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Thursday, August 31, 2017

विलंब


   कई वर्षों से मैं अपने चचेरे भाई के साथ हमारे जीवनों में पापों की क्षमा और उद्धारकर्ता की आवश्यकता के बारे में बात किया करता था। जब हाल ही में वह मुझ से मिलने आया तो मैंने एक बार फिर उससे आग्रह किया कि वह मसीह यीशु को ग्रहण कर ले; तुरंत ही उसका प्रत्युत्तर था: "मैं यीशु को ग्रहण करना और चर्च आना तो चाहता हूँ, परन्तु अभी नहीं। मैं अन्य धर्मों को मानने वालों के मध्य रहता हूँ। जब तक किसी नए स्थान पर जाकर न बस जऊँ, मैं अपने मसीही विश्वास को भली-भांति निभा नहीं पाऊँगा।" उसने संभावित सताव, उपहास, और साथियों से आने वाले दबाव का हवाला देकर अपना निर्णय टालने को उचित ठहराना चाहा।

   उसके ये सब भय सही थे, परन्तु मैंने उसे आश्वस्त किया कि चाहे कोई भी परिस्थिति क्यों न आ जाए, प्रभु यीशु उसे कभी अकेला नहीं छोड़ेगा। मैंने उसे प्रोत्साहित किया कि वह निर्णय लेने में विलंब न करे, वरन प्रभु परमेश्वर पर भरोसा करे कि वह उसकी सहायता करेगा, उसे सुरक्षा प्रदान करेगा। मेरे भाई ने टालना बन्द करके प्रभु यीशु से पापों की क्षमा की बात को स्वीकार किया, अपना जीवन उसे समर्पित करके प्रभु को अपना निज उद्धारकर्ता स्वीकार कर लिया।

   जब प्रभु यीशु ने लोगों को अपने पीछे हो लेने के लिए आमंत्रित किया, तब उन लोगों ने भी निर्णय टालने के लिए बहाने बनाए - संसार की बातों और ज़िम्मेदारियों में व्यस्त होने के (लूका 9:59-62)। जो उत्तर प्रभु यीशु ने तब उन लोगों को दिया था (पद 60-62) वह आज हम सब से भी आग्रह करता है कि जीवन के सबसे महत्वपूर्ण और अनन्तकाल का प्रभाव रखने वाले इस निर्णय को लेने में विलंब न करें। हमारी आत्माओं के उद्धार से महत्वपूर्ण और कोई विषय नहीं है।

   क्या आज आप परमेश्वर की वाणी को आपको पापों की क्षमा तथा उद्धार पाने के लिए बुलाते हुए सुन रहे हैं - तो विलंब कदापि न करें; जब तक अवसर है समय का सदुपयोग करें और अपना अनन्तकाल सुरक्षित कर लें: "क्योंकि वह तो कहता है, कि अपनी प्रसन्नता के समय मैं ने तेरी सुन ली, और उद्धार के दिन मैं ने तेरी सहायता की: देखो, अभी वह प्रसन्नता का समय है; देखो, अभी उद्धार का दिन है" (2 कुरिन्थियों 6:2)। - लॉरेंस दरमानी

आज ही उद्धार का दिन है।

वरन जिस दिन तक आज का दिन कहा जाता है, हर दिन एक दूसरे को समझाते रहो, ऐसा न हो, कि तुम में से कोई जन पाप के छल में आकर कठोर हो जाए। - इब्रानियों 3:13

बाइबल पाठ: लूका 9:57-62
Luke 9:57 जब वे मार्ग में चले जाते थे, तो किसी न उस से कहा, जहां जहां तू जाएगा, मैं तेरे पीछे हो लूंगा। 
Luke 9:58 यीशु ने उस से कहा, लोमडिय़ों के भट और आकाश के पक्षियों के बसेरे होते हैं, पर मनुष्य के पुत्र को सिर धरने की भी जगह नहीं। 
Luke 9:59 उसने दूसरे से कहा, मेरे पीछे हो ले; उसने कहा; हे प्रभु, मुझे पहिले जाने दे कि अपने पिता को गाड़ दूं। 
Luke 9:60 उसने उस से कहा, मरे हुओं को अपने मुरदे गाड़ने दे, पर तू जा कर परमेश्वर के राज्य की कथा सुना। 
Luke 9:61 एक और ने भी कहा; हे प्रभु, मैं तेरे पीछे हो लूंगा; पर पहिले मुझे जाने दे कि अपने घर के लोगों से विदा हो आऊं। 
Luke 9:62 यीशु ने उस से कहा; जो कोई अपना हाथ हल पर रखकर पीछे देखता है, वह परमेश्वर के राज्य के योग्य नहीं।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 132-134
  • 1 कुरिन्थियों 11:17-34


