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Sunday, February 21, 2016

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   मुझे राष्ट्रीय स्तर पर वितृत किए गए एक समाचार लेख को देख कर अचरज हुआ; उस लेख में किशोरों के एक समूह की प्रशंसा करी गई थी जो कॉलेराडो में स्थित बर्फ के ढालों पर स्कींग करने आए लोगों के साथ प्रति इतवार चर्च सभाएं करते थे। इस लेख ने, जिसमें पत्रकार ने उन किशोरों के बारे में लिखा था जो स्कींग करना और साथ ही लोगों को यह बताना कि प्रभु यीशु ने उनके जीवन कैसे बदले पसन्द करते थे, बहुत से लोगों को आकर्षित किया। इन किशोरों का साथ एक युवा मसीही विश्वासियों की संस्था दे रही थी, जो उन्हें परमेश्वर के प्रेम को दूसरों तक पहुँचाने और प्रगट करने में सहायता करती थी।

   दूसरों को कार्य करने के लिए प्रशिक्षित करने से अधिक सरल होता है स्वयं उस कार्य को करना, परन्तु फिर भी प्रभु यीशु ने अपने आप को अपने चेलों के जीवन में निवेश किया, क्योंकि उन चेलों ही के द्वारा उनका सन्देश संसार में जाना था। जब लोग प्रभु से चँगाई पाने के लिए उसे घेरे हुए थे, वह एक पहाड़ पर चढ़ गया और "तब उसने बारह पुरूषों को नियुक्त किया, कि वे उसके साथ साथ रहें, और वह उन्हें भेजे, कि प्रचार करें" (मरकुस 3:14)।

   कॉलेराडो के उन किशोरों में से एक किशोरी ने मसीही शिष्यता के अपने प्रशिक्षण के बारे में बताया: "मैं कभी परिवार या मित्रों के साथ कोई संबंध बना कर नहीं रख सकी; मैं सदा ही उनसे दूरी बनाए रखती थी। लेकिन इस कार्यक्रम ने ना केवल मुझे परमेश्वर के प्रेम का अनुभव करवाया, वरन मुझे उस प्रेम को दूसरों तक पहुँचाना भी सिखाया।

   प्रभु यीशु के प्रेम का व्यक्तिगत अनुभव करने और उसके अनुयायियों के साथ रहने से हम वह साहस और सामर्थ पाते हैं जिससे हम वह सब कह और कर सकते हैं जो हमारे प्रभु को आदर देता है; क्योंकि प्रभु यीशु के प्रेम और उद्देश्य के बारे में बताना ही मसीही जीवन का ध्येय है। - डेविड मैक्कैसलैंड


मसीही गवाही देना करे जाने के लिए कार्य नहीं वरन जीए जाने के लिए जीवन है।

उस ने उन से कहा, आओ; हम और कहीं आस पास की बस्‍तियों में जाएं, कि मैं वहां भी प्रचार करूं, क्योंकि मैं इसी लिये निकला हूं। - मरकुस 1:38

बाइबल पाठ: मरकुस 3:1-15
Mark 3:1 और वह आराधनालय में फिर गया; और वहां एक मनुष्य था, जिस का हाथ सूख गया था। 
Mark 3:2 और वे उस पर दोष लगाने के लिये उस की घात में लगे हुए थे, कि देखें, वह सब्त के दिन में उसे चंगा करता है कि नहीं। 
Mark 3:3 उसने सूखे हाथ वाले मनुष्य से कहा; बीच में खड़ा हो। 
Mark 3:4 और उन से कहा; क्या सब्त के दिन भला करना उचित है या बुरा करना, प्राण को बचाना या मारना? पर वे चुप रहे। 
Mark 3:5 और उसने उन के मन की कठोरता से उदास हो कर, उन को क्रोध से चारों ओर देखा, और उस मनुष्य से कहा, अपना हाथ बढ़ा उसने बढ़ाया, और उसका हाथ अच्छा हो गया। 
Mark 3:6 तब फरीसी बाहर जा कर तुरन्त हेरोदियों के साथ उसके विरोध में सम्मति करने लगे, कि उसे किस प्रकार नाश करें। 
Mark 3:7 और यीशु अपने चेलों के साथ झील की ओर चला गया: और गलील से एक बड़ी भीड़ उसके पीछे हो ली। 
Mark 3:8 और यहूदिया, और यरूशलेम और इदूमिया से, और यरदन के पार, और सूर और सैदा के आसपास से एक बड़ी भीड़ यह सुनकर, कि वह कैसे अचम्भे के काम करता है, उसके पास आई। 
Mark 3:9 और उसने अपने चेलों से कहा, भीड़ के कारण एक छोटी नाव मेरे लिये तैयार रहे ताकि वे मुझे दबा न सकें। 
Mark 3:10 क्योंकि उसने बहुतों को चंगा किया था; इसलिये जितने लोग रोग से ग्रसित थे, उसे छूने के लिये उस पर गिरे पड़ते थे। 
Mark 3:11 और अशुद्ध आत्माएं भी, जब उसे देखती थीं, तो उसके आगे गिर पड़ती थीं, और चिल्लाकर कहती थीं कि तू परमेश्वर का पुत्र है। 
Mark 3:12 और उसने उन्हें बहुत चिताया, कि मुझे प्रगट न करना। 
Mark 3:13 फिर वह पहाड़ पर चढ़ गया, और जिन्हें वह चाहता था उन्हें अपने पास बुलाया; और वे उसके पास चले आए। 
Mark 3:14 तब उसने बारह पुरूषों को नियुक्त किया, कि वे उसके साथ साथ रहें, और वह उन्हें भेजे, कि प्रचार करें। 
Mark 3:15 और दुष्टात्माओं के निकालने का अधिकार रखें।

एक साल में बाइबल: 
  • गिनती 1-3
  • मरकुस 3