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Friday, November 27, 2015

जीवन जल


   पृथ्वी के सबसे निर्जल स्थानों में से एक है पूर्वी अफ्रीका; इसीलिए उस इलाके के एक शहर का नाम "नैरिबी" होना बहुत रोचक बात है। यह नाम उस इलाके के एक कबीले, मसाई, की भाषा के एक वाक्यंश, जिसका अर्थ होता है "ठंडा पानी" से लिया गया है और नैरोबी का अर्थ है "जल का स्थान"।

   संसार के इतिहास में जल की उपस्थिति सदैव ही जीवन-दायक और सामरिक रही है। चाहे कोई निर्जल रेगिस्तान में रहे या फिर वर्षा-वन में, जीवन के लिए पानी का कोई विकल्प नहीं है; बिना जल के जीवन संभव नहीं है। किसी सूखे पर्यावरण वाले उजाड़ स्थान पर पानी के स्त्रोत का पता होना जीवन और मृत्यु को निर्धारित करता है।

   हमारे आत्मिक जीवन में भी कुछ बातें हैं जिनका कोई विकल्प नहीं है। इसीलिए जब एक कुएं पर प्रभु यीशु का साक्षात्कार एक आत्मिक रीति से प्यासी स्त्री से हुआ तो उन्होंने उससे कहा कि जिस जीवन जल की उसे आवश्यकता है वह जल उसे केवल वे ही दे सकते हैं। प्रभु ने उस स्त्री से कहा, "परन्तु जो कोई उस जल में से पीएगा जो मैं उसे दूंगा, वह फिर अनन्तकाल तक प्यासा न होगा: वरन जो जल मैं उसे दूंगा, वह उस में एक सोता बन जाएगा जो अनन्त जीवन के लिये उमड़ता रहेगा" (यूहन्ना 4:14)।

   हमारे मन परमेश्वर के लिए वैसे ही प्यासे होने चाहिएं जैसे जल के लिए हाँफने वाली प्यासी हिरणी की उपमा परमेश्वर के वचन बाइबल में दी गई है (भजन 42:1-2)। हमारी आत्मा केवल उस पोषण से ही तृप्त हो सकती है जो हमें प्रभु यीशु से मिलता है; क्योंकि केवल प्रभु यीशु ही जीवन जल का वह स्त्रोत है जो सबके मनों को तरोताज़ा कर सकता है, नया जीवन प्रदान कर सकता है, अनन्तकाल के लिए सन्तुष्ट कर सकता है। - बिल क्राउडर


प्रभु यीशु सारे संसार के सभी लोगों के लिए सेंत-मेंत उपलब्ध जीवन जल का सोता है।

हे परमेश्वर, तू मेरा ईश्वर है, मैं तुझे यत्न से ढूंढूंगा; सूखी और निर्जल ऊसर भूमि पर, मेरा मन तेरा प्यासा है, मेरा शरीर तेरा अति अभिलाषी है। - भजन 63:1

बाइबल पाठ: भजन 42:1-5
Psalms 42:1 जैसे हरिणी नदी के जल के लिये हांफती है, वैसे ही, हे परमेश्वर, मैं तेरे लिये हांफता हूं। 
Psalms 42:2 जीवते ईश्वर परमेश्वर का मैं प्यासा हूं, मैं कब जा कर परमेश्वर को अपना मुंह दिखाऊंगा? 
Psalms 42:3 मेरे आंसू दिन और रात मेरा आहार हुए हैं; और लोग दिन भर मुझ से कहते रहते हैं, तेरा परमेश्वर कहां है? 
Psalms 42:4 मैं भीड़ के संग जाया करता था, मैं जयजयकार और धन्यवाद के साथ उत्सव करने वाली भीड़ के बीच में परमेश्वर के भवन को धीरे धीरे जाया करता था; यह स्मरण कर के मेरा प्राण शोकित हो जाता है। 
Psalms 42:5 हे मेरे प्राण, तू क्यों गिरा जाता है? और तू अन्दर ही अन्दर क्यों व्याकुल है? परमेश्वर पर आशा लगाए रह; क्योंकि मैं उसके दर्शन से उद्धार पाकर फिर उसका धन्यवाद करूंगा।

एक साल में बाइबल: 
  • यहेजकेल 30-32
  • 1पतरस 4