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Monday, November 21, 2016

ध्यान


   यरूशालेम के निकट स्थित अबु घोष नामक गाँव के एक रेस्ट्रॉन्ट के मालिक, जॉदत इब्राहिम, ने अपने ग्राहकों को 50% छूट देने की घोषणा करी यदि वे जितने समय उसके रेस्ट्रॉन्ट में बैठते हैं, उतने समय तक अपने मोबाइल फोन बन्द रखें। जॉदत का मानना है कि स्मार्टफोन के कारण भोजन करते समय का वातावरण संगति और संवाद से हटकर फोन पर सर्फिंग, टेक्सटिंग, और व्यावसायिक बातचीत करते रहने का हो गया है। जॉदत कहते हैं, "टेक्नॉलॉजी बहुत अच्छी चीज़ है; परन्तु जब आप परिवार और मित्र जनों के साथ होते हैं, तो आधा घण्टा थम कर भोजन तथा संगति का आनन्द लें।"

   हमारे लिए, संसार की कितनी ही बातों के द्वारा, दूसरों के या प्रभु यीशु के प्रति अपने संबंधों में, उन पर से अपना ध्यान हटा लेना कितना सरल हो गया है। प्रभु यीशु ने अपने अनुयायियों से कहा कि आत्मिक ध्यान के भंग होने का आरंभ मन के संवेदनहीन हो जाने, कानों के कम सुनने, और आँखों से कम दिखने के साथ होता है (मत्ती 13:15)। बीज बोने वाले व्यक्ति के उदाहरण के द्वारा, प्रभु यीशु ने उन बीजों की, जो झाड़ियों में गिरे थे, तुलना ऐसे व्यक्ति से करी जो परमेश्वर का वचन सुनता तो है परन्तु जिसका मन और ही बातों पर केन्द्रित होता है; जिस कारण वह: "...वचन को सुनता है, पर इस संसार की चिन्‍ता और धन का धोखा वचन को दबाता है, और वह फल नहीं लाता" (मत्ती 13:22)।

   प्रतिदिन ऐसा समय निकालना, जिस में हम संसार और संसार की बातों से ध्यान हटा कर, अपना मन और ध्यान प्रभु यीशु और उसकी बातों पर लगाएं, हमारे लिए बहुत लाभदायक होगा। - डेविड मैक्कैसलैंड


मसीह यीशु पर ध्यान केंद्रित करने से बाकी सब कुछ स्वतः ही सही परिपेक्ष में आ जाता है।

इसलिये पहिले तुम उस [परमेश्वर] के राज्य और धर्म की खोज करो तो ये सब वस्तुएं भी तुम्हें मिल जाएंगी। - मत्ती 6:33

बाइबल पाठ: मत्ती 13:13-23
Matthew 13:13 मैं उन से दृष्‍टान्‍तों में इसलिये बातें करता हूं, कि वे देखते हुए नहीं देखते; और सुनते हुए नहीं सुनते; और नहीं समझते। 
Matthew 13:14 और उन के विषय में यशायाह की यह भविष्यद्ववाणी पूरी होती है, कि तुम कानों से तो सुनोगे, पर समझोगे नहीं; और आंखों से तो देखोगे, पर तुम्हें न सूझेगा। 
Matthew 13:15 क्योंकि इन लोगों का मन मोटा हो गया है, और वे कानों से ऊंचा सुनते हैं और उन्होंने अपनी आंखें मूंद लीं हैं; कहीं ऐसा न हो कि वे आंखों से देखें, और कानों से सुनें और मन से समझें, और फिर जाएं, और मैं उन्हें चंगा करूं। 
Matthew 13:16 पर धन्य है तुम्हारी आंखें, कि वे देखती हैं; और तुम्हारे कान, कि वे सुनते हैं। 
Matthew 13:17 क्योंकि मैं तुम से सच कहता हूं, कि बहुत से भविष्यद्वक्ताओं ने और धर्मियों ने चाहा कि जो बातें तुम देखते हो, देखें पर न देखीं; और जो बातें तुम सुनते हो, सुनें, पर न सुनीं। 
Matthew 13:18 सो तुम बोने वाले का दृष्‍टान्‍त सुनो। 
Matthew 13:19 जो कोई राज्य का वचन सुनकर नहीं समझता, उसके मन में जो कुछ बोया गया था, उसे वह दुष्‍ट आकर छीन ले जाता है; यह वही है, जो मार्ग के किनारे बोया गया था। 
Matthew 13:20 और जो पत्थरीली भूमि पर बोया गया, यह वह है, जो वचन सुनकर तुरन्त आनन्द के साथ मान लेता है। 
Matthew 13:21 पर अपने में जड़ न रखने के कारण वह थोड़े ही दिन का है, और जब वचन के कारण क्‍लेश या उपद्रव होता है, तो तुरन्त ठोकर खाता है। 
Matthew 13:22 जो झाड़ियों में बोया गया, यह वह है, जो वचन को सुनता है, पर इस संसार की चिन्‍ता और धन का धोखा वचन को दबाता है, और वह फल नहीं लाता। 
Matthew 13:23 जो अच्छी भूमि में बोया गया, यह वह है, जो वचन को सुनकर समझता है, और फल लाता है कोई सौ गुना, कोई साठ गुना, कोई तीस गुना।

एक साल में बाइबल: 
  • यहेजेकल 16-17
  • याकूब 3