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Friday, September 16, 2016

शरणस्थान


   एक युवा महिला अपनी 4 तथा 2 वर्षीय पुत्रियों के साथ हवाई यात्रा कर रही थी, और उन दोनों को व्यस्त रखने में लगी हुई थी जिससे वे दोनों अन्त यात्रियों को परेशान ना करने पाएं। जब विमान-चालक ने सूचना देने के लिए विमान के लाऊडस्पीकरों पर उद्घोषणा करनी आरंभ करी तो छोटी बेटी शांत होकर, अपना सिर झुकाकर बैठ गई, और उद्घोषणा समाप्त होने पर बोली "आमीन", जो कि प्रार्थना कि समाप्ति पर बोला जाता है; उस बच्ची को लगा कि विमान-चालक प्रार्थना कर रहा है!

   मैं भी चाहती हूँ कि मेरा मन भी उस बच्ची के समान रहे, जो तुरंत प्रार्थना में परमेश्वर की ओर मुड़ जाता है। परमेश्वर के वचन बाइबल में भजन-संहिता के अनेकों भजनों के रचियता दाऊद का मन ऐसा ही था। हम दाऊद द्वारा लिखे भजन, भजन 27 में इस बात के संकेत पाते हैं, जहाँ वह कठिन शत्रुओं का सामना करने के बारे में लिखता है (पद 2)। दाऊद लिखता है, "तू ने कहा है, कि मेरे दर्शन के खोजी हो। इसलिये मेरा मन तुझ से कहता है, कि हे यहोवा, तेरे दर्शन का मैं खोजी रहूंगा" (भजन 27:8)। कुछ लोगों का मानना है कि इस भजन को लिखते समय दाऊद शाऊल से (1 शमूएल 21:10) या फिर अपने बेटे अबशालोम के षड़यंत्र से (2 शमूएल 15:13-14) जान बचाकर भागने के अपने अनुभवों को स्मरण कर रहा था। प्रार्थना करना और परमेश्वर पर निर्भर रहना दाऊद के रवैये में सर्वोपरि रहते थे; उसने परमेश्वर को अपना शरणस्थान बना रखा था (भजन 27:4-5)।

   हम सभी को शरणस्थान की आवश्यकता रहती है, विशेषकर कठिन परिस्थितियों और परेशानी के समयों में। इस, तथा अन्य भजनों को पढ़ना और प्रार्थना का आधार बनाना हमारे लिए अपने परमेश्वर पिता के साथ वैसा ही निकट संबंध बनाने में सहायक हो सकता है जैसा दाऊद के साथ था। जब हम परमेश्वर को अपना शरणस्थान बना लेंगे, तो स्वतः ही प्रार्थना और आवश्यकता के समयों में हम उसमें शांति तथा विश्राम भी पाएंगे। - ऐनी सेटास


प्रार्थना के समयों में परमेश्वर हमारे हृदयों को शांत करके, 
हमारे मनों को स्थिर करता है।

हे परमेश्वर, जब मैं तेरी दोहाई दूं, तब मेरी सुन; शत्रु के उपजाए हुए भय के समय मेरे प्राण की रक्षा कर। - भजन 64:1

बाइबल पाठ: भजन 27:1-14
Psalms 27:1 यहोवा परमेश्वर मेरी ज्योति और मेरा उद्धार है; मैं किस से डरूं? यहोवा मेरे जीवन का दृढ़ गढ़ ठहरा है, मैं किस का भय खाऊं? 
Psalms 27:2 जब कुकर्मियों ने जो मुझे सताते और मुझी से बैर रखते थे, मुझे खा डालने के लिये मुझ पर चढ़ाई की, तब वे ही ठोकर खाकर गिर पड़े।
Psalms 27:3 चाहे सेना भी मेरे विरुद्ध छावनी डाले, तौभी मैं न डरूंगा; चाहे मेरे विरुद्ध लड़ाई ठन जाए, उस दशा में भी मैं हियाव बान्धे निशचिंत रहूंगा।
Psalms 27:4 एक वर मैं ने यहोवा से मांगा है, उसी के यत्न में लगा रहूंगा; कि मैं जीवन भर यहोवा के भवन में रहने पाऊं, जिस से यहोवा की मनोहरता पर दृष्टि लगाए रहूं, और उसके मन्दिर में ध्यान किया करूं।
Psalms 27:5 क्योंकि वह तो मुझे विपत्ति के दिन में अपने मण्डप में छिपा रखेगा; अपने तम्बू के गुप्त स्थान में वह मुझे छिपा लेगा, और चट्टान पर चढ़ाएगा। 
Psalms 27:6 अब मेरा सिर मेरे चारों ओर के शत्रुओं से ऊंचा होगा; और मैं यहोवा के तम्बू में जयजयकार के साथ बलिदान चढ़ाऊंगा; और उसका भजन गाऊंगा।
Psalms 27:7 हे यहोवा, मेरा शब्द सुन, मैं पुकारता हूं, तू मुझ पर अनुग्रह कर और मुझे उत्तर दे। 
Psalms 27:8 तू ने कहा है, कि मेरे दर्शन के खोजी हो। इसलिये मेरा मन तुझ से कहता है, कि हे यहोवा, तेरे दर्शन का मैं खोजी रहूंगा। 
Psalms 27:9 अपना मुख मुझ से न छिपा।। अपने दास को क्रोध कर के न हटा, तू मेरा सहायक बना है। हे मेरे उद्धार करने वाले परमेश्वर मुझे त्याग न दे, और मुझे छोड़ न दे! 
Psalms 27:10 मेरे माता पिता ने तो मुझे छोड़ दिया है, परन्तु यहोवा मुझे सम्भाल लेगा।
Psalms 27:11 हे यहोवा, अपने मार्ग में मेरी अगुवाई कर, और मेरे द्रोहियों के कारण मुझ को चौरस रास्ते पर ले चल। 
Psalms 27:12 मुझ को मेरे सताने वालों की इच्छा पर न छोड़, क्योंकि झूठे साक्षी जो उपद्रव करने की धुन में हैं मेरे विरुद्ध उठे हैं।
Psalms 27:13 यदि मुझे विश्वास न होता कि जीवितों की पृथ्वी पर यहोवा की भलाई को देखूंगा, तो मैं मूर्च्छित हो जाता। 
Psalms 27:14 यहोवा की बाट जोहता रह; हियाव बान्ध और तेरा हृदय दृढ़ रहे; हां, यहोवा ही की बाट जोहता रह!

एक साल में बाइबल: 
  • नीतिवचन 25-26
  • 2 कुरिन्थियों 9