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Wednesday, March 12, 2014

महानतम


   खेल-कूद में सबसे महान क्या है? क्या वह बड़ी प्रतियोगिताएं है; या स्थापित होने वाले कीर्तिमान अथवा मिलने वाला यश? पेनसिल्वेनिया विश्वविद्यालय के बास्केट्बॉल कोर्ट में लगी एक पटिया पर एक भिन्न दृष्टिकोण वाला वाक्य लिखा है: "खेल जीतना महान है। खेल को सही खेलना उससे भी महान है। किंतु खेल से प्रेम करना सबसे महान है।" यह हमें स्मरण कराता है कि खेल स्पर्धा नहीं वरन वे क्रीड़ाएं हैं जिन्हें खेल कर हम बालकपन से आनन्दित होते रहे हैं।

   एक धार्मिक अगुवे ने एक बार प्रभु यीशु से परमेश्वर के वचन के बारे में उसकी परीक्षा लेने के उद्देश्य से महानता के बारे में पूछा: "हे गुरू; व्यवस्था में कौन सी आज्ञा बड़ी है?" (मत्ती 22:36)। प्रभु यीशु ने अपने उत्तर में उसे प्रेम के विषय में चुनौति देते हुए कहा: "उसने उस से कहा, तू परमेश्वर अपने प्रभु से अपने सारे मन और अपने सारे प्राण और अपनी सारी बुद्धि के साथ प्रेम रख। बड़ी और मुख्य आज्ञा तो यही है। और उसी के समान यह दूसरी भी है, कि तू अपने पड़ोसी से अपने समान प्रेम रख" (मत्ती 22:37-39)।

   मसीह यीशु में हमारा विश्वास हमें चाहे और कुछ भी करने के लिए प्रेरित करे, लेकिन इससे बढ़कर और कुछ नहीं कि हम अपने प्रेम को प्रदर्शित करें - क्योंकि प्रेम ही हमारे स्वर्गीय परमेश्वर पिता के हृदय का प्रगटिकरण है। परमेश्वर का वचन बाइबल कहती है, "जो प्रेम नहीं रखता, वह परमेश्वर को नहीं जानता है, क्योंकि परमेश्वर प्रेम है" (1 यूहन्ना 4:8)। इससे कम महत्व की बातों के द्वारा मार्ग से भ्रमित हो जाना सरल है, इसलिए हमारा पूरा ध्यान उस महानतम बात पर लगा रहना चाहिए - प्रभु परमेश्वर से प्रेम। जब हम परमेश्वर से प्रेम रखेंगे तो परमेश्वर की सृष्टि, अर्थात एक दूसरे से भी प्रेम रखेंगे। इससे बढ़कर और कुछ भी नहीं है। - बिल क्राउडर


परमेश्वर के प्रति हमारे प्रेम का प्रमाण है परमेश्वर की आज्ञाओं के लिए हमारी आज्ञाकारिता।

क्योंकि परमेश्वर ने जगत से ऐसा प्रेम रखा कि उसने अपना एकलौता पुत्र दे दिया, ताकि जो कोई उस पर विश्वास करे, वह नाश न हो, परन्तु अनन्त जीवन पाए। - यूहन्ना 3:16

बाइबल पाठ: मत्ती 22:34-40
Matthew 22:34 जब फरीसियों ने सुना, कि उसने सदूकियों का मुंह बन्‍द कर दिया; तो वे इकट्ठे हुए। 
Matthew 22:35 और उन में से एक व्यवस्थापक ने परखने के लिये, उस से पूछा। 
Matthew 22:36 हे गुरू; व्यवस्था में कौन सी आज्ञा बड़ी है? 
Matthew 22:37 उसने उस से कहा, तू परमेश्वर अपने प्रभु से अपने सारे मन और अपने सारे प्राण और अपनी सारी बुद्धि के साथ प्रेम रख। 
Matthew 22:38 बड़ी और मुख्य आज्ञा तो यही है। 
Matthew 22:39 और उसी के समान यह दूसरी भी है, कि तू अपने पड़ोसी से अपने समान प्रेम रख। 
Matthew 22:40 ये ही दो आज्ञाएं सारी व्यवस्था और भविष्यद्वक्ताओं का आधार है।

एक साल में बाइबल: 
  • न्यायियों 19-21