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Thursday, March 31, 2016

जीवन जल


   यहाँ अमेरिका में, हम अमेरिका निवासी पिछ्ले अनेक वर्षों से बोतल-बन्द पानी पीने के आदि हो गए हैं, जबकि अधिकांश लोगों के पास नलों से साफ और सुरक्षित जल पाने की सुविधा है, लेकिन फिर भी लोग पानी खरीद कर ही पीना पसन्द करते हैं। लोगों को लगता है कि खरीदा गया पानी नल में आने वाले मुफ्त पानी से अच्छा है। जब एक सही चीज़ आपको निःशुल्क मिल रही है तो उसे खरीदने के लिए कीमत चुकाने की बात मेरी समझ में बिल्कुल नहीं आती।

   यही बात हमारे आत्मिक जीवन पर भी लागू होती है। अनेक लोगों के लिए पापों की क्षमा और उद्धार को परमेश्वर से मुफ्त मिलने वाले उपहार के रूप में स्वीकार करना बहुत कठिन है; वे उसे प्राप्त करने के लिए कुछ कीमत चुकाना चाहते हैं, अपने प्रयास करना चाहते हैं। लेकिन इस कीमत चुकाने की इच्छा के साथ समस्य यह है कि पापों की क्षमा और उद्धार बहुत महंगा है, और कोई ऐसा नहीं है जो इतनी कीमत चुका सके, क्योंकि इसे खरीद पाना पूर्ण सिद्धता द्वारा ही संभव है (मत्ती 19:21)। इसीलिए मानव इतिहास में उस एकमात्र व्यक्ति ने ही, जो मन-ध्यान-विचार तथा प्राण-देह आत्मा में पूर्णतः सिद्ध, निष्पाप और निषकलंक था (रोमियों 5:18), सब के लिए यह कीमत चुका कर इस क्षमा और उद्धार को सबके लिए मुफ्त उपहार के रूप में उपलब्ध करवा दिया है। अब जो भी एक प्यासे के समान जीवन का जल पीने के लिए उसके पास आता है, उसे वह अनन्त जीवन का यह जल सेंत-मेंत प्रदान करने का वायदा करता है (यूहन्ना 4:14; प्रकाशितवाक्य 21:6)।

   लेकिन फिर भी कुछ लोग अनन्त जीवन के इस जल को पाने के लिए कुछ कीमत चुकाने का प्रयास करते हैं, अपने भले कार्यों, उपकारों तथा दान-दक्षिणा के द्वारा। यद्यपि आत्मिक सेवा के ये कार्य परमेश्वर की नज़रों में भले और महत्वपूर्ण हैं, लेकिन इनके द्वारा परमेश्वर से पापों की क्षमा और उद्धार खरीदा नहीं जा सकता है। समस्त मानव जाति के सभी लोगों के लिए प्रभु यीशु ने अपने बलिदान द्वारा सभी के लिए यह कीमत चुका कर, अपने पुनरुत्थान द्वारा सबके लिए उद्धार का मार्ग खोल दिया है; अब दोबारा यह कीमत चुकाने का प्रयास करने की ना तो आवश्यक्ता है और ना ही यह कर पाना संभव है। परमेश्वर द्वारा जो उप्लब्ध करवा दिया गया है, उसे तो बस धन्यवाद के साथ ग्रहण ही किया जा सकता है।

   आज जो भी आत्मिक जीवन की प्यास बुझाने के लिए उस जीवन के जल की नदी प्रभु यीशु के पास पश्चाताप और विश्वास के साथ आता है, उसे परमेश्वर की ओर से यह जीवन जल भरपूरी के साथ सेंत-मेंत मिलता है। और अद्भुत बात यह है कि जो यह जीवन जल स्वीकार करता है, परमेश्वर का यह जीवन जल फिर उस व्यक्ति में होकर औरों के लिए भी प्रवाहित होने लग जाता है (यूहन्ना 7:37-38)। - जूली ऐकैरमन लिंक


