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Monday, November 27, 2017

सहायता


   मेरे पति कार्य के सिलसिले में बाहर गए हुए थे, और एक होटल में ठहरे थे। उन्होंने आकर होटल में आराम करना आरंभ ही किया था, कि एक विचित्र से शोर से वे चौंक गए। उन्होंने बाहर गलियारे में निकल कर उस शोर के बारे में जानना चाहा तो पता चला कि साथ के एक कमरे से किसी के चिल्लाने की आवाज़ आ रही थी। उन्होंने होटल के कर्मचारी को कारण देखने के लिए बुलाया, और पाया कि एक व्यक्ति अपने कमरे के बाथरूम में फंस गया है; बाथरूम के दरवाज़े को बन्द करने वाली कुण्डी खराब हो गई थी और वह व्यक्ति दरवाज़ा खोलकर बाहर नहीं आ पा रहा था। अपने आप को अन्दर फंसा हुआ जानकर वह घबरा गया और सहायता के लिए ऊँची आवाज़ से पुकारने लगा।

   कभी कभी जीवन की परिस्थितियों में हम भी अपने आप को फंसा हुआ अनुभव करते हैं, और उन परिस्थितियों से बाहर निकलने का कोई मार्ग दिखाई न देने के कारण कहीं से कोई सहायता पाने के लिए गुहार लगाते हैं। अन्दर फंसे हुए उस व्यक्ति के समान, हमें भी बाहर से मिलने वाली सहायता की आवश्यकता होती है। परन्तु उस बाहर से आने वाली सहायता के लिए हमें यह स्वीकार करना होता है कि हम अपने आप में असहाय हैं। कई बार हम अपनी समस्याओं से निकलने के लिए अपने अन्दर ही समाधान ढूँढने लगते हैं। परन्तु परमेश्वर का वचन बाइबल हमें बताती है कि अनेकों बार हम स्वयं ही अपनी समस्याओं का कारण होते हैं क्योंकि हम अपने मन की इच्छा करना चाहते हैं, और हमारा "मन तो सब वस्तुओं से अधिक धोखा देने वाला होता है, उस में असाध्य रोग लगा है; उसका भेद कौन समझ सकता है?" (यिर्मयाह 17:9) जो हमें बुराई और समस्याओं में धकेल देता है।

   परन्तु हमें धन्यवादी रहना चाहिए कि हमारा प्रभु परमेश्वर, "...हमारे मन से बड़ा है; और सब कुछ जानता है" (1 यूहन्ना 3:20)। इस कारण वह भली-भांति जानता है कि कब और कैसे हमारी सहायता करनी है। हमारे जीवन की प्रत्येक समस्या की स्थायी और कारगर सहायता परमेश्वर ही से आती है; वही हमारे धोखेबाज़ मन को परिवर्तित कर के स्वच्छ और पवित्र बना सकता है। प्रभु परमेश्वर पर भरोसा रखने और उसकी इच्छा के अनुसार जीवन व्यतीत करने के उद्देश्य से ही हम वास्तव में मुक्त रहेंगे; हर बात, हर परिस्थिति के लिए उस से मार्गदर्शन और सहायता प्राप्त करते रहेंगे। - जेनिफर बेन्सन शुल्ट


परमेश्वर उनका सहायक बनता है जो यह मान लेते हैं कि वे असहाय हैं।

फिर यहोवा की यह वाणी है, क्या कोई ऐसे गुप्त स्थानों में छिप सकता है, कि मैं उसे न देख सकूं? क्या स्वर्ग और पृथ्वी दोनों मुझ से परिपूर्ण नहीं हैं? यिर्मयाह 23:24

बाइबल पाठ: यिर्मयाह 17:7-14
Jeremiah 17:7 धन्य है वह पुरुष जो यहोवा पर भरोसा रखता है, जिसने परमेश्वर को अपना आधार माना हो। 
Jeremiah 17:8 वह उस वृक्ष के समान होगा जो नदी के तीर पर लगा हो और उसकी जड़ जल के पास फैली हो; जब घाम होगा तब उसको न लगेगा, उसके पत्ते हरे रहेंगे, और सूखे वर्ष में भी उनके विषय में कुछ चिन्ता न होगी, क्योंकि वह तब भी फलता रहेगा। 
Jeremiah 17:9 मन तो सब वस्तुओं से अधिक धोखा देने वाला होता है, उस में असाध्य रोग लगा है; उसका भेद कौन समझ सकता है? 
Jeremiah 17:10 मैं यहोवा मन की खोजता और हृदय को जांचता हूँ ताकि प्रत्येक जन को उसकी चाल-चलन के अनुसार अर्थात उसके कामों का फल दूं। 
Jeremiah 17:11 जो अन्याय से धन बटोरता है वह उस तीतर के समान होता है जो दूसरी चिडिय़ा के दिए हुए अंडों को सेती है, उसकी आधी आयु में ही वह उस धन को छोड़ जाता है, और अन्त में वह मूढ़ ही ठहरता है। 
Jeremiah 17:12 हमारा पवित्र आराधनालय आदि से ऊंचे स्थान पर रखे हुए एक तेजोमय सिंहासन के समान है।
Jeremiah 17:13 हे यहोवा, हे इस्राएल के आधार, जितने तुझे छोड देते हैं वे सब लज्जित होंगे; जो तुझ से भटक जाते हैं उनके नाम भूमि ही पर लिखे जाएंगे, क्योंकि उन्होंने बहते जल के सोते यहोवा को त्याग दिया है। 
Jeremiah 17:14 हे यहोवा मुझे चंगा कर, तब मैं चंगा हो जाऊंगा; मुझे बचा, तब मैं बच जाऊंगा; क्योंकि मैं तेरी ही स्तुति करता हूँ।

एक साल में बाइबल: 
  • यहेजकेल 30-32
  • 1 पतरस 4