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Thursday, October 9, 2014

दृढ़ विश्वास


   मसीही कॉलेज का वह मेरा प्रथम वर्ष था, वहाँ मेरी एक नई मित्र, मुझे अपने जीवन के बारे में बता रही थी कि कैसे उसका पति उसे छोड़ कर चल गया है और वह अकेली ही अपने दो छोटे बच्चों की परवरिश कर रही है। अपने जीवन यापन के लिए वह कार्य भी करती थी परन्तु उसका वेतन न्यूनतम वेतन से बस ज़रा सा ही अधिक था, और इतने कम वेतन पर जहाँ वह रहती थी उस मोहल्ले की गरीबी और वातावरण के खतरों से उसके परिवार का अछूते बने रहने की आशा बहुत कम ही थी।

   अपने बच्चों को लेकर उसकी चिंता ने मुझे भी द्रवित किया, क्योंकि मेरे भी अपने बच्चे थे, इसलिए उसके परिवार की दशा और बच्चों की परवरिश को लेकर मैंने उससे पूछा, "तुम यह सब कैसे करने पाती हो?" वह मेरे प्रश्न से अचंभित हुई और उत्तर दिया, "मैं जो कर सकती हूँ वह करती हूँ, और उन्हें मैंने परमेश्वर के हाथों में छोड़ रखा है।" इन कठिन परिस्थितियों में भी परमेश्वर पर उसके विश्वास ने मुझे अचंभित किया तथा अय्युब के विश्वास की याद दिलाई (अय्युब 1:6-22)।

   इस वार्तालाप के लगभग एक वर्ष बाद मुझे उसका फोन आया और उसने पूछा कि क्या मैं उसके साथ खड़े होने के लिए कब्रिस्तान पर आ सकता हूँ; सड़क पर हुई एक गोली चलाने की घटना में उसका पुत्र मारा गया था। उसके दुखी जीवन में आने वाली इस एक और दुर्घटना में उसे सान्तवना कैसे दूँ, मैं परमेश्वर से प्रार्थना करने लगा और साथ ही वे उचित शब्द भी माँगने लगा जो मैं उसके साथ बाँट सकूँ तथा यह भी कि जिस बात को समझाने की समझ मेरे पास नहीं थी उसे समझाने के मैं कोई बचकाना प्रयास वहाँ जाकर ना करने लगूँ।

   लेकिन उस दिन वहाँ उसके साथ खड़े होने पर मुझे एक बार फिर उसे लेकर अचंभा हुआ, क्योंकि वहाँ वह स्वयं आने वाले लोगों को सांत्वना दे रही थी, इस त्रासदी के बावजूद परमेश्वर पर उसका दृढ़ विश्वास अडिग बना हुआ था। जब मैं वापस जाने के लिए तैयार हुआ तो उसके मुझ से कहे हुए शब्द उसके दृढ़ विश्वास की गहराई के मार्मिक सूचक थे; उसने मुझ से कहा, "मेरा बेटा आज भी परमेश्वर के हाथों में ही है।" अय्युब के समान ही उसने "...ना तो पाप किया, और न परमेश्वर पर मूर्खता से दोष लगाया" (अय्युब 1:22)।

   यदि हम प्रतिदिन परमेश्वर के साथ समय बिताने वाले होंगे, तो हम भी परमेश्वर पर ऐसा ही दृढ़ विश्वास विकसित कर सकते हैं, जो हर परिस्थिति में हमें शान्ति, सामर्थ तथा सांत्वना देता रहता है। - रैन्डी किलगोर


जो परमेश्वर के हाथ में बने रहते हैं, उन्हें कोई हिला नहीं सकता।

धन्य है वह मनुष्य, जो परीक्षा में स्थिर रहता है; क्योंकि वह खरा निकल कर जीवन का वह मुकुट पाएगा, जिस की प्रतिज्ञा प्रभु ने अपने प्रेम करने वालों को दी है। - याकूब 1:12 

बाइबल पाठ: अय्युब 1:13-22
Job 1:13 एक दिन अय्यूब के बेटे-बेटियां बड़े भाई के घर में खाते और दाखमधु पी रहे थे; 
Job 1:14 तब एक दूत अय्यूब के पास आकर कहने लगा, हम तो बैलों से हल जोत रहे थे, और गदहियां उनके पास चर रही थी, 
Job 1:15 कि शबा के लोग धावा कर के उन को ले गए, और तलवार से तेरे सेवकों को मार डाला; और मैं ही अकेला बचकर तुझे समाचार देने को आया हूँ। 
Job 1:16 वह अभी यह कह ही रहा था कि दूसरा भी आकर कहने लगा, कि परमेश्वर की आग आकाश से गिरी और उस से भेड़-बकरियां और सेवक जलकर भस्म हो गए; और मैं ही अकेला बचकर तुझे समाचार देने को आया हूँ। 
Job 1:17 वह अभी यह कह ही रहा था, कि एक और भी आकर कहने लगा, कि कसदी लोग तीन गोल बान्धकर ऊंटों पर धावा कर के उन्हें ले गए, और तलवार से तेरे सेवकों को मार डाला; और मैं ही अकेला बचकर तुझे समाचार देने को आया हूँ। 
Job 1:18 वह अभी यह कह ही रहा था, कि एक और भी आकर कहने लगा, तेरे बेटे-बेटियां बड़े भाई के घर में खाते और दाखमधु पीते थे, 
Job 1:19 कि जंगल की ओर से बड़ी प्रचण्ड वायु चली, और घर के चारों कोनों को ऐसा झोंका मारा, कि वह जवानों पर गिर पड़ा और वे मर गए; और मैं ही अकेला बचकर तुझे समाचार देने को आया हूँ। 
Job 1:20 तब अय्यूब उठा, और बागा फाड़, सिर मुंड़ाकर भूमि पर गिरा और दण्डवत्‌ कर के कहा, 
Job 1:21 मैं अपनी मां के पेट से नंगा निकला और वहीं नंगा लौट जाऊंगा; यहोवा ने दिया और यहोवा ही ने लिया; यहोवा का नाम धन्य है। 
Job 1:22 इन सब बातों में भी अय्यूब ने न तो पाप किया, और न परमेश्वर पर मूर्खता से दोष लगाया।

एक साल में बाइबल: 
  • ज़कर्याह 3-6