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Sunday, October 11, 2015

सुन्दर


   एक व्यस्त राज्मार्ग पर स्थित वह एक साधारण सा दिखने वाला मकान था। उसकी बनावट या बाहरी रूप में कोई विशेष बात नहीं थी, और मार्ग से गुज़रते हुए लोगों द्वारा उसका नज़रंदाज़ होना कोई अनोखी बात नहीं थी। लेकिन एक दिन जब मैं उसके सामने से गुज़र रहा था तो मैंने घर के बाहर बड़े अक्षरों में लिखा देखा, "बिकाऊ है", और इसके नीचे उससे कुछ छोटे अक्षरों में लिखा था "अन्दर से सुन्दर"! मैं मकान खरीदने की फिराक में तो नहीं हूँ, लेकिन फिर भी मुझ में जिज्ञासा जागृत हुई कि भला ऐसा क्या होगा जो बाहर से साधारण से दिखने वाले इस मकान को अन्दर से सुन्दर बनाता है?

   इस संदर्भ में फिर यही जिज्ञासा मेरे आत्मिक जीवन के बारे में भी उठी; क्या एक मसीही विश्वासी होने के नाते मैं अपने जीवन के बाहर भी यही लिखकर लगा सकता हूँ? हम बाहार से चाहे जैसे दिखाई दें, क्या हम मसीही विश्वासियों के अन्दर वह भीतरी सुन्दरता नहीं होनी चाहिए जो हमारे जीवनों में हुए परमेश्वर के प्रेम और कार्य को दिखाती हो?

   परमेश्वर के वचन बाइबल से भीतरी सुन्दरता के बारे में कुछ बातों को देखें: रोम के मसीही विश्वासियों को लिखी अपनी पत्री में प्रेरित पौलुस कहता है, "क्योंकि मैं भीतरी मनुष्यत्व से तो परमेश्वर की व्यवस्था से बहुत प्रसन्न रहता हूं" (रोमियों 7:22); फिर कुछ और आगे चलकर वह परमेश्वर के पवित्रात्मा पर केंद्रित मन के विषय में लिखता है, "शरीर पर मन लगाना तो मृत्यु है, परन्तु आत्मा पर मन लगाना जीवन और शान्ति है" (रोमियों 8:6)। गलतिया के मसीही विश्वासियों को लिखी पत्री में पौलुस ने पवित्रात्मा को समर्पित भीतरी मनुष्यत्व के लिए लिखा कि उससे "आत्मा के फल" उत्पन्न होते हैं (गलतियों 5:22-23) जो जीवनों को सुसज्जित कर देते हैं।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में आनन्दित रहने और परमेश्वर के पवित्रात्मा को अपने जीवन में कार्यरत होने देने से हमारे अन्दर वह सुन्दरता आती है जिसे बनाए रखने के लिए हमें किसी कृत्रिम सांसारिक साधन का उपयोग नहीं करना पड़ेगा, जो हमारे जीवनों से परमेश्वर को महिमा देगी और कभी नाश नहीं होगी। - डेव ब्रैनन


मन की धार्मिकता चरित्र की सुन्दरता का निर्माण करती है।

पर आत्मा का फल प्रेम, आनन्द, मेल, धीरज, और कृपा, भलाई, विश्वास, नम्रता, और संयम हैं; ऐसे ऐसे कामों के विरोध में कोई भी व्यवस्था नहीं। - गलतियों 5:22-23 

बाइबल पाठ: रोमियों 8:1-11
Romans 8:1 सो अब जो मसीह यीशु में हैं, उन पर दण्ड की आज्ञा नहीं: क्योंकि वे शरीर के अनुसार नहीं वरन आत्मा के अनुसार चलते हैं। 
Romans 8:2 क्योंकि जीवन की आत्मा की व्यवस्था ने मसीह यीशु में मुझे पाप की, और मृत्यु की व्यवस्था से स्वतंत्र कर दिया। 
Romans 8:3 क्योंकि जो काम व्यवस्था शरीर के कारण दुर्बल हो कर न कर सकी, उसको परमेश्वर ने किया, अर्थात अपने ही पुत्र को पापमय शरीर की समानता में, और पाप के बलिदान होने के लिये भेज कर, शरीर में पाप पर दण्ड की आज्ञा दी। 
Romans 8:4 इसलिये कि व्यवस्था की विधि हम में जो शरीर के अनुसार नहीं वरन आत्मा के अनुसार चलते हैं, पूरी की जाए। 
Romans 8:5 क्योंकि शरीरिक व्यक्ति शरीर की बातों पर मन लगाते हैं; परन्तु आध्यात्मिक आत्मा की बातों पर मन लगाते हैं। 
Romans 8:6 शरीर पर मन लगाना तो मृत्यु है, परन्तु आत्मा पर मन लगाना जीवन और शान्ति है। 
Romans 8:7 क्योंकि शरीर पर मन लगाना तो परमेश्वर से बैर रखना है, क्योंकि न तो परमेश्वर की व्यवस्था के आधीन है, और न हो सकता है। 
Romans 8:8 और जो शारीरिक दशा में है, वे परमेश्वर को प्रसन्न नहीं कर सकते। 
Romans 8:9 परन्तु जब कि परमेश्वर का आत्मा तुम में बसता है, तो तुम शारीरिक दशा में नहीं, परन्तु आत्मिक दशा में हो। यदि किसी में मसीह का आत्मा नहीं तो वह उसका जन नहीं। 
Romans 8:10 और यदि मसीह तुम में है, तो देह पाप के कारण मरी हुई है; परन्तु आत्मा धर्म के कारण जीवित है। 
Romans 8:11 और यदि उसी का आत्मा जिसने यीशु को मरे हुओं में से जिलाया तुम में बसा हुआ है; तो जिसने मसीह को मरे हुओं में से जिलाया, वह तुम्हारी मरनहार देहों को भी अपने आत्मा के द्वारा जो तुम में बसा हुआ है जिलाएगा। 

एक साल में बाइबल: 
  • यशायाह 37-38
  • कुलुस्सियों 3