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Tuesday, October 31, 2017

नया


   हमारे घर की खिड़कियों के पल्ले ठीक करने का समय हो गया था। इसलिए मैंने उन पल्लों को खुरचा, रेगमाल से रगड़ा, और पट्टी मिश्रण लगा कर गढ्ढों और टूटे हुए किनारों को समतल तथा सपाट किया, और फिर उन्हें रंगने के लिए तैयार किया, उन पर अच्छा महंगा रंग भी लगाया। मेरी काफी मेहनत के बाद अब वे पल्ले पहले से बहुत अच्छे तो दिखने लगे, परन्त नए फिर भी नहीं लगते हैं। उनके नए लगने के लिए एकमात्र उपाय है उनके स्थान पर नई लकड़ी के पल्ले लगाना।

   घर में मौसम से खराब हुए पल्लों की मरम्मत करके उन्हें "बहुत अच्छा" बनाना तो ठीक है परन्तु यही बात पाप से खराब हुए हमारे हृदय तथा जीवन पर लागू नहीं होती है; उस हृदय की मरम्मत भर देना काफी नहीं है। परमेश्वर के दृष्टिकोण से सब बातों का नया हो जाना अनिवार्य है (2 कुरिन्थियों 5:17)।

   प्रभु यीशु में लाए गए विश्वास द्वारा परमेश्वर से सेंत-मेंत मिलने वाली पापों की क्षमा और उद्धार की यही अनुपम सुन्दरता है - प्रभु का विश्वासी जन, परमेश्वर के अनुग्रह द्वारा "नई सृष्टि" हो जाता है। प्रभु यीशु हमारे पापों को अपने ऊपर ले कर क्रूस पर बलिदान हो गया, और पाप तथा मृत्यु पर अपनी सामर्थ्य के प्रमाण स्वरूप तीसरे दिन फिर मृतकों में से जीवित हो उठा। प्रभु द्वारा सभी मनुष्यों के सब पापों के लिए दिए गए इस बलिदान से सारे संसार के सभी मनुष्यों के सभी पापों के दण्ड को भुगत कर एक ही बार में चुका दिया गया, इसलिए अब किसी को अपने पापों का बोझ लेकर चलने और उनके निवारण के लिए अपने किसी प्रयास को करने की कोई आवश्यकता नहीं है। अब जो मसीह यीशु में स्वेच्छा से विश्वास लाता है, अपना जीवन उसे समर्पित करता है, उसका पुराना जीवन नए से बदल जाता है (प्रेरितों 5:20), और परमेश्वर की दृष्टि में वह एक "नई सृष्टि" बन जाता है (2 कुरिन्थियों 5:17)। प्रभु यीशु द्वारा कलवरी के क्रुस पर जो कार्य हमारे लिए पूरा कर दिया गया, उसमें होकर परमेश्वर पिता मसीह यीशु में विश्वास लाने वाले सभी विश्वासियों को पूर्णतः नया और निर्दोष देखता है।

   पाप ने संसार और संसार के लोगों क्वे जीवनों में भारी नुकसान किया है। अपने प्रयासों से हम उस नुकसान को पलट नहीं सकते हैं, हम कितनी भी ’मरम्मत’ करने के प्रयास क्यों न कर लें, वह मरम्मत हमें अन्दर से नया और निर्दोष नहीं बना सकती है। परन्तु जब हम अपने पापों को मान लेते हैं, उनके लिए पश्चाताप के साथ प्रभु यीशु से क्षमा माँग लेते हैं, तो वह हमारे हृदयों को, हमारे जीवनों को परिवर्तित कर के हमें एक पूर्णतः नया जीवन प्रदान करता है। - डेव ब्रैनन


केवल प्रभु यीशु मसीह ही हमें एक नया जीवन प्रदान कर सकता है।

सो उस मृत्यु का बपतिस्मा पाने से हम उसके साथ गाड़े गए, ताकि जैसे मसीह पिता की महिमा के द्वारा मरे हुओं में से जिलाया गया, वैसे ही हम भी नए जीवन की सी चाल चलें। - रोमियों 6:4

