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Sunday, February 16, 2014

स्थिर और सामर्थी


   क्योंकि मैंने बहुत से लेख और एक पुस्तक जीवन में होने वाली दुर्घटनाओं और उनके नुकसान विषय पर लिखी है इसलिए मेरा परिचय कई ऐसे लोगों के साथ हो गया है जिन्हें अपनी जीवन यात्रा में नुकसानों को झेलना पड़ा है या झेल रहे हैं। ऐसी ही मेरी एक नई परिचित है एक महिला जिसकी 21 वर्षीय पुत्री की आकस्मक मृत्यु हो गई जिससे उसके पैरों तले मानों ज़मीन ही खिसक गई। उस महिला ने मुझ से कहा, "इस दुर्घटना के कारण मुझे ऐसा प्रतीत हुआ जैसे मैं सामन्य जीवन से निशकासित कर दी गई हूँ, कुचल दी गई हूँ; मेरी आत्मा में अत्यन्त वेदना है"।

   यह सच है कि हमारे जीवन में आने वाले ये नुकसान - किसी प्रीय जन की मृत्यु, कोई बच्चा जो परिवार और परमेश्वर को छोड़ कर चला जाए, कोई शारीरिक अथवा मानसिक आघात आदि हमें बहुत आहत कर सकते हैं। लेकिन मैंने और मेरे समान अन्य मसीही विश्वासियों ने भी अपने जीवन के कटु अनुभवों से सीखा है ऐसे में भी हमारा परमेश्वर हमारे साथ ही होता है, हमारे दुख में दुखी होता है और हमें उस परिस्थिति पर जयवन्त होने की सामर्थ देता है और हमारे लिए उस से भी कुछ भला ही उत्पन्न करता है। इसलिए हम भजनकार के साथ कह सकते हैं कि, "परमेश्वर हमारा शरणस्थान और बल है, संकट में अति सहज से मिलने वाला सहायक" (भजन 46:1)।

   परमेश्वर के वचन बाइबल के नायकों के जीवन में हम इस बात को बहुधा पाते हैं। उन सभी के लिए जीवन कभी सरल नहीं था, उन्हें नाम और शौहरत आसानी से नहीं मिली; दुख, कठिनाईयाँ, विपरीत परिस्थितियाँ उनके जीवन का अभिन्न अंग रहीं लेकिन इन सब में उन्होंने परमेश्वर की निकटता को अनुभव किया और परमेश्वर की सामर्थ को प्राप्त किया जो उन्हें इन सभी परिस्थितियों से पार निकालती ले गई और अन्ततः वे इन सब अनुभवों और इन में होकर मिली आशीषों के लिए परमेश्वर का धन्यवाद करने पाए, परमेश्वर पर उन का भरोसा और दृढ़ ही हो गया।

   जब जीवन अनायास ही पैरों तले ज़मीन खिसका दे, तो ऊपर परमेश्वर की ओर देखें। वह सब देख रहा है, उसकी नज़र सब पर बनी रहती है, वह सब जानता और समझता है। यह सरल तो नहीं होगा लेकिन यह बात विश्वासयोग्य है - अपना हाथ उसकी ओर बढ़ा दीजिए, वह आपको उठाकर पुनः खड़ा करेगा, फिर स्थिर करेगा, फिर सामर्थ देगा। - डेव ब्रैनन


पृथ्वी के दुख जैसे स्वर्ग में अनुभव होते हैं उससे बढ़कर और कहीं नहीं होते।

यहोवा पिसे हुओं के लिये ऊंचा गढ़ ठहरेगा, वह संकट के समय के लिये भी ऊंचा गढ़ ठहरेगा। - भजन 9:9

बाइबल पाठ: भजन 116:1-6
Psalms 116:1 मैं प्रेम रखता हूं, इसलिये कि यहोवा ने मेरे गिड़गिड़ाने को सुना है। 
Psalms 116:2 उसने जो मेरी ओर कान लगाया है, इसलिये मैं जीवन भर उसको पुकारा करूंगा। 
Psalms 116:3 मृत्यु की रस्सियां मेरे चारों ओर थीं; मैं अधोलोक की सकेती में पड़ा था; मुझे संकट और शोक भोगना पड़ा। 
Psalms 116:4 तब मैं ने यहोवा से प्रार्थना की, कि हे यहोवा बिनती सुन कर मेरे प्राण को बचा ले! 
Psalms 116:5 यहोवा अनुग्रहकारी और धर्मी है; और हमारा परमेश्वर दया करने वाला है। 
Psalms 116:6 यहोवा भोलों की रक्षा करता है; जब मैं बलहीन हो गया था, उसने मेरा उद्धार किया।

एक साल में बाइबल: 
  • व्यवस्थाविवरण 1-3