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रविवार, 26 जुलाई 2015

बीज और भूमि


   मेरे आंगन के एक भाग में कुछ भी ठीक से उग नहीं पा रहा था; मैं चाहे जितनी भी अच्छी तरह से उसकी सिंचाई कर दूँ, तौ भी वहाँ घास भी अच्छे से नहीं उगती थी। यह देखने के लिए कि वहाँ समस्या क्या है, मैंने एक दिन फावड़ा लिया और वहाँ खोदना आरम्भ किया और तुरंत ही समस्या मेरे सामने थी - मिट्टी के थोड़ा ही नीचे पत्थरों की एक परत थी जिसको पार कर ठीक से जड़ पकड़ पाना किसी भी पौधे या घास के लिए संभव नहीं था। मैंने वे पत्थर निकाले, उनके स्थान पर अच्छी उपजाऊ मिट्टी वहाँ भर दी; अब वहाँ बीज अच्छी तरह से जड़ पकड़ सकते थे।

   प्रभु यीशु ने भी बीज और भूमि को लेकर एक दृष्टांत कहा था जो परमेश्वर के वचन बाइबल में मत्ती 13 में दिया गया है। उस दृष्टांत में प्रभु ने बताया कि विभिन्न प्रकार की भूमि पर बोए गए बीज का क्या होता है। उन्होंने बताया कि वे बीज जो पत्थरीली भूमि पर गिरते हैं जहाँ उन्हें बहुत मिट्टी नहीं मिलती, वे उगते तो हैं परन्तु सूरज की गर्मी से शीघ्र ही मर भी जाते हैं (पद 5, 6)। दृष्टांत में कही गई इस बात के द्वारा प्रभु उन लोगों के बारे में बता रहे थे जिन्होंने प्रभु यीशु में सेंत-मेंत उपलब्ध पापों की क्षमा और उद्धार का सुसमाचार सुना, उसे ऊपरी तौर से माना भी पर उनके जीवन में उस सुसमाचार ने जड़ नहीं पकड़ी, इसलिए जब परेशानियाँ आईं तो ऐसा व्यक्ति, जो वास्तविक मसीही विश्वासी नहीं था, प्रभु से दूर हो गया।

   हमें प्रभु यीशु का कितना आभारी और धन्यवादी होना चाहिए उनके द्वारा इस दृष्टांत के अन्त में कहे गए उस अन्तिम प्रकार की भूमि को दर्शाने वाले लोगों के लिए: "जो अच्छी भूमि में बोया गया, यह वह है, जो वचन को सुनकर समझता है, और फल लाता है कोई सौ गुना, कोई साठ गुना, कोई तीस गुना" (मत्ती 13:23)। प्रभु यीशु पर विश्वास लाने से मिलने वाले उद्धार की आशीषों एवं उत्तरदायित्वों को यह दृष्टांत कैसी अद्भुत रीति से स्मरण करवाता है।

   परमेश्वर का धन्यवाद और महिमा हो सुसमाचार के बीज और आत्मिक उन्नति की लालसा रखने वाले जीवनों रूपी भूमि के लिए। - डेव ब्रैनन


परमेश्वर के लिए खुला और समर्पित हृदय वह भूमि है जिसमें उसका वचन पनप सकता है, फल ला सकता है।

और जो पत्थरीली भूमि पर बोया गया, यह वह है, जो वचन सुनकर तुरन्त आनन्द के साथ मान लेता है। पर अपने में जड़ न रखने के कारण वह थोड़े ही दिन का है, और जब वचन के कारण क्‍लेश या उपद्रव होता है, तो तुरन्त ठोकर खाता है। - मत्ती 13:20-21

बाइबल पाठ: मत्ती 13:1-9
Matthew 13:1 उसी दिन यीशु घर से निकलकर झील के किनारे जा बैठा। 
Matthew 13:2 और उसके पास ऐसी बड़ी भीड़ इकट्ठी हुई कि वह नाव पर चढ़ गया, और सारी भीड़ किनारे पर खड़ी रही। 
Matthew 13:3 और उसने उन से दृष्‍टान्‍तों में बहुत सी बातें कही, कि देखो, एक बोने वाला बीज बोने निकला। 
Matthew 13:4 बोते समय कुछ बीज मार्ग के किनारे गिरे और पक्षियों ने आकर उन्हें चुग लिया। 
Matthew 13:5 कुछ पत्थरीली भूमि पर गिरे, जहां उन्हें बहुत मिट्टी न मिली और गहरी मिट्टी न मिलने के कारण वे जल्द उग आए। 
Matthew 13:6 पर सूरज निकलने पर वे जल गए, और जड़ न पकड़ने से सूख गए। 
Matthew 13:7 कुछ झाड़ियों में गिरे, और झाड़ियों ने बढ़कर उन्हें दबा डाला। 
Matthew 13:8 पर कुछ अच्छी भूमि पर गिरे, और फल लाए, कोई सौ गुना, कोई साठ गुना, कोई तीस गुना। 
Matthew 13:9 जिस के कान हों वह सुन ले।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 40-42
  • प्रेरितों 27:1-26


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