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Saturday, December 10, 2016

शिक्षक


   सारे शरीर की प्रत्येक कोशिका तक रक्त और पोशाण पहुँचाने के लिए हमारा हृदय प्रतिदिन लगभग 100,000 बार धड़कता है। यदि इसका योग लगाया जाए तो यह एक वर्ष में लगभग 3 करोड़ 50 लाख बार और एक सामान्य जीवनकाल में लगभग 2.5 अरब बार धडकना होता है। चिकित्सा विज्ञान हमें बताता है कि हृदय की प्रत्येक धड़कन लगभग उतना ही बल होता है जितना बल एक टेनिस की गेंद को मुट्ठी में पकड़ कर ज़ोर से दबाने में लगता है। हमारा हृदय और उसका कार्य कितना भी आश्चर्यजनक क्यों ना हो, यह प्राकृतिक संसार की विलक्षण बातों का केवल एक नमूना ही है जो हमारे सृष्टिकर्ता परमेश्वर ने रचा और अपने बारे में हमें समझाने के लिए रखा है। परमेश्वर के वचन बाइबल में अय्युब के जीवन की कहानी का, हमें यही सिखाना उद्देश्य है।

   अय्युब परमेश्वर का भय मानने वाला और उसकी आराधना में लगे रहने वाला ऐसा व्यक्ति था जिसकी धार्मिकता की गवाही स्वयं परमेश्वर ने दी। लेकिन उस पर और उसके परिवार पर शैतान के हमलों से विपत्तियों के पहाड़ टूट पड़े, उसका सब कुछ जाता रहा, उसके बेटे-बहुएं मर गए, संपत्ति लुट गई और शरीर घावों से भर गया। लेकिन इतना सब होने पर भी अय्युब परमेश्वर के विरुद्ध नहीं बोला; वह खिन्न अवश्य हुआ, उसने अपना विसमय और इन विपरीत परिस्थितियों के आने  के कारण को समझ ना पाने की बात अवश्य की, परन्तु परमेश्वर की निन्दा या बुराई कदापि नहीं की। अपनी इन घोर मुसीबतों और दुःखों के कारण को जानने के लिए उसने परमेश्वर से प्रश्न भी किया, लेकिन परमेश्वर ने उसे इस बात का कोई उत्तर नहीं दिया; और ना ही सृष्टिकर्ता परमेश्वर ने उसे यह बताया कि भविष्य में वह यीशु के रूप में समस्त मानव जाति के पापों से बचने का मार्ग बनाने के लिए कैसी-कैसी पीड़ाओं को सहेगा, अपना प्राण भी बलिदान कर देगा। अन्ततः जब परमेश्वर ने अय्युब से बोलना आरंभ किया, तो उसने अय्युब को उसकी पीड़ाओं के लिए कोई स्पष्टिकरण नहीं दिया, वरन अय्युब का ध्यान प्रकृति में विद्यमान उसकी आश्चर्यजनक रचनाओं की ओर खींचा, जो सदा ही मनुष्य के बयान और समझ से बाहर परमेश्वर की बुद्धिमता और सामर्थ की गवाही देती रहती हैं (अय्युब 38:1-11)।

   तो आज हमारे लिए हमारे हृदय की क्या शिक्षा है? हमारा हृदय हमारे लिए वैसा ही शिक्षक है जैसा तट पर आने वाली लहरें, रात में चमकने वाले सितारे हैं। हमारे सृष्टिकर्ता परमेश्वर की सामर्थ और बुद्धिमता हमें वाजिब कारण प्रदान करती हैं कि हम उसमें विश्वास करें, उसकी आज्ञाकारिता में बने रहें और चलें, और संसार के सामने उसके इन विलक्षण गुणों के गवाह बनें। - मार्ट डीहॉन


जब हम सृष्टि में विदित परमेश्वर की बुद्धिमता पर मनन करते हैं, 
तो हमारे प्रति उसकी चिंता और देखभाल की सामर्थ को समझने पाते हैं।

इसलिये कि परमेश्वर के विषय का ज्ञान उन के मनों में प्रगट है, क्योंकि परमेश्वर ने उन पर प्रगट किया है। क्योंकि उसके अनदेखे गुण, अर्थात उस की सनातन सामर्थ, और परमेश्वरत्व जगत की सृष्टि के समय से उसके कामों के द्वारा देखने में आते है, यहां तक कि वे निरुत्तर हैं। - रोमियों 1:19-20

बाइबल पाठ: अय्युब 38:1-11
Job 38:1 तब यहोवा ने अय्यूब को आँधी में से यूं उत्तर दिया, 
Job 38:2 यह कौन है जो अज्ञानता की बातें कहकर युक्ति को बिगाड़ना चाहता है? 
Job 38:3 पुरुष की नाईं अपनी कमर बान्ध ले, क्योंकि मैं तुझ से प्रश्न करता हूँ, और तू मुझे उत्तर दे। 
Job 38:4 जब मैं ने पृथ्वी की नेव डाली, तब तू कहां था? यदि तू समझदार हो तो उत्तर दे। 
Job 38:5 उसकी नाप किस ने ठहराई, क्या तू जानता है उस पर किस ने सूत खींचा? 
Job 38:6 उसकी नेव कौन सी वस्तु पर रखी गई, वा किस ने उसके कोने का पत्थर बिठाया, 
Job 38:7 जब कि भोर के तारे एक संग आनन्द से गाते थे और परमेश्वर के सब पुत्र जयजयकार करते थे? 
Job 38:8 फिर जब समुद्र ऐसा फूट निकला मानो वह गर्भ से फूट निकला, तब किस ने द्वार मूंदकर उसको रोक दिया; 
Job 38:9 जब कि मैं ने उसको बादल पहिनाया और घोर अन्धकार में लपेट दिया, 
Job 38:10 और उसके लिये सिवाना बान्धा और यह कहकर बेंड़े और किवाड़े लगा दिए, कि 
Job 38:11 यहीं तक आ, और आगे न बढ़, और तेरी उमंडने वाली लहरें यहीं थम जाएं?

एक साल में बाइबल: 
  • होशे 1-4
  • प्रकाशितवाक्य 1