बाइबल और मसीही विश्वास सम्बन्धी अपने प्रश्नों के लिए यहाँ क्लिक करें:

GotQuestions?org

Monday, March 6, 2017

रहस्य


   सैलिनियों के लिए इंगलैण्ड के सबसे लोकप्रीय आकर्षणों में से एक है स्टोनहेंज में लगे हुए पत्थर के विशाल स्तंभ। बड़ी चट्टानों के ये टुकड़े एक बड़े रहस्य का स्त्रोत भी हैं। हर साल अनेकों लोग स्टोनहेंज आते हैं कि इन्हें देखें, उनके अन्दर कौतुहल होता है कि इन्हें क्यों खड़ा किया गया और इन्हें किसने खड़ा किया? इंजीनियरिंग की इस विलक्षण उपलब्धि को करने वाला कौन है और यह चमत्कार उसने कैसे करा? परन्तु सैलानियों को उन खामोश पत्थरों से इन प्रश्नों का कोई उत्तर नहीं मिलता है और यह रहस्य बना ही रहता है।

   पवित्रशास्त्र इससे भी बड़े एक रहस्य के बारे में बताता है - यह तथ्य कि परमेश्वर हमारे बीच में मनुष्य बनकर रहा। परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रेरित पौलुस ने लिखा: "और इस में सन्‍देह नहीं, कि भक्ति का भेद गम्भीर है; अर्थात वह जो शरीर में प्रगट हुआ, आत्मा में धर्मी ठहरा, स्‍वर्गदूतों को दिखाई दिया, अन्यजातियों में उसका प्रचार हुआ, जगत में उस पर विश्वास किया गया, और महिमा में ऊपर उठाया गया" (1 तिमुथियुस 3:16)। प्रभु यीशु मसीह के जीवन का यह संक्षिप्त अवलोकन, अर्थात भक्ति का यह भेद, अपने आप में विलक्षण है। परन्तु इस सृष्टि के सृष्टिकर्ता ने संसार में आकर मानव रूप में रहना और अपनी रचना के लिए बलिदान होना क्यों स्वीकार कर लिया, यह रहस्य नहीं है, क्योंकि बाइबल बताती है, "परन्तु परमेश्वर हम पर अपने प्रेम की भलाई इस रीति से प्रगट करता है, कि जब हम पापी ही थे तभी मसीह हमारे लिये मरा" (रोमियों 5:8) - हमारे प्रति परमेश्वर का महान प्रेम ही भक्ति के इस भेद के पीछे है और समस्त मानव जाति के लिए क्रूस पर दिए गए प्रभु यीशु के बलिदान ने इसे सब पर प्रगट कर दिया है। - बिल क्राउडर


प्रभु यीशु कैसे मनुष्य बने यह तो रहस्य हो सकता है, 
परन्तु परमेश्वर का प्रेम रहस्य नहीं है।

क्योंकि परमेश्वर ने जगत से ऐसा प्रेम रखा कि उसने अपना एकलौता पुत्र दे दिया, ताकि जो कोई उस पर विश्वास करे, वह नाश न हो, परन्तु अनन्त जीवन पाए। - यूहन्ना 3:16

बाइबल पाठ: रोमियों 5:1-11
Romans 5:1 सो जब हम विश्वास से धर्मी ठहरे, तो अपने प्रभु यीशु मसीह के द्वारा परमेश्वर के साथ मेल रखें। 
Romans 5:2 जिस के द्वारा विश्वास के कारण उस अनुग्रह तक, जिस में हम बने हैं, हमारी पहुंच भी हुई, और परमेश्वर की महिमा की आशा पर घमण्ड करें। 
Romans 5:3 केवल यही नहीं, वरन हम क्लेशों में भी घमण्ड करें, यही जानकर कि क्लेश से धीरज। 
Romans 5:4 ओर धीरज से खरा निकलना, और खरे निकलने से आशा उत्पन्न होती है। 
Romans 5:5 और आशा से लज्ज़ा नहीं होती, क्योंकि पवित्र आत्मा जो हमें दिया गया है उसके द्वारा परमेश्वर का प्रेम हमारे मन में डाला गया है। 
Romans 5:6 क्योंकि जब हम निर्बल ही थे, तो मसीह ठीक समय पर भक्तिहीनों के लिये मरा। 
Romans 5:7 किसी धर्मी जन के लिये कोई मरे, यह तो र्दुलभ है, परन्तु क्या जाने किसी भले मनुष्य के लिये कोई मरने का भी हियाव करे। 
Romans 5:8 परन्तु परमेश्वर हम पर अपने प्रेम की भलाई इस रीति से प्रगट करता है, कि जब हम पापी ही थे तभी मसीह हमारे लिये मरा। 
Romans 5:9 सो जब कि हम, अब उसके लोहू के कारण धर्मी ठहरे, तो उसके द्वारा क्रोध से क्यों न बचेंगे? 
Romans 5:10 क्योंकि बैरी होने की दशा में तो उसके पुत्र की मृत्यु के द्वारा हमारा मेल परमेश्वर के साथ हुआ फिर मेल हो जाने पर उसके जीवन के कारण हम उद्धार क्यों न पाएंगे? 
Romans 5:11 और केवल यही नहीं, परन्तु हम अपने प्रभु यीशु मसीह के द्वारा जिस के द्वारा हमारा मेल हुआ है, परमेश्वर के विषय में घमण्ड भी करते हैं।

एक साल में बाइबल: 
  • व्यवस्थाविवरण 1-2
  • मरकुस 10:1-31