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Saturday, February 28, 2015

दुख और शान्ति


   1960 के अशान्त दशक में अमेरिका में प्रचलित संगीत में भी एक विचित्र मिश्रण था देशभक्ति और विरोध के भावों का; कुछ गीत ऐसे थे जो युद्ध, लालच, समाज में हो रहे अन्याय के तीखे निन्दक थे, तो कुछ अन्य देश के प्रति कर्तव्य और पारंपरिक मूल्यों के निर्वाह पर ज़ोर देते थे। उन दिनों एक गीत प्रचलित हुआ था, "Pack Up Your Sorrows" (अपने दुखों की गठरी बना लो) जो इन भिन्न भावनाओं को एक साथ व्यक्त करता था और व्यक्तिगत जीवन में शांति पर ध्यान केंद्रित करता था। उस गीत का कोरस कहता था: "यदि तुम अपने दुखों की गठरी बना सको, तो उसे लाकर मुझे दे देना; तुम दुखों से छूट पाओगे, और मुझे उनका उपयोग करना आता है; उन्हें मुझे दे देना।" इस गीत में व्यक्त किया गया था कि ऐसा कोई हो जो दूसरों के दुखों को उठा सके, और बदले में उन्हें मन की वास्तविक एवं स्थाई शान्ति दे सके।

   अच्छी खबर यह है कि कोई है जो यह कर सकता है, और वह यह सेंत-मेंत करने के लिए सारे संसार के सभी लोगों के लिए सहर्ष उपलब्ध है, क्योंकि वह सभी को मन की सच्ची तथा स्थाई शान्ति देना चाहता है। परमेश्वर के वचन बाइबल में यशायाह की पुस्तक के 53वें अध्याय में भविष्यवाणी के रूप में सारे जगत के उद्धारकर्ता प्रभु यीशु मसीह का चित्रण है; यह भविष्यवाणी प्रभु यीशु के जीवन, बलिदान और मृतकों में से पुनरुत्थान में पूरी हुई। उस अध्याय में एक स्थान पर लिखा है, "निश्चय उसने हमारे रोगों को सह लिया और हमारे ही दु:खों को उठा लिया; तौभी हम ने उसे परमेश्वर का मारा-कूटा और दुर्दशा में पड़ा हुआ समझा। परन्तु वह हमारे ही अपराधों के कारण घायल किया गया, वह हमारे अधर्म के कामों के हेतु कुचला गया; हमारी ही शान्ति के लिये उस पर ताड़ना पड़ी कि उसके कोड़े खाने से हम चंगे हो जाएं" (यशायाह 53:4-5)।

   प्रभु यीशु ने संसार के प्रत्येक जन के पाप और दुख तथा उनका दण्ड अपने ऊपर ले लिए और अपने बलिदान से उस दण्ड को सब के लिए चुका दिया। अब जो कोई साधारण विश्वास से प्रभु यीशु के इस बलिदान के कार्य को स्वीकार करता है, उसे अपना मुक्तिदाता प्रभु ग्रहण कर लेता है, प्रभु यीशु उसे पापों के दण्ड से क्षमा तथा परमेश्वर के साथ मेल एवं अनन्त शान्ति प्रदान कर देता है। क्या आज आप अपने दुख उसे देकर उससे अनन्त शान्ति प्राप्त करना चाहेंगे? - डेविड मैक्कैसलैंड


कोई दुख इतना बड़ा नहीं है जिसे प्रभु यीशु अपने ऊपर लेकर उसके बदले अपनी अनन्त शान्ति ना दे सके।

वह आप ही हमारे पापों को अपनी देह पर लिये हुए क्रूस पर चढ़ गया जिस से हम पापों के लिये मर कर के धामिर्कता के लिये जीवन बिताएं: उसी के मार खाने से तुम चंगे हुए। - 1 पतरस 2:24 

