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Wednesday, August 16, 2017

धन्यवाद और अराधना


   पेंसिलिन के अविष्कार से स्वास्थ्य सेवाओं में क्रांतिकारी परिवर्तन आया। 1940 के दशक से पहले, कीटाणुओं से होने वाला संक्रमण अकसर घातक सिद्ध होता था। परन्तु पेंसिलिन के आने के बाद से हानिकारक जीवाअणुओं के नाश द्वारा अनगिनित जानें बचाई गई हैं। जिन व्यक्तियों ने पेंसिलिन की इस संभावना को पहचाना और उसे व्यापक उपयोग के लिए विकसित करके उपलब्ध करवाया, उन्हें इस कार्य के लिए 1945 में नोबल पुरुस्कार से सम्मानित किया गया। हम मनुष्य आज भी उनकी इन सेवाओं और कार्य के लिए धन्यवादी और कृतज्ञ है।

   पेंसिलिन के अविष्कार से बहुत पहले भी हानिकारक जीवाणुओं का नाश करने के लिए कुछ अदृश्य और अनजाने मूक कार्यकर्ता कार्यरत थे। ये मूक कार्यकर्ता हैं हमारे रक्त में पाई जानी वाली श्वेत रक्त कोशिकाएं। ये परिश्रमी कोशिकाएं हमें बीमारियों से बचाए रखने के लिए परमेश्वर द्वारा दिया गया उपाय हैं। कोई नहीं जानता कि उन्होंने कितने आक्रमणों को विफल किया है, कितनी जानों को बचाया है। उनके द्वारा लगातार की जा रही भलाई के लिए उन्हें बहुत कम ही श्रेय मिल पाता है।

   प्रभु परमेश्वर के साथ भी यही स्थिति है। यदि कुछ गलत हो जाता है तो प्रभु को ही दोष दिया जाता है, परन्तु जब सब कुछ सुचारू रुप से चल रहा होता है तो उस स्थिति के लिए उसे कम ही श्रेय दिया जाता है। प्रतिदिन लोग सो कर उठते हैं, तैयार होते हैं, अपने कार्यों के लिए विभिन्न साधनों के द्वारा जाते हैं, और फिर सुरक्षित लौट कर अपने परिवारों के पास आ जाते हैं। कोई नहीं जानता है कि कितनी बार प्रभु ने उन्हें किसी खतरे से, से किसी हानि से, कैसे-कैसे बचाया है; बहुत ही कम लोगों को इस प्रभु द्वारा दी गई इस देखभाल और सुरक्षा का एहसास होता है; बहुत ही कम लोग प्रभु के प्रति इन दैनिक आशीषों के लिए धन्यवादी होते हैं। परन्तु यदि कोई त्रासदी हो जाए, तो सभी एकदम पुकारने लगते हैं कि ऐसे में "परमेश्वर कहाँ था?"

   जब मैं उन अद्भुत बातों के बारे में विचार करती हूँ जो परमेश्वर हमारे जीवनों में, हमारे लिए करता रहता है (यशायाह 25:1), तो मैं पाती हूँ कि प्रभु परमेश्वर के प्रति मेरे धन्यवाद और अराधना के विषयों की सूची, उससे माँगने के लिए मेरी प्रार्थनाओं और निवेदनों की सूची से कहीं अधिक बड़ी हो जाती है। - जूली ऐकैरमैन लिंक


परमेश्वर हमें उसकी स्तुति और प्रशंसा करते रहने के कारण प्रदान करता रहता है।

हे मेरे परमेश्वर यहोवा, तू ने बहुत से काम किए हैं! जो आश्चर्यकर्म और कल्पनाएं तू हमारे लिये करता है वह बहुत सी हैं; तेरे तुल्य कोई नहीं! मैं तो चाहता हूं की खोल कर उनकी चर्चा करूं, परन्तु उनकी गिनती नहीं हो सकती। - भजन 40:5

बाइबल पाठ: यशायाह 25:1-9
Isaiah 25:1 हे यहोवा, तू मेरा परमेश्वर है; मैं तुझे सराहूंगा, मैं तेरे नाम का धन्यवाद करूंगा; क्योंकि तू ने आश्चर्यकर्म किए हैं, तू ने प्राचीनकाल से पूरी सच्चाई के साथ युक्तियां की हैं। 
Isaiah 25:2 तू ने नगर को डीह, और उस गढ़ वाले नगर को खण्डहर कर डाला है; तू ने परदेशियों की राजपुरी को ऐसा उजाड़ा कि वह नगर नहीं रहा; वह फिर कभी बसाया न जाएगा। 
Isaiah 25:3 इस कारण बलवन्त राज्य के लोग तेरी महिमा करेंगे; भयंकर अन्यजातियों के नगरों में तेरा भय माना जाएगा। 
Isaiah 25:4 क्योंकि तू संकट में दीनों के लिये गढ़, और जब भयानक लोगों का झोंका भीत पर बौछार के समान होता था, तब तू दरिद्रों के लिये उनकी शरण, और तपन में छाया का स्थान हुआ। 
Isaiah 25:5 जैसे निर्जल देश में बादल की छाया से तपन ठण्डी होती है वैसे ही तू परदेशियों का कोलाहल और क्रूर लोगों को जयजयकार बन्द करता है।
Isaiah 25:6 सेनाओं का यहोवा इसी पर्वत पर सब देशों के लोगों के लिये ऐसी जेवनार करेगा जिस में भांति भांति का चिकना भोजन और निथरा हुआ दाखमधु होगा; उत्तम से उत्तम चिकना भोजन और बहुत ही निथरा हुआ दाखमधु होगा। 
Isaiah 25:7 और जो पर्दा सब देशों के लोगों पर पड़ा है, जो घूंघट सब अन्यजातियों पर लटका हुआ है, उसे वह इसी पर्वत पर नाश करेगा। 
Isaiah 25:8 वह मृत्यु को सदा के लिये नाश करेगा, और प्रभु यहोवा सभों के मुख पर से आंसू पोंछ डालेगा, और अपनी प्रजा की नामधराई सारी पृथ्वी पर से दूर करेगा; क्योंकि यहोवा ने ऐसा कहा है।
Isaiah 25:9 और उस समय यह कहा जाएगा, देखो, हमारा परमेश्वर यही है; हम इसी की बाट जोहते आए हैं, कि वह हमारा उद्धार करे। यहोवा यही है; हम उसकी बाट जोहते आए हैं। हम उस से उद्धार पाकर मगन और आनन्दित होंगे।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 94-96
  • रोमियों 15:14-33


Tuesday, August 15, 2017

स्वीकार


   1800 के अन्त की ओर, तथा 1900 के आरंभिक वर्षों में, जॉर्जिया प्रांत के सवान्ना शहर के बन्दरगाह में आने वाले जलपोतों का स्वागत करने के लिए एक बात चिर-परिचित हो गई थी - फ्लोरेंस मार्टस नामक महिला, जो 44 वर्ष तक संसार भर से आने वाले विशाल जलपोतों का स्वागत दिन में रुमाल लिए हुए हाथ हिला-हिला कर और रात में लालटेन हिला कर किया करती थी। आज सवान्ना के मोरेल उद्यान में स्थापित की गई फ्लोरेंस और उसके वफादार कुत्ते की मूर्ति आने वाले जलपोतों का स्वागत करती है।

   हार्दिक अभिनन्दन और स्वागत में कुछ बात है जो स्वीकार करना दिखाती है। परमेश्वर के वचन बाइबल के रोमियों 15:7 में पौलुस ने अपने पाठकों से आग्रह किया: "इसलिये, जैसा मसीह ने भी परमेश्वर की महिमा के लिये तुम्हें ग्रहण किया है, वैसे ही तुम भी एक दूसरे को ग्रहण करो"। पौलुस बता रहा था कि मसीही विश्वासी और मसीह यीशु के अनुयायी होने के नाते, हमें एक दूसरे के प्रति कैसा व्यवहार रखना चाहिए: "और धीरज, और शान्ति का दाता परमेश्वर तुम्हें यह वरदान दे, कि मसीह यीशु के अनुसार आपस में एक मन रहो। ताकि तुम एक मन और एक मुंह हो कर हमारे प्रभु यीशु मसीह के पिता परमेश्वर की बड़ाई करो" (रोमियों 15:5-6)।

   मसीह यीशु में सहविश्वासियों को स्वीकार करना केवल एक दूसरे के प्रति हमारे प्रेम ही को नहीं दिखाता है - यह उस महान प्रेम को प्रतिबिंबित करता है जिसके द्वारा प्रभु परमेश्वर ने हमें अपने परिवार में सम्मिलित किया है - स्थायी रूप से, अनन्तकाल के लिए। - बिल क्राऊडर


मसीही जितना मसीह की निकटता में बढ़ते हैं, 
वे उतना ही एक दूसरे की निकटता में भी बढ़ते हैं।

विरोध या झूठी बड़ाई के लिये कुछ न करो पर दीनता से एक दूसरे को अपने से अच्छा समझो। हर एक अपनी ही हित की नहीं, वरन दूसरों की हित की भी चिन्‍ता करे। - फिलिप्पियों 2:3-4

बाइबल पाठ: रोमियों 15:1-7
Romans 15:1 निदान हम बलवानों को चाहिए, कि निर्बलों की निर्बलताओं को सहें; न कि अपने आप को प्रसन्न करें। 
Romans 15:2 हम में से हर एक अपने पड़ोसी को उस की भलाई के लिये सुधारने के निमित प्रसन्न करे। 
Romans 15:3 क्योंकि मसीह ने अपने आप को प्रसन्न नहीं किया, पर जैसा लिखा है, कि तेरे निन्दकों की निन्दा मुझ पर आ पड़ी। 
Romans 15:4 जितनी बातें पहिले से लिखी गईं, वे हमारी ही शिक्षा के लिये लिखी गईं हैं कि हम धीरज और पवित्र शास्त्र की शान्ति के द्वारा आशा रखें। 
Romans 15:5 और धीरज, और शान्ति का दाता परमेश्वर तुम्हें यह वरदान दे, कि मसीह यीशु के अनुसार आपस में एक मन रहो। 
Romans 15:6 ताकि तुम एक मन और एक मुंह हो कर हमारे प्रभु यीशु मसीह के पिता परमेश्वर की बड़ाई करो। 
Romans 15:7 इसलिये, जैसा मसीह ने भी परमेश्वर की महिमा के लिये तुम्हें ग्रहण किया है, वैसे ही तुम भी एक दूसरे को ग्रहण करो।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 91-93
  • रोमियों 15:1-13


Monday, August 14, 2017

परिप्रेक्ष्य


   हम एलबर्ट आइन्स्टाईन को उनके बिखरे हुए बालों, बड़ी-बड़ी आँखों और आकर्षक बुद्धिमता के अलावा उनके एक सुप्रसिद्ध वैज्ञानिक और भौतिक शास्त्री होने के लिए जानते हैं; एक ऐसे प्रवीण वैज्ञानिक होने के लिए जिन्होंने संसार की रचना और कार्यविद्धि के प्रति हमारा दृष्टिकोण बदल दिया। उनके प्रसिद्ध सूत्र, E=mc2 ने वैज्ञानिक सोच में क्रांति ला दी और हमें नाभिकीय युग में पहुँचा दिया। उन्होंने अपने "Special Theory of Relativity (सापेक्षता के विशेष सिद्धांत)" के द्वारा तर्क दिया कि क्योंकि सृष्टि में सब कुछ गतिवान है, इसलिए हर बात को समझना और जानना उसके परिप्रेक्ष्य पर निर्भर करता है। उनका मानना था कि प्रकाश की गति ही एकमात्र अपरिवर्तनीय तथ्य है, जिसके आधार पर हम अन्तरिक्ष, समय, और भौतिक द्रव्यमान को माप सकते हैं।

   एलबर्ट आइन्स्टाईन से सदियों पहले प्रभु यीशु ने हमारे संसार को जानने और समझने के लिए प्रकाश के महत्व के बारे में बताया, किंतु एक भिन्न परिप्रेक्ष्य से। प्रभु यीशु ने संसार की ज्योति होने के अपने दावे (यूहन्ना 8:12) के समर्थन में एक जन्म से अन्धे की आँखों को ज्योति दी (यूहन्ना 9:6)। इस घटना को लेकर जब उस समय के धर्मगुरुओं, फरीसियों, ने प्रभु पर पापी होने का दोषारोपण किया, तो ज्योति पाने वाले उस कृतज्ञ जन्म के अँधे ने उन से कहा, "...मैं नहीं जानता कि वह पापी है या नहीं: मैं एक बात जानता हूं कि मैं अन्‍धा था और अब देखता हूं" (यूहन्ना 9:25)।

   यद्यपि बाद में आइन्स्टाईन के विचारों को सरलता से जाँच पाना कठिन हुआ, प्रभु यीशु के सभी दावों की जाँच की जा सकती है। जब हम परमेश्वर के वचन बाइबल की शिक्षाओं में प्रभु यीशु के साथ चलते हैं, उसे अपनी दिनचर्या में आमंत्रित कर के अपने जीवन का भाग बना लेते हैं, तो हम स्वयं देखने पाएंगे कि वह प्रत्येक बात के प्रति हमारे परिप्रेक्ष्य को बदल देता है, हमें जीवन के प्रति एक नया दृष्टिकोण प्रदान करता है। - मार्ट डीहॉन


केवल मसीह की ज्योति में चलकर ही हम उसके प्रेम में जीवन जी सकते हैं।

तब यीशु ने फिर लोगों से कहा, जगत की ज्योति मैं हूं; जो मेरे पीछे हो लेगा, वह अन्धकार में न चलेगा, परन्तु जीवन की ज्योति पाएगा। - यूहन्ना 8:12

बाइबल पाठ: यूहन्ना 9:1-7
John 9:1 फिर जाते हुए उसने एक मनुष्य को देखा, जो जन्म का अन्‍धा था। 
John 9:2 और उसके चेलों ने उस से पूछा, हे रब्बी, किस ने पाप किया था कि यह अन्‍धा जन्मा, इस मनुष्य ने, या उसके माता पिता ने? 
John 9:3 यीशु ने उत्तर दिया, कि न तो इस ने पाप किया था, न इस के माता पिता ने: परन्तु यह इसलिये हुआ, कि परमेश्वर के काम उस में प्रगट हों। 
John 9:4 जिसने मुझे भेजा है; हमें उसके काम दिन ही दिन में करना अवश्य है: वह रात आने वाली है जिस में कोई काम नहीं कर सकता। 
John 9:5 जब तक मैं जगत में हूं, तब तक जगत की ज्योति हूं। 
John 9:6 यह कहकर उसने भूमि पर थूका और उस थूक से मिट्टी सानी, और वह मिट्टी उस अन्धे की आंखों पर लगाकर। 
John 9:7 उस से कहा; जा शीलोह के कुण्ड में धो ले, (जिस का अर्थ भेजा हुआ है) सो उसने जा कर धोया, और देखता हुआ लौट आया।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 89-90
  • रोमियों 14


Sunday, August 13, 2017

सामर्थ्य


   अपने मोबाइल फोन पर आए एक सन्देश को पढ़ते हुए मेरा पारा चढ़ने लगा, और खून खौलने लगा। मैं तुरंत उस सन्देश के प्रत्युत्तर में वैसा ही सन्देश भेजना चाहता था, परन्तु मेरे अन्दर से एक आवाज़ आई, "अभी आवेश में नहीं; इसका उत्तर कल देना।" रात के अच्छे आराम के पश्चात, अगले दिन, जिस बात से मैं बीते दिन में इतना भड़क गया था, वही अब बहुत मामूली लग रही थी। मैंने ही उसे आवश्यकता से कहीं अधिक बढ़ा-चढ़ा के समझ लिया था क्योंकि मैं किसी दूसरे के हित को अपने हित से आगे नहीं रखना चाहता था। मैं किसी दूसरे की सहायता के लिए अपने आप को कोई कष्ट नहीं देना चाहता था।

   मेरे लिए यह खेद की बात है कि मैं अनेकों बार क्रोध और आवेश में लोगों को प्रतिक्रिया और प्रत्युत्तर दे बैठता हूँ। मैं पाता हूँ कि इस प्रवृत्ति के निवारण के लिए मुझे बहुत बार परमेश्वर के वचन बाइबल के महान सत्यों को स्मरण करके अपने आप को काबू में लेना पड़ता है; जैसे कि "क्रोध तो करो, पर पाप मत करो: सूर्य अस्‍त होने तक तुम्हारा क्रोध न रहे" (इफिसियों 4:26) और "हर एक अपने ही हित की नहीं, वरन दूसरों की हित की भी चिन्‍ता करे" (फिलिप्पियों 2:4)।

   हम मसीही विश्वासियों को परमेश्वर का धन्यवादी होना चाहिए कि उसने अपने पवित्र आत्मा को हमारे अन्दर निवास के लिए दिया है; और वह हमें सिखाता-समझाता है, पाप से लड़ने में हमारी सहायता करता है। पौलुस और पतरस ने इसे पवित्र आत्मा का पवित्र करने का कार्य कहा है (2 थिस्सलुनीकियों 2:13; 1 पतरस 1:2)। पवित्र आत्मा की इस सामर्थ्य के बिना हम निःसहाय और पराजित जीवन व्यतीत कर रहे होते। परन्तु उसके द्वारा हमें दी जाने वाली इस सामर्थ्य के कारण अब हम आशा से परिपूर्ण जयवंत जीवन जीने पाते हैं। - पोह फैंग चिया


परमेश्वर के जन का विकास सारी उम्र चलते रहने वाला कार्य है।

परन्तु सहायक अर्थात पवित्र आत्मा जिसे पिता मेरे नाम से भेजेगा, वह तुम्हें सब बातें सिखाएगा, और जो कुछ मैं ने तुम से कहा है, वह सब तुम्हें स्मरण कराएगा। - यूहन्ना 14:26

बाइबल पाठ: 2 थिस्सलुनीकियों 2:13-17
2 Thessalonians 2:12 और जितने लोग सत्य की प्रतीति नहीं करते, वरन अधर्म से प्रसन्न होते हैं, सब दण्‍ड पाएं।
2 Thessalonians 2:13 पर हे भाइयो, और प्रभु के प्रिय लोगो चाहिये कि हम तुम्हारे विषय में सदा परमेश्वर का धन्यवाद करते रहें, कि परमेश्वर ने आदि से तुम्हें चुन लिया; कि आत्मा के द्वारा पवित्र बन कर, और सत्य की प्रतीति कर के उद्धार पाओ। 
2 Thessalonians 2:14 जिस के लिये उसने तुम्हें हमारे सुसमाचार के द्वारा बुलाया, कि तुम हमारे प्रभु यीशु मसीह की महिमा को प्राप्त करो। 
2 Thessalonians 2:15 इसलिये, हे भाइयों, स्थिर रहो; और जो जो बातें तुम ने क्या वचन, क्या पत्री के द्वारा हम से सीखी है, उन्हें थामे रहो।
2 Thessalonians 2:16 हमारा प्रभु यीशु मसीह आप ही, और हमारा पिता परमेश्वर जिसने हम से प्रेम रखा, और अनुग्रह से अनन्त शान्‍ति और उत्तम आशा दी है। 
2 Thessalonians 2:17 तुम्हारे मनों में शान्‍ति दे, और तुम्हें हर एक अच्‍छे काम, और वचन में दृढ़ करे।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 87-88
  • रोमियों 13


Saturday, August 12, 2017

चित्र


   रॉबर्ट हेन्किस ने अपनी पुस्तक Portraits of Famous American Women में लिखा, "चित्र कोई फोटो नहीं है, ना ही वह व्यक्ति की हू-ब-हू समानता में बनाई गई छवि है।" चित्र बाहरी स्वरूप से आगे निकलकर मानवीय आत्मा की भीतरी गहराईयों में झाँकता है। चित्र में एक सच्चा कलाकार दर्शाना चाहता है कि वह व्यक्ति वास्तव में है क्या।

   सदियों से प्रभु यीशु के अनेकों चित्र बनाए गए हैं। हो सकता है कि आपने उन्हें किसी चर्च या कला के संग्रहालय में देखा हो, या कोई चित्र आपके घर में भी लगा हो। लेकिन संसार्र भर में पाए जाने वाले इन चित्रों में से कोई एक भी चित्र प्रभु यीशु का वास्तविक चित्र नहीं है क्योंकि हमारे प्रभु के शारीरिक स्वरूप की न तो कोई फोटो है और न ही कभी कोई वास्तविक छवि बनी है; सभी उपलब्ध चित्र विभिन्न कलाकारों ने अपनी कल्पना और समझ के आधार पर बनाए हैं।

   परन्तु परमेश्वर के वचन बाइबल में यशायाह भविष्यद्वक्ता की पुस्तक के 53वें अध्याय में हम प्रभु का एक महान शब्द-चित्रण पाते हैं। परमेश्वर की प्रेरणा से लिखे गए इस शब्द-चित्र में प्रभु के, और उसके कार्य के बारे में एक सजीव वर्णन दिया गया है: "निश्चय उसने हमारे रोगों को सह लिया और हमारे ही दु:खों को उठा लिया; तौभी हम ने उसे परमेश्वर का मारा-कूटा और दुर्दशा में पड़ा हुआ समझा। परन्तु वह हमारे ही अपराधो के कारण घायल किया गया, वह हमारे अधर्म के कामों के हेतु कुचला गया; हमारी ही शान्ति के लिये उस पर ताड़ना पड़ी कि उसके कोड़े खाने से हम चंगे हो जाएं" (यशायाह 53:4-5)।

