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Wednesday, April 23, 2014

प्रार्थना


   मठ के रसोई घर रह कर में नम्रता और दीनता के साथ बर्तन मांझने वाले ब्रदर लौरेंस (1614-1691) अपने आप को सदा ही परमेश्वर के अति निकट पाते थे। अवश्य ही ब्रदर लौरेंस प्रार्थना के लिए कुछ विशेष समय अलग से निकलते थे, लेकिन जो उनके लिए जीवन संवारने वाला अनुभव था वह था उनका अपने कार्य करते हुए प्रार्थना के भाव में बने रहना। उनके द्वारा लिखी गई सुप्रसिद्ध और बहुचर्चित भक्ति रचना, Practicing the Presence of God में वे लिखते हैं, "यह सोचना कि हमारे प्रार्थना के समय हमारी दिनचर्या से अलग होने चाहिए एक बहुत बड़ा भ्रम है। हम बाध्य हैं कि अपने कार्य समय में भी अपने कार्य के द्वारा परमेश्वर से ऐसे ही चिपके रहें जैसे अपने प्रार्थना काल में प्रार्थना द्वारा उस से चिपक जाते हैं।" उनके कहने का तात्पर्य था कि हम "निरन्तर प्रार्थना में लगे रहें" (1 थिस्सुलुनीकियों 5:17)।

   यह स्मरण रखने और जीवन संवारने के लिए एक बहुत सहायक बात है, क्योंकि कई बार हमारी प्रवृति जीवन को खण्डों में बाँट लेने की होती है। हो सकता है कि हम केवल चर्च में उपस्थित होने पर ही प्रार्थना करते हों, या फिर अपने गुट के साथ बाइबल अध्ययन के समय में, या पारिवारिक प्रार्थना समय अथवा व्यक्तिगत प्रार्थना के लिए निकाले गए विशेष समय में ही। लेकिन हमारे प्रतिदिन के कार्य समय में प्रार्थना का क्या? कार्य समय में प्रार्थना करने का यह अर्थ नहीं है कि हम अपने कार्य को छोड़कर, हाथ जोड़कर, घुटनों पर आकर ऊँची आवाज़ में प्रार्थना करने लगें। लेकिन इसका यह तात्पर्य अवश्य है कि अपने दिन के कार्य के दौरान लिए जाने वाले प्रत्येक निर्णय, लोगों से होने वाले प्रत्येक संपर्क और बातचीत को हम मन ही मन शांत स्वभाव के साथ परमेश्वर के सम्मुख लाते रहें, उससे उस समय, निर्णय और बातचीत के लिए मार्गदर्शन पाते रहें।

   हम कहीं भी हों, कुछ भी कर रहे हों, परमेश्वर चाहता है कि हम उसे उस सब का एक भाग बनाए रखें। जब यह प्रार्थना और परमेश्वर की उपस्थिति में बने रहने का भाव हमारे कार्यों और जीवनों के प्रतिपल का अभिन्न अंग बन जाएगा, तो हमारे जीवन भी परमेश्वर की महिमा का कारण बन जाएंगे, आशीषित हो जाएंगे। - डेनिस फिशर


सच्ची प्रार्थना, जीवन जीने की एक विधि है; ना कि आपात काल में सहायता पाने के लिए लिया गया टेढ़ा-मेढ़ा मार्ग।

और हर समय और हर प्रकार से आत्मा में प्रार्थना, और बिनती करते रहो, और इसी लिये जागते रहो, कि सब पवित्र लोगों के लिये लगातार बिनती किया करो। - इफिसियों 6:18

बाइबल पाठ: 1 थिस्सुलुनीकियों 5:12-18
1 Thessalonians 5:12 और हे भाइयों, हम तुम से बिनती करते हैं, कि जो तुम में परिश्रम करते हैं, और प्रभु में तुम्हारे अगुवे हैं, और तुम्हें शिक्षा देते हैं, उन्हें मानो। 
1 Thessalonians 5:13 और उन के काम के कारण प्रेम के साथ उन को बहुत ही आदर के योग्य समझो: आपस में मेल-मिलाप से रहो। 
1 Thessalonians 5:14 और हे भाइयों, हम तुम्हें समझाते हैं, कि जो ठीक चाल नहीं चलते, उन को समझाओ, कायरों को ढाढ़स दो, निर्बलों को संभालो, सब की ओर सहनशीलता दिखाओ। 
1 Thessalonians 5:15 सावधान! कोई किसी से बुराई के बदले बुराई न करे; पर सदा भलाई करने पर तत्‍पर रहो आपस में और सब से भी भलाई ही की चेष्‍टा करो। 
1 Thessalonians 5:16 सदा आनन्‍दित रहो। 
1 Thessalonians 5:17 निरन्‍तर प्रार्थना मे लगे रहो। 
1 Thessalonians 5:18 हर बात में धन्यवाद करो: क्योंकि तुम्हारे लिये मसीह यीशु में परमेश्वर की यही इच्छा है।

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