Wednesday, August 30, 2017

सत्यापित


   मुझे और मेरे मित्रों को ईमेल के द्वारा एक सूचना प्राप्त हुई - एक घातक मकड़ा अमेरिका में आ गया है और लोगों को मार रहा है। उस सूचना में, उसे सच्चा जताने के लिए, कई वैज्ञानिक संज्ञाएं और जीवन की वास्तविक परिस्थितियाँ भी दी गईं थीं, जिससे सूचना सच्ची लग रही थी। परन्तु जब मैंने उस सूचना की पुष्टि के लिए इंटरनैट पर कुछ भरोसे मंद वेबसाईट्स पर खोज की तो पता चला कि वह सच्ची नहीं थी, इंटरनैट पर फैलाए जाने वाले धोखों में से एक थी। यह सच्चाई एक विश्वासयोग्य स्त्रोत से पुष्टि के द्वारा ही स्पष्ट हो पाई।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में हम पाते हैं कि प्रथम ईसवीं में, मकिदूनिया के कुछ मसीही विश्वासियों ने भी जो प्रचार वे सुन रहे थे, उसे सत्यापित करने के महत्व को समझा, जिसके लिए बाइबल में उनकी प्रशंसा की गई: "ये लोग तो थिस्सलुनीके के यहूदियों से भले थे और उन्होंने बड़ी लालसा से वचन ग्रहण किया, और प्रति दिन पवित्र शास्‍त्रों में ढूंढ़ते रहे कि ये बातें यों ही हैं, कि नहीं" (प्रेरितों 17:11)। बेरिया में रहने वाले वे विश्वासी प्रेरित पौलुस से प्रभु का सन्देश सुनते थे, परन्तु साथ ही वे जाकर उस सन्देश को परमेश्वर के वचन के तब उपलब्ध पुराने नियम खण्ड से सत्यापित भी करते थे। संभवतः पौलुस उन्हें बता रहा था कि पुराने नियम में यह लिखा गया है कि मसीहा दुःख उठाएगा और लोगों के पापों के लिए मारा जाएगा। परन्तु वे स्वयं मूल स्त्रोत से आश्वस्त हो जाना चाहते थे कि जो कहा जा रहा है वह सत्य है।

   जब कभी भी हम ऐसे आत्मिक विचारों या शिक्षाओं को सुनें जो हमें विचलित करें या अटपटी लगें, तो हमें सचेत हो जाना चाहिए। हमें स्वयं पवित्र-शास्त्र से खोजना चाहिए, भरोसेमंद स्त्रोतों से पता करना चाहिए, उसके विषय सही निर्णय करने के लिए प्रार्थना में प्रभु यीशु से बुद्धिमता माँगनी चाहिए। प्रत्येक आत्मिक शिक्षा को सत्यापित करके, तब ही उसे ग्रहण करना चाहिए। - डेव ब्रैनन

परमेश्वर का सत्य हर प्रकार की जाँच में खरा ही उतरेगा।

सब बातों को परखो: जो अच्छी है उसे पकड़े रहो। - 1 थिस्सलुनीकियों 5:21

बाइबल पाठ: प्रेरितों 17:10-13, 1 यूहन्ना 4:1-6
Acts 17:10 भाइयों ने तुरन्त रात ही रात पौलुस और सीलास को बिरीया में भेज दिया: और वे वहां पहुंचकर यहूदियों के आराधनालय में गए। 
Acts 17:11 ये लोग तो थिस्सलुनीके के यहूदियों से भले थे और उन्होंने बड़ी लालसा से वचन ग्रहण किया, और प्रति दिन पवित्र शास्‍त्रों में ढूंढ़ते रहे कि ये बातें यों ही हैं, कि नहीं। 
Acts 17:12 सो उन में से बहुतों ने, और यूनानी कुलीन स्‍त्रियों में से, और पुरूषों में से बहुतेरों ने विश्वास किया। 
Acts 17:13 किन्‍तु जब थिस्सलुनीके के यहूदी जान गए, कि पौलुस बिरीया में भी परमेश्वर का वचन सुनाता है, तो वहां भी आकर लोगों को उकसाने और हलचल मचाने लगे। 

