बाइबल और मसीही विश्वास सम्बन्धी अपने प्रश्नों के लिए यहाँ क्लिक करें:

GotQuestions?org

Wednesday, September 14, 2016

यीशु


   सुप्रसिद्ध मसीही प्रचारक चार्ल्स वेस्ली (1707-1788) ने परमेश्वर की स्तुति में 9000 भजन और कविताएं लिखीं थीं। उन में से कुछ, जैसे कि "काश कि हज़ार ज़ुबानों से" स्तुति और आराधना की महान कृतियाँ हैं। उनकी एक कविता, "कोमल यीशु, नम्र एवं सौम्य" जो पहली बार 1742 में प्राकाशित हुई थी, एक बच्चे के समान करी गई शांत मन की प्रार्थना है जो दिखाती है कि हमें कैसे साधारण विश्वास और ईमानदारी के साथ प्रभु यीशु का खोजी होना चाहिए:
प्रेमी यीशु, कोमल मेमने,
आपके कृपालु हाथों में समर्पित हूँ;
मेरे उद्धारकर्ता, मुझे अपनी समानता में लाएं,
आप स्वयं मेरे हृदय में निवास करें।

   जब प्रभु यीशु के कुछ चेले उसके स्वर्गीय राज्य में उच्च स्थान प्राप्त करने के लिए तरकीबें लड़ा रहे थे, तब प्रभु यीशु ने "...एक बालक को पास बुलाकर उन के बीच में खड़ा किया। और कहा, मैं तुम से सच कहता हूं, यदि तुम न फिरो और बालकों के समान न बनो, तो स्वर्ग के राज्य में प्रवेश करने नहीं पाओगे" (मत्ती 18:2-3)।

   बच्चे बहुत कम ही किसी उच्च पद की या सामर्थ पाने की लालसा करते हैं; इससे अधिक वे सुरक्षा और स्वीकृति चाहते हैं; बच्चे उन व्यसकों के साथ रहना चाहते हैं जो उन्हें प्रेम करते हैं, उनकी देखभाल करते हैं। प्रभु यीशु ने कभी बच्चों को अपने से दूर नहीं किया।

   वेस्ली की इस कविता का अंतीम अंतरा एक बालक के समान प्रभु यीशु की समानता में ढलने की लालसा को दिखाता है:
तब मैं आपकी प्रशंसा प्रदर्शित करने पाऊँगा,
खुशियों से भरे अपने सारे दिनों में आपकी सेवा करूँगा;
तब संसार सदा देखने पाएगा,
मसीह, पवित्र बालक को मुझ में।
 - डेविड मैक्कैसलैंड

विश्वास सबसे अच्छा एक बच्चे के समान निर्मल हृदय में ही चमकता है।

यीशु ने कहा, बालकों को मेरे पास आने दो: और उन्हें मना न करो, क्योंकि स्वर्ग का राज्य ऐसों ही का है। - मत्ती 19:14

बाइबल पाठ: मत्ती 18:1-10
Matthew 18:1 उसी घड़ी चेले यीशु के पास आकर पूछने लगे, कि स्वर्ग के राज्य में बड़ा कौन है? 
Matthew 18:2 इस पर उसने एक बालक को पास बुलाकर उन के बीच में खड़ा किया। 
Matthew 18:3 और कहा, मैं तुम से सच कहता हूं, यदि तुम न फिरो और बालकों के समान न बनो, तो स्वर्ग के राज्य में प्रवेश करने नहीं पाओगे। 
Matthew 18:4 जो कोई अपने आप को इस बालक के समान छोटा करेगा, वह स्वर्ग के राज्य में बड़ा होगा। 
Matthew 18:5 और जो कोई मेरे नाम से एक ऐसे बालक को ग्रहण करता है वह मुझे ग्रहण करता है। 
Matthew 18:6 पर जो कोई इन छोटों में से जो मुझ पर विश्वास करते हैं एक को ठोकर खिलाए, उसके लिये भला होता, कि बड़ी चक्की का पाट उसके गले में लटकाया जाता, और वह गहिरे समुद्र में डुबाया जाता। 
Matthew 18:7 ठोकरों के कारण संसार पर हाय! ठोकरों का लगना अवश्य है; पर हाय उस मनुष्य पर जिस के द्वारा ठोकर लगती है। 
Matthew 18:8 यदि तेरा हाथ या तेरा पांव तुझे ठोकर खिलाए, तो काटकर फेंक दे; टुण्‍डा या लंगड़ा हो कर जीवन में प्रवेश करना तेरे लिये इस से भला है, कि दो हाथ या दो पांव रहते हुए तू अनन्त आग में डाला जाए। 
Matthew 18:9 और यदि तेरी आंख तुझे ठोकर खिलाए, तो उसे निकाल कर फेंक दे। 
Matthew 18:10 काना हो कर जीवन में प्रवेश करना तेरे लिये इस से भला है, कि दो आंख रहते हुए तू नरक की आग में डाला जाए।

एक साल में बाइबल: 
  • नीतिवचन 19-21
  • 2 कुरिन्थियों 7