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Friday, January 15, 2016

चिंता


   मेरी मित्र मार्सिया ने, जो बधिरों के जमाइका क्रिश्चियन स्कूल की निर्देशिका है, हाल ही में परिस्थितियों के प्रति एक महतवपूर्ण दृष्टिकोण को दर्शाया। अपने कार्य के विषय में भेजे गए समाचार के पत्र में उसने "एक धन्य आरंभ" शीर्षक के अन्तर्गत एक लेख लिखा, जिसमें उसने बताया कि 7 वर्षों में पहली बार ऐसा हुआ कि उन्होंने नए वर्ष का आरंभ एक "अधिकाई" से किया। क्या थी वह "अधिकाई"? क्या बैंक में हज़ार डॉलर की रकम? नहीं। क्या साल भर के लिए स्कूल की आवश्यकताओं की आपूर्ति? नहीं। वह "अधिकाई" केवल एक माह की भोजन सामग्री अलमारी में विद्यमान होना थी।

   जब 30 भूखे बच्चों को, बहुत कम पैसों के सहारे, भोजन उपलब्ध करवाना आपकी ज़िम्मेदारी हो तो भोजन सामग्री की यह मात्रा बड़ी बात है। मार्सिया ने अपने लेख में परमेश्वर के वचन बाइबल में से 1 इतिहास 16:34 को भी लिखा: "यहोवा का धन्यवाद करो, क्योंकि वह भला है; उसकी करुणा सदा की है।"

   साल-ब-साल मार्सिया परमेश्वर पर भरोसा रखती है कि वह उसके स्कूल के बच्चों एवं कर्मचारियों की आवश्यकताओं को पूरा करेगा। उसके पास कभी अधिक नहीं होता - वह चाहे पानी या भोजन सामग्री या स्कूल की आवश्यकता की कोई वस्तु हो। लेकिन जो भी परमेश्वर उसे भेजता है, उसके लिए वह परमेश्वर की धन्यवादी रहती है, और साथ ही विश्वासयोग्य भी रहती है कि आते समय में भी परमेश्वर उसकी आवश्यकताओं को पूरा करता रहेगा।

   नए साल के आरंभ में क्या हमारे पास मार्सिया के समान विश्वास है कि परमेश्वर हमारी प्रत्येक आवश्यकता को पूरा करेगा? यह विश्वास रखना हमारे प्रभु के आश्वासन को मानना है कि हम ना तो अपने जीवन और ना कल की कोई चिंता करें क्योंकि परमेश्वर हमारी चिंता करता है, हमारे लिए उपलब्ध करवाता है (मत्ती 6:25, 34)। - डेव ब्रैनन


चिंता कल के दुःख को तो समाप्त नहीं करती, परन्तु आज की सामर्थ को अवश्य समाप्त कर देती है। - कोरी टेन बूम

परन्तु जो यहोवा की बाट जोहते हैं, वे नया बल प्राप्त करते जाएंगे, वे उकाबों की नाईं उड़ेंगे, वे दौड़ेंगे और श्रमित न होंगे, चलेंगे और थकित न होंगे। - यशायाह 40:31

बाइबल पाठ: मत्ती 6:25-34
Matthew 6:25 इसलिये मैं तुम से कहता हूं, कि अपने प्राण के लिये यह चिन्‍ता न करना कि हम क्या खाएंगे? और क्या पीएंगे? और न अपने शरीर के लिये कि क्या पहिनेंगे? क्या प्राण भोजन से, और शरीर वस्‍त्र से बढ़कर नहीं? 
Matthew 6:26 आकाश के पक्षियों को देखो! वे न बोते हैं, न काटते हैं, और न खत्तों में बटोरते हैं; तौभी तुम्हारा स्‍वर्गीय पिता उन को खिलाता है; क्या तुम उन से अधिक मूल्य नहीं रखते। 
Matthew 6:27 तुम में कौन है, जो चिन्‍ता कर के अपनी अवस्था में एक घड़ी भी बढ़ा सकता है 
Matthew 6:28 और वस्‍त्र के लिये क्यों चिन्‍ता करते हो? जंगली सोसनों पर ध्यान करो, कि वै कैसे बढ़ते हैं, वे न तो परिश्रम करते हैं, न कातते हैं। 
Matthew 6:29 तौभी मैं तुम से कहता हूं, कि सुलैमान भी, अपने सारे वैभव में उन में से किसी के समान वस्‍त्र पहिने हुए न था। 
Matthew 6:30 इसलिये जब परमेश्वर मैदान की घास को, जो आज है, और कल भाड़ में झोंकी जाएगी, ऐसा वस्‍त्र पहिनाता है, तो हे अल्पविश्वासियों, तुम को वह क्योंकर न पहिनाएगा? 
Matthew 6:31 इसलिये तुम चिन्‍ता कर के यह न कहना, कि हम क्या खाएंगे, या क्या पीएंगे, या क्या पहिनेंगे? 
Matthew 6:32 क्योंकि अन्यजाति इन सब वस्‍तुओं की खोज में रहते हैं, और तुम्हारा स्‍वर्गीय पिता जानता है, कि तुम्हें ये सब वस्तुएं चाहिए। 
Matthew 6:33 इसलिये पहिले तुम उसके राज्य और धर्म की खोज करो तो ये सब वस्तुएं भी तुम्हें मिल जाएंगी। 
Matthew 6:34 सो कल के लिये चिन्‍ता न करो, क्योंकि कल का दिन अपनी चिन्‍ता आप कर लेगा; आज के लिये आज ही का दुख बहुत है।

एक साल में बाइबल: 
  • उत्पत्ति 36-38
  • मत्ती 10:21-42