बाइबल पाठ: 2 कुरिन्थियों 5:14-21
2 Corinthians 5:14 क्योंकि मसीह का प्रेम हमें विवश कर देता है; इसलिये कि हम यह समझते हैं, कि जब एक सब के लिये मरा तो सब मर गए। 
2 Corinthians 5:15 और वह इस निमित्त सब के लिये मरा, कि जो जीवित हैं, वे आगे को अपने लिये न जीएं परन्तु उसके लिये जो उन के लिये मरा और फिर जी उठा। 
2 Corinthians 5:16 सो अब से हम किसी को शरीर के अनुसार न समझेंगे, और यदि हम ने मसीह को भी शरीर के अनुसार जाना था, तौभी अब से उसको ऐसा नहीं जानेंगे। 
2 Corinthians 5:17 सो यदि कोई मसीह में है तो वह नई सृष्‍टि है: पुरानी बातें बीत गई हैं; देखो, वे सब नई हो गईं। 
2 Corinthians 5:18 और सब बातें परमेश्वर की ओर से हैं, जिसने मसीह के द्वारा अपने साथ हमारा मेल-मिलाप कर लिया, और मेल-मिलाप की सेवा हमें सौंप दी है। 
2 Corinthians 5:19 अर्थात परमेश्वर ने मसीह में हो कर अपने साथ संसार का मेल मिलाप कर लिया, और उन के अपराधों का दोष उन पर नहीं लगाया और उसने मेल मिलाप का वचन हमें सौंप दिया है।
2 Corinthians 5:20 सो हम मसीह के राजदूत हैं; मानो परमेश्वर हमारे द्वारा समझाता है: हम मसीह की ओर से निवेदन करते हैं, कि परमेश्वर के साथ मेल मिलाप कर लो। 
2 Corinthians 5:21 जो पाप से अज्ञात था, उसी को उसने हमारे लिये पाप ठहराया, कि हम उस में हो कर परमेश्वर की धामिर्कता बन जाएं।

एक साल में बाइबल: 
  • यिर्मयाह 22-23
  • तीतुस 1


Monday, October 30, 2017

आँधी-तूफान


   परमेश्वर के वचन बाइबल में मरकुस रचित सुसमाचार में हम एक प्रचण्ड तूफान के बारे में पढ़ते हैं। शिष्य प्रभु यीशु के साथ थे, और वे नाव द्वारा गलील के सागर के पार जा रहे थे, कि वे एक बड़ी आँधी में फंस गए। उन शिष्यों में से कुछ अनुभवी मछुआरे भी थे, परन्तु वे भी आँधी के वेग को देख कर डर गए (मरकुस 4:37-38)। उन शिष्यों के मनों में विचार उठने लगे, क्या परमेश्वर को हमारी कोई चिंता नहीं है? क्या वे प्रभु यीशु द्वारा चुने और नियुक्त किए हुए तथा प्रभु के करीबी नहीं थे? क्या झील के पार जाने में वे प्रभु की आज्ञा का पालन नहीं कर रहे थे? तो फिर उन्हें ऐसी बड़ी आँधी-तूफान का सामना क्यों करना पड़ रहा था?

   जीवन में आँधी-तूफान के अनुभव से कोई अछूता नहीं है। परन्तु जैसे वे शिष्य पहले आँधी से डरे परन्तु फिर उस आँधी के अनुभव के कारण ही प्रभु यीशु के प्रति उनकी श्रद्धा और भी अधिक बढ़ गई, उसी प्रकार जब हम अपने जीवनों में आँधी-तूफानों का सामना करते हैं, तो परमेश्वर और उसके कार्यों के प्रति हमारी समझ और गहरी हो जाती है। उन शिष्यों के मन में कौतहूल था, "यह कौन है, कि आन्‍धी और पानी भी उस की आज्ञा मानते हैं?" (मरकुस 4:41)। हमारे जीवनों में आने वाले आँधी-तूफानों से हम सीख सकते हैं कि हमारे जीवन का कोई आँधी-तूफान प्रभु परमेश्वर को अपनी इच्छा पूरी करने से नहीं रोक सकता है (मरकुस 5:1)।