बाइबल पाठ: यशायाह 53:1-6
Isaiah 53:1 जो समाचार हमें दिया गया, उसका किस ने विश्वास किया? और यहोवा का भुजबल किस पर प्रगट हुआ? 
Isaiah 53:2 क्योंकि वह उसके साम्हने अंकुर की नाईं, और ऐसी जड़ के समान उगा जो निर्जल भूमि में फूट निकले; उसकी न तो कुछ सुन्दरता थी कि हम उसको देखते, और न उसका रूप ही हमें ऐसा दिखाई पड़ा कि हम उसको चाहते। 
Isaiah 53:3 वह तुच्छ जाना जाता और मनुष्यों का त्यागा हुआ था; वह दु:खी पुरूष था, रोग से उसकी जान पहिचान थी; और लोग उस से मुख फेर लेते थे। वह तुच्छ जाना गया, और, हम ने उसका मूल्य न जाना।
Isaiah 53:4 निश्चय उसने हमारे रोगों को सह लिया और हमारे ही दु:खों को उठा लिया; तौभी हम ने उसे परमेश्वर का मारा-कूटा और दुर्दशा में पड़ा हुआ समझा। 
Isaiah 53:5 परन्तु वह हमारे ही अपराधो के कारण घायल किया गया, वह हमारे अधर्म के कामों के हेतु कुचला गया; हमारी ही शान्ति के लिये उस पर ताड़ना पड़ी कि उसके कोड़े खाने से हम चंगे हो जाएं। 
Isaiah 53:6 हम तो सब के सब भेड़ों की नाईं भटक गए थे; हम में से हर एक ने अपना अपना मार्ग लिया; और यहोवा ने हम सभों के अधर्म का बोझ उसी पर लाद दिया।

एक साल में बाइबल: 
  • गिनती 20-22
  • मरकुस 7:1-13



Friday, February 27, 2015

निकट


   मेरा चचेरे भाई केन चार वर्ष तक कैंसर के साथ साहसपूर्वक जीता रहा। उसके अन्तिम दिनों में उसकी पत्नि, उसके तीन बच्चे और अनेक नाती-पोते उसके कमरे में उससे मिलने आते-जाते रहते थे, अलविदा के विशेष पल उसके साथ बिताते थे। एक समय, ज़रा सी देर को वह अपने कमरे में अकेला था, और उस समय ही में वह अनन्त में प्रवेश कर गया। जब परिवारजनों को यह एहसास हुआ कि वह जा चुका है तो उसकी एक पोती ने, जो अभी बालिका ही थी, बड़ी मासूमियत से कहा, "दादाजी तो चुपचाप से खिसक लिए!" एक पल केन का प्रभु पृथ्वी पर उसके साथ था, और अगले पल केन की आत्मा अपने प्रभु के साथ अनन्त काल के लिए स्वर्ग में थी।

   परमेश्वर के वचन बाइबल का भजन 16 केन का प्रीय भजन था और वह चाहता था कि उसकी यादगार में रखी गई प्रार्थना सभा में वह भजन पढ़ा जाए। केन भजनकार दाऊद के साथ पूर्णतः सहमत था कि परमेश्वर के साथ व्यक्तिगत संबंध से बढ़कर और कोई बहुमूल्य धन नहीं है। वह दाऊद के साथ इस बात में भी सहमत था कि कब्र किसी मसीही विश्वासी के जीवन को छीन कर रख नहीं सकती क्योंकि परमेश्वर उनका शरणस्थान है; दाऊद ने लिखा, "क्योंकि तू मेरे प्राण को अधोलोक में न छोड़ेगा, न अपने पवित्र भक्त को सड़ने देगा" (भजन 16:10)।

   प्रभु यीशु के बलिदान और मृतकों में से पुनरुत्थान के कारण हम मसीही विश्वासियों को यह दृढ़ आश्वसन है कि हम भी मृत्योप्रांत एक दिन पुनः जी उठेंगे (प्रेरितों 2:25-28; 1 कुरिन्थियों 15:20-22) और दाऊद तथा केन के समान हम भी पाएंगे कि परमेश्वर के, "...निकट आनन्द की भरपूरी है..." (भजन 16:11)। - ऐनी सेटास


परमेश्वर हमारी निधि है; उसकी निकटता अभी हमारा शरणस्थान है, तथा स्वर्ग में आनन्द की भरपूरी होगा।

