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Wednesday, September 2, 2015

काम


   काम से संबंधित परमेश्वर के वचन बाइबल के खण्डों में से मेरा एक प्रीय खण्ड है नहेम्याह 1-2। नहेम्याह राजा अर्तक्षत्र का कर्मचारी था; नहेम्याह का काम कोई साधारण काम नहीं था, वह राजा को पिलानेहारा था, एक ऐसा व्यक्ति जो राजा को विष से बचाने के लिए पहले स्वयं चखकर फिर ही राजा को कुछ पीने को देता था। ऐसा ज़िम्मेदारी का कार्य करने के लिए नहेम्याह ने बहुत कड़ी मेहनत करी होगी, अपने जीवन से परमेश्वर को आदर दिया होगा। राजा उसके कार्य से इतना प्रसन्न था कि जब नहेम्याह यरूशालेम कि दुर्दशा को लेकर परेशान हुआ तो राजा ने उसकी उदासी का कारण पूछा तथा यरुशालेम की हालत को सुधारने के लिए नहेम्याह की सहायता करने का निर्णय ले लिया।

   परमेश्वर हमारे कार्य और कार्य करने के तरीके पर ध्यान रखता है। बाइबल में लिखा है, "और जो कुछ तुम करते हो, तन मन से करो, यह समझ कर कि मनुष्यों के लिये नहीं परन्तु प्रभु के लिये करते हो" (कुलुस्सियों 3:23)। इस बात को पूरा करने के लिए हम नहेम्याह के जीवन से सीख सकते हैं, और ऐसे कार्यकर्ता बन सकते हैं जिसके जीवन से परमेश्वर की महिमा होती है। अपने कार्य में दूसरों की चिन्ता करना और अपने कार्य से परमेश्वर को महिमा देना, जो परमेश्वर को पसन्द है उसे करने के लिए जोखिम उठाना तथा अपने साथ के लोगों का आदर करना आदि वे बातें हैं जो हम नहेम्याह के जीवन से सीख सकते हैं।

   जब हम अपने कार्य में परमेश्वर को आदर देते हैं, तो हमारे नियोक्ताओं का ध्यान हम पर आ सकता है; परन्तु चाहे ऐसा ना भी हो, फिर भी हमारे मन की चाह और हमारे कार्य का उद्देश्य उस परमेश्वर को आदर देना होना चाहिए अन्ततः जिस की हम सेवकाई करते हैं (कुलुस्सियों 3:17, 23)। - रैण्डी किल्गोर


परमेश्वर विश्वास का आदर करता है क्योंकि विश्वास परमेश्वर का आदर करता है।

और वचन से या काम से जो कुछ भी करो सब प्रभु यीशु के नाम से करो, और उसके द्वारा परमेश्वर पिता का धन्यवाद करो। - कुलुस्सियों 3:17 

बाइबल पाठ: नहेम्याह 2:1-8
Nehemiah 2:1 अर्तक्षत्र राजा के बीसवें वर्ष के नीसान नाम महीने में, जब उसके साम्हने दाखमधु था, तब मैं ने दाखमधु उठा कर राजा को दिया। इस से पहिले मैं उसके साम्हने कभी उदास न हुआ था। 
Nehemiah 2:2 तब राजा ने मुझ से पूछा, तू तो रोगी नहीं है, फिर तेरा मुंह क्यों उतरा है? यह तो मन ही की उदासी होगी। 
Nehemiah 2:3 तब मैं अत्यन्त डर गया। और राजा से कहा, राजा सदा जीवित रहे! जब वह नगर जिस में मेरे पुरखाओं की कबरें हैं, उजाड़ पड़ा है और उसके फाटक जले हुए हैं, तो मेरा मुंह क्यों न उतरे? 
Nehemiah 2:4 राजा ने मुझ से पूछा, फिर तू क्या मांगता है? तब मैं ने स्वर्ग के परमेश्वर से प्रार्थना कर के, राजा से कहा; 
Nehemiah 2:5 यदि राजा को भाए, और तू अपने दास से प्रसन्न हो, तो मुझे यहूदा और मेरे पुरखाओं की कबरों के नगर को भेज, ताकि मैं उसे बनाऊं। 
Nehemiah 2:6 तब राजा ने जिसके पास रानी भी बैठी थी, मुझ से पूछा, तू कितने दिन तक यात्रा में रहेगा? और कब लैटेगा? सो राजा मुझे भेजने को प्रसन्न हुआ; और मैं ने उसके लिये एक समय नियुक्त किया। 
Nehemiah 2:7 फिर मैं ने राजा से कहा, यदि राजा को भाए, तो महानद के पार के अधिपतियों के लिये इस आशय की चिट्ठियां मुझे दी जाएं कि जब तक मैं यहूदा को न पहुंचूं, तब तक वे मुझे अपने अपने देश में से हो कर जाने दें। 
Nehemiah 2:8 और सरकारी जंगल के रख वाले आसाप के लिये भी इस आशय की चिट्ठी मुझे दी जाए ताकि वह मुझे भवन से लगे हुए राजगढ़ की कडिय़ों के लिये, और शहरपनाह के, और उस घर के लिये, जिस में मैं जा कर रहूंगा, लकड़ी दे। मेरे परमेश्वर की कृपादृष्टि मुझ पर थी, इसलिये राजा ने यह बिनती ग्रहण किया।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 137-139
  • 1 कुरिन्थियों 13