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Saturday, July 23, 2016

समर्पण


   हाल ही में मैं दक्षिणी अमेरिका में हुई एक चर्च सभा का वीडियो देख रहा था; उस वीडियो में मैंने कुछ ऐसा देखा जो किसी चर्च में पहले कभी नहीं देखा था। सन्देश के दौरान पादरी ने अपनी मण्डली के लोगों को भावविभोर होकर आवाहन दिया कि वे अपने जीवन प्रभु यीशु को समर्पण करें, उनके इस आवाहन के प्रत्युत्तर में वहाँ उपस्थित लोगों में से एक ने अपनी जेब से सफेद रुमाल निकाला और उसे हवा में हिलाने लगा; फिर एक और ने, एक और ने और एक के बाद एक अनेकों ने ऐसा ही करना आरंभ कर दिया। उन लोगों की आँखों से आंसू बह रहे थे और वे प्रभु यीशु मसीह को अपने जीवन पूर्णतः समर्पित करने के अपने निर्णय को दिखा रहे थे।

   लेकिन संभवतः समर्पण के उस रुमाल रूपी झंडे को हिलाने के पीछे एक और भावना भी थी - वे लोग परमेश्वर के प्रति अपने प्रेम को व्यक्त करने वाले झंडे भी लहरा रहे थे। परमेश्वर के वचन बाइबल में जब परमेश्वर ने लोगों से कहा कि वे उससे सारे मन, और सारे जीव, और सारी शक्ति के साथ प्रेम रखें (व्यवस्थाविवरण 6:5), तब वह उन लोगों द्वारा परमेश्वर को अपने जीवन समर्पित करने के संदर्भ में था।

   परमेश्वर के दृष्टिकोण से, उसके साथ जीवन व्यतीत करने का तात्पर्य भला बनने से कहीं अधिक बढ़कर है। परमेश्वर के साथ जीवन बिताने का अर्थ है उसके साथ एक संबंध स्थापित करना; एक ऐसा संबंध जिसमें हम उसके प्रति पूर्णतः समर्पित होने के द्वारा उसके प्रति अपना प्रेम व्यक्त करते हैं। प्रेम में ऐसा महान समर्पण करना हमें पहले प्रभु यीशु ने करके  दिखाया जब उन्होंने हमारे तथा सारे जगत के सभी लोगों के पापों की क्षमा के लिए अपने आप को क्रूस पर बलिदान होने के लिए समर्पित कर दिया। प्रभु यीशु के इसी समर्पण द्वारा हमें पाप के बन्धनों से मुक्ति और हर भली तथा महिमामय बात को दिलाने वाले यात्रा-मार्ग, अर्थात परमेश्वर के मार्ग पर चलने का सौभाग्य मिला है।

   हमारे पास वे शब्द नहीं हैं जिनके द्वारा हम परमेश्वर के प्रति अपने प्रेम को हम पूर्णतः बयान कर सकें; लेकिन अपने समपूर्ण समर्पण के द्वारा हम अपने इस प्रेम को व्यक्त अवश्य कर सकते हैं। - जो स्टोवैल


समर्पण परमेश्वर के प्रेम की भाषा है।

क्योंकि परमेश्वर ने जगत से ऐसा प्रेम रखा कि उसने अपना एकलौता पुत्र दे दिया, ताकि जो कोई उस पर विश्वास करे, वह नाश न हो, परन्तु अनन्त जीवन पाए। - यूहन्ना 3:16 

बाइबल पाठ: व्यवस्थाविवरण 6:1-9
Deuteronomy 6:1 यह वह आज्ञा, और वे विधियां और नियम हैं जो तुम्हें सिखाने की तुम्हारे परमेश्वर यहोवा ने आज्ञा दी है, कि तुम उन्हें उस देश में मानो जिसके अधिकारी होने को पार जाने पर हो; 
Deuteronomy 6:2 और तू और तेरा बेटा और तेरा पोता यहोवा का भय मानते हुए उसकी उन सब विधियों और आज्ञाओं पर, जो मैं तुझे सुनाता हूं, अपने जीवन भर चलते रहें, जिस से तू बहुत दिन तक बना रहे। 
Deuteronomy 6:3 हे इस्राएल, सुन, और ऐसा ही करने की चौकसी कर; इसलिये कि तेरा भला हो, और तेरे पितरों के परमेश्वर यहोवा के वचन के अनुसार उस देश में जहां दूध और मधु की धाराएं बहती हैं तुम बहुत हो जाओ। 
Deuteronomy 6:4 हे इस्राएल, सुन, यहोवा हमारा परमेश्वर है, यहोवा एक ही है; 
Deuteronomy 6:5 तू अपने परमेश्वर यहोवा से अपने सारे मन, और सारे जीव, और सारी शक्ति के साथ प्रेम रखना। 
Deuteronomy 6:6 और ये आज्ञाएं जो मैं आज तुझ को सुनाता हूं वे तेरे मन में बनी रहें; 
Deuteronomy 6:7 और तू इन्हें अपने बाल-बच्चों को समझाकर सिखाया करना, और घर में बैठे, मार्ग पर चलते, लेटते, उठते, इनकी चर्चा किया करना। 
Deuteronomy 6:8 और इन्हें अपने हाथ पर चिन्हानी कर के बान्धना, और ये तेरी आंखों के बीच टीके का काम दें। 
Deuteronomy 6:9 और इन्हें अपने अपने घर के चौखट की बाजुओं और अपने फाटकों पर लिखना।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 33-34
  • प्रेरितों 24