यहोवा मेरी चट्टान, और मेरा गढ़ और मेरा छुड़ाने वाला है; मेरा ईश्वर, मेरी चट्टान है, जिसका मैं शरणागत हूं, वह मेरी ढ़ाल और मेरी मुक्ति का सींग, और मेरा ऊँचा गढ़ है। - भजन 18:2

बाइबल पाठ: भजन 16:1-11
Psalms 16:1 हे ईश्वर मेरी रक्षा कर, क्योंकि मैं तेरा ही शरणागत हूं। 
Psalms 16:2 मैं ने परमेश्वर से कहा है, कि तू ही मेरा प्रभु है; तेरे सिवाए मेरी भलाई कहीं नहीं। 
Psalms 16:3 पृथ्वी पर जो पवित्र लोग हैं, वे ही आदर के योग्य हैं, और उन्हीं से मैं प्रसन्न रहता हूं। 
Psalms 16:4 जो पराए देवता के पीछे भागते हैं उनका दु:ख बढ़ जाएगा; मैं उनके लोहू वाले तपावन नहीं तपाऊंगा और उनका नाम अपने ओठों से नहीं लूंगा।
Psalms 16:5 यहोवा मेरा भाग और मेरे कटोरे का हिस्सा है; मेरे बाट को तू स्थिर रखता है। 
Psalms 16:6 मेरे लिये माप की डोरी मनभावने स्थान में पड़ी, और मेरा भाग मनभावना है।
Psalms 16:7 मैं यहोवा को धन्य कहता हूं, क्योंकि उसने मुझे सम्मत्ति दी है; वरन मेरा मन भी रात में मुझे शिक्षा देता है। 
Psalms 16:8 मैं ने यहोवा को निरन्तर अपने सम्मुख रखा है: इसलिये कि वह मेरे दाहिने हाथ रहता है मैं कभी न डगमगाऊंगा।
Psalms 16:9 इस कारण मेरा हृदय आनन्दित और मेरी आत्मा मगन हुई; मेरा शरीर भी चैन से रहेगा। 
Psalms 16:10 क्योंकि तू मेरे प्राण को अधोलोक में न छोड़ेगा, न अपने पवित्र भक्त को सड़ने देगा।
Psalms 16:11 तू मुझे जीवन का रास्ता दिखाएगा; तेरे निकट आनन्द की भरपूरी है, तेरे दाहिने हाथ में सुख सर्वदा बना रहता है।

एक साल में बाइबल: 
  • गिनती 17-19
  • मरकुस 6:30-56



Thursday, February 26, 2015

आनन्दायक


   एक त्रासदी ने उस परिवार में एक ऐसा खालीपन ला दिया जिसे फिर कुछ नहीं भर सका। वह बच्चा जिसने अभी हाल ही में चलना आरंभ किया था, बिल्ली के पीछे पीछे सड़क पर आ गया और एक ट्रक द्वारा कुचला गया; उसके माता-पिता ने सड़क से उसके बेजान शरीर को उठा कर चिपटा लिया। उस बच्चे की 4 वर्षीय बहन यह सब स्तब्ध होकर देख रही थी। वर्षों तक उस त्रासदी के पल का वह खालीपन उस परिवार को उदासी से घेरे रहा। उनकी भावनाएं मानों जड़ हो गई थीं; यदि कोई दिलासा थी तो वह उस त्रासदी के सुन्नपन में थी, किसी भी प्रकार की राहत कल्पना से परे थी।

   लेखिका ऐन वोसकैम्प वह 4 वर्षीय बहन थी जिसने यह सब देखा और इस घटना के दुख ने जीवन और परमेश्वर के प्रति उसके दृष्टिकोण को आकार दिया। जिस संसार में वह बड़ी हुई, उसमें अनुग्रह के विचार का नगण्य स्थान था, आनन्द एक ऐसी धारणा थी जिसका वास्तविकता से कोई लेना-देना नहीं था।