1 John 4:1 हे प्रियों, हर एक आत्मा की प्रतीति न करो: वरन आत्माओं को परखो, कि वे परमेश्वर की ओर से हैं कि नहीं; क्योंकि बहुत से झूठे भविष्यद्वक्ता जगत में निकल खड़े हुए हैं। 
1 John 4:2 परमेश्वर का आत्मा तुम इसी रीति से पहचान सकते हो, कि जो कोई आत्मा मान लेती है, कि यीशु मसीह शरीर में हो कर आया है वह परमेश्वर की ओर से है। 
1 John 4:3 और जो कोई आत्मा यीशु को नहीं मानती, वह परमेश्वर की ओर से नहीं; और वही तो मसीह के विरोधी की आत्मा है; जिस की चर्चा तुम सुन चुके हो, कि वह आने वाला है: और अब भी जगत में है। 
1 John 4:4 हे बालको, तुम परमेश्वर के हो: और तुम ने उन पर जय पाई है; क्योंकि जो तुम में है, वह उस से जो संसार में है, बड़ा है। 
1 John 4:5 वे संसार के हैं, इस कारण वे संसार की बातें बोलते हैं, और संसार उन की सुनता है। 
1 John 4:6 हम परमेश्वर के हैं: जो परमेश्वर को जानता है, वह हमारी सुनता है; जो परमेश्वर को नहीं जानता वह हमारी नहीं सुनता; इसी प्रकार हम सत्य की आत्मा और भ्रम की आत्मा को पहचान लेते हैं।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 129-131
  • 1 कुरिन्थियों 11:1-16


Tuesday, August 29, 2017

चलना


   मेरी बेटी चलना सीख रही है। मुझे उसे पकड़े रहना पड़ता है, और वह मेरी ऊँगली को दृढ़ता से थामे रहती है, क्योंकि वह अभी भी अपने आप से चलने में अस्थिर है। उसे गिरने का भय रहता है, परन्तु उसे संभालने और स्थिर रखने के लिए मैं उसके साथ बनी रहती हूँ। मेरी सहायता से चलते हुए उसकी आँखों में उत्साह, उल्लास और सुरक्षा की चमक होती है। परन्तु कभी-कभी जब मैं उसे कुछ खतरनाक रास्तों पर नहीं चलने देती हूँ तो वह रोने लगती है; उसे अभी यह समझ नहीं है कि उसे उन रास्तों पर जाने से रोक कर मैं उसकी रक्षा कर रही हूँ, उसे हानि में पड़ने से बचा रही हूँ।

   मेरी छोटी बेटी के समान, हमें भी बहुधा हमारे आत्मिक चाल-चलन में हमारा ध्यान रखने, हमारा मार्गदर्शन करने और हमें स्थिर बनाए रखने के लिए किसी बड़े और सामर्थी की आवश्यकता होती है। हम मसीही विश्वासियों के साथ हमारा प्रभु परमेश्वर है, जो हमारा, हम जो उसकी आत्मिक सन्तान हैं, सदा ध्यान रखता है, हमें चलने में सहायक होता है, हमारे कदमों को सही ओर ले जाता है, हमारा मार्गदर्श्न करता है, और गलत राहों से बचा कर रखता है।

   परमेश्वर के वचन बाइबल का एक नायक, राजा दाऊद, जीवन में परमेश्वर की देखभाल और सहायता की आवश्यकता को भली-भांति जानता था। अपने द्वारा लिखे भजनों में से एक, भजन 18 में दाऊद वर्णन करता है कि कैसे परमेश्वर हमारी सहायता और मार्गदर्शन करता है जब हम किसी परेशानी में पड़कर भटकने लगते हैं (पद 32)। परमेश्वर हमारे पैरों को हरिणियों के समान, जो बिना फिसले ऊँचे स्थानों पर चढ़ जाती हैं, स्थिर करता है (पद 33); और यदि हम फिसल भी जाएं तो भी वह हमें थाम लेने के लिए हमारे साथ बना रहता है (पद 35)।
   
   हम चाहे नए मसीही विश्वासी हों जो आत्मिक जीवन में कदम बढ़ाना अभी सीख ही रहे हैं, या हम अपने विश्वास के जीवन में आगे बढ़ चुके हों, हम सबको प्रभु परमेश्वर के थामे रखने और सही दिशा देने वाले हाथों की आवश्यकता बनी रहती है; और हमारा प्रभु हमारे सहारे और सहायता के लिए सदा हमारे साथ-साथ चलता रहता है। - कीला ओकोआ


मेरे जीवन मार्ग के हर कदम पर परमेश्वर मुझ पर ध्यान बनाए रखता है।

क्योंकि वह तो मुझे विपत्ति के दिन में अपने मण्डप में छिपा रखेगा; अपने तम्बू के गुप्त स्थान में वह मुझे छिपा लेगा, और चट्टान पर चढ़ाएगा। - भजन 27:5

बाइबल पाठ: भजन 18:30-36
Psalms 18:30 ईश्वर का मार्ग सच्चाई; यहोवा का वचन ताया हुआ है; वह अपने सब शरणागतों की ढाल है।
Psalms 18:31 यहोवा को छोड़ क्या कोई ईश्वर है? हमारे परमेश्वर को छोड़ क्या और कोई चट्टान है? 
Psalms 18:32 यह वही ईश्वर है, जो सामर्थ से मेरा कटिबन्ध बान्धता है, और मेरे मार्ग को सिद्ध करता है। 
Psalms 18:33 वही मेरे पैरों को हरिणियों के पैरों के समान बनाता है, और मुझे मेरे ऊंचे स्थानों पर खड़ा करता है। 
Psalms 18:34 वह मेरे हाथों को युद्ध करना सिखाता है, इसलिये मेरी बाहों से पीतल का धनुष झुक जाता है। 
Psalms 18:35 तू ने मुझ को अपने बचाव की ढाल दी है, तू अपने दाहिने हाथ से मुझे सम्भाले हुए है, और मेरी नम्रता ने महत्व दिया है। 
Psalms 18:36 तू ने मेरे पैरों के लिये स्थान चौड़ा कर दिया, और मेरे पैर नहीं फिसले।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 126-128
  • 1 कुरिन्थियों 10:19-33


Monday, August 28, 2017

नायक


   हाल ही में प्रकाशित हुई एक पुस्तक अमेरिका के इतिहास के एक छोटे भाग में लाए गए कल्पना के कार्य के बारे में बताती है। इस पुस्तक में पुराने पश्चिमी अमेरिका में बन्दूकों और गोलियों के सहारे जीवन जीने वाले नायकों, व्याट एर्प और डॉक हॉलिडे को वास्तविक जीवन में नाकारा और नासमझ बताया गया है। नैशनल पब्लिक रेडियो को दिए गए एक साक्षात्कार में पुस्तक के लेखक ने वास्तविक एर्प के बारे में कहा, "उसने अपने सारे जीवन भर कुछ भी उल्लेखनीय, कभी भी नहीं किया।" लेकिन अनेकों उपन्यासों और हॉलिवुड की कई फिल्मों में उसे एक नायक के समान प्रस्तुत किया गया है। परन्तु विश्वासयोग्य एतिहासिक वृतांत बताते हैं कि वह नायक कदापि नहीं था।

   इसकी तुलना में, परमेश्वर के वचन बाइबल में ऐसे अनेकों लोगों का वर्णन है जिनके जीवन में कमियाँ और त्रुटियाँ थीं, परन्तु फिर भी वे परमेश्वर की सहायता और मार्ग्दर्शन से वास्तविक नायक बन गए। उनका विश्वास जीवते सच्चे प्रभु परमेश्वर पर था, जो कमज़ोर और त्रुटियुक्त लोगों को लेता है और अपने अद्भुत उद्देश्यों के लिए उन्हें सामर्थी तथा अनुसरणीय नायक बना देता है।

   बाइबल के एक महान नायक मूसा को ही लीजिए। जब हम मूसा के बारे में सोचते हैं तो अकसर हम यह ध्यान नहीं कर पाते हैं कि वह एक हत्यारा था और परमेश्वर द्वारा दी जा रही ज़िम्मेदारी को स्वीकार करने का कतई इच्छुक नहीं था। उसने इस्त्राएलियों के व्यवहार से खिसिया कर परमेश्वर को ताना भी मारा था, "...तू अपने दास से यह बुरा व्यवहार क्यों करता है? और क्या कारण है कि मैं ने तेरी दृष्टि में अनुग्रह नहीं पाया, कि तू ने इन सब लोगों का भार मुझ पर डाला है? क्या ये सब लोग मेरे ही कोख में पड़े थे? क्या मैं ही ने उन को उत्पन्न किया, जो तू मुझ से कहता है, कि जैसे पिता दूध पीते बालक को अपनी गोद में उठाए उठाए फिरता है, वैसे ही मैं इन लोगों को अपनी गोद में उठा कर उस देश में ले जाऊं, जिसके देने की शपथ तू ने उनके पूर्वजों से खाई है?" (गिनती 11:11-12)। साधारण मनुष्यों की सी प्रवृत्ति मूसा में विद्यमान तो थी; परन्तु नए नियम में इब्रानियों नामक पुस्तक हमें उसके विषय स्मरण दिलाती है, "मूसा तो उसके सारे घर में सेवक के समान विश्वास योग्य रहा, कि जिन बातों का वर्णन होने वाला था, उन की गवाही दे" (इब्रानियों 3:5)।

   जो नायक होते हैं, वे अपने जीवनों द्वारा उस सच्चे तथा वास्तव में अनुसरणीय नायक प्रभु यीश