प्रभु यीशु ही वह एक मात्र स्त्रोत है जो आत्मा की प्यास बुझा सकता है।

फिर पर्व के अंतिम दिन, जो मुख्य दिन है, यीशु खड़ा हुआ और पुकार कर कहा, यदि कोई प्यासा हो तो मेरे पास आकर पीए। जो मुझ पर विश्वास करेगा, जैसा पवित्र शास्त्र में आया है उसके हृदय में से जीवन के जल की नदियां बह निकलेंगी। - यूहन्ना 7:37-38

बाइबल पाठ: यूहन्ना 4:10-14; रोमियों 5:12-21
John 4:10 यीशु ने उत्तर दिया, यदि तू परमेश्वर के वरदान को जानती, और यह भी जानती कि वह कौन है जो तुझ से कहता है; मुझे पानी पिला तो तू उस से मांगती, और वह तुझे जीवन का जल देता। 
John 4:11 स्त्री ने उस से कहा, हे प्रभु, तेरे पास जल भरने को तो कुछ है भी नहीं, और कूआं गहिरा है: तो फिर वह जीवन का जल तेरे पास कहां से आया? 
John 4:12 क्या तू हमारे पिता याकूब से बड़ा है, जिसने हमें यह कूआं दिया; और आप ही अपने सन्तान, और अपने ढोरों समेत उस में से पीया? 
John 4:13 यीशु ने उसको उत्तर दिया, कि जो कोई यह जल पीएगा वह फिर प्यासा होगा। 
John 4:14 परन्तु जो कोई उस जल में से पीएगा जो मैं उसे दूंगा, वह फिर अनन्तकाल तक प्यासा न होगा: वरन जो जल मैं उसे दूंगा, वह उस में एक सोता बन जाएगा जो अनन्त जीवन के लिये उमड़ता रहेगा। 

Romans 5:12 इसलिये जैसा एक मनुष्य के द्वारा पाप जगत में आया, और पाप के द्वारा मृत्यु आई, और इस रीति से मृत्यु सब मनुष्यों में फैल गई, इसलिये कि सब ने पाप किया। 
Romans 5:13 क्योंकि व्यवस्था के दिए जाने तक पाप जगत में तो था, परन्तु जहां व्यवस्था नहीं, वहां पाप गिना नहीं जाता। 
Romans 5:14 तौभी आदम से ले कर मूसा तक मृत्यु ने उन लोगों पर भी राज्य किया, जिन्हों ने उस आदम के अपराध की नाईं जो उस आने वाले का चिन्ह है, पाप न किया। 
Romans 5:15 पर जैसा अपराध की दशा है, वैसी अनुग्रह के वरदान की नहीं, क्योंकि जब एक मनुष्य के अपराध से बहुत लोग मरे, तो परमेश्वर का अनुग्रह और उसका जो दान एक मनुष्य के, अर्थात यीशु मसीह के अनुग्रह से हुआ बहुतेरे लागों पर अवश्य ही अधिकाई से हुआ। 
Romans 5:16 और जैसा एक मनुष्य के पाप करने का फल हुआ, वैसा ही दान की दशा नहीं, क्योंकि एक ही के कारण दण्ड की आज्ञा का फैसला हुआ, परन्तु बहुतेरे अपराधों से ऐसा वरदान उत्पन्न हुआ, कि लोग धर्मी ठहरे।
Romans 5:17 क्योंकि जब एक मनुष्य के अपराध के कराण मृत्यु ने उस एक ही के द्वारा राज्य किया, तो जो लोग अनुग्रह और धर्म रूपी वरदान बहुतायत से पाते हैं वे एक मनुष्य के, अर्थात यीशु मसीह के द्वारा अवश्य ही अनन्त जीवन में राज्य करेंगे। 
Romans 5:18 इसलिये जैसा एक अपराध सब मनुष्यों के लिये दण्ड की आज्ञा का कारण हुआ, वैसा ही एक धर्म का काम भी सब मनुष्यों के लिये जीवन के निमित धर्मी ठहराए जाने का कारण हुआ। 
Romans 5:19 क्योंकि जैसा एक मनुष्य के आज्ञा न मानने से बहुत लोग पापी ठहरे, वैसे ही एक मनुष्य के आज्ञा मानने से बहुत लोग धर्मी ठहरेंगे। 
Romans 5:20 और व्यवस्था बीच में आ गई, कि अपराध बहुत हो, परन्तु जहां पाप बहुत हुआ, वहां अनुग्रह उस से भी कहीं अधिक हुआ। 
Romans 5:21 कि जैसा पाप ने मृत्यु फैलाते हुए राज्य किया, वैसा ही हमारे प्रभु यीशु मसीह के द्वारा अनुग्रह भी अनन्त जीवन के लिये धर्मी ठहराते हुए राज्य करे।

