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Wednesday, July 15, 2015

अन्त


   मैं यह स्वीकारता हूँ कि कभी कभी मैं किसी पुस्तक के अन्त को पहले पढ़ लेता हूँ और फिर उसे आरंभ से पढ़ना शुरू करता हूँ। ऐसा करने से मैं यह जान लेता हूँ कि कौन से पात्र अन्त तक बने रहेंगे और कौन से कहानी के बढ़ने के दौरान कहीं रह जाएंगे। यह जानकर कि पुस्तक का अन्त कैसा होगा, मैं आराम से मज़ा ले लेकर उस कहानी को पढ़ने पाता हूँ, कहानी के बढ़ने के साथ साथ उसके पात्रों के चरित्रों के उजागर होने का आनन्द लेने पाता हूँ।

   इसी प्रकार परमेश्वर के वचन बाइबल की अन्तिम पुस्तक, प्रकाशितवाक्य को पढ़ने से हम मसीही विश्वासी प्रोत्साहन और शांति पा सकते हैं। बाइबल बारंबार हम मसीहियों को परिस्थितियों पर जयवन्त होने के लिए कहती है (1 यूहन्ना 4:4; 5:4; प्रकाशितवाक्य 2:7,11,17,26; 3:5,12,21), और बाइबल की अन्तिम पुस्तक हमें बताती है कि प्रभु यीशु में होकर हम ना केवल वर्तमान में जयवन्त रह सकते हैं वरन अपने प्रभु में होकर हम अनन्त काल तक जयवन्त तथा आशीषित बने रहेंगे।

   प्रकाशितवाक्य का लेखक यूहन्ना जब नए आकाश और नई पृथ्वी के प्रकट होने की बात लिखता है (प्रकाशितवाक्य 21:1), तब वह इसका भी वर्णन करता है कि प्रभु यीशु को अपना उद्धारकर्ता स्वीकार कर लेने वालों के लिए वह अन्तिम विजय कैसी होगी। उस अन्तिम विजय के समय हम देखेंगे कि प्रभु सदा हमारे साथ रहेगा (पद 3), मृत्यु, आँसु, दुख और पीड़ा का अन्त हो जाएगा (पद 4), वह हमारे लिए सब कुछ नया कर देगा (पद 5); साथ ही प्रभु यह भी घोषणा करता है कि, "जो जय पाए, वही इन वस्‍तुओं का वारिस होगा; और मैं उसका परमेश्वर होऊंगा, और वह मेरा पुत्र होगा" (प्रकाशितवाक्य 21:7)।

   जब आज की परीक्षाएं आपको अपने सहने की सामर्थ से बढ़कर लगें, तो प्रभु द्वारा हमें प्रकाशितवाक्य में दिखाए गए संसार, पाप और शैतान के अन्त पर ध्यान करें, और यह ध्यान रखें कि अन्त बहुत निकट है  और आप किसी भी समय अनन्त काल के लिए प्रभु यीशु के साथ होंगे, फिर वहाँ की शान्ति और आशीषों का कभी कोई अन्त नहीं होगा। - रैन्डी किल्गोर


आज की आशा के लिए अन्त, अर्थात परमेश्वर के साथ अनन्तकाल की आशीषों को स्मरण रखें।

बुद्धिमान महिमा को पाएंगे, और मूर्खों की बढ़ती अपमान ही की होगी। - नीतिवचन 3:35

बाइबल पाठ: प्रकाशितवाक्य 21:1-7
Revelation 21:1 फिर मैं ने नये आकाश और नयी पृथ्वी को देखा, क्योंकि पहिला आकाश और पहिली पृथ्वी जाती रही थी, और समुद्र भी न रहा। 
Revelation 21:2 फिर मैं ने पवित्र नगर नये यरूशलेम को स्वर्ग पर से परमेश्वर के पास से उतरते देखा, और वह उस दुल्हिन के समान थी, जो अपने पति के लिये सिंगार किए हो। 
Revelation 21:3 फिर मैं ने सिंहासन में से किसी को ऊंचे शब्द से यह कहते सुना, कि देख, परमेश्वर का डेरा मनुष्यों के बीच में है; वह उन के साथ डेरा करेगा, और वे उसके लोग होंगे, और परमेश्वर आप उन के साथ रहेगा; और उन का परमेश्वर होगा। 
Revelation 21:4 और वह उन की आंखों से सब आंसू पोंछ डालेगा; और इस के बाद मृत्यु न रहेगी, और न शोक, न विलाप, न पीड़ा रहेगी; पहिली बातें जाती रहीं। 
Revelation 21:5 और जो सिंहासन पर बैठा था, उसने कहा, कि देख, मैं सब कुछ नया कर देता हूं: फिर उसने कहा, कि लिख ले, क्योंकि ये वचन विश्वास के योग्य और सत्य हैं। 
Revelation 21:6 फिर उसने मुझ से कहा, ये बातें पूरी हो गई हैं, मैं अलफा और ओमिगा, आदि और अन्‍त हूं: मैं प्यासे को जीवन के जल के सोते में से सेंतमेंत पिलाऊंगा। 
Revelation 21:7 जो जय पाए, वही इन वस्‍तुओं का वारिस होगा; और मैं उसका परमेश्वर होऊंगा, और वह मेरा पुत्र होगा।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 13-15
  • प्रेरितों 19:21-41