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Friday, November 7, 2014

वचन


   मेरी प्यानों शिक्षिका कंठस्थ कर लेने के लिए पीछे पड़ी रहती थीं। उनके लिए यह काफी नहीं था कि मैं प्यानो संगीत का कोई एक भाग बिना गलती किए बजा लूँ; वे चाहती थीं कि मैं संगीत के अनेक भाग केवल स्मरण से बिना किसी गलती के बजाने वाली हो सकूँ। वे नहीं चाहती थीं कि उनका कोई भी शिष्य कभी यह कहने पाए कि "क्षमा कीजिए, क्योंकि मेरे पास संगीत के लिखित भाग नहीं हैं इसलिए मैं आज नहीं बजा पाऊँगी!" साथ ही वे इस बात पर भी ज़ोर देती थीं कि मैं उन स्मरण किए हुए भागों को अपने अन्दर अनुभव कर सकूँ, और वह संगीत मेरे अन्दर से हावभाव के साथ निकले ना कि मेरे मस्तिष्क से।

   बचपन में मैं ना केवल प्यानो संगीत के भाग कंठस्थ करती थी, मैं परमेश्वर के वचन बाइबल के भाग भी कंठस्थ करती थी। बचपन की मेरी सीमित समझ के कारण, मुझे लगता था कि भजन 119:11 कंठस्थ कर लेने से मैं पाप करने से बची रह सकूँगी। मैं बाइबल के पद स्मरण करने के लिए बहुत मेहनत करती थी और एक बार मैंने इससे संबंधित एक प्रतियोगिता भी जीती थी। बाइबल के पद स्मरण करना एक अच्छी आदत है लेकिन केवल याद भर कर लेने से ही हम पाप करने से बच नहीं जाते - यह मैंने उस प्रतियोगिता को जीत लेने के बाद सीखा, क्योंकि इतने पद मस्तिषक में होने के बावजूद मेरे व्यवहार में कोई परिवर्तन नहीं आया था। लेकिन उन स्मरण किए गए पदों के कारण मेरे मन में अपने पापों को लेकर दोष भावना अवश्य रहने लगी।

   अन्ततः मैंने यह जाना कि परमेश्वर के वचन का मेरे मस्तिष्क में विद्यमान होना भर ही काफी नहीं है, मुझे उस वचन को अपने व्यावाहरिक जीवन में लागू भी करना है, उसे अपने मस्तिष्क से अपने मन में भी लाना है, उसकी आज्ञाकारिता भी निभानी है; अर्थात उसका पालन भी करना है। जैसे संगीत के वे भाग जब तक मेरे अन्दर का एक हिस्सा नहीं बन जाते थे, मैं उन्हें भली-भांति नहीं बजा पाती थी, उसी प्रकार परमेश्वर के उस वचन को मेरे जीवन मेरे कारगर होने के लिए मेरे जीवन का एक व्याहारिक भाग बनना आवश्यक था। बाइबल के भागों को केवल कंठस्थ कर लेना काफी नहीं था, उनका अनुसरण भी करना था। जब मैंने यह करना आरंभ किया तो पाप की पकड़ मेरे जीवन से जाती रही और मैं उस दोष भावना से भी निकल सकी।

   परमेश्वर के वचन को केवल मस्तिष्क में ही स्थान ना दें, उसे मन में भी उतारें, अपने दैनिक व्यावाहरिक जीवन का अंग बना लें, उसकी आज्ञाकारिता में चलें और वह जीवित वचन आपके जीवन को पाप की पकड़ से स्वतंत्र कर देगा। - जूली ऐकैअरमैन लिंक


परमेश्वर के वचन को अपने मस्तिष्क में भर लें, मन में बसा लें और जीवन का मार्गदर्शन करने दें।

आदि में वचन था, और वचन परमेश्वर के साथ था, और वचन परमेश्वर था। और वचन देहधारी हुआ; और अनुग्रह और सच्चाई से परिपूर्ण हो कर हमारे बीच में डेरा किया, और हम ने उस की ऐसी महिमा देखी, जैसी पिता के एकलौते की महिमा। - यूहन्ना 1:1, 14

बाइबल पाठ: भजन 119:9-16
Psalms 119:9 जवान अपनी चाल को किस उपाय से शुद्ध रखे? तेरे वचन के अनुसार सावधान रहने से। 
Psalms 119:10 मैं पूरे मन से तेरी खोज मे लगा हूं; मुझे तेरी आज्ञाओं की बाट से भटकने न दे! 
Psalms 119:11 मैं ने तेरे वचन को अपने हृदय में रख छोड़ा है, कि तेरे विरुद्ध पाप न करूं। 
Psalms 119:12 हे यहोवा, तू धन्य है; मुझे अपनी विधियां सिखा! 
Psalms 119:13 तेरे सब कहे हुए नियमों का वर्णन, मैं ने अपने मुंह से किया है। 
Psalms 119:14 मैं तेरी चितौनियों के मार्ग से, मानों सब प्रकार के धन से हर्षित हुआ हूं। 
Psalms 119:15 मैं तेरे उपदेशों पर ध्यान करूंगा, और तेरे मार्गों की ओर दृष्टि रखूंगा। 
Psalms 119:16 मैं तेरी विधियों से सुख पाऊंगा; और तेरे वचन को न भूलूंगा।

एक साल में बाइबल: 
  • यूहन्ना 18-21