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Tuesday, October 13, 2015

अतीत


   प्रिज़न फ़ेलोशिप (कारावास सेवकाई) के संस्थापक, चक कोल्सन ने जीवन के 40 वर्ष लोगों तक प्रभु यीशु का सुसमाचार पहुँचाने और सुनाने का कार्य किया। जब अप्रैल 2012 में उनका देहान्त हुआ तो एक समाचार पत्र ने मुखपृष्ठ पर इसे मुख्यसमाचार बनाकर इस शीर्षक के साथ छापा: "राष्ट्रपति निक्सन के लिए कुकृत्य करने वाले चार्ल्स कोल्सन का 80 वर्ष की आयु में देहान्त।" यह अचंभित करने वाली बात थी कि प्रभु यीशु को जीवन समर्पण करने से दशकों पहले और केवल कुछ समय तक अपने राजनैतिक स्वामियों के लिए अनैतिक और अन्यायसंगत कार्य करने के कारण कोल्सन की प्रभु यीशु के लिए करी गई सेवा और समर्पण का जीवन नज़रन्दाज़ कर दिया गया; प्रभु यीशु को जानने और मानने से उनके जीवन में आए आमूलचूल परिवर्तन को कोई महत्व नहीं दिया गया, उन्हें उनके अतीत के कुकर्मों के साथ ही स्मरण किया गया।

   प्रेरित पौलुस के मसीही विश्वास में आने और प्रभु यीशु द्वारा परिवर्तित होने को भी आरंभ में लोगों ने सन्देह और भय के साथ देखा क्योंकि वह पहले मसीही विश्वासियों को सतानेवाला व्यक्ति था। जब पौलुस ने प्रभु यीशु का प्रचार करना और यह बताना आरंभ किया कि वह ही परमेश्वर का पुत्र है तो लोगों ने कहा, "...क्या यह वही व्यक्ति नहीं है जो यरूशलेम में उन्हें जो इस नाम को लेते थे नाश करता था, और यहां भी इसी लिये आया था, कि उन्हें बान्‍ध कर महायाजकों के पास ले आए?" (प्रेरितों 9:21)। जब पौलुस ने यरुशालेम जाकर प्रभु यीशु के चेलों के साथ जुड़ना चाहा, तो उन्होंने उसका विश्वास नहीं किया, वरन वे उससे डरते रहे। बाद के समयों में पौलुस ने कभी अपने अतीत को भुलाया नहीं, लेकिन अपने बीते समयों के कुकृत्यों से मिली बदनामी के वर्णन को परमेश्वर के अनुग्रह के प्रमाण के रूप में इस्तेमाल किया (1 तिमुथियुस 1:13-14)।

   पौलुस के समान हमें अपने अतीत की असफलताओं का प्रदर्शन करने की आवश्यकता नहीं है, और ना ही यह जताने का प्रयास करना चाहिए कि मानो वे गलत कार्य हमसे हुए ही नहीं। लेकिन हम परमेश्वर का धन्यवाद कर सकते हैं कि उसके प्रेम, अनुग्रह और सामर्थ से प्रभु यीशु में होकर हमारे पाप क्षमा किए गए, हमारे अतीत के दुषपरिणाम मिटा दिए गए, हमारा वर्तमान बदल दिया गया, हमारे भविष्य को आशा और अनन्त आशीष के साथ ज्योतिर्मय कर दिया गया है और स्वर्ग में हमारे लिए एक अजर, अमर और अनन्त मीरास तैयार रखी गई है। - डेविड मैक्कैसलैंड


केवल प्रभु यीशु ही जीवन परिवर्तित कर सकता है।

क्योंकि मैं प्रेरितों में सब से छोटा हूं, वरन प्रेरित कहलाने के योग्य भी नहीं, क्योंकि मैं ने परमेश्वर की कलीसिया को सताया था। परन्तु मैं जो कुछ भी हूं, परमेश्वर के अनुग्रह से हूं: और उसका अनुग्रह जो मुझ पर हुआ, वह व्यर्थ नहीं हुआ परन्तु मैं ने उन सब से बढ़कर परिश्रम भी किया: तौभी यह मेरी ओर से नहीं हुआ परन्तु परमेश्वर के अनुग्रह से जो मुझ पर था। - 1 कुरिन्थियों 15:9-10

बाइबल पाठ: प्रेरितों 9:20-30
Acts 9:20 और वह तुरन्त आराधनालयों में यीशु का प्रचार करने लगा, कि वह परमेश्वर का पुत्र है। 
Acts 9:21 और सब सुनने वाले चकित हो कर कहने लगे; क्या यह वही व्यक्ति नहीं है जो यरूशलेम में उन्हें जो इस नाम को लेते थे नाश करता था, और यहां भी इसी लिये आया था, कि उन्हें बान्‍ध कर महायाजकों के पास ले आए? 
Acts 9:22 परन्तु शाऊल और भी सामर्थी होता गया, और इस बात का प्रमाण दे देकर कि मसीह यही है, दमिश्क के रहने वाले यहूदियों का मुंह बन्‍द करता रहा।
Acts 9:23 जब बहुत दिन बीत गए, तो यहूदियों ने मिलकर उसके मार डालने की युक्ति निकाली। 
Acts 9:24 परन्तु उन की युक्ति शाऊल को मालूम हो गई: वे तो उसके मार डालने के लिये रात दिन फाटकों पर लगे रहे थे। 
Acts 9:25 परन्तु रात को उसके चेलों ने उसे ले कर टोकरे में बैठाया, और शहरपनाह पर से लटका कर उतार दिया।
Acts 9:26 यरूशलेम में पहुंचकर उसने चेलों के साथ मिल जाने का उपाय किया: परन्तु सब उस से डरते थे, क्योंकि उन को प्रतीति न होता था, कि वह भी चेला है। 
Acts 9:27 परन्तु बरनबास उसे अपने साथ प्रेरितों के पास ले जा कर उन से कहा, कि इस ने किस रीति से मार्ग में प्रभु को देखा, और इस ने इस से बातें कीं; फिर दमिश्क में इस ने कैसे हियाव से यीशु के नाम का प्रचार किया। 
Acts 9:28 वह उन के साथ यरूशलेम में आता जाता रहा। 
Acts 9:29 और निधड़क हो कर प्रभु के नाम से प्रचार करता था: और यूनानी भाषा बोलने वाले यहूदियों के साथ बातचीत और वाद-विवाद करता था; परन्तु वे उसके मार डालने का यत्‍न करने लगे। 
Acts 9:30 यह जानकर भाई उसे कैसरिया में ले आए, और तरसुस को भेज दिया।

एक साल में बाइबल: 
  • यशायाह 41-42
  • 1 थिस्सलुनीकियों 1