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Friday, October 6, 2017

आग


   मेरे बचपन में मेरी माँ ने मुझे सचेत किया कि मैं कभी आग से न खेलूँ। फिर भी एक दिन मैंने यह देखना चाहा कि यदि मैं खेलूँगा तो क्या हो जाएगा। मैंने कुछ कागज़ और माचिस ली और घर के पिछले आँगन में प्रयोग करने के लिए चला गया। मैंने कागज़ों को भूमि पर रखा, और तेज़ धड़कते हृदय के साथ माचिस को जलाया और कागज़ों में आग लगा दी। तभी मैंने अपनी माँ को आते हुए देखा। पकड़े जाने के डर से मैंने अपने किए को छिपाने के लिए अपने पैर लपटों के ऊपर रख दिए। तुरंत माँ ने चिल्ला कर कहा, "डेन्नी अपने पैर वहाँ से हटाओ! पैरों के नीचे आग है!" सौभाग्यवश मैंने अपने पैर तुरंत हटा लिए और जला नहीं। मुझे तब यह एहसास हुआ कि आग से न खेलने का मेरी माँ का नियम मेरे मज़े को खराब करने के लिए नहीं परन्तु मुझे सुरक्षित रखने के लिए था।

   कभी-कभी हम परमेश्वर के नियमों के पीछे उसके कारणों को समझ नहीं पाते हैं। हमें यह भी लगता है मानो वह हमारे आनन्द को बिगाड़ने की इच्छा रखने वाली आकाशीय शक्ति है, जो हमारे लिए नियम और कानून बना कर हमारे मज़े को खराब करना चाहती है। परन्तु क्योंकि परमेश्वर हमारा भला ही चाहता है, इसीलिए वह चाहता है कि हम उसके आज्ञाकारी हों। जब हम आज्ञाकारी होते हैं, हम उसके प्रेम में बने रहते हैं, और उसकी आशीषों तथा आनन्द से परिपूर्ण रहते हैं (यूहन्ना 15:10-11)।

   इसलिए जब परमेश्वर यह कहता है कि हम पाप न करें तो वह इसलिए जिससे हमारा भला हो सके। वह वास्तव में हमें आग से जलने से बचाए रखना चाहता है, वह हमें नरक की आग की अनन्त पीड़ा से दूर रखना चाहता है। - डेनिस फिशर


परमेश्वर हमें सुरक्षित रखने के लिए अपने वचन द्वारा हमें सप्रेम सचेत करता है।

भला होता कि उनका मन सदैव ऐसा ही बना रहे, कि वे मेरा भय मानते हुए मेरी सब आज्ञाओं पर चलते रहें, जिस से उनकी और उनके वंश की सदैव भलाई होती रहे! - व्यवस्थाविवरण 5:29

बाइबल पाठ: यूहन्ना 15:10-20
John 15:10 यदि तुम मेरी आज्ञाओं को मानोगे, तो मेरे प्रेम में बने रहोगे: जैसा कि मैं ने अपने पिता की आज्ञाओं को माना है, और उसके प्रेम में बना रहता हूं। 
John 15:11 मैं ने ये बातें तुम से इसलिये कही हैं, कि मेरा आनन्द तुम में बना रहे, और तुम्हारा आनन्द पूरा हो जाए। 
John 15:12 मेरी आज्ञा यह है, कि जैसा मैं ने तुम से प्रेम रखा, वैसा ही तुम भी एक दूसरे से प्रेम रखो। 
John 15:13 इस से बड़ा प्रेम किसी का नहीं, कि कोई अपने मित्रों के लिये अपना प्राण दे। 
John 15:14 जो कुछ मैं तुम्हें आज्ञा देता हूं, यदि उसे करो, तो तुम मेरे मित्र हो। 
John 15:15 अब से मैं तुम्हें दास न कहूंगा, क्योंकि दास नहीं जानता, कि उसका स्‍वामी क्या करता है: परन्तु मैं ने तुम्हें मित्र कहा है, क्योंकि मैं ने जो बातें अपने पिता से सुनीं, वे सब तुम्हें बता दीं। 
John 15:16 तुम ने मुझे नहीं चुना परन्तु मैं ने तुम्हें चुना है और तुम्हें ठहराया ताकि तुम जा कर फल लाओ; और तुम्हारा फल बना रहे, कि तुम मेरे नाम से जो कुछ पिता से मांगो, वह तुम्हें दे। 
John 15:17 इन बातें की आज्ञा मैं तुम्हें इसलिये देता हूं, कि तुम एक दूसरे से प्रेम रखो। 
John 15:18 यदि संसार तुम से बैर रखता है, तो तुम जानते हो, कि उसने तुम से पहिले मुझ से भी बैर रखा। 
John 15:19 यदि तुम संसार के होते, तो संसार अपनों से प्रीति रखता, परन्तु इस कारण कि तुम संसार के नहीं, वरन मैं ने तुम्हें संसार में से चुन लिया है इसी लिये संसार तुम से बैर रखता है। 
John 15:20 जो बात मैं ने तुम से कही थी, कि दास अपने स्‍वामी से बड़ा नहीं होता, उसको याद रखो: यदि उन्होंने मुझे सताया, तो तुम्हें भी सताएंगे; यदि उन्होंने मेरी बात मानी, तो तुम्हारी भी मानेंगे।

एक साल में बाइबल: 
  • यशायाह 26-27
  • फिलिप्पियों 2