एक साल में बाइबल: 
  • न्यायियों 11-12
  • लूका 6:1-26


Wednesday, March 30, 2016

नम्र और दीन


   अंग्रज़ी भाषा के शब्द meek, अर्थात नम्र या दीन, के साथ समस्या है कि वह अंग्रेज़ी के एक अन्य शब्द weak, अर्थात दुर्बल से मेल खाता है, और सामन्यतः लोग इन दोनों शब्दों को एक दूसरे का पर्याय मानते आए हैं। एक प्रसिद्ध शब्दकोष ने meek की और विस्तृत परिभाषा देते हुए उसका अर्थ बताया है, "वह जो बहुत दब्बु है; जिसके ऊपर सरलता से हावी हुआ जा सकता है; जिसमें प्रतिरोध करने की शक्ति नहीं है; जिसमें आत्मसम्मान नहीं है।" ऐसी परिभाषाओं और आँकलन के सामने यह प्रश्न उठना स्वाभाविक है कि फिर प्रभु यीशु मसीह ने यह क्यों कहा कि, "धन्य हैं वे, जो नम्र हैं, क्योंकि वे पृथ्वी के अधिकारी होंगे" (मत्ती 5:5)।

   लेकिन प्रभु यीशु मसीह के इस शब्द को प्रयोग करने का तात्पर्य और वास्तविकता इस शब्द को लेकर प्रचलित आम नकारात्मक धारणा से बिलकुल विपरीत है। परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रयुक्त भाषाओं और शब्दों के प्रसिद्ध विद्वान डब्ल्यु. ई. वाईन इस शब्द के लिए मूल युनानी भाषा में प्रयुक्त हुए शब्द के बारे में बताते हैं कि "यह परमेश्वर के प्रति दिखाए गए रवैये का सूचक है, जिसमें हमारे प्रति परमेश्वर के हर व्यवहार और बर्ताव को हम भला मानकर विश्वास के साथ ग्रहण करते हैं और उसके लिए परमेश्वर से कोई विवाद या विरोध नहीं करते"। इस बात को हम प्रभु यीशु मसीह के जीवन, शिक्षाओं और कार्यों में प्रदर्शित होता देखते हैं; हम देखते हैं कि प्रभु यीशु पिता परमेश्वर की इच्छा को पूरी करने में ही आनन्दित होते थे, यह इच्छापूर्ति ही उनके जीवन का ध्येय था (इब्रानियों 10:7)।