   चाहे हम यह नहीं समझ पाएं कि प्रभु परमेश्वर हमारे जीवनों में आँधी-तूफानों क्यों आने देता है, परन्तु हम उसके धन्यवादी हो सकते हैं कि उन में हो कर हम उसके बारे में और अधिक सीख सकते हैं। हर परिस्थिति हमें सिखाती है कि हमारा प्रभु परमेश्वर सदा हमारा ध्यान रखता है, हमारी देखभाल करता है, और हमारी भलाई ही के लिए कार्य करता है। - एल्बर्ट ली


हमारे जीवन के लंगर की सामर्थ्य आँधी-तूफानों में ही प्रकट होती है।

और इस कारण तुम मगन होते हो, यद्यपि अवश्य है कि अब कुछ दिन तक नाना प्रकार की परीक्षाओं के कारण उदास हो। और यह इसलिये है कि तुम्हारा परखा हुआ विश्वास, जो आग से ताए हुए नाशमान सोने से भी कहीं, अधिक बहुमूल्य है, यीशु मसीह के प्रगट होने पर प्रशंसा, और महिमा, और आदर का कारण ठहरे। - 1 पतरस 1:6-7

बाइबल पाठ: मरकुस 4:35-5:1
Mark 4:35 उसी दिन जब सांझ हुई, तो उसने उन से कहा; आओ, हम पार चलें,। 
Mark 4:36 और वे भीड़ को छोड़कर जैसा वह था, वैसा ही उसे नाव पर साथ ले चले; और उसके साथ, और भी नावें थीं। 
Mark 4:37 तब बड़ी आन्‍धी आई, और लहरें नाव पर यहां तक लगीं, कि वह अब पानी से भरी जाती थी। 
Mark 4:38 और वह आप पिछले भाग में गद्दी पर सो रहा था; तब उन्होंने उसे जगाकर उस से कहा; हे गुरू, क्या तुझे चिन्‍ता नहीं, कि हम नाश हुए जाते हैं? 
Mark 4:39 तब उसने उठ कर आन्‍धी को डांटा, और पानी से कहा; “शान्‍त रह, थम जा”: और आन्‍धी थम गई और बड़ा चैन हो गया। 
Mark 4:40 और उन से कहा; तुम क्यों डरते हो? क्या तुम्हें अब तक विश्वास नहीं? 
Mark 4:41 और वे बहुत ही डर गए और आपस में बोले; यह कौन है, कि आँधी और पानी भी उस की आज्ञा मानते हैं? 
Mark 5:1 और वे झील के पार गिरासेनियों के देश में पहुंचे।

