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Thursday, September 10, 2015

सराहना और आलोचना


   हाल ही में हुए एक अध्ययन में 200,000 लोगों से साक्षात्कार में पूछा गया कि उनको और बेहतर कार्य करने से क्या रोकता है और अध्ययन के नतीजों से पता चला कि इस प्रश्न के उत्तरों की सूचि में सबसे ऊपर था कार्यकर्ताओं के अधिकारियों द्वारा उनके कार्य की सराहना एवं उनमें अधिकारियों के विश्वास की कमी। इस शोध ने दिखाया कि सराहना पाना एक बुनियादी मानवीय आवश्यकता है।

   प्रेरित पौलुस भी संभवतः कुरिन्थियों के मसीही विश्वासियों कि इस मूलभूत आवश्यकता को जानता था, इसीलिए उन्हें सुधारने के लिए लिखी गई पत्री का आरंभ, उनका आत्मिक अगुवा होने के कारण पौलुस ने परमेश्वर द्वारा उनके जीवन में दिखाए जाने वाले अनुग्रह के लिए धन्यवाद करने के साथ किया, फिर पौलुस ने कुरिन्थुस के मसीही विश्वासियों की सराहना करी, उसके बाद ही उसने अनुशासन के लिए कठोर शब्दों का प्रयोग किया।

   कभी कुरिन्थुस के ये मसीही विश्वासी परमेश्वर से दूर थे, लेकिन अब प्रभु यीशु के बलिदान और पुनरुत्थान द्वारा समस्त संसार को उपलब्ध पापों की क्षमा को परमेश्वर के अनुग्रह द्वारा प्राप्त करके वे परमेश्वर की निकटता में बढ़ रहे थे। प्रभु यीशु के साथ बने संबंध में हो कर वे उससे अपने आत्मिक जीवन के लिए सामर्थ प्राप्त कर रहे थे जिससे उनका आध्यात्मिक विकास हो रहा था (1 कुरिन्थियों 1:4-7)। कुरिन्थुस के मसीही विश्वासियों के जीवन में किए जा रहे परमेश्वर के कार्य के लिए पौलुस लगातार और विचारपूर्वक परमेश्वर का धन्यवादी रहता था। क्योंकि कुरिन्थुस के वे विश्वासी उनके लिए पौलुस के इस प्रेम, विश्वास और सराहना को भली-भांति जानते थे, इसलिए उन्होंने उससे आलोचना के कठोर शब्द भी स्वीकार कर लिए।

   जब भी हम परमेश्वर के आज्ञाकारी लोगों के संपर्क में आते हैं, और हमें उनके जीवन में कुछ कमियों का आभास होता है तो आलोचना से पहले उनके लिए परमेश्वर का धन्यवाद करें, उनके द्वारा परमेश्वर के लिए हो रहे कार्यों की सराहना करें, और उसके बाद ही किसी आलोचना के लिए कोई कठोर शब्द प्रयोग करें। - मारविन विलियम्स


प्रशंसा ऊँची आवाज़ में करें; आलोचना धीमी आवाज़ में मृदुता के साथ करें।

वह वहां पहुंचकर, और परमेश्वर के अनुग्रह को देखकर आनन्‍दित हुआ; और सब को उपदेश दिया कि तन मन लगाकर प्रभु से लिपटे रहो। - प्रेरितों 11:23

बाइबल पाठ: 1 कुरिन्थियों 1:1-9
1 Corinthians 1:1 पौलुस की ओर से जो परमेश्वर की इच्छा से यीशु मसीह का प्रेरित होने के लिये बुलाया गया और भाई सोस्थिनेस की ओर से। 
1 Corinthians 1:2 परमेश्वर की उस कलीसिया के नामि जो कुरिन्थुस में है, अर्थात उन के नाम जो मसीह यीशु में पवित्र किए गए, और पवित्र होने के लिये बुलाए गए हैं; और उन सब के नाम भी जो हर जगह हमारे और अपने प्रभु यीशु मसीह के नाम की प्रार्थना करते हैं।
1 Corinthians 1:3 हमारे पिता परमेश्वर और प्रभु यीशु मसीह की ओर से तुम्हें अनुग्रह और शान्‍ति मिलती रहे।
1 Corinthians 1:4 मैं तुम्हारे विषय में अपने परमेश्वर का धन्यवाद सदा करता हूं, इसलिये कि परमेश्वर का यह अनुग्रह तुम पर मसीह यीशु में हुआ। 
1 Corinthians 1:5 कि उस में हो कर तुम हर बात में अर्थात सारे वचन और सारे ज्ञान में धनी किए गए। 
1 Corinthians 1:6 कि मसीह की गवाही तुम में पक्की निकली। 
1 Corinthians 1:7 यहां तक कि किसी वरदान में तुम्हें घटी नहीं, और तुम हमारे प्रभु यीशु मसीह के प्रगट होने की बाट जोहते रहते हो। 
1 Corinthians 1:8 वह तुम्हें अन्‍त तक दृढ़ भी करेगा, कि तुम हमारे प्रभु यीशु मसीह के दिन में निर्दोष ठहरो। 
1 Corinthians 1:9 परमेश्वर सच्चा है; जिसने तुम को अपने पुत्र हमारे प्रभु यीशु मसीह की संगति में बुलाया है।

एक साल में बाइबल: 
  • नीतिवचन 8-9
  • 2 कुरिन्थियों 3