   एक युवा माँ के रूप में ऐन वोसकैम्प ने उस भ्रामक वस्तु को खोजने का निर्णय लिया जिसे परमेश्वर का वचन बाइबल आनन्द कहती है। उसकी खोज ने उसे बताया कि बाइबल में जिस मूल ग्रीक भाषा के शब्द का अनुवाद आनन्द और अनुग्रह हुआ है वह ग्रीक भाषा के एक अन्य शब्द से निकला है जिसका अर्थ है धन्यवादी। ऐन ने सोचा, "क्या यह इतना सरल हो सकता है?" अपनी इस खोज को परखने करने के लिए वोसकैम्प ने उसे मिले हुए 1,000 उपहारों के लिए धन्यवाद देने का निर्णय लिया। उसने धीरे धीरे धन्यवाद देना आरंभ किया, किंतु शीघ्र ही कृतज्ञता उसके जीवन से उनमुक्त होकर प्रवाहित होने लगी। ऐन वोसकैम्प ने पाया कि धन्यवाद देने से उसके जीवन में आनन्द की वे भावनाएं जागृत हो उठीं जिन्हें वह बहुत वर्ष पहले मृतक समझ चुकी थी। उसने अपने अनुभव से सीखा कि धन्यवाद देना आनन्दायक होता है।

   हम सामान्यतः कार्य होने के बाद धन्यवाद करते हैं परन्तु परमेश्वर का वचन बाइबल हमें सिखाती है कि परमेश्वर के सम्मुख प्रार्थना भी धन्यवाद के साथ प्रस्तुत की जाए (फिलिप्पियों 4:6-7); और प्रभु यीशु ने अपने उदाहरण के द्वारा इसके सत्य को दिखाया जब लाज़र को मृतकों में से जिला उठाने की प्रार्थना से पहले ही उन्होंने परमेश्वर का धन्यवाद किया (यूहन्ना 11:41)।

   हर बात में परमेश्वर के धन्यवादी होना सीखें, और वह आपके जीवन को आनन्द से परिपूर्ण बना देगा। - जूली ऐकैरमैन लिंक


धन्यवाद से भरा हृदय आनन्द से भरे जीवन का स्त्रोत है।

किसी भी बात की चिन्‍ता मत करो: परन्तु हर एक बात में तुम्हारे निवेदन, प्रार्थना और बिनती के द्वारा धन्यवाद के साथ परमेश्वर के सम्मुख अपस्थित किए जाएं। तब परमेश्वर की शान्‍ति, जो समझ से बिलकुल परे है, तुम्हारे हृदय और तुम्हारे विचारों को मसीह यीशु में सुरिक्षत रखेगी। - फिलिप्पियों 4:6-7

बाइबल पाठ: यूहन्ना 11:32-44
John 11:32 जब मरियम वहां पहुंची जहां यीशु था, तो उसे देखते ही उसके पांवों पर गिर के कहा, हे प्रभु, यदि तू यहां होता तो मेरा भाई न मरता। 
John 11:33 जब यीशु न उसको और उन यहूदियों को जो उसके साथ आए थे रोते हुए देखा, तो आत्मा में बहुत ही उदास हुआ, और घबरा कर कहा, तुम ने उसे कहां रखा है? 
John 11:34 उन्होंने उस से कहा, हे प्रभु, चलकर देख ले। 
John 11:35 यीशु के आंसू बहने लगे। 
John 11:36 तब यहूदी कहने लगे, देखो, वह उस से कैसी प्रीति रखता था। 
John 11:37 परन्तु उन में से कितनों ने कहा, क्या यह जिसने अन्धे की आंखें खोली, यह भी न कर सका कि यह मनुष्य न मरता? 
John 11:38 यीशु मन में फिर बहुत ही उदास हो कर कब्र पर आया, वह एक गुफा थी, और एक पत्थर उस पर धरा था। 
John 11:39 यीशु ने कहा; पत्थर को उठाओ: उस मरे हुए की बहिन मारथा उस से कहने लगी, हे प्रभु, उस में से अब तो र्दुगंध आती है क्योंकि उसे मरे चार दिन हो गए। 
John 11:40 यीशु ने उस से कहा, क्या मैं ने तुझ से न कहा था कि यदि तू विश्वास करेगी, तो परमेश्वर की महिमा को देखेगी। 
John 11:41 तब उन्होंने उस पत्थर को हटाया, फिर यीशु ने आंखें उठा कर कहा, हे पिता, मैं तेरा धन्यवाद करता हूं कि तू ने मेरी सुन ली है। 
John 11:42 और मैं जानता था, कि तू सदा मेरी सुनता है, परन्तु जो भीड़ आस पास खड़ी है, उन के कारण मैं ने यह कहा, जिस से कि वे विश्वास करें, कि तू ने मुझे भेजा है। 
John 11:43 यह कहकर उसने बड़े शब्द से पुकारा, कि हे लाजर, निकल आ। 
John 11:44 जो मर गया था, वह कफन से हाथ पांव बन्‍धे हुए निकल आया और उसका मुंह अंगोछे से लिपटा हुआ था : यीशु ने उन से कहा, उसे खोल कर जाने दो।

