ई-मेल संपर्क / E-Mail Contact

इन संदेशों को ई-मेल से प्राप्त करने के लिए अपना ई-मेल पता इस ई-मेल पर भेजें / To Receive these messages by e-mail, please send your e-mail id to: rozkiroti@gmail.com

मंगलवार, 2 जनवरी 2018

उत्तर


कोरिया की एक प्रसिद्ध और मेरी पसंदीदा सिनेमा स्टार के ट्विट्टर पृष्ठ को देख कर मैं बड़ी उत्साहित हुई, और मैंने उसे नोट लिखने का निर्णय लिया। मुझसे जितना अच्छा बन सकता था मैंने उतना अच्छा सन्देश लिख कर उसे भेजा और उसके उत्तर की प्रतीक्षा करने लगी। मैं जानती थी कि उससे उत्तर आने की संभावना बहुत ही कम है। उसकी जैसी सुप्रसिद्ध हस्ती के पास प्रतिदिन बहुत से प्रशंसकों के सन्देश आते रहते होंगे। फिर भी मन में इच्छा थी कि वह उत्तर दे; परन्तु ऐसा नहीं हुआ और मुझे निराशा हुई।

परन्तु हम मसीही विश्वासी धन्यवादी रह सकते हैं कि हमारा परमेश्वर पिता हमें उत्तर देता है। वह “परमप्रधान” और “सर्वशक्तिमान” है (भजन 91:1)। उसकी हस्ती सबसे महान है और उसकी सामर्थ्य की कोई सीमा नहीं है, परन्तु फिर भी वह सदा सबके लिए उपलब्ध रहता है। उसने खुला निमंत्रण दिया है, “मुझे पुकारो, मैं तुम्हारी सुनुँगा” (पद 15)।

एक पुरानी कहानी है कि एक राजा ने बुनकरों को अपने लिए सजावट के कपड़े और पहनने के वस्त्र बनाने के लिए कार्य पर लिया। राजा ने उन्हें रेशम के धागे और नमूने दिए जिनके अनुसार वह अपने लिए वस्त्र तथा कपड़े चाहता था; साथ ही उन्हें सख्त निर्देष भी दिए कि कोई भी कठिनाई होने पर तुरंत उससे संपर्क करें, क्योंकि सारा कार्य उसके कहे के अनुसार ही होना था। वे लोग काम करने लगे, और कुछ दिनों में एक युवा बुनकर बहुत प्रसन और सफल दिखाई देने लगा जबकि शेष किसी न किसी परेशानी में पड़ते रहते थे। जब उस युवा बुनकर से उसकी प्रसन्नता और सफलता का रहस्य पूछा गया, तो उसने उत्तर दिया, “क्या आप लोगों ने ध्यान नहीं दिया कि मैं राजा के पास अनेकों बार जाता रहता हूँ।” अन्य बुनकर बोले, “हाँ, परन्तु वह तो इतना व्यस्त रहता है, हमें लगा कि बार बार उसे परेशान करना ठीक नहीं होगा।” तो उस युवक ने कहा, “मैंने तो उसके कहे के अनुसार ही किया, और वह मेरी सहायता कर के सदा प्रसन्न ही हुआ है।”

हमारा प्रभु परमेश्वर उस राजा के समान ही है – परन्तु उससे कहीं अधिक महान। लेकिन फिर भी वह कृपालु और प्रेम करने वाला है; उसे हमारी छोटी से छोटी बात की चिन्ता रहती है, वह हमारी धीमी सी फुसफुसाहट भी सुनता है, और सब बातों को उत्तर देता है। - पोह फैंग चिया


परमेश्वर का ध्यान हम पर सदा लगा रहता है।

इसलिये परमेश्वर के बलवन्‍त हाथ के नीचे दीनता से रहो, जिस से वह तुम्हें उचित समय पर बढ़ाए। और अपनी सारी चिन्‍ता उसी पर डाल दो, क्योंकि उसको तुम्हारा ध्यान है। - 1 पतरस 5:6-7

बाइबल पाठ: भजन 91
Psalms 91:1 जो परमप्रधान के छाए हुए स्थान में बैठा रहे, वह सर्वशक्तिमान की छाया में ठिकाना पाएगा।
Psalms 91:2 मैं यहोवा के विषय कहूंगा, कि वह मेरा शरणस्थान और गढ़ है; वह मेरा परमेश्वर है, मैं उस पर भरोसा रखूंगा।
Psalms 91:3 वह तो तुझे बहेलिये के जाल से, और महामारी से बचाएगा;
Psalms 91:4 वह तुझे अपने पंखों की आड़ में ले लेगा, और तू उसके पैरों के नीचे शरण पाएगा; उसकी सच्चाई तेरे लिये ढाल और झिलम ठहरेगी।
Psalms 91:5 तू न रात के भय से डरेगा, और न उस तीर से जो दिन को उड़ता है,
Psalms 91:6 न उस मरी से जो अन्धेरे में फैलती है, और न उस महारोग से जो दिन दुपहरी में उजाड़ता है।
Psalms 91:7 तेरे निकट हजार, और तेरी दाहिनी ओर दस हजार गिरेंगे; परन्तु वह तेरे पास न आएगा।
Psalms 91:8 परन्तु तू अपनी आंखों की दृष्टि करेगा और दुष्टों के अन्त को देखेगा।
Psalms 91:9 हे यहोवा, तू मेरा शरण स्थान ठहरा है। तू ने जो परमप्रधान को अपना धाम मान लिया है,
Psalms 91:10 इसलिये कोई विपत्ति तुझ पर न पड़ेगी, न कोई दु:ख तेरे डेरे के निकट आएगा।
Psalms 91:11 क्योंकि वह अपने दूतों को तेरे निमित्त आज्ञा देगा, कि जहां कहीं तू जाए वे तेरी रक्षा करें।
Psalms 91:12 वे तुझ को हाथों हाथ उठा लेंगे, ऐसा न हो कि तेरे पांवों में पत्थर से ठेस लगे।
Psalms 91:13 तू सिंह और नाग को कुचलेगा, तू जवान सिंह और अजगर को लताड़ेगा।
Psalms 91:14 उसने जो मुझ से स्नेह किया है, इसलिये मैं उसको छुड़ाऊंगा; मैं उसको ऊंचे स्थान पर रखूंगा, क्योंकि उसने मेरे नाम को जान लिया है।
Psalms 91:15 जब वह मुझ को पुकारे, तब मैं उसकी सुनूंगा; संकट में मैं उसके संग रहूंगा, मैं उसको बचा कर उसकी महिमा बढ़ाऊंगा।
Psalms 91:16 मैं उसको दीर्घायु से तृप्त करूंगा, और अपने किए हुए उद्धार का दर्शन दिखाऊंगा।


एक साल में बाइबल: 
  • उत्पत्ति 4-6
  • मत्ती 2


कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें