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Wednesday, September 13, 2017

स्मरण


   जुलाई 28, 2014, प्रथम विश्व-युध्द के आरंभ की सौवीं जयंती थी। ब्रिटिश मीडिया में, 4 वर्ष तक चलने वाले इस संघर्ष की जयंती के उपलक्ष में, अनेकों चर्चाएं और वृतचित्र प्रसारित किए गए। एक टी.वी. कार्यक्रम Mr. Selfridge में, जो लंडन मे स्थित एक वास्तविक डिपार्टमैन्टल स्टोर पर आधारित है, एक प्रसंग दिखाया जो 1914 के समय पर आधारित था और जिसमें स्टोर में काम करने वाले युवकों का सेना में भरती होने के लिए जाना दिखाया गया था। मैं जब स्वेच्छा से दिए जाने वाले बलिदानों की यह घटनाएं देख रहा था तो मेरा गला रुँध गया। जिन सैनिकों के बारे में दिखाया जा रहा था वे अभी युवा ही थे, किंतु युध्द में जाने के लिए तत्पर थे, यह जानते हुए भी कि उनका उस युध्द से लौट कर आने की संभावना बहुत कम थी।

   यद्यपि प्रभु यीशु मसीह किसी शारीरिक शत्रु को हराने के लिए किसी युध्द में नहीं गए, परन्तु वे हम मनुष्यों के सबसे घातक शत्रु - पाप और मृत्यु को हराने के लिए क्रूस पर अपने जीवन को बलिदान करने के लिए अवश्य गए। प्रभु यीशु इस संसार में परमेश्वर के प्रेम को प्रगट करने के लिए आए थे; उन्होंने संसार के सभी मनुष्यों के पापों की कीमत चुकाने के लिए स्वेच्छा से क्रूस पर एक बहुत ही दर्दनाक मृत्यु सह लेना स्वीकार किया। जिन आताताईयों ने उन्हें कोड़े मारे और क्रूस पर कीलों से ठोक दिया, उन्होंने उन मनुष्यों को भी क्षमा कर दिया (लूका 23:34)। क्रूस पर मारे जाने और कब्र में दफनाए जाने के बाद तीसरे दिन मृतकों में से जी उठने के द्वारा प्रभु यीशु ने मृत्यु पर विजय पाई, और सारी पृथ्वी के सभी मनुष्यों के लिए, प्रभु में लाए गए साधारण विश्वास द्वारा सेंत-मेंत पापों की क्षमा और उद्धार का मार्ग बना कर उपलब्ध कर दिया। अपने विश्वासियों को परमेश्वर की सन्तान होने का अधिकार प्रदान कर दिया (यूहन्ना 3:13-16)।

   जयंतियाँ और स्मारक हमें महत्वपूर्ण ऐतिहासिक घटनाओं तथा बहादुरी के कार्यों का स्मरण करवाते हैं। क्रूस हमें स्मरण करवाता है प्रभु यीशु के उस सर्वोच्च और सबसे महत्वपूर्ण बलिदान का जिसके द्वारा समस्त मानव जाति को पाप से छुटकारे और अनन्त जीवन की आशीष मिलती है। - मेरियन स्ट्राउड


प्रभु यीशु मसीह का क्रूस, परमेश्वर के सर्वोच्च प्रेम का प्रमाण है। - ओस्वॉल्ड चैंबर्स

तब यीशु ने कहा; हे पिता, इन्हें क्षमा कर, क्योंकि ये नहीं जानते कि क्या कर रहें हैं और उन्होंने चिट्ठियां डालकर उसके कपड़े बांट लिए। - लूका 23:34

बाइबल पाठ: यूहन्ना 3:12-21
John 3:12 जब मैं ने तुम से पृथ्वी की बातें कहीं, और तुम प्रतीति नहीं करते, तो यदि मैं तुम से स्वर्ग की बातें कहूं, तो फिर क्योंकर प्रतीति करोगे? 
John 3:13 और कोई स्वर्ग पर नहीं चढ़ा, केवल वही जो स्वर्ग से उतरा, अर्थात मनुष्य का पुत्र जो स्वर्ग में है। 
John 3:14 और जिस रीति से मूसा ने जंगल में सांप को ऊंचे पर चढ़ाया, उसी रीति से अवश्य है कि मनुष्य का पुत्र भी ऊंचे पर चढ़ाया जाए। 
John 3:15 ताकि जो कोई विश्वास करे उस में अनन्त जीवन पाए।
John 3:16 क्योंकि परमेश्वर ने जगत से ऐसा प्रेम रखा कि उसने अपना एकलौता पुत्र दे दिया, ताकि जो कोई उस पर विश्वास करे, वह नाश न हो, परन्तु अनन्त जीवन पाए। 
John 3:17 परमेश्वर ने अपने पुत्र को जगत में इसलिये नहीं भेजा, कि जगत पर दंड की आज्ञा दे परन्तु इसलिये कि जगत उसके द्वारा उद्धार पाए। 
John 3:18 जो उस पर विश्वास करता है, उस पर दंड की आज्ञा नहीं होती, परन्तु जो उस पर विश्वास नहीं करता, वह दोषी ठहर चुका; इसलिये कि उसने परमेश्वर के एकलौते पुत्र के नाम पर विश्वास नहीं किया। 
John 3:19 और दंड की आज्ञा का कारण यह है कि ज्योति जगत में आई है, और मनुष्यों ने अन्धकार को ज्योति से अधिक प्रिय जाना क्योंकि उन के काम बुरे थे। 
John 3:20 क्योंकि जो कोई बुराई करता है, वह ज्योति से बैर रखता है, और ज्योति के निकट नहीं आता, ऐसा न हो कि उसके कामों पर दोष लगाया जाए। 
John 3:21 परन्तु जो सच्चाई पर चलता है वह ज्योति के निकट आता है, ताकि उसके काम प्रगट हों, कि वह परमेश्वर की ओर से किए गए हैं।

एक साल में बाइबल: 
  • नीतिवचन 16-18
  • 2 कुरिन्थियों 6


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