एक साल में बाइबल: 
  • गिनती 15-16
  • मरकुस 6:1-29



Wednesday, February 25, 2015

तिरस्कृत


   आर्थिक विशेषज्ञ, वॉरन बफेट संसार के सबसे धनी व्यक्तियों में से एक हैं; 19 वर्ष की आयु में हार्वर्ड बिज़नेस स्कूल ने उन्हें अस्वीकृत कर दिया था। वे बताते हैं कि हार्वर्ड में दाखिले के लिए हुए साक्षात्कार में असफल होने के बाद भय के भाव ने उन्हें घेर लिया, और साथ ही इस अस्वीकृति के कारण उन्हें अपने पिता की होने वाली प्रतिक्रीया की भी चिंता थी। लेकिन अब पीछे मुड़कर उन सब बातों और घटनाओं के प्रभावों को देखने पर वॉरन कहते हैं: "मेरे जीवन में सब कुछ जो हुआ, वह भी जिसे मैं उस समय मुझे कुचल देने वाली घटना समझता था, मेरी भलाई ही के लिए था।"

   तिरस्कृत होना दर्दनाक होता है, इससे कोई इन्कार नहीं है, लेकिन संसार से तिरस्कृत होने के कारण हमें परमेश्वर की इच्छाओं को पूरा करने से रुक नहीं जाना चाहिए। इस बात का सबसे अच्छा उदाहरण प्रभु यीशु मसीह हैं। प्रभु यीशु को उसके अपने लोगों ने ही स्वीकार नहीं किया (यूहन्ना 1:11), बाद में उसके अनेक अनुयायी उसे छोड़ कर चले गए (यूहन्ना 6:66)। लेकिन जैसे प्रभु यीशु का यह तिरस्कार परमेश्वर की योजना में था (यशायाह 53:3), वैसे ही परमेश्वर के पुत्र का इस तिरस्कार के बावजूद अपनी सेवकाई को जारी रखना और पूरा करना भी था। प्रभु यीशु ने ना केवल पृथ्वी के लोगों के तिरस्कार को सहा, वरन वे यह भी जानते थे कि उनके बलिदान के समय, जब वे कलवरी के क्रूस पर लटके होंगे, उनका स्वर्गीय पिता भी उनसे मूँह मोड़ लेगा, और यह हुआ भी (मत्ती 27:46)। लेकिन इस सब के बावजूद प्रभु यीशु ने बीमारों को चंगा किया, दुष्टात्माओं को निकाला और पाप क्षमा तथा उद्धार के सुसमाचार का प्रचार किया (प्रेरितों 10:38) और क्रूस पर अपने बलिदान से पहले वे परमेश्वर पिता से कह सके "जो काम तू ने मुझे करने को दिया था, उसे पूरा कर के मैं ने पृथ्वी पर तेरी महिमा की है" (यूहन्ना 17:4)।

   यदि तिरस्कृत होना, परमेश्वर द्वारा आपको सौंपे गए कार्य को पूरा करने में बाधा बन रहा है, तो हिम्मत ना हारें, अपनी सेवकाई में डटे रहें। स्मरण रखे कि प्रभु यीशु ने भी यह दुख सहा है और वह आपकी परिस्थितियों तथा भावनाओं को भली-भांति समझ सकता है, इसलिए वह कहता है: "जो कुछ पिता मुझे देता है वह सब मेरे पास आएगा, उसे मैं कभी न निकालूंगा" (यूहन्ना 6:37)। - जेनिफर बेन्सन शुल्ट


