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Tuesday, January 27, 2015

अगुवे



   सर्दियों के एक अति ठंडे दिन में मुझे परड्यू विश्वविद्यालाय जाना पड़ा। विश्वविद्यालय के परिसर में एक छात्रावास के पास से निकलते समय मुझे दो लड़के दिखाई दिए जो छात्रावास के मार्ग पर जमी हुई बर्फ की मोटी परत को हटाने में लगे हुए थे। यह सोचकर कि वे दोनों प्रथम वर्ष के छात्र होंगे जिन्हें छात्रावास के वरिष्ठ छात्रों ने यह कठिन कार्य करने को कहा है, मैंने उनसे कहा, "जब यहाँ दाखिला लिया था तब किसी ने यह नहीं कहा होगा कि ऐसा भी करना पड़ेगा?" उन में से एक ने सिर उठाकर मेरी ओर देखा और मुस्कुरा कर बोला, "ऐसा नहीं है; हम दोनों ही इस छात्रावास के वरिष्ठ छात्र हैं और इस छात्रावास के छात्रसंघ के पदाधिकारी भी - मैं उपाध्यक्ष हूँ और मेरा यह मित्र अध्यक्ष है।" मैंने उन दोनो को उनकी कठिन मेहनत के लिए धन्यवाद किया और अपने कार्य के लिए आगे बढ़ गया; मुझे उन दोनों ने अपने उदाहरण से याद दिला दिया कि सच्चे अगुवे दूसरों के सेवक होते हैं।

   जब प्रभु यीशु के दो चेलों ने प्रभु यीशु से चाहा कि आने वाले उसके स्वर्गीय राज्य में वे दोनों उसके दाहिने और बांए ओर बैठने का आदरणीय स्थान पाएं; तब प्रभु ने अपने बारहों चेलों को पास बुला कर उन सभी से कहा, "पर तुम में ऐसा नहीं है, वरन जो कोई तुम में बड़ा होना चाहे वह तुम्हारा सेवक बने। और जो कोई तुम में प्रधान होना चाहे, वह सब का दास बने" (मरकुस 10:43-44)। यदि किसी के मन में इस बारे में फिर भी कोई भ्रम रह गया हो, तो उस भ्रम को दूर करने के उद्देश्य से प्रभु यीशु ने आगे उनसे अपने बारे में कहा, "क्योंकि मनुष्य का पुत्र इसलिये नहीं आया, कि उस की सेवा टहल की जाए, पर इसलिये आया, कि आप सेवा टहल करे, और बहुतों की छुड़ौती के लिये अपना प्राण दे" (मरकुस 10:45)।

   परमेश्वर के भय में चलने और कार्य करने वाले सच्चे अगुवे का चिन्ह है कि वह सत्ता-अधिकार तथा विशेषाधिकारों के लिए परन्तु नम्रता से सेवा करने के लिए अगुवे होने की ज़िम्मेदारी ग्रहण करता है और फिर उसे वैसे ही निभाता भी है। प्रत्येक मसीही विश्वासी को परमेश्वर सामर्थ देता है कि वे प्रभु यीशु के उदाहरण का अनुसरण करते हुए उसके गुणों को अपने जीवन से दिखाने पाएं; परमेश्वर द्वारा प्रदान की गई इस सामर्थ से अपनी ज़िम्मेदारियों के निर्वाह में प्रभु यीशु को महिमा देने वाले बनें। - डेविड मैक्कैसलैंड


एक योग्य अगुवा वह ही है जो सेवा करना सीख चुका है।

क्योंकि हम अपने को नहीं, परन्तु मसीह यीशु को प्रचार करते हैं, कि वह प्रभु है; और अपने विषय में यह कहते हैं, कि हम यीशु के कारण तुम्हारे सेवक हैं। - 2 कुरिन्थियों 4:5 

बाइबल पाठ: मरकुस 10:35-45
Mark 10:35 तब जब्‍दी के पुत्र याकूब और यूहन्ना ने उसके पास आकर कहा, हे गुरू, हम चाहते हैं, कि जो कुछ हम तुझ से मांगे, वही तू हमारे लिये करे। 
Mark 10:36 उसने उन से कहा, तुम क्या चाहते हो कि मैं तुम्हारे लिये करूं? 
Mark 10:37 उन्होंने उस से कहा, कि हमें यह दे, कि तेरी महिमा में हम में से एक तेरे दाहिने और दूसरा तेरे बांए बैठे। 
Mark 10:38 यीशु ने उन से कहा, तुम नहीं जानते, कि क्या मांगते हो? जो कटोरा मैं पीने पर हूं, क्या पी सकते हो? और जो बपतिस्मा मैं लेने पर हूं, क्या ले सकते हो? 
Mark 10:39 उन्होंने उस से कहा, हम से हो सकता है: यीशु ने उन से कहा: जो कटोरा मैं पीने पर हूं, तुम पीओगे; और जो बपतिस्मा मैं लेने पर हूं, उसे लोगे। 
Mark 10:40 पर जिन के लिये तैयार किया गया है, उन्हें छोड़ और किसी को अपने दाहिने और अपने बाएं बिठाना मेरा काम नहीं। 
Mark 10:41 यह सुन कर दसों याकूब और यूहन्ना पर रिसयाने लगे। 
Mark 10:42 और यीशु ने उन को पास बुला कर उन से कहा, तुम जानते हो, कि जो अन्यजातियों के हाकिम समझे जाते हैं, वे उन पर प्रभुता करते हैं; और उन में जो बड़ें हैं, उन पर अधिकार जताते हैं। 
Mark 10:43 पर तुम में ऐसा नहीं है, वरन जो कोई तुम में बड़ा होना चाहे वह तुम्हारा सेवक बने। 
Mark 10:44 और जो कोई तुम में प्रधान होना चाहे, वह सब का दास बने। 
Mark 10:45 क्योंकि मनुष्य का पुत्र इसलिये नहीं आया, कि उस की सेवा टहल की जाए, पर इसलिये आया, कि आप सेवा टहल करे, और बहुतों की छुड़ौती के लिये अपना प्राण दे।

एक साल में बाइबल: 

  • निर्गमन 16-18
  • मत्ती 18:1-20