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Wednesday, June 7, 2017

सर्वोत्तम तथा महानतम


   एक बार अराधना के लिए चर्च में बठे हुए, मेरी दृष्टि कई पंक्ति आगे एक शिशु पर गई। वह अपने पिता की गोद में था और उनके कंधे के ऊपर से बड़ी-बड़ी आँखों से इधर-उधर देख रहा था। उसके मुँह से लार बह रही थी, वह अपनी ऊँगलियों को मुँह में लेकर चूस रहा था, परन्तु अपने अँगूठे को मुँह तक नहीं ला पा रहा था और वह आस-पास बैठे हुए लोगों को देखते हुए कभी कभी मुस्कुरा देता था। उसकी हरकतों के कारण मेरा ध्यान पादरी द्वारा दिए जा रहे सन्देश से भटक कर बार-बार उस सुन्दर शिशु तथा उसकी अटखेलियों की ओर जा रहा था।

   ध्यान भटकाने वाली बातें अनेकों रूप और आकार में आती हैं। परमेश्वर के वचन बाइबल में हम दो बहनों, मरियम और मार्था का उल्लेख पाते हैं जिन्होंने प्रभु यीशु को अपने घर आने का निमंत्रण दिया। उन में से मार्था के लिए प्रभु यीशु से ध्यान भटकाने वाली बात प्रभु की सेवा-टहल करना बन गई; बजाए प्रभु के पास बैठकर उसकी बातें सुनने के, मार्था प्रभु के लिए पकाने-परोसने में लग गई। लेकिन मरियम प्रभु के साथ ही बैठी रही, उसकी बातें सुनती रही। अपने सेवा-टहल के प्रयासों से थक कर जब मार्था ने कुड़कुड़ाते हुए प्रभु से शिकायत की तब प्रभु यीशु ने उसे समझाया, "...मार्था, हे मार्था; तू बहुत बातों के लिये चिन्‍ता करती और घबराती है। परन्तु एक बात अवश्य है, और उस उत्तम भाग को मरियम ने चुन लिया है: जो उस से छीना न जाएगा" (लूका 10:41-42)।

   मार्था से कहे गए प्रभु यीशु के ये शब्द हम मसीही विश्वासियों को स्मरण करवाते हैं कि प्रभु यीशु के साथ हमारे सुदृढ़ तथा लगातार बढ़ते हुए संबंधों के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात है शान्त होकर उसके पास बैठकर उसकी सुनना, न कि उसे प्रसन्न करने के प्रयासों में अपनी इच्छानुसार कुछ भला लगने वाला करने का प्रयास करना। कहा जाता है कि बहुधा बेहतर बातें सर्वोत्तम बातों की शत्रु होती हैं - बेहतर के कारण, हम सर्वोत्तम से ध्यान हटा लेते हैं। प्रभु यीशु के अनुयायियों के लिए, इस जीवन में सर्वोत्तम तथा महानतम बात है प्रभु यीशु को निकटता से जानना और उसके साथ-साथ चलना। हम मसीही विश्वासियों के लिए प्रभु यीशु की इच्छा जानकार, उसकी आज्ञाकारिता में बने रहने से बढ़कर और कुछ भी नहीं है, क्योंकि प्रभु इसी से प्रसन्न होता है। - जेनिफर बेन्सन शुल्ट


हे प्रभु मुझे सिखाएं कि मैं आपको निकटता से जान सकूँ; 
क्योंकि तब ही मैं आपसे सबसे बढ़कर प्रेम करने पाऊँगा।

शमूएल ने कहा, क्या यहोवा होमबलियों, और मेलबलियों से उतना प्रसन्न होता है, जितना कि अपनी बात के माने जाने से प्रसन्न होता है? सुन मानना तो बलि चढ़ाने और कान लगाना मेढ़ों की चर्बी से उत्तम है। - 1 शमूएल 15:22 

बाइबल पाठ: लूका 10:38-42
Luke 10:38 फिर जब वे जा रहे थे, तो वह एक गांव में गया, और मार्था नाम एक स्त्री ने उसे अपने घर में उतारा।
Luke 10:39 और मरियम नाम उस की एक बहिन थी; वह प्रभु के पांवों के पास बैठकर उसका वचन सुनती थी। 
Luke 10:40 पर मार्था सेवा करते करते घबरा गई और उसके पास आकर कहने लगी; हे प्रभु, क्या तुझे कुछ भी सोच नहीं कि मेरी बहिन ने मुझे सेवा करने के लिये अकेली ही छोड़ दिया है? सो उस से कह, कि मेरी सहायता करे। 
Luke 10:41 प्रभु ने उसे उत्तर दिया, मार्था, हे मार्था; तू बहुत बातों के लिये चिन्‍ता करती और घबराती है। 
Luke 10:42 परन्तु एक बात अवश्य है, और उस उत्तम भाग को मरियम ने चुन लिया है: जो उस से छीना न जाएगा।

एक साल में बाइबल: 
  • 2 इतिहास 28-29
  • यूहन्ना 17