प्रभु यीशु के समान हमें कोई अन्य नहीं समझ सकता।

क्योंकि हमारा ऐसा महायाजक नहीं, जो हमारी निर्बलताओं में हमारे साथ दुखी न हो सके; वरन वह सब बातों में हमारी नाईं परखा तो गया, तौभी निष्‍पाप निकला। - इब्रानियों 4:15

बाइबल पाठ: यूहन्ना 1:1-13
John 1:1 आदि में वचन था, और वचन परमेश्वर के साथ था, और वचन परमेश्वर था। 
John 1:2 यही आदि में परमेश्वर के साथ था। 
John 1:3 सब कुछ उसी के द्वारा उत्पन्न हुआ और जो कुछ उत्पन्न हुआ है, उस में से कोई भी वस्तु उसके बिना उत्पन्न न हुई। 
John 1:4 उस में जीवन था; और वह जीवन मुनष्यों की ज्योति थी। 
John 1:5 और ज्योति अन्धकार में चमकती है; और अन्धकार ने उसे ग्रहण न किया। 
John 1:6 एक मनुष्य परमेश्वर की ओर से आ उपस्थित हुआ जिस का नाम यूहन्ना था। 
John 1:7 यह गवाही देने आया, कि ज्योति की गवाही दे, ताकि सब उसके द्वारा विश्वास लाएं। 
John 1:8 वह आप तो वह ज्योति न था, परन्तु उस ज्योति की गवाही देने के लिये आया था। 
John 1:9 सच्ची ज्योति जो हर एक मनुष्य को प्रकाशित करती है, जगत में आनेवाली थी। 
John 1:10 वह जगत में था, और जगत उसके द्वारा उत्पन्न हुआ, और जगत ने उसे नहीं पहिचाना। 
John 1:11 वह अपने घर आया और उसके अपनों ने उसे ग्रहण नहीं किया। 
John 1:12 परन्तु जितनों ने उसे ग्रहण किया, उसने उन्हें परमेश्वर के सन्तान होने का अधिकार दिया, अर्थात उन्हें जो उसके नाम पर विश्वास रखते हैं। 
John 1:13 वे न तो लोहू से, न शरीर की इच्छा से, न मनुष्य की इच्छा से, परन्तु परमेश्वर से उत्पन्न हुए हैं।

एक साल में बाइबल: 
  • गिनती 12-14
  • मरकुस 5:21-43



Tuesday, February 24, 2015

ज्योतिसतंभ


   उत्तरी मिशिगन प्रांत में स्थित मिशिगन झील के एक प्रायद्वीप पर स्थित ज्योतिस्तंभ "मिशन पॉइन्ट लाइटहाउस" कहलाता है। इसे झील के उस तट के समीप पानी में स्थित चट्टानों और रेत के टीलों में जलयानों के फंसने से बचने के लिए सन 1870 में बनाया गया था। लेकिन इसका यह नाम एक अन्य प्रकार के ज्योतिस्तंभ के कारण पड़ा - निकट ही स्थित "ओल्ड मिशन चर्च" के कारण जिसका निर्माण 31 वर्ष पहले हुआ था। सन 1839 में पादरी पीटर डोहर्टी ने उस प्रायद्वीप पर स्थित मूल अमरीकी निवासियों के बीच मसीही सेवकाई की अपनी बुलाहट को स्वीकार किया और वहाँ पर एक चर्च की स्थापना करी। उनके नेतृत्व में किसानों, शिक्षकों और कारीगरों के मेहनती समाज ने एक साथ मिलकर कार्य किया जिससे उस इलाके ने बहुत उन्नति पाई।

   जब मसीही विश्वासियों का समूह एक साथ मिलकर अपनी सेवकाई की ज़िम्मेदारी को पूरा करता है, तो उनका विश्वास और सहभागिता पाप के अन्धकार में पड़े संसार को आत्मिक ज्योति तथा उन्नति प्रदान करता है (फिलिप्पियों 2:15)। प्रभु यीशु ने अपने अनुयायियों से कहा, "तुम जगत की ज्योति हो; जो नगर पहाड़ पर बसा हुआ है वह छिप नहीं सकता। और लोग दिया जलाकर पैमाने के नीचे नहीं परन्तु दीवट पर रखते हैं, तब उस से घर के सब लोगों को प्रकाश पहुंचता है। उसी प्रकार तुम्हारा उजियाला मनुष्यों के सामने चमके कि वे तुम्हारे भले कामों को देखकर तुम्हारे पिता की, जो स्वर्ग में हैं, बड़ाई करें" (मत्ती 5:14-16)।