एक साल में बाइबल: 
  • यिर्मयाह 20-21
  • 2 तिमुथियुस 4


Sunday, October 29, 2017

सचेत


   बचपन में मैं अपने माता-पिता के साथ अपनी पर-नानी से, जो एक फार्म के निकट रहतीं थीं, मिलने गई। उनके घर का आहता चारों ओर कटीले तारों की बाड़ से घिरा हुआ था, जिसमें बिजली का संचार रहता था, जिससे कि फ़ार्म की गाएं घास चरने के लिए उनके घर के आहते में नहीं गुस आएं। मैंने अपने माता-पिता से बाहर जाकर खेलने की अनुमति माँगी तो उन्होंने अनुमति देते हुए कहा कि मैं बाड़े के निकट सचेत रहूँ, क्योंकि उसे छू लेने से मुझे बिजली का झटका लग जाएगा। दुर्भाग्यवश मैंने उनकी यह चेतावनी नज़रन्दाज़ कर दी और उस बाड़ को छू लिया; तुरंत ही मुझे बिजली का ज़ोर का झटका लगा, ऐसा जो एक गाए को सबक सिखाने लायक था। मैंने तब समझा कि मेरे माता-पिता ने जब मुझे सचेत किया था तो वह मेरी भलाई के लिए था, क्योंकि वे मुझसे प्रेम करते हैं और मुझे किसी हानि में पड़ते हुए देखना नहीं चाहते हैं।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में दी गई इस्त्राएल की ऐतिहासिक घटनओं में हम पाते हैं कि जब परमेश्वर ने इस्त्राएलियों को मूर्तियाँ बनाते और उनकी उपासना करते हुए देखा, तो उन्हें इसके विरुध्द बारंबार सचेत किया, "और उनके पूर्वजों के परमेश्वर यहोवा ने बड़ा यत्न कर के अपने दूतों से उन के पास कहला भेजा, क्योंकि वह अपनी प्रजा और अपने धाम पर तरस खाता था" (2 इतिहास 36:15)। परमेश्वर ने उन से अपने नबी यिर्मयाह द्वारा भी बातें कीं, परन्तु उन इस्त्राएलियों ने उत्तर दिया, "...ऐसा नहीं होने का, हम तो अपनी ही कल्पनाओं के अनुसार चलेंगे और अपने बुरे मन के हठ पर बने रहेंगे" (यिर्मयाह 18:12)। इस कारण परमेश्वर ने उन्हें नबूकद्नेस्सर के हाथ में पड़ने दिया, और नबूकद्नेस्सर ने यरुशलेम को नष्ट कर दिया तथा उसके अधिकांश लोगों को बन्दी बनाकर ले गया।

   हो सकता है कि आज परमेश्वर आपको आपके जीवन के किसी पाप के विषय में सचेत कर रहा है। यदि ऐसा है तो उत्साहित हों, क्योंकि यह इस बात का प्रमाण है कि वह आप से प्रेम करता है (इब्रानियों 12:5-6), और आपको हानि से दूर रखना चाहता है। परमेश्वर ही है जो यह जानता है कि आगे क्या रखा है और आने वाली समस्याओं से हमें सुरक्षित रखना चाहता है। - जेनिफर बेन्सन शुल्ट


परमेश्वर की चेतावनियाँ हमारी रक्षा करने के लिए होती हैं, हमें दण्ड देने के लिए नहीं।

और तुम उस उपदेश को जो तुम को पुत्रों के समान दिया जाता है, भूल गए हो, कि हे मेरे पुत्र, प्रभु की ताड़ना को हलकी बात न जान, और जब वह तुझे घुड़के तो हिम्मत न छोड़। क्योंकि प्रभु, जिस से प्रेम करता है, उस की ताड़ना भी करता है; और जिसे पुत्र बना लेता है, उसको कोड़े भी लगाता है। - इब्रानियों 12:5-6

बाइबल पाठ: यिर्मयाह 18:1-12
Jeremiah 18:1 यहोवा की ओर से यह वचन यिर्मयाह के पास पहुंचा, उठ कर कुम्हार के घर जा, 
Jeremiah 18:2 और वहां मैं तुझे अपने वचन सुनवाऊंगा। 
Jeremiah 18:3 सो मैं कुम्हार के घर गया और क्या देखा कि वह चाक पर कुछ बना रहा है! 
Jeremiah 18:4 और जो मिट्टी का बासन वह बना रहा था वह बिगड़ गया, तब उसने उसी का दूसरा बासन अपनी समझ के अनुसार बना दिया। 
Jeremiah 18:5 तब यहोवा का यह वचन मेरे पास पहुंचा, हे इस्राएल के घराने, 
Jeremiah 18:6 यहोवा की यह वाणी है कि इस कुम्हार के समान तुम्हारे साथ क्या मैं भी काम नहीं कर सकता? देख, जैसा मिट्टी कुम्हार के हाथ में रहती है, वैसा ही हे इस्राएल के घराने, तुम भी मेरे हाथ में हो। 
Jeremiah 18:7 जब मैं क&