   बाइबल के इस खण्ड में हम प्रभु यीशु के चेहरे पर प्रेम और दुःख, शोक और दर्द को देखने पाते हैं। उसके होंठों पर कोई दोष या निंदा नहीं है; वह स्वयं निष्पाप और निर्दोष है किंतु हम सभी मनुष्यों के पापों को अपने ऊपर उठाए हुए है। और अपने अन्दर वह जानता है कि, "...अपने ज्ञान के द्वारा मेरा धर्मी दास बहुतेरों को धर्मी ठहराएगा..." (पद 11)।

   जगत के उद्धारकर्ता का यह कैसा अद्भुत चित्र है, जिसे प्रत्येक हृदय में बसा लिया जाना चाहिए। - डेविड मैक्कैसलैंड


प्रेम का सजीव स्वरूप, प्रभु यीशु मसीह है।

जो प्रेम परमेश्वर हम से रखता है, वह इस से प्रगट हुआ, कि परमेश्वर ने अपने एकलौते पुत्र को जगत में भेजा है, कि हम उसके द्वारा जीवन पाएं। प्रेम इस में नहीं कि हम ने परमेश्वर ने प्रेम किया; पर इस में है, कि उसने हम से प्रेम किया; और हमारे पापों के प्रायश्‍चित्त के लिये अपने पुत्र को भेजा। - 1 यूहन्ना 4:9-10

बाइबल पाठ: यशायाह 53
Isaiah 53:1 जो समाचार हमें दिया गया, उसका किस ने विश्वास किया? और यहोवा का भुजबल किस पर प्रगट हुआ? 
Isaiah 53:2 क्योंकि वह उसके साम्हने अंकुर की नाईं, और ऐसी जड़ के समान उगा जो निर्जल भूमि में फूट निकले; उसकी न तो कुछ सुन्दरता थी कि हम उसको देखते, और न उसका रूप ही हमें ऐसा दिखाई पड़ा कि हम उसको चाहते। 
Isaiah 53:3 वह तुच्छ जाना जाता और मनुष्यों का त्यागा हुआ था; वह दु:खी पुरूष था, रोग से उसकी जान पहिचान थी; और लोग उस से मुख फेर लेते थे। वह तुच्छ जाना गया, और, हम ने उसका मूल्य न जाना।
Isaiah 53:4 निश्चय उसने हमारे रोगों को सह लिया और हमारे ही दु:खों को उठा लिया; तौभी हम ने उसे परमेश्वर का मारा-कूटा और दुर्दशा में पड़ा हुआ समझा। 
Isaiah 53:5 परन्तु वह हमारे ही अपराधों के कारण घायल किया गया, वह हमारे अधर्म के कामों के हेतु कुचला गया; हमारी ही शान्ति के लिये उस पर ताड़ना पड़ी कि उसके कोड़े खाने से हम चंगे हो जाएं। 
Isaiah 53:6 हम तो सब के सब भेड़ों की नाईं भटक गए थे; हम में से हर एक ने अपना अपना मार्ग लिया; और यहोवा ने हम सभों के अधर्म का बोझ उसी पर लाद दिया।
Isaiah 53:7 वह सताया गया, तौभी वह सहता रहा और अपना मुंह न खोला; जिस प्रकार भेड़ वध होने के समय वा भेड़ी ऊन कतरने के समय चुपचाप शान्त रहती है, वैसे ही उसने भी अपना मुंह न खोला। 
Isaiah 53:8 अत्याचार कर के और दोष लगाकर वे उसे ले गए; उस समय के लोगों में से किस ने इस पर ध्यान दिया कि वह जीवतों के बीच में से उठा लिया गया? मेरे ही लोगों के अपराधों के कारण उस पर मार पड़ी। 
Isaiah 53:9 और उसकी कब्र भी दुष्टों के संग ठहराई गई, और मृत्यु के समय वह धनवान का संगी हुआ, यद्यपि उसने किसी प्रकार का अपद्रव न किया था और उसके मुंह से कभी छल की बात नहीं निकली थी।
Isaiah 53:10 तौभी यहोवा को यही भाया कि उसे कुचले; उसी ने उसको रोगी कर दिया; जब तू उसका प्राण दोषबलि करे, तब वह अपना वंश देखने पाएगा, वह बहुत दिन जीवित रहेगा; उसके हाथ से यहोवा की इच्छा पूरी हो जाएगी। 
Isaiah 53:11 वह अपने प्राणों का दु:ख उठा कर उसे देखेगा और तृप्त होगा; अपने ज्ञान के द्वारì