   वाईन आगे कहते हैं कि, "जो दीनता प्रभु यीशु ने दिखाई और अपने अनुयायियों से दिखाने के लिए कहा वह ईश्वरीय सामर्थ का प्रतिफल है। प्रभु यीशु मसीह दीन इसलिए थे क्योंकि स्वर्ग के असीम संसाधन और परमेश्वर की असीम सामर्थ उन्हें उपलब्ध थीं।" यदि प्रभु चाहते तो स्वर्गदूतों की सेना उनके पकड़वाए जाने और क्रुस पर चढ़ाए जाने को कभी भी रोक सकती थीं (मत्ती 26:52-53)। लेकिन उन्होंने अपने संसाधनों और सामर्थ का प्रयोग स्वार्थसिधी अथवा अपनी भलाई के लिए नहीं वरन दूसरों की भलाई के लिए ही किया।

   प्रभु यीशु मसीह ने अपने अनुयायियों से कहा, "मेरा जूआ अपने ऊपर उठा लो; और मुझ से सीखो; क्योंकि मैं नम्र और मन में दीन हूं: और तुम अपने मन में विश्राम पाओगे" (मत्ती 11:29)। वे नम्र और दीन होने के सिद्ध नमूना थे।

   आज भी प्रभु यीशु हमें अपनी नम्रता और दीनता को ग्रहण करके उस से मिलने वाली शांति और सामर्थ का अनुभव करने के लिए बुला रहे हैं। - डेविड मैक्कैसलैंड


परमेश्वर के दो निवास-स्थान हैं, एक स्वर्ग और दूसरा दीन और धन्यवादी हृदय। - वॉल्टन

तब मैं ने कहा, देख, मैं आ गया हूं, (पवित्र शास्त्र में मेरे विषय में लिखा हुआ है) ताकि हे परमेश्वर तेरी इच्छा पूरी करूं। - इब्रानियों 10:7

बाइबल पाठ: मत्ती 5:1-10
Matthew 5:1 वह इस भीड़ को देखकर, पहाड़ पर चढ़ गया; और जब बैठ गया तो उसके चेले उसके पास आए। 
Matthew 5:2 और वह अपना मुंह खोल कर उन्हें यह उपदेश देने लगा, 
Matthew 5:3 धन्य हैं वे, जो मन के दीन हैं, क्योंकि स्वर्ग का राज्य उन्‍हीं का है। 
Matthew 5:4 धन्य हैं वे, जो शोक करते हैं, क्योंकि वे शांति पाएंगे। 
Matthew 5:5 धन्य हैं वे, जो नम्र हैं, क्योंकि वे पृथ्वी के अधिकारी होंगे। 
Matthew 5:6 धन्य हैं वे जो धर्म के भूखे और प्यासे हैं, क्योंकि वे तृप्त किये जाएंगे। 
Matthew 5:7 धन्य हैं वे, जो दयावन्‍त हैं, क्योंकि उन पर दया की जाएगी। 
Matthew 5:8 धन्य हैं वे, जिन के मन शुद्ध हैं, क्योंकि वे परमेश्वर को देखेंगे। 
Matthew 5:9 धन्य हैं वे, जो मेल करवाने वाले हैं, क्योंकि वे परमेश्वर के पुत्र कहलाएंगे। 
Matthew 5:10 धन्य हैं वे, जो धर्म के कारण सताए जाते हैं, क्योंकि स्वर्ग का राज्य उन्‍हीं का है।

एक साल में बाइबल: 
  • न्यायियों 9-10
  • लूका 5:17-39


Tuesday, March 29, 2016

बेहतर


   मेरे पसन्दीदा कार्टून श्रंखला Peanuts की एक पात्र है लूसी जो अपने आप को लेकर सदा ही अति आश्वस्त रहती है; एक कार्टून में लूसी को कहते दिखाया गया है, "जब मैं संसार में विद्यमान हूँ तो फिर संसार का बदतर होते जाना कैसे संभव हो सकता है? मेरे जन्म के बाद से ही संसार में होता जा रहा सुधार स्पष्ट दिखाई दे रहा है!"

