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Saturday, October 3, 2015

सांत्वना


   बहुत साल पहले की बात है, मैं एक संस्थान में नया मानव संसाधन प्रबंधक लगा था, और मुझे उस संस्थान में लंबे समय से काम करने वाले एक राजमिस्त्री के अन्तिम संसकार में जाना पड़ा, जिससे मेरी कभी मुलाकात नहीं हुई थी। यद्यपि वह राजमिस्त्री अपने साथी कर्मचारियों में लोकप्रीय था, लेकिन उसकी विध्वा के पास शोक व्यक्त करने बहुत कम लोग आए। मैं सुन रहा था कि कोई उसकी विध्वा को सांत्वना देते हुए समझा रहा था कि बहुत से लोग इसलिए पास नहीं आते क्योंकि ऐसे अवसरों पर उन्हें कुछ कहने, या करने में डर लगता है कि कहीं वे कुछ गलत या अनुप्युक्त ना कह या कर दें, और शोक संतप्त परिवार के दुख और बढ़ा ना दें।

   लेकिन दुख और व्यथा के समयों में शोकित लोगों को कम ही स्मरण रहता है कि किसने क्या कहा या किया; जो उन्हें स्मरण रहता है वह है कि कौन उनके पास आया। इन शोक के समयों में परिचित चेहरों और लोगों को देखने से वर्णन से बाहर सहारा मिलता है; उस हानि के कारण उत्पन्न होने वाले एकाकीपन से राहत तथा सांत्वना देने में परिचित लोगों की उपस्थिति बहुत सहायक होती है। चाहे हम उस स्थिति में मौन ही रहें और बेचैन अनुभव करें, लेकिन शोकित जन के निकट हमारी उपस्थिति एक उपहार के समान होती है।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में एक ऐसी ही घटना का उल्लेख है; मरियम और मार्था के भाई लाज़र का देहाँत हो गया था और मित्रगण तथा शोक मनाने वाले उनके साथ थे (यूहन्ना 11:19)। फिर वह आया जिसे वे दोनों देखने की बहुत लालसा रखती थीं - प्रभु यीशु; वह उनके पास आया और उनके दुख में उनके साथ रोया भी (पद 33-35)। यह देखकर वहाँ जमा "यहूदी कहने लगे, देखो, वह उस से कैसी प्रीति रखता था" (यूहन्ना 11:36)।

   किसी भी हानि में प्रभु यीशु की उपस्थिति सदा ही सांत्वना देने वाली होती है; और हमारे प्रभु ने हमें भी यह ज़िम्मेदारी सौंपी है कि जैसे वह हमें सांत्वना देता है, हम भी उन्हें जो दुखों में हैं सांत्वना दें (2 कुरिन्थियों 1:3-4)। - रैंडी किलगोर


अकसर शोकित के पास उपस्थित होना ही उसके लिए सबसे सांत्वनादायक होता है।

हमारे प्रभु यीशु मसीह के परमेश्वर, और पिता का धन्यवाद हो, जो दया का पिता, और सब प्रकार की शान्‍ति का परमेश्वर है। वह हमारे सब क्‍लेशों में शान्‍ति देता है; ताकि हम उस शान्‍ति के कारण जो परमेश्वर हमें देता है, उन्हें भी शान्‍ति दे सकें, जो किसी प्रकार के क्‍लेश में हों। - 2 कुरिन्थियों 1:3-4

बाइबल पाठ: यूहन्ना 11:14-27
John 11:14 तब यीशु ने उन से साफ कह दिया, कि लाजर मर गया है। 
John 11:15 और मैं तुम्हारे कारण आनन्‍दित हूं कि मैं वहां न था जिस से तुम विश्वास करो, परन्तु अब आओ, हम उसके पास चलें। 
John 11:16 तब थोमा ने जो दिदुमुस कहलाता है, अपने साथ के चेलों से कहा, आओ, हम भी उसके साथ मरने को चलें। 
John 11:17 सो यीशु को आकर यह मालूम हुआ कि उसे कब्र में रखे चार दिन हो चुके हैं। 
John 11:18 बैतनिय्याह यरूशलेम के समीप कोई दो मील की दूरी पर था। 
John 11:19 और बहुत से यहूदी मारथा और मरियम के पास उन के भाई के विषय में शान्‍ति देने के लिये आए थे। 
John 11:20 सो मारथा यीशु के आने का समाचार सुनकर उस से भेंट करने को गई, परन्तु मरियम घर में बैठी रही। 
John 11:21 मारथा ने यीशु से कहा, हे प्रभु, यदि तू यहां होता, तो मेरा भाई कदापि न मरता। 
John 11:22 और अब भी मैं जानती हूं, कि जो कुछ तू परमेश्वर से मांगेगा, परमेश्वर तुझे देगा। 
John 11:23 यीशु ने उस से कहा, तेरा भाई जी उठेगा। 
John 11:24 मारथा ने उस से कहा, मैं जानती हूं, कि अन्‍तिम दिन में पुनरुत्थान के समय वह जी उठेगा। 
John 11:25 यीशु ने उस से कहा, पुनरुत्थान और जीवन मैं ही हूं, जो कोई मुझ पर विश्वास करता है वह यदि मर भी जाए, तौभी जीएगा। 
John 11:26 और जो कोई जीवता है, और मुझ पर विश्वास करता है, वह अनन्तकाल तक न मरेगा, क्या तू इस बात पर विश्वास करती है? 
John 11:27 उसने उस से कहा, हां हे प्रभु, मैं विश्वास कर चुकी हूं, कि परमेश्वर का पुत्र मसीह जो जगत में आनेवाला था, वह तू ही है। 

एक साल में बाइबल: 
  • यशायाह 17-19
  • इफिसियों 5:17-33