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Tuesday, December 20, 2016

यीशु के नाम में


   परिवार की तस्वीरों के संग्रह में मेरी मनपसन्द फोटो एक पारिवारिक भोजन के समय की है। उस फोटो में पिताजी, उनके बेटे और बेटों की पत्नियाँ और उन सभी के बच्चे सब एक साथ धन्यवादी समारोह और प्रार्थना के अवसर पर एक साथ एकत्रित हैं। पिताजी को पक्षाघात के कई दौरे पड़ चुके थे, और अब वे पहले के समान बोल नहीं पाते थे। परन्तु प्रार्थना के उस समय में, मैंने उन्हें पूरे मन से कहते सुना, "हम प्रभु यीशु के नाम में माँगते हैं!" इसके लगभग एक वर्ष पश्चात, पिताजी इस संसार से कूच कर के उसके पास चले गए जिसके नाम में उन्होंने ऐसा दृढ़ विश्वास रखा था।

   प्रभु यीशु ने हमें अपने नाम में प्रार्थना करके परमेश्वर से आग्रह करना सिखाया है। अपने क्रूस पर बलिदान होने की पूर्व-संध्या को उन्होंने अपने अनुयायियों से कहा: "अब तक तुम ने मेरे नाम से कुछ नहीं मांगा; मांगो तो पाओगे ताकि तुम्हारा आनन्द पूरा हो जाए" (यूहन्ना 16:24)। परन्तु प्रभु यीशु की उनके नाम में माँगने से परमेश्वर से प्राप्त कर लेने की यह प्रतिज्ञा बैंक के किसी कोरे चेक के समान नहीं है, जिसे भुनाने वाला अपनी मर्ज़ी से चाहे जितनी रकम भर सकता है और वह रकम प्राप्त कर सकता है। इस प्रतिज्ञा में होकर हमें भी अपनी सनक के अनुसार परमेश्वर से कुछ भी माँग लेने और परमेश्वर का उस माँग को पूरा करने के लिए बाध्य होने की छूट प्रभु की इस प्रतिज्ञा से नहीं मिलती है।

   उस ही संध्या को, प्रभु ने यह भी सिखाया कि उसके नाम में माँगी गई बातों को इसलिए दिया जाता है जिससे परमेश्वर पिता की महिमा हो (यूहन्ना 14:13)। बाद में, उसी रात में प्रभु ने अपनी व्यथा में परमेश्वर से प्रार्थना की, "फिर वह थोड़ा और आगे बढ़कर मुंह के बल गिरा, और यह प्रार्थना करने लगा, कि हे मेरे पिता, यदि हो सके, तो यह कटोरा मुझ से टल जाए; तौभी जैसा मैं चाहता हूं वैसा नहीं, परन्तु जैसा तू चाहता है वैसा ही हो" (मत्ती 26:39)। तात्पर्य यह है कि प्रभु ने अपने उदाहरण से दिखाया कि माँगने में परमेश्वर पिता की महिमा और आज्ञाकारिता के अनुसार माँगी गई बात ही पूरी हो सकती है (1 यूहन्ना 5:14)।

   जब हम परमेश्वर से प्रार्थना करते हैं, तो चाहिए कि हम परमेश्वर की इच्छा, समझ-बूझ, प्रेम और सार्वभौमिकता के प्रति समर्पित भी रहें; तब ही हम निःसंकोच होकर प्रार्थना में कह सकते हैं "यीशु के नाम में"। - डेनिस फिशर


प्रार्थना की पहुँच से बाहर कुछ भी नहीं है, 
बशर्ते कि वह परमेश्वर की इच्छा के बाहर ना हो।

और हमें उसके साम्हने जो हियाव होता है, वह यह है; कि यदि हम उस की इच्छा के अनुसार कुछ मांगते हैं, तो हमारी सुनता है। - 1 यूहन्ना 5:14

बाइबल पाठ: यूहन्ना 14:12-21
John 14:12 मैं तुम से सच सच कहता हूं, कि जो मुझ पर विश्वास रखता है, ये काम जो मैं करता हूं वह भी करेगा, वरन इन से भी बड़े काम करेगा, क्योंकि मैं पिता के पास जाता हूं। 
John 14:13 और जो कुछ तुम मेरे नाम से मांगोगे, वही मैं करूंगा कि पुत्र के द्वारा पिता की महिमा हो। 
John 14:14 यदि तुम मुझ से मेरे नाम से कुछ मांगोगे, तो मैं उसे करूंगा। 
John 14:15 यदि तुम मुझ से प्रेम रखते हो, तो मेरी आज्ञाओं को मानोगे। 
John 14:16 और मैं पिता से बिनती करूंगा, और वह तुम्हें एक और सहायक देगा, कि वह सर्वदा तुम्हारे साथ रहे। 
John 14:17 अर्थात सत्य का आत्मा, जिसे संसार ग्रहण नहीं कर सकता, क्योंकि वह न उसे देखता है और न उसे जानता है: तुम उसे जानते हो, क्योंकि वह तुम्हारे साथ रहता है, और वह तुम में होगा। 
John 14:18 मैं तुम्हें अनाथ न छोडूंगा, मैं तुम्हारे पास आता हूं। 
John 14:19 और थोड़ी देर रह गई है कि फिर संसार मुझे न देखेगा, परन्तु तुम मुझे देखोगे, इसलिये कि मैं जीवित हूं, तुम भी जीवित रहोगे। 
John 14:20 उस दिन तुम जानोगे, कि मैं अपने पिता में हूं, और तुम मुझ में, और मैं तुम में। 
John 14:21 जिस के पास मेरी आज्ञा है, और वह उन्हें मानता है, वही मुझ से प्रेम रखता है, और जो मुझ से प्रेम रखता है, उस से मेरा पिता प्रेम रखेगा, और मैं उस से प्रेम रखूंगा, और अपने आप को उस पर प्रगट करूंगा।

एक साल में बाइबल: 
  • मीका 1-3
  • प्रकाशितवाक्य 11