   निशचय ही लूसी की बात असत्य तथा अतिश्योक्ति है, लेकिन जो उसने कहा वह काफी रुचिकर भी है। कैसा रहे यदि हम मसीही विश्वासी, जिस भी स्थान पर परमेश्वर ने हमें रखा है वहाँ अपने जीवन और व्यवहार से प्रभु यीशु के प्रेम को व्यावाहरिक रूप में दिखाएं? ऐसा करने से अवश्य ही हम अपने आस-पास के स्थान और समाज को बेहतर करने पाएंगे।

    जब प्रेरित पतरस ने अत्याचार सह रहे मसीही विश्वासियों को पत्री लिखी तो उन्हें प्रभु यीशु में लाए गए विश्वास के कारण परमेश्वर द्वारा उन्हें दिए गए विशिष्ट दर्जे का स्मरण दिलाया, तथा उन से कहा कि वे अपने भले चाल-चलन के द्वारा उन्हें सताने वाले उन अविश्वासियों के सामने अपने परमेश्वर की महिमा करें (1 पतरस 2:9-12)। दूसरे शब्दों में, हम मसीही विश्वासी अपने कार्यों से संसार को एक बेहतर स्थान बना सकते हैं। उस प्रभाव और परिवर्तन के बारे में ज़रा विचार कीजिए जो मसीह यीशु के समान प्रेम, दया, क्षमा, न्याय और शांति को जीवन का अभिन्न अंग और व्यावाहरिक जीवन में प्रदर्शन करने से हो सकता है। मेरा सदा ही यह मानना रहा है कि यदि हम पतरस द्वारा लिखी गई बात को अपने जीवनों में लागु करेंगे तो हमारे आस-पास के लोग भी यह कहने लगेंगे कि अमुक व्यक्ति के "यहाँ कार्य करने के कारण हमारा दफ्तर बेहतर स्थान है"; या, "हमारा पड़ौस एक बेहतर पड़ौस है"; या, "हमारा विद्यालय एक बेहतर विद्यालय है।"

   हम अकेले तो संसार को नहीं बदल सकते, लेकिन जो प्रभाव और परिवर्तन परमेश्वर ने प्रभु यीशु द्वारा हमारे जीवनों में किया है, उसे अपने व्यावाहरिक जीवनों में लागू करके परमेश्वर के अनुग्रह से अपने आस-पास के स्थान को बेहतर अवश्य कर सकते हैं। - जो स्टोवैल


संसार को बेहतर करने का मार्ग सबके लिए उपलब्ध है - प्रभु यीशु मसीह को अपने जीवनों से प्रदर्शित करें।

पर तुम एक चुना हुआ वंश, और राज-पदधारी याजकों का समाज, और पवित्र लोग, और (परमेश्वर की) निज प्रजा हो, इसलिये कि जिसने तुम्हें अन्धकार में से अपनी अद्भुत ज्योति में बुलाया है, उसके गुण प्रगट करो। तुम पहिले तो कुछ भी नहीं थे, पर अब परमेश्वर की प्रजा हो: तुम पर दया नहीं हुई थी पर अब तुम पर दया हुई है। हे प्रियों मैं तुम से बिनती करता हूं, कि तुम अपने आप को परदेशी और यात्री जान कर उन सांसारिक अभिलाषाओं से जो आत्मा से युद्ध करती हैं, बचे रहो। अन्यजातियों में तुम्हारा चालचलन भला हो; इसलिये कि जिन जिन बातों में वे तुम्हें कुकर्मी जान कर बदनाम करते हैं, वे तुम्हारे भले कामों को देख कर; उन्‍हीं के कारण कृपा दृष्टि के दिन परमेश्वर की महिमा करें। - 1 पतरस 2:9-12