   ज्योतिस्तंभ "मिशन पॉइन्ट लाइटहाउस" जलयानों को पानी की सतह के नीचे छिपे खतरों के लिए सचेत करता था और "ओल्ड मिशन चर्च" लोगों को आत्मिक खतरों के लिए सचेत करके, मानने वालों को उन आत्मिक खतरों से सुरक्षित बचकर निकलने के मार्ग - प्रभु यीशु के बारे में बताता था।

   आज भी हम मसीही विश्वासी उस ज्योतिसतंभ के समान कार्य करने के लिए संसार में रखे गए हैं जिससे अपने जीवनों और मसीही विश्वासियों की मण्डलियों द्वारा संसार को पाप के विनाश के बारे में सचेत कर सकें और पाप से बच कर सुरक्षित निकल पाने के मार्ग प्रभु यीशु के बारे में बता सकें। हम परमेश्वर के ज्योतिस्तंभ हैं क्योंकि परमेश्वर की ज्योति प्रभु यीशु मसीह हम में रहता है, कार्य करता है।


जब मसीही विश्वासियों में होकर मसीह की ज्योति चमकती है, तो वे पाप में भटके हुए लोगों को सही मार्ग दिखाने वाले बन जाते हैं।

ताकि तुम निर्दोष और भोले हो कर टेढ़े और हठीले लोगों के बीच परमेश्वर के निष्‍कलंक सन्तान बने रहो, (जिन के बीच में तुम जीवन का वचन लिये हुए जगत में जलते दीपकों की नाईं दिखाई देते हो)। - फिलिप्पियों 2:15

बाइबल पाठ: मत्ती 5:1-16
Matthew 5:1 वह इस भीड़ को देखकर, पहाड़ पर चढ़ गया; और जब बैठ गया तो उसके चेले उसके पास आए। 
Matthew 5:2 और वह अपना मुंह खोल कर उन्हें यह उपदेश देने लगा, 
Matthew 5:3 धन्य हैं वे, जो मन के दीन हैं, क्योंकि स्वर्ग का राज्य उन्‍हीं का है। 
Matthew 5:4 धन्य हैं वे, जो शोक करते हैं, क्योंकि वे शांति पाएंगे। 
Matthew 5:5 धन्य हैं वे, जो नम्र हैं, क्योंकि वे पृथ्वी के अधिकारी होंगे। 
Matthew 5:6 धन्य हैं वे जो धर्म के भूखे और प्यासे हैं, क्योंकि वे तृप्त किये जाएंगे। 
Matthew 5:7 धन्य हैं वे, जो दयावन्‍त हैं, क्योंकि उन पर दया की जाएगी। 
Matthew 5:8 धन्य हैं वे, जिन के मन शुद्ध हैं, क्योंकि वे परमेश्वर को देखेंगे। 
Matthew 5:9 धन्य हैं वे, जो मेल करवाने वाले हैं, क्योंकि वे परमेश्वर के पुत्र कहलाएंगे। 
Matthew 5:10 धन्य हैं वे, जो धर्म के कारण सताए जाते हैं, क्योंकि स्वर्ग का राज्य उन्‍हीं का है। 
Matthew 5:11 धन्य हो तुम, जब मनुष्य मेरे कारण तुम्हारी निन्दा करें, और सताएं और झूठ बोल बोलकर तुम्हरो विरोध में सब प्रकार की बुरी बात कहें। 
Matthew 5:12 आनन्‍दित और मगन होना क्योंकि तुम्हारे लिये स्वर्ग में बड़ा फल है इसलिये कि उन्होंने उन भविष्यद्वक्ताओं को जो तुम से पहिले थे इसी रीति से सताया था।
Matthew 5:13 तुम पृथ्वी के नमक हो; परन्तु यदि नमक का स्‍वाद बिगड़ जाए, तो वह फिर किस वस्तु से नमकीन किया जाएगा? फिर वह किसी काम का नहीं, केवल इस के कि बाहर फेंका जाए और मनुष्यों के पैरों तले रौंदा जाए। 
Matthew 5:14 तुम जगत की ज्योति हो; जो नगर पहाड़ पर बसा हुआ है वह छिप नहीं सकता। 
Matthew 5:15 और लोग दिया जलाकर पैमाने के नीचे नहीं परन्तु दीवट पर रखते हैं, तब उस से घर के सब लोगों को प्रकाश पहुंचता है। 
Matthew 5:16 उसी प्रकार तुम्हारा उजियाला मनुष्यों के सामने चमके कि वे तुम्हारे भले कामों को देखकर तुम्हारे पिता की, जो स्वर्ग में हैं, बड़ाई करें।

