की अनूठी और अनुपम रचना हैं; अपने जीवन और अपनी मृत्यु, दोनो ही से, जो महिमा आप परमेश्वर को दे सकते हैं, वह कोई और नहीं दे सकता।

तब उन्होंने उस की बात मान ली; और प्रेरितों को बुलाकर पिटवाया; और यह आज्ञा देकर छोड़ दिया, कि यीशु के नाम से फिर बातें न करना। वे इस बात से आनन्‍दित हो कर महासभा के साम्हने से चले गए, कि हम उसके नाम के लिये निरादर होने के योग्य तो ठहरे। - प्रेरितों 5:40-41

बाइबल पाठ: युहन्ना 21:12-19
John 21:12 यीशु ने उन से कहा, कि आओ, भोजन करो और चेलों में से किसी को हियाव न हुआ, कि उस से पूछे, कि तू कौन है? क्योंकि वे जानते थे, कि हो न हो यह प्रभु ही है। 
John 21:13 यीशु आया, और रोटी ले कर उन्हें दी, और वैसे ही मछली भी। 
John 21:14 यह तीसरी बार है, कि यीशु ने मरे हुओं में से जी उठने के बाद चेलों को दर्शन दिए।
John 21:15 भोजन करने के बाद यीशु ने शमौन पतरस से कहा, हे शमौन, यूहन्ना के पुत्र, क्या तू इन से बढ़कर मुझ से प्रेम रखता है? उसने उस से कहा, हां प्रभु तू तो जानता है, कि मैं तुझ से प्रीति रखता हूं: उसने उस से कहा, मेरे मेमनों को चरा। 
John 21:16 उसने फिर दूसरी बार उस से कहा, हे शमौन यूहन्ना के पुत्र, क्या तू मुझ से प्रेम रखता है? उसने उन से कहा, हां, प्रभु तू जानता है, कि मैं तुझ से प्रीति रखता हूं: उसने उस से कहा, मेरी भेड़ों की रखवाली कर। 
John 21:17 उसने तीसरी बार उस से कहा, हे शमौन, यूहन्ना के पुत्र, क्या तू मुझ से प्रीति रखता है? पतरस उदास हुआ, कि उसने उसे तीसरी बार ऐसा कहा; कि क्या तू मुझ से प्रीति रखता है? और उस से कहा, हे प्रभु, तू तो सब कुछ जानता है: तू यह जानता है कि मैं तुझ से प्रीति रखता हूं: यीशु ने उस से कहा, मेरी भेड़ों को चरा। 
John 21:18 मैं तुझ से सच सच कहता हूं, जब तू जवान था, तो अपनी कमर बान्‍धकर जहां चाहता था, वहां फिरता था; परन्तु जब तू बूढ़ा होगा, तो अपने हाथ लम्बे करेगा, और दूसरा तेरी कमर बान्‍धकर जहां तू न चाहेगा वहां तुझे ले जाएगा। 
John 21:19 उसने इन बातों से पता दिया कि पतरस कैसी मृत्यु से परमेश्वर की महिमा करेगा; और यह कहकर, उस से कहा, मेरे पीछे हो ले।

एक साल में बाइबल: 
  • गिनती 15-17