बाइबल पाठ: 1 पतरस 4:7-19
1 Peter 4:7 सब बातों का अन्‍त तुरन्त होने वाला है; इसलिये संयमी हो कर प्रार्थना के लिये सचेत रहो। 
1 Peter 4:8 और सब में श्रेष्ठ बात यह है कि एक दूसरे से अधिक प्रेम रखो; क्योंकि प्रेम अनेक पापों को ढांप देता है। 
1 Peter 4:9 बिना कुड़कुड़ाए एक दूसरे की पहुनाई करो। 
1 Peter 4:10 जिस को जो वरदान मिला है, वह उसे परमेश्वर के नाना प्रकार के अनुग्रह के भले भण्‍डारियों की नाईं एक दूसरे की सेवा में लगाए। 
1 Peter 4:11 यदि कोई बोले, तो ऐसा बोले, मानों परमेश्वर का वचन है; यदि कोई सेवा करे; तो उस शक्ति से करे जो परमेश्वर देता है; जिस से सब बातों में यीशु मसीह के द्वारा, परमेश्वर की महिमा प्रगट हो: महिमा और साम्राज्य युगानुयुग उसी की है। आमीन। 
1 Peter 4:12 हे प्रियों, जो दुख रूपी अग्‍नि तुम्हारे परखने के लिये तुम में भड़की है, इस से यह समझ कर अचम्भा न करो कि कोई अनोखी बात तुम पर बीत रही है। 
1 Peter 4:13 पर जैसे जैसे मसीह के दुखों में सहभागी होते हो, आनन्द करो, जिस से उसकी महिमा के प्रगट होते समय भी तुम आनन्‍दित और मगन हो। 
1 Peter 4:14 फिर यदि मसीह के नाम के लिये तुम्हारी निन्‍दा की जाती है, तो धन्य हो; क्योंकि महिमा का आत्मा, जो परमेश्वर का आत्मा है, तुम पर छाया करता है। 
1 Peter 4:15 तुम में से कोई व्यक्ति हत्यारा या चोर, या कुकर्मी होने, या पराए काम में हाथ डालने के कारण दुख न पाए। 
1 Peter 4:16 पर यदि मसीही होने के कारण दुख पाए, तो लज्ज़ित न हो, पर इस बात के लिये परमेश्वर की महिमा करे। 
1 Peter 4:17 क्योंकि वह समय आ पहुंचा है, कि पहिले परमेश्वर के लोगों का न्याय किया जाए, और जब कि न्याय का आरम्भ हम ही से होगा तो उन का क्या अन्‍त होगा जो परमेश्वर के सुसमाचार को नहीं मानते? 
1 Peter 4:18 और यदि धर्मी व्यक्ति ही कठिनता से उद्धार पाएगा, तो भक्तिहीन और पापी का क्या ठिकाना? 
1 Peter 4:19 इसलिये जो परमेश्वर की इच्छा के अनुसार दुख उठाते हैं, वे भलाई करते हुए, अपने अपने प्राण को विश्वासयोग्य सृजनहार के हाथ में सौंप दें।

एक साल में बाइबल: 
  • न्यायियों 7-8
  • लूका 5:1-16


Monday, March 28, 2016

विजयी


   हाल ही में मैंने एक प्राचीन पेन्टिंग देखी, जिस ने मुझे बहुत प्रभावित किया। उस पेन्टिंग का शीर्षक था Anastasis, जिसका अर्थ होता है ’पुनरुत्थान’, और इस चित्र में मसीह यीशु के मृत्यु पर विजयी होने को एक अद्भुत तरीके से दिखाया गया है - प्रभु यीशु, अपनी कब्र से निकलते ही आदम और हव्वा को भी उनके ताबूतों में से अनन्त जीवन के लिए बाहर निकाल रहे हैं। इस कलाकृति की विलक्षण बात है इसमें प्रदर्शित पाप के कारण आई आत्मिक और शारीरिक मृत्यु को कैसे प्रभु यीशु के पुनरुत्थान ने उलट दिया।

