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Monday, May 26, 2014

निर्देश


   इस्त्राएली घिर कर फंस गए थे। मिस्त्र की गुलामी से निकल कर आज़ादी से रहने के लिए कनान देश की ओर उनके चल निकलने के कुछ समय पश्चात ही उन्हें अपने पीछे एक व्याकुल कर देने वाला दृश्य दिखाई दिया। धूल का एक बादल उनके पीछे से, उनकी ओर बढ़ा आ रहा था - वह धूल का बादल मिस्त्र की विशाल सेना के कारण था जो इस्त्राएलियों का पीछा कर रही थी। मिस्त्र के राजा फिरौन ने अपना हृदय एक बार फिर कठोर कर लिया था, अब उसे इस्त्राएलियों को गुलामी से जाने देने के अपने निर्णय पर पछतावा हुआ और उसने अपनी सेना उन्हें फिर से बन्धुआ बना कर मिस्त्र वापस ले आने के लिए भेजी।

   मिस्त्री सेना के इस्त्राएली सेना के निकट आने की परिस्थिति से ऐसा लगा कि मानो अब सब कुछ नाश हो जाएगा। उस समय इस्त्राएली ऐसे स्थान पर थे जहाँ उनके आगे लाल समुद्र, दोनों ओर पहाड़ियाँ और पीछे मिस्त्री सेना थी - बच कर निकलने का कोई मार्ग सूझ नहीं पड़ रहा था, विनाश अवश्यंभावी लग रहा था। इस विकट परिस्थिति से बचने के लिए उन्होंने घबरा कर मूसा ओर परमेश्वर दोनों ही को पुकारा। मूसा और परमेश्वर दोनों ही ने उनकी पुकार के प्रत्युत्तर में उन्हें कुछ करने के निर्देश दिए। मूसा ने कहा, "...डरो मत, खड़े खड़े वह उद्धार का काम देखो..." (निर्गमन 14:13); और परमेश्वर ने कहा, "...इस्राएलियों को आज्ञा दे कि यहां से कूच करें" (निर्गमन 14:15)! अब तो उनकी समस्या और बढ़ गई - एक कह रहा था खड़े रहो, तो दूसरा कह रहा था यहाँ से कूच करो! यह विरोधाभास क्यों? इन में से कौन सा निर्देश सही था, और किस का पालन करना था?

   दोनों ही निर्देश सही थे, दोनों में परस्पर कोई विरोधाभास नहीं था, और इस्त्राएलियों को दोनों का ही पालन करना था - उसी क्रम में जिस में वे निर्देश दिए गए थे। पहला काम था व्याकुलता और छटपटाहट छोड़कर शांत तथा स्थिर खड़े होकर परमेश्वर से निर्देश लेना, ना की अपनी अधीरता में कुछ गलत कर बैठना; क्या होता यदि वे परमेश्वर के निर्देश को जाने बिना ही लाल समुद्र में छलांग लगाकर उसे अपने बूते पर पार करने का, या फिर पहाड़ियों पर चढ़कर बच निकलने का प्रयास करते - वे या तो डूब मरते या फिर फिरौन की सेना द्वारा बन्धुआ बना लिए जाते अथवा घात कर दिए जाते। लेकिन पहले शांत हो जाने, परमेश्वर पर भरोसा रखने और उससे निर्देश लेकर अगला कदम उठाने के कारण वे बच सके और फिरौन की सेना भी नाश हो गई। परमेश्वर ने इस्त्राएलियों और मूसा दोनों ही के लिए निर्देश दिए - मूसा को अपनी लाठी लाल समुद्र के ऊपर उठानी थी जिससे लाल समुद्र दो भागों में विभाजित हो गया तथा इस्त्राएलियों के लिए भूमि पर होकर जाने का मार्ग बन गया और इस्त्राएलियों को समुद्र में उनके लिए बने उस मार्ग पर चलना था, आगे बढ़ना था जिस का पालन करने से वे बिना किसी परेशानी के पार उतर सके।

   क्या आप कभी अपने आप को समस्याओं और परेशानियों से घिरा हुआ पाते हैं, जब कुछ समझ नहीं आता कि क्या करें और क्या ना करें? सबसे पहले शांत हो जाईए, परमेश्वर पर भरोसा रख कर उससे निर्देश लीजिए, फिर जो निर्देश वह आपको दे, उनका वैसा ही पालन कीजिए, उनके अनुसार आगे कदम बढ़ाईए और समस्या के पार उतर जाईए! - डेव ब्रैनन


जीवन की राह पर, हर परिस्थिति के लिए, परमेश्वर का वचन बाइबल तथा प्रभु यीशु ही सर्वोत्तम मार्गदर्शक हैं।

तेरा वचन मेरे पांव के लिये दीपक, और मेरे मार्ग के लिये उजियाला है। - भजन 119:105 

बाइबल पाठ: निर्गमन 14:5-22
Exodus 14:5 जब मिस्र के राजा को यह समाचार मिला कि वे लोग भाग गए, तब फिरौन और उसके कर्मचारियों का मन उनके विरुद्ध पलट गया, और वे कहने लगे, हम ने यह क्या किया, कि इस्राएलियों को अपनी सेवकाई से छुटकारा देकर जाने दिया? 
Exodus 14:6 तब उसने अपना रथ जुतवाया और अपनी सेना को संग लिया। 
Exodus 14:7 उसने छ: सौ अच्छे से अच्छे रथ वरन मिस्र के सब रथ लिये और उन सभों पर सरदार बैठाए। 
Exodus 14:8 और यहोवा ने मिस्र के राजा फिरौन के मन को कठोर कर दिया। सो उसने इस्राएलियों का पीछा किया; परन्तु इस्राएली तो बेखटके निकले चले जाते थे। 
Exodus 14:9 पर फिरौन के सब घोड़ों, और रथों, और सवारों समेत मि