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Monday, October 10, 2016

शान्त आज्ञाकारिता


   बचपन में मुझे बहुत पसन्द आने वाला एक खेल था हूला-हूप (कमर पर घुमाने वाला छल्ला) घुमाना, जो अब पुनः लोकप्रीय हो रहा है। मैं और मेरी सहेली घंटों घर के सामने वाले लॉन पर स्पर्धा में लगे रहते थे, यह देखने के लिए कौन उस छल्ले को सबसे अधिक देर तक अपनी कमर पर घुमाता रह सकता है। इस वर्ष मैंने अपने बचपन के उस समय के आनन्द को फिर से अनुभव किया; एक पार्क में बैठे हुए मैं देख रही थी कि सभी उम्र के बच्चे अपनी अपनी कमर पर छल्ले को घुमाने और उसे धरती पर गिरने से बचाए रखने का प्रयास करने में लगे हुए थे। वे अपनी भरसक शक्ति और प्रयत्नों से, अपने शरीर को इधर-उधर झुका कर छल्ले को कमर के आस-पास रखने के प्रयास में लगे हुए थे, परन्तु उनके सभी प्रयासों के बावजूद छल्ला नीचे गिर ही जा रहा था। फिर एक युवती ने एक छल्ला उठाया और बिना अधिक हिले-डुले, शरीर की लयभद्ध हरकत के द्वारा, वह उस छल्ले को अपनी कमर पर घुमाने लगी, उसे ऊपर अपने कंधों तक और फिर वापस कमर पर लाने-लेजाने लगी। उन बच्चों की अपेक्षा, उसकी छल्ले को घुमा पाने की इस सफलता का राज़ उसका वेग से नहीं वरन लय में हिलना-घुमाना था।

   हमारे आत्मिक जीवनों में भी, परमेश्वर की सेवा के लिए हम अनेक प्रकार से अपनी शक्ति व्यय कर सकते हैं, दूसरों के समान और साथ बने रहने के प्रयास करते रह सकते हैं। परन्तु इन प्रयासों में थक कर चूर हो जाना कोई सद्गुण नहीं है (गलतियों 6:9)। परमेश्वर के वचन बाइबल में हम पाते हैं कि हज़ारों लोगों को केवल पाँच रोटियों और दो मछलियों से भर पेट भोजन करवाने (मरकुस 6:38-44) से पहले, प्रभु यीशु ने अपने चेलों से कहा था कि वे एकांत में आकर पहले कुछ विश्राम कर लें। इस घटना से हम यह समझ सकते हैं कि प्रभु परमेश्वर को अपने उद्देश्यों एवं कार्यों को हमारे द्वारा पूरा करवाने के लिए उसे हम से हमें थका देने वाले परिश्रम की आवश्यकता नहीं वरन हमारे सहयोग की आवश्यकता है।

   जो तथ्य प्रभु यीशु ने तब अपने उन चेलों को सिखाया था, वह चाहता है कि वही तथ्य आज हम भी सीख लें: जितना हम शान्त रह कर उसकी आज्ञाकारिता के द्वारा कर सकते हैं उतना हम अपने अनेकों अन्धाधुंध प्रयासों से कभी नहीं कर सकते हैं। - जूली ऐकैअरमैन लिंक


प्रभु यीशु हमारी स्वेच्छा तथा सहयोग चाहता है, ना कि हमें थका देना।

प्रभु यहोवा, इस्राएल का पवित्र यों कहता है, लौट आने और शान्त रहने में तुम्हारा उद्धार है; शान्त रहते और भरोसा रखने में तुम्हारी वीरता है। परन्तु तुम ने ऐसा नहीं किया - यशायाह 30:15

बाइबल पाठ: मरकुस 6:34-44
Mark 6:34 उसने निकलकर बड़ी भीड़ देखी, और उन पर तरस खाया, क्योंकि वे उन भेड़ों के समान थे, जिन का कोई रखवाला न हो; और वह उन्हें बहुत सी बातें सिखाने लगा। 
Mark 6:35 जब दिन बहुत ढल गया, तो उसके चेले उसके पास आकर कहने लगे; यह सुनसान जगह है, और दिन बहुत ढल गया है। 
Mark 6:36 उन्हें विदा कर, कि चारों ओर के गांवों और बस्‍तियों में जा कर, अपने लिये कुछ खाने को मोल लें। 
Mark 6:37 उसने उन्हें उत्तर दिया; कि तुम ही उन्हें खाने को दो: उन्हों ने उस से कहा; क्या हम सौ दीनार की रोटियां मोल लें, और उन्हें खिलाएं? 
Mark 6:38 उसने उन से कहा; जा कर देखो तुम्हारे पास कितनी रोटियां हैं? उन्होंने मालूम कर के कहा; पांच और दो मछली भी। 
Mark 6:39 तब उसने उन्हें आज्ञा दी, कि सब को हरी घास पर पांति पांति से बैठा दो। 
Mark 6:40 वे सौ सौ और पचास पचास कर के पांति पांति बैठ गए। 
Mark 6:41 और उसने उन पांच रोटियों को और दो मछिलयों को लिया, और स्वर्ग की ओर देखकर धन्यवाद किया और रोटियां तोड़ तोड़ कर चेलों को देता गया, कि वे लोगों को परोसें, और वे दो मछिलयां भी उन सब में बांट दीं। 
Mark 6:42 और सब खाकर तृप्‍त हो गए। 
Mark 6:43 और उन्होंने टुकडों से बारह टोकिरयां भर कर उठाई, और कुछ मछिलयों से भी। 
Mark 6:44 जिन्हों ने रोटियां खाईं, वे पांच हजार पुरूष थे।

एक साल में बाइबल: 
  • यशायाह 34-36
  • कुलुस्सियों 2