   क्रुस पर अपनी मृत्यु से पहले प्रभु यीशु ने उस महिमामय दिन की भविष्यवाणी करी थी जब वह अपने विश्वासियों को एक नए और महिमित जीवन में ले जाएंगे: "इस से अचंभा मत करो, क्योंकि वह समय आता है, कि जितने कब्रों में हैं, उसका शब्द सुनकर निकलेंगे। जिन्हों ने भलाई की है वे जीवन के पुनरुत्थान के लिये जी उठेंगे और जिन्हों ने बुराई की है वे दंड के पुनरुत्थान के लिये जी उठेंगे" (यूहन्ना 5:28-29)।

   प्रभु यीशु के म्रुत्यु पर विजयी होने के कारण, उनके विश्वासियों के लिए अब मृत्यु और कब्र का कोई भय नहीं है। अपने प्रीय जनों से इस जीवन में मृत्यु द्वारा अलग होने पर हमारा दुःखी और शोकित होना स्वाभाविक है, लेकिन एक मसीही विश्वासी को उनके समान जिनके पास कोई आशा नहीं है शोकित नहीं होना है (1 थिस्सुलुनीकियों 4:13)। प्रभु यीशु के मृतकों में से पुनरुत्थान का तात्पर्य है कि एक दिन सभी मसीही विश्वासी भी जिलाए जाएंगे और महिमित देह धारण कर लेंगे (1 कुरिन्थियों 15:42-44), और अनन्त काल तक प्रभु के साथ रहेंगे (1 थिस्स्लुनीकियों 4:17) - अब वे मसीह यीशु में होकर शैतान और मृत्यु पर विजयी हैं। - डेनिस फिशर


क्योंकि मसीह यीशु जीवित है, उसके विश्वासी जन भी जीवित रहेंगे।

इसलिये जब कि लड़के मांस और लोहू के भागी हैं, तो वह आप भी उन के समान उन का सहभागी हो गया; ताकि मृत्यु के द्वारा उसे जिसे मृत्यु पर शक्ति मिली थी, अर्थात शैतान को निकम्मा कर दे। और जितने मृत्यु के भय के मारे जीवन भर दासत्‍व में फंसे थे, उन्हें छुड़ा ले। - इब्रानियों 2:14-15

बाइबल पाठ: यूहन्ना 5:24-30
John 5:24 मैं तुम से सच सच कहता हूं, जो मेरा वचन सुनकर मेरे भेजने वाले की प्रतीति करता है, अनन्त जीवन उसका है, और उस पर दंड की आज्ञा नहीं होती परन्तु वह मृत्यु से पार हो कर जीवन में प्रवेश कर चुका है। 
John 5:25 मैं तुम से सच सच कहता हूं, वह समय आता है, और अब है, जिस में मृतक परमेश्वर के पुत्र का शब्द सुनेंगे, और जो सुनेंगे वे जीएंगे। 
John 5:26 क्योंकि जिस रीति से पिता अपने आप में जीवन रखता है, उसी रीति से उसने पुत्र को भी यह अधिकार दिया है कि अपने आप में जीवन रखे। 
John 5:27 वरन उसे न्याय करने का भी अधिकार दिया है, इसलिये कि वह मनुष्य का पुत्र है। 
John 5:28 इस से अचम्भा मत करो, क्योंकि वह समय आता है, कि जितने कब्रों में हैं, उसका शब्द सुनकर निकलेंगे। 
John 5:29 जिन्हों ने भलाई की है वे जीवन के पुनरुत्थान के लिये जी उठेंगे और जिन्हों ने बुराई की है वे दंड के पुनरुत्थान के लिये जी उठेंगे। 
John 5:30 मैं अपने आप से कुछ नहीं कर सकता; जैसा सुनता हूं, वैसा न्याय करता हूं, और मेरा न्याय सच्चा है; क्योंकि मैं अपनी इच्छा नहीं, परन्तु अपने भेजने वाले की इच्छा चाहता हूं।

एक साल में बाइबल: 
  • न्यायियों 4-6
  • लूका 4:31-44