एक साल में बाइबल: 
  • गिनती 9-11
  • मरकुस 5:1-20



Monday, February 23, 2015

विधि


   हमारे पोते के जन्मदिन को मनाने के लिए मेरी पत्नि ने एक बड़ा सा चॉकलेट केक बना कर सजाया। यह करने के लिए उसने अपनी व्यंजन बनाने की विधियाँ सिखाने वाली पुस्तक को निकाला, उसमें लिखी विधि के अनुसार सही अनुपात में आवश्यक सामग्री को एकत्रित किया, फिर दी गई केक बनाने की विधि का क्रमवार अनुसरण किया, और केक बनकर तैयार हो गया। कितना अच्छा होता यदि जीवन भी कुछ ऐसा ही होता - जीने के कुछ सरल क्रमों का पालन करें और आनन्दमय जीवन का सुख लें!

   लेकिन जीवन ऐसा सरल नहीं है। हम एक पाप में पतित संसार में रहते हैं और ऐसी कोई सरल विधि नहीं है जिसके पालन से हम हानि, पीड़ा, अन्याय और कष्ट से विहीन जीवन व्यतीत कर सकेंगे। जीवन की तकलीफों में हमें एक ऐसे सहायक और मार्गदर्शक की आवश्यकता है जिसने स्वयं यह सब अनुभव किया हो किंतु उन सब पर जयवन्त रहा हो और अब हमें भी जयवन्त कर सकता हो। परमेश्वर के वचन बाइबल में इब्रानियों की पत्री में ऐसे एकमात्र जन - प्रभु यीशु के विषय में लिखा है: "क्योंकि हमारा ऐसा महायाजक नहीं, जो हमारी निर्बलताओं में हमारे साथ दुखी न हो सके; वरन वह सब बातों में हमारी नाईं परखा तो गया, तौभी निष्‍पाप निकला" (इब्रानियों 4:15)। प्रभु यीशु मसीह जो हमें जीवन देने के लिए बलिदान होकर मृतकों में से जी उठा, पूर्ण रीति से सक्षम है कि हमें जीवन के सभी दुखों और अन्धकारमय अनुभवों के पार सकुशल निकाल लाए, क्योंकि "निश्चय उसने हमारे रोगों को सह लिया और हमारे ही दु:खों को उठा लिया..." (यशायाह 53:4)।

   प्रभु यीशु जानता है कि ऐसी कोई सरल विधि नहीं है जिससे जीवन के दुख मिटाए जा सकें, इसलिए वह स्वयं संसार में आ गया, हमारे दुखों को अपने ऊपर ले लिया, उन से सुरक्षित निकल जाने का मार्ग बनाकर दे दिया। क्या आज आप उस पर विश्वास करके अपने दुखों और आँसुओं के जीवन को उन दुखों से पार सुरक्षित निकाल ले जाने के लिए उसे समर्पित करेंगे। जीवन की सुरक्षा और अनन्त आनन्द की इससे सरल विधि और कहीं नहीं है, कोई नहीं है। - बिल क्राउडर


प्रभु यीशु जो हमें जीवन देने के लिए बलिदान हो गया, वही हमें जीवन के दुखों से पार भी लगा सकता है।

इस कारण मैं इन दुखों को भी उठाता हूं, पर लजाता नहीं, क्योंकि मैं उसे जिस की मैं ने प्रतीति कì