बाइबल और मसीही विश्वास सम्बन्धी अपने प्रश्नों के लिए यहाँ क्लिक करें:

GotQuestions?org

Thursday, June 4, 2015

बढ़ते रहें बढ़ाते रहें


   मसीही पुरुषों के एक सम्मेलन में मैं अपने एक पुराने मित्र क्लाईड से, जो अनेक वर्षों से मेरा प्रोत्साहन और मार्गदर्शन करता रहा है, मिला और बातचीत करी। क्लाईड के साथ चीन से आए हुए दो युवक भी थे जो विश्वास में नए थे और क्लाईड की मित्रता तथा आत्मिक बढोतरी में सहायता के लिए बहुत कृतज्ञ थे। क्लाईड जो अब 80 वर्ष का होने वाला है, बहुत उत्साहित तथा प्रफुल्लित था और कह रहा था, "मसीह यीशु को जानने और उससे प्रेम करने को लेकर जितना मैं आज उत्साहित हूँ उतना पहले कभी नहीं था।"

   परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रेरित पौलुस द्वारा फिलिप्पियों की मसीही विश्वासी मण्डली को लिखी पत्री में हम पौलुस के मन और उद्देश्य को देखते हैं जो समय के साथ कभी धूमिल नहीं हुआ: "मैं उसको और उसके मृत्युंजय की सामर्थ को, और उसके साथ दुखों में सहभागी हाने के मर्म को जानूँ, और उस की मृत्यु की समानता को प्राप्त करूं" (फिलिप्पियों 3:10)। प्रभु यीशु के साथ पौलुस के संबंध से उसके अन्दर यह कभी कम ना होने वाली लालसा जागी कि उसके द्वारा अन्य लोग भी मसीही विश्वास को जान सकें। पौलुस प्रभु यीशु में पापों की क्षमा और उद्धार के सुसमाचार को प्रचार करने से तथा इस बात से कि उसे देखकर अन्य लोग मसीही विश्वास में साहसी बनते हैं, आनन्दित होता था (फिलिप्पियों 1:12-14)।

   यदि हमारे मसीही विश्वास के जीवन का उद्देश्य केवल प्रभु यीशु के लिए सेवकाई करना मात्र ही है, तो कभी ना कभी हम थक कर बैठ जाएंगे। परन्तु यदि पौलुस और क्लाईड और उनके जैसे अनेक अन्य लोगों के समान हमारा उद्देश्य मसीह यीशु को और गहराई से जानना, उससे और अधिक प्रेम करना है, तो हम पाएंगे कि प्रभु हमें सामर्थ देगा कि हम दूसरों को उसके बारे में बता सकें, उन्हें प्रभु के निकट ला सकें।

   प्रभु परमेश्वर से मिलने वाली सामर्थ में आनन्दित रहकर आत्मिक जीवन में स्वयं भी आगे बढ़ते रहें तथा दूसरों को भी बढ़ाते रहें। - डेविड मैक्कैसलैंड


मसीह यीशु से सीखें, फिर दूसरों को उसके बारे में सिखाएं।

... उदास मत रहो, क्योंकि यहोवा का आनन्द तुम्हारा दृढ़ गढ़ है। - नहेम्याह 8:10

बाइबल पाठ: फिलिप्पियों 1:12-18; 3:8-11
Philippians 1:12 हे भाइयों, मैं चाहता हूं, कि तुम यह जान लो, कि मुझ पर जो बीता है, उस से सुसमाचार ही की बढ़ती हुई है। 
Philippians 1:13 यहां तक कि कैसरी राज्य की सारी पलटन और शेष सब लोगों में यह प्रगट हो गया है कि मैं मसीह के लिये कैद हूं। 
Philippians 1:14 और प्रभु में जो भाई हैं, उन में से बहुधा मेरे कैद होने के कारण, हियाव बान्‍ध कर, परमेश्वर का वचन निधड़क सुनाने का और भी हियाव करते हैं। 
Philippians 1:15 कितने तो डाह और झगड़े के कारण मसीह का प्रचार करते हैं और कितने भली मनसा से। 
Philippians 1:16 कई एक तो यह जान कर कि मैं सुसमाचार के लिये उत्तर देने को ठहराया गया हूं प्रेम से प्रचार करते हैं। 
Philippians 1:17 और कई एक तो सीधाई से नहीं पर विरोध से मसीह की कथा सुनाते हैं, यह समझ कर कि मेरी कैद में मेरे लिये क्‍लेश उत्पन्न करें। 
Philippians 1:18 सो क्या हुआ? केवल यह, कि हर प्रकार से चाहे बहाने से, चाहे सच्चाई से, मसीह की कथा सुनाई जाती है, और मैं इस से आनन्‍दित हूं, और आनन्‍दित रहूंगा भी। 
Philippians 3:8 वरन मैं अपने प्रभु मसीह यीशु की पहिचान की उत्तमता के कारण सब बातों को हानि समझता हूं: जिस के कारण मैं ने सब वस्‍तुओं की हानि उठाई, और उन्हें कूड़ा समझता हूं, जिस से मैं मसीह को प्राप्त करूं। 
Philippians 3:9 और उस में पाया जाऊं; न कि अपनी उस धामिर्कता के साथ, जो व्यवस्था से है, वरन उस धामिर्कता के साथ जो मसीह पर विश्वास करने के कारण है, और परमेश्वर की ओर से विश्वास करने पर मिलती है। 
Philippians 3:10 और मैं उसको और उसके मृत्युंजय की सामर्थ को, और उसके साथ दुखों में सहभागी हाने के मर्म को जानूँ, और उस की मृत्यु की समानता को प्राप्त करूं। 
Philippians 3:11 ताकि मैं किसी भी रीति से मरे हुओं में से जी उठने के पद तक पहुंचूं।

एक साल में बाइबल: 
  • 2 इतिहास 21